Monsoon 2026 की फाइनल रिपोर्ट: 12.6% कम बारिश के साथ 2015 के बाद सबसे सूखा सीजन — राजस्थान में पाली-जैसलमेर सबसे ज्यादा प्यासे, अक्टूबर-दिसंबर भी रहेगा सूखा
नई दिल्ली/जयपुर: चार महीने चली आसमान की परीक्षा का नतीजा सामने आ गया है, और यह निराशाजनक है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार को ऐलान किया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन 2026 देश में सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त हुआ। जून से सितंबर तक देश को महज 759 मिलीमीटर बारिश मिली, जबकि सामान्य आंकड़ा 868.6 मिलीमीटर है।
यह 2015 के बाद का सबसे सूखा मानसून सीजन है और 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर। IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा, “कुल मिलाकर बारिश सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम रही।”
असली चिंता आगे के महीनों को लेकर है। IMD ने कहा है कि अक्टूबर में देश में सामान्य से कम बारिश की संभावना है, और अक्टूबर-दिसंबर की पूरी अवधि में भी ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से नीचे रहेगी। राजस्थान के लिए इसका सीधा मतलब है — पानी की किल्लत बढ़ेगी, रबी की बुवाई पर दबाव आएगा और तापमान चढ़ेगा।
राष्ट्रीय तस्वीर: 741 में से 282 जिलों में कम बारिश
IMD के जिलावार आकलन के अनुसार देश के कुल 741 जिलों में से 282 जिलों (38 प्रतिशत) में बारिश सामान्य से कम रही, जबकि 34 जिलों (5 प्रतिशत) में भारी कमी दर्ज हुई। सिर्फ 312 जिलों (42 प्रतिशत) में सामान्य, 90 जिलों (12 प्रतिशत) में सामान्य से अधिक और महज 16 जिलों (2 प्रतिशत) में बहुत अधिक बारिश हुई।
पूर्वोत्तर भारत के लिए यह सीजन ऐतिहासिक रूप से सबसे खराब रहा — वहां 125 साल के रिकॉर्ड में सबसे कम बारिश हुई। पंजाब में भी चारों महीनों तक बारिश में कमी बनी रही, जबकि महाराष्ट्र ने 358 में से 265 तालुकाओं में सूखा घोषित कर दिया।
एक खास बात यह रही कि कुल बारिश भले कम हुई, लेकिन चरम मौसमी घटनाएं बढ़ गईं। देश में इस बार 525 भारी वर्षा की घटनाएं दर्ज हुईं — पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा। यानी बारिश जब हुई तो मूसलाधार हुई, लेकिन उसका फैलाव असमान रहा। यही असमान वितरण खेती और जल प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती बना।
राजस्थान का हाल: औसत से 17.61% कम, पाली सबसे ज्यादा प्यासा
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 27 सितंबर तक प्रदेश में बारिश की कमी -17.61 प्रतिशत रही — यानी सामान्य से करीब 18 फीसदी कम पानी मिला।
पाली सबसे सूखा जिला रहा — कमी -58.44 प्रतिशत, यानी सामान्य का आधा पानी भी नहीं बरसा। इसके बाद जैसलमेर (-54.17%), जालौर (-50.26%), बांसवाड़ा (-39.07%) और हनुमानगढ़ (-38.02%) का नंबर रहा।
वहीं कुछ जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश भी हुई। डीग में 27.98 प्रतिशत, धौलपुर में 27.78 प्रतिशत, सलूंबर में 25.88 प्रतिशत, भरतपुर में 15.81 प्रतिशत और फलोदी में 11.37 प्रतिशत बारिश सामान्य से अधिक दर्ज हुई।
| जिला | स्थिति (सामान्य की तुलना में) |
| पाली | -58.44% — सबसे ज्यादा कमी |
| जैसलमेर | -54.17% |
| जालौर | -50.26% |
| बांसवाड़ा | -39.07% |
| हनुमानगढ़ | -38.02% |
| डीग | +27.98% — सबसे ज्यादा अधिक |
| धौलपुर | +27.78% |
| सलूंबर | +25.88% |
| भरतपुर | +15.81% |
| फलोदी | +11.37% |
