राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 का कार्यक्रम जारी: चार चरणों में मतदान, 25 अक्टूबर से शुरू होगी वोटिंग

शनिवार, 3 अक्टूबर को जयपुर में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजस्थान पंचायतीराज चुनाव 2026 के पूरे कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी — गांव की सरकार चुनने की तारीख अब तय है। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आदर्श आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। इस बार करीब 4.03 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे और कुल 1.69 लाख से ज्यादा जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे।

सबसे पहले जानिए: मतदान कब-कब, कहां-कहां

चुनाव आयोग की घोषणा के मुताबिक सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव चार चरणों में होंगे। पहले चरण की वोटिंग 25 अक्टूबर को होगी, जिसमें 3,672 ग्राम पंचायतों के 10,857 मतदान केंद्रों पर मतदाता कतार में लगेंगे। दूसरे चरण की वोटिंग 31 अक्टूबर को 3,626 पंचायतों के 11,763 केंद्रों पर होगी। तीसरे चरण का मतदान 6 नवंबर को 3,605 पंचायतों के 11,566 केंद्रों पर और चौथे व अंतिम चरण की वोटिंग 16 नवंबर को 3,500 ग्राम पंचायतों के 11,198 मतदान केंद्रों पर कराई जाएगी।

सबसे खास बात यह है कि मतदान खत्म होने के तुरंत बाद ही उसी पोलिंग बूथ पर मतगणना शुरू कर दी जाएगी, यानी वोटर को नतीजे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव भी चार चरणों में होंगे। आयोग द्वारा जारी प्रारंभिक कार्यक्रम के अनुसार लोकसूचना 8 अक्टूबर से जारी होगी और नामांकन दाखिल करने की चरणवार अंतिम तिथियां 8, 13, 19 और 21 अक्टूबर तय की गई हैं। नाम वापस लेने की अंतिम तिथियां 15 अक्टूबर, 19 अक्टूबर, 26 अक्टूबर और 6 नवंबर होंगी। नामांकन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक दाखिल किए जा सकेंगे। उम्मीदवार विस्तृत विषयवार कार्यक्रम आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जरूर जांच लें।

चुनाव का पूरा गणित: कितने पद, कितने मतदाता

चुनाव का स्तरचुने जाने वाले प्रतिनिधि
जिला प्रमुख41
जिला परिषद सदस्य1,403
प्रधान457
पंचायत समिति सदस्य8,245
सरपंच14,403
वार्ड पंच1,30,589
कुल प्रतिनिधि1,69,000 से ज्यादा

मतदाताओं की बात करें तो इस बार करीब 4.03 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कुल वोटरों में 51.82 प्रतिशत पुरुष और 48.18 प्रतिशत महिला मतदाता हैं। जयपुर जिले में सबसे ज्यादा 18.99 लाख वोटर हैं, जबकि जैसलमेर में सबसे कम 4.36 लाख मतदाता दर्ज हैं।

आरक्षण का खाका: महिलाओं को आधी हिस्सेदारी

ग्रामीण नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायतीराज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान इस बार भी सख्ती से लागू रहेगा। सरपंच पदों के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 3,058, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 2,493 और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 1,961 पद आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में सभी 1,253 सरपंच पद पूरी तरह एसटी वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगे।

वार्ड पंचों के स्तर पर एससी के लिए 21,962, एसटी के लिए 19,117 और ओबीसी के लिए करीब 15,000 वार्ड आरक्षित किए गए हैं।

आचार संहिता लागू: अब गांवों में क्या रुक जाएगा

चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा के साथ ही पूरे ग्रामीण राजस्थान में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसका सीधा असर यह होगा कि अब राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए किसी भी नई विकास योजना की घोषणा नहीं कर पाएगी और न ही कोई नया वर्क ऑर्डर जारी किया जा सकेगा। अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर भी रोक लग गई है। मंत्रियों के सरकारी वाहनों और सरकारी गेस्ट हाउस व डाक बंगलों के इस्तेमाल पर भी पाबंदी रहेगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 28 नवंबर 2026 तक संपन्न करा ली जाएगी।

कैसे होगा मतदान: बैलेट पेपर और EVM का हाइब्रिड मॉडल

इस बार के चुनावों में मतदान की पद्धति को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बिना किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक सिंबल के लड़े जाएंगे और इनमें पारंपरिक मतपत्र यानी बैलेट पेपर का इस्तेमाल होगा। वहीं जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव दलीय आधार पर, यानी पार्टी सिंबल पर लड़े जाएंगे और इनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का प्रयोग किया जाएगा।

एक अहम अपवाद भी है। बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा जिलों की कुछ संस्थाओं का कानूनी कार्यकाल अभी बचा हुआ है, इसलिए वहां के चुनाव 22 दिसंबर 2026 के बाद संपन्न कराए जाएंगे। निर्वाचन आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आयोग राज्य में ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की अवधारणा को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, और इसी नीति के तहत त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव एक साथ कराए जा रहे हