एक ऐसा तस्कर, जो दो साल से ज्यादा समय तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा, अब आखिरकार सलाखों के पीछे है। चित्तौड़गढ़ तस्कर गिरफ्तार होने की यह खबर सिर्फ एक गिरफ्तारी की कहानी नहीं है — यह उस नेटवर्क की कहानी है जो अमेरिकी फोन नंबरों और सोशल मीडिया ऐप के जरिए राजस्थान के अंदर नशीले पदार्थों का जाल बिछाए बैठा था। करीब ढाई साल तक फरार रहने के बाद 20 हजार रुपये के इनामी खेताराम बिश्नोई को निकुंभ थाना पुलिस ने धर दबोचा है, और इस गिरफ्तारी के साथ बाड़मेर का एक खरीदार भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है।
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी अपने साथियों से संपर्क रखने के लिए विदेशी नंबरों का इस्तेमाल करता था — ताकि कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच में पुलिस को भ्रमित किया जा सके। चित्तौड़गढ़ तस्कर गिरफ्तार होने की इस कार्रवाई में तकनीकी जांच और मुखबिर तंत्र दोनों ने अहम भूमिका निभाई।
चित्तौड़गढ़ तस्कर गिरफ्तार: अमेरिकी नंबरों से चलता था नेटवर्क
पुलिस की जांच में सामने आया है कि खेताराम बिश्नोई अपना तस्करी का नेटवर्क सोशल मीडिया ऐप और अमेरिकी नंबरों के जरिए चलाता था। उसके साथी भी उसी तरह के सुरक्षित चैनलों पर बातचीत करते थे, जिससे पुलिस की सामान्य निगरानी में उनका नंबर न पकड़ा जाए।
खेताराम पुत्र चीमाराम जाट निवासी अहसान का कला, बाड़मेर — इसी शख्स पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह यादव के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेन्द्र सिंह जोधा और डीएसपी बड़ीसादड़ी हरीश चंद्र सिंह के सुपरविजन में निकुंभ थानाधिकारी प्रभुसिंह चुंडावत की टीम ने इस गिरफ्तारी को अंजाम दिया।
खेताराम से पूछताछ के बाद पुलिस ने बाड़मेर के ही प्रकाश पुत्र मग्गाराम थोरी जाट निवासी गोलिया जैतमाल, थाना सदर, बाड़मेर को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक प्रकाश डोडा चूरा मंगवाने और उसकी खरीद-फरोख्त में शामिल था। रिमांड पर लेकर गिरोह के अन्य सदस्यों और माल सप्लाई करने वालों का पता लगाया जा रहा है।
ढाई साल पुराना नाकाबंदी तोड़ने का केस
इस गिरफ्तारी की जड़ें 22 मई 2024 के एक मामले में हैं। उस रात निकुंभ थाना क्षेत्र में नाकाबंदी के दौरान पुलिस ने एक स्कॉर्पियो को रोकने का प्रयास किया। लेकिन चालक ने नाकाबंदी तोड़कर गाड़ी भगा दी। पुलिस ने पीछा किया और वाहन के टायरों पर फायर भी किए, जिसके बाद स्कॉर्पियो रुक तो गई — मगर पुलिस के पहुंचने से पहले चालक और उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर खेतों के रास्ते फरार हो गए।
तलाशी में उस स्कॉर्पियो से बड़ी मात्रा में अवैध अफीम डोडा चूरा बरामद हुआ। इसके बाद से ही खेताराम फरार चल रहा था। करीब ढाई साल बाद अब यह चित्तौड़गढ़ तस्कर गिरफ्तार हुआ है — ऑपरेशन त्रिनेत्र और नशा मुक्त चित्तौड़गढ़ अभियान के तहत।
चोरी की स्कॉर्पियो, छेड़छाड़ वाले नंबर और FSL की मदद
मामले की जांच के दौरान एक और परत सामने आई। तस्करी में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो चोरी की थी। असली पहचान छिपाने के लिए इसके इंजन और चेसिस नंबर के कुछ अंकों से भी छेड़छाड़ की गई थी — ताकि वाहन का असली मालिक और पंजीकरण कभी सामने न आए। चित्तौड़गढ़ तस्कर गिरफ्तार मामले में वाहन की सही पहचान के लिए पुलिस को एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी) विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ी।
