जयपुर। मानसून के लौटने के साथ ही राजस्थान के बड़े हिस्से पर एक और गंभीर चुनौती ने दस्तक दे दी है। पानी की कमी अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रही — प्रदेश के 16 जिलों के करीब 16,400 गांवों और 52 शहरों में पेयजल, चारे और रोजगार, तीनों मोर्चों पर संकट गहरा गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक राहत की तैयारी शुरू कर दी है और चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को विशेष एक्शन प्लान बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों को अगले 15 दिनों में विस्तृत योजना सामने लाने को कहा गया है, जिसके बाद सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की घोषणा भी हो सकती है।
सबसे पहले: राहत का पहला मोर्चा — 650 वाहन, 3,200 श्रमिक
योजना बनने का इंतजार किए बिना सरकार ने जमीनी स्तर पर राहत काम पहले ही शुरू कर दिया है। पेयजल संकट से जूझ रहे इलाकों तक पानी पहुंचाने के लिए 650 वाहन और 3,200 श्रमिक तैनात किए गए हैं। गांवों में बंद पड़े हैंडपंप सबसे बड़ी मुसीबत बने हुए हैं — कई बस्तियों में इन्हीं हैंडपंपों से रोजमर्रा का पानी आता था। इनकी तत्काल मरम्मत के लिए 150 वाहनों की अलग से स्वीकृति दी गई है।
स्थानीय स्तर पर काम में तेजी लाने के लिए जिला कलेक्टरों को भी खास अधिकार दिए गए हैं। कलेक्टर आपातकालीन मद से 75 लाख रुपये तक खर्च कर सकते हैं और जल व्यवस्था के लिए अपने स्तर पर 25 लाख रुपये तक की स्वीकृति दे सकते हैं। इसका मतलब है कि पानी की किल्लत वाले इलाकों में अब टैंकर, हैंडपंप मरम्मत या अन्य आपात व्यवस्थाओं के लिए फाइलों को राजधानी तक नहीं दौड़ना पड़ेगा — फैसला जिले में ही होगा।
16 जिले: एक टेबल में पूरा हिसाब
सूखे की मार सबसे ज्यादा पश्चिमी राजस्थान के नौ जिलों और मध्य राजस्थान के दो जिलों पर पड़ी है, लेकिन कुल मिलाकर 16 जिलों के इलाके प्रभावित बताए गए हैं। अधिकतर हिस्सों में सामान्य से 33 प्रतिशत बारिश भी नहीं हुई, यानी जो बारिश होनी चाहिए थी उसका तीसरा हिस्सा भी नहीं बरसा। नीचे देखें कि किस जिले के कितने गांव संकट की चपेट में हैं:
| जिला | प्रभावित गांव |
|---|---|
| बाड़मेर | 2,460 |
| जोधपुर | 1,838 |
| नागौर | 1,589 |
| जयपुर | 1,400 |
| बालोतरा | 1,216 |
| जालोर | 1,117 |
| अजमेर | 1,134 |
| पाली | 1,030 |
| फलोदी | 1,064 |
| जैसलमेर | 961 |
| चूरू | 934 |
| बीकानेर | 919 |
| ब्यावर | 787 |
| सिरोही | 530 |
अकेले बाड़मेर के 2,460 गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, इसके बाद जोधपुर और नागौर का नंबर आता है। खास बात यह है कि जयपुर जैसा शहरी जिला भी 1,400 प्रभावित गांवों के साथ सूची में शामिल है — यह बताता है कि संकट सिर्फ रेगिस्तानी इलाकों तक सीमित नहीं है।
बारिश की कमी कहां कितनी खतरनाक हो गई
संकट की असली वजह साफ है — आसमान ने इस बार साथ नहीं दिया। सूखे की चपेट वाले ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से 33 प्रतिशत बारिश भी नहीं हुई। पश्चिमी राजस्थान के रेतीले इलाकों में तो बारिश वैसे भी कम होती है, लेकिन इस बार कमी इतनी ज्यादा रही कि बारानी खेती पूरी तरह ठप हो गई। खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगीं तो पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहरा गया।
चारे की किल्लत पशुपालकों के लिए सबसे बड़ी चिंता है। जिन इलाकों में पशुपालन ही आजीविका का मुख्य साधन है, वहां सूखे का असर दोहरा पड़ता है — न खेती हुई, न पशुओं को चारा मिला। इसी वजह से सरकार की राहत योजना में पेयजल के साथ-साथ चारे और रोजगार को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है।
अब आगे क्या: 15 दिन में प्लान, फिर राहत पैकेज
सरकार इस बार काम को चार विभागों की साझा जिम्मेदारी बनाकर चला रही है — आपदा प्रबंधन, जलदाय, जल संसाधन और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारी मिलकर एक्शन प्लान तैयार कर रहे हैं। चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इस पूरी कवायद की अगुवाई कर रहे हैं। अगले 15 दिनों में जब विस्तृत राहत योजना सामने आएगी, तो उसके बाद सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की घोषणा हो सकती है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया है कि उपलब्ध जल और अतिरिक्त आवश्यकता का आकलन करके राज्य स्तरीय एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े जिलों के लिए अलग योजना बनेगी, क्योंकि वहां की जल आपूर्ति का स्वरूप बाकी इलाकों से अलग है। प्रभावित क्षेत्रों में जल वितरण की नियमित निगरानी को और सख्त किया जाएगा, ताकि आमजन और पशुधन दोनों के लिए पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: राजस्थान में सूखे से कितने जिले प्रभावित हैं?
उत्तर: प्रदेश के 16 जिलों के करीब 16,400 गांव और 52 शहर सूखे से प्रभावित बताए गए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित बाड़मेर (2,460 गांव), जोधपुर (1,838 गांव) और नागौर (1,589 गांव) हैं।
प्रश्न 2: सरकार ने राहत के लिए अभी तक क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: पेयजल आपूर्ति के लिए 650 वाहन और 3,200 श्रमिक तैनात किए गए हैं, बंद हैंडपंपों की मरम्मत के लिए 150 वाहन स्वीकृत किए गए हैं, और जिला कलेक्टरों को आपातकालीन मद से 75 लाख रुपये तक खर्च करने का अधिकार दिया गया है।
प्रश्न 3: राहत की पूरी योजना कब तक आएगी?
उत्तर: चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अगले 15 दिनों में विस्तृत राहत योजना तैयार करेंगे, जिसके बाद सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की घोषणा हो सकती है।
प्रश्न 4: इंदिरा गांधी नहर वाले जिलों के लिए क्या अलग व्यवस्था है?
उत्तर: मुख्य सचिव के मुताबिक इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े जिलों के लिए अलग योजना बनाई जाएगी और प्रभावित इलाकों में जल वितरण की निगरानी और सख्त की जाएगी।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि 15 दिनों में बनने वाला एक्शन प्लान जमीनी हकीकत से कितना जुड़ा होता है और विशेष पैकेज का ऐलान कब होता है। तब तक संकट वाले इलाकों में लोगों की नजर टैंकरों, हैंडपंपों और सरकार की हर हलचल पर टिकी रहेगी।