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार राजस्थान से मानसून की विदाई लगभग पूरी हो चुकी है और राज्य में एंटी-साइक्लोनिक परिस्थितियां बन रही हैं, जिससे अक्टूबर के पहले सप्ताह में तापमान और बढ़ेगा।
जिम्मेदार कौन: मजबूत होता एल नीनो
कमजोर मानसून के पीछे सबसे बड़ा खलनायक एल नीनो है। IMD प्रमुख महापात्र के अनुसार भूमध्य प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर पहुंच गया है — यह एक मजबूत एल नीनो का संकेत है। यह स्थिति कम से कम अगले साल मार्च तक बनी रहने की आशंका है।
एल नीनो में प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर होती हैं और भारत में सूखे की स्थितियां बनती हैं। 2002, 2009 और 2015 के कमजोर मानसूनों में भी एल नीनो की भूमिका रही थी। अप्रैल में IMD ने 92 प्रतिशत LPA का अनुमान जताया था, जिसे बाद में घटाकर 90 प्रतिशत किया गया — अंतिम आंकड़ा 87.4 प्रतिशत के साथ आया।
अक्टूबर-दिसंबर का पूर्वानुमान: राहत की उम्मीद कम
IMD के अनुसार अक्टूबर में देश में सामान्य से कम बारिश की संभावना है, और अक्टूबर-दिसंबर की अवधि में भी ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से नीचे रहेगी। राजस्थान के पश्चिमी जिलों में पहले से सूखी जमीन को अक्टूबर में भी राहत मिलने की उम्मीद कम है।
जयपुर मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार अक्टूबर के पहले सप्ताह में जैसलमेर-बाड़मेर में अधिकतम तापमान 38 से 39 डिग्री तक पहुंच सकता है। जयपुर में 1 अक्टूबर को 34-35 डिग्री और 2 से 4 अक्टूबर के बीच 35-36 डिग्री का अनुमान है। रात का पारा 20-24 डिग्री रहेगा — दिन में गर्मी, रात में हल्की ठंडक।
किसानों के लिए यह दोहरी चिंता है — खरीफ पहले ही प्रभावित हुई, अब रबी (सरसों, गेहूं, चना) के लिए मिट्टी में नमी की कमी चुनौती बनेगी। पाली, जालौर और जैसलमेर में जलाशयों और भूजल पर भी दबाव बढ़ेगा।
किसानों और शहरों के लिए 5 काम की बातें
- पानी बचाएं: घर और खेत — दोनों जगह पानी का किफायती इस्तेमाल करें। मानसून की कमी और आगे कम बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए यह अब जरूरत है।
- रबी बुवाई सोच-समझकर: मिट्टी की नमी जांचकर सरसों और चने जैसी कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें।
- मौसम अपडेट पर नजर: IMD जयपुर के दैनिक बुलेटिन पर नजर रखें।
- फसल बीमा का लाभ: बीमित किसान नुकसान का आकलन कराकर समय पर क्लेम की प्रक्रिया पूरी करें।
- जल स्रोतों की निगरानी: कुओं और जलाशयों के स्तर पर नजर रखें; सामुदायिक जल संरक्षण अपनाएं।
मानसून 2026 की रिपोर्ट एक चेतावनी है — जलवायु परिवर्तन के दौर में हर साल “सामान्य मानसून” की उम्मीद पूरी नहीं होगी। राजस्थान जैसे राज्य में भविष्य की तैयारी आज से ही शुरू करनी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. मानसून 2026 में देश में कुल कितनी बारिश हुई? 759 मिलीमीटर — सामान्य 868.6 मिमी से 12.6 प्रतिशत कम। यह 2015 के बाद का सबसे सूखा और 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर सीजन है।
2. राजस्थान में बारिश की कमी कितनी रही? 1 जून से 27 सितंबर तक -17.61 प्रतिशत। पाली में -58.44% कमी, डीग में +27.98% अधिक बारिश।
3. मानसून कमजोर रहने का मुख्य कारण क्या है? मजबूत होता एल नीनो — प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री से ज्यादा ऊपर है, और यह स्थिति मार्च 2027 तक बनी रह सकती है।
4. अक्टूबर-दिसंबर में राजस्थान का मौसम कैसा रहेगा? सामान्य से कम बारिश की संभावना। जैसलमेर-बाड़मेर में 38-39 डिग्री तक पारा; रात में 20 डिग्री के आसपास हल्की ठंडक।