पुलिस के मुताबिक खेताराम का नाम पहले भी कई मामलों में सामने आ चुका है। करीब छह-सात महीने पहले पाली जिले के रानी थाना क्षेत्र में उसकी पुलिस से मुठभेड़ भी हो चुकी है।
ऑपरेशन त्रिनेत्र: चित्तौड़गढ़ तस्कर गिरफ्तार होने की बड़ी अहमियत
यह गिरफ्तारी सिर्फ एक केस के निपटारे से ज्यादा महत्व रखती है। चित्तौड़गढ़ पुलिस इन दिनों ऑपरेशन त्रिनेत्र और नशा मुक्त चित्तौड़गढ़ अभियान चला रही है, जिसका मकसद जिले में नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। इस अभियान के तहत ही खेताराम की गिरफ्तारी हुई है।
डोडा चूरा राजस्थान के कई जिलों में नशे की बड़ी समस्या है। इस केस में बाड़मेर के खरीदार की गिरफ्तारी से पुलिस को उम्मीद है कि आगे की पूछताछ में पूरे सप्लाई चेन का खुलासा हो सकता है — माल कहां से आता है, कहां जाता है और इसमें कौन-कौन शामिल है।
हाल के महीनों में प्रदेश में नशे के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाइयां हुई हैं। राजधानी समेत कई जिलों में स्मैक और हेरोइन की तस्करी पर पुलिस ने शिकंजा कसा है। इस कड़ी में चित्तौड़गढ़ तस्कर गिरफ्तार होना नशे के खिलाफ जारी मुहिम की एक और अहम कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।
तथ्य एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुख्य आरोपी | खेताराम बिश्नोई पुत्र चीमाराम जाट, निवासी अहसान का कला, बाड़मेर |
| इनाम | 20 हजार रुपये |
| फरारी की अवधि | करीब ढाई साल (मई 2024 से अक्टूबर 2026) |
| दूसरा आरोपी | प्रकाश थोरी पुत्र मग्गाराम थोरी, निवासी गोलिया जैतमाल, थाना सदर, बाड़मेर |
| बरामदगी (2024 केस) | अफीम डोडा चूरा, चोरी की स्कॉर्पियो |
| संपर्क का तरीका | अमेरिकी नंबर और सोशल मीडिया ऐप |
| ऑपरेशन | ऑपरेशन त्रिनेत्र, नशा मुक्त चित्तौड़गढ़ अभियान |
| थाना | निकुंभ, जिला चित्तौड़गढ़ |
आगे क्या होगा
चित्तौड़गढ़ तस्कर गिरफ्तार होने के बाद अब दोनों आरोपियों को रिमांड पर लिया जाएगा ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों और माल सप्लाई करने वालों का पता चल सके। पुलिस यह भी जांच रही है कि खेताराम के अमेरिकी नंबरों वाले नेटवर्क में कितने लोग जुड़े थे और किन-किन इलाकों में डोडा चूरा की सप्लाई होती थी।
उम्मीद है कि पूछताछ में इस नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
चित्तौड़गढ़ तस्कर गिरफ्तार मामले से जुड़े पाठकों के मन में उठने वाले कुछ जरूरी सवाल और उनके जवाब:
1. चित्तौड़गढ़ में कौन-सा तस्कर गिरफ्तार हुआ है? चित्तौड़गढ़ के निकुंभ थाना क्षेत्र में 20 हजार रुपये का इनामी खेताराम बिश्नोई (निवासी अहसान का कला, बाड़मेर) गिरफ्तार हुआ है। वह करीब ढाई साल से फरार था।
2. आरोपी अपना नेटवर्क कैसे चलाता था? पुलिस के मुताबिक खेताराम अमेरिकी नंबरों और सोशल मीडिया ऐप के जरिए अपने साथियों के संपर्क में रहकर तस्करी का नेटवर्क चलाता था, ताकि नंबर ट्रेस न हो सकें।
3. यह मामला कब का है? मूल मामला 22 मई 2024 का है, जब नाकाबंदी तोड़कर स्कॉर्पियो में डोडा चूरा ले जा रहे आरोपी फरार हो गए थे। गिरफ्तारी अक्टूबर 2026 में हुई है।
4. दूसरा आरोपी कौन है? खेताराम की पूछताछ के आधार पर बाड़मेर के प्रकाश थोरी को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक वह डोडा चूरा मंगवाने और उसकी खरीद-फरोख्त में शामिल था।
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स्रोत: जागरण संवाददाता, उदयपुर — मूल खबर पढ़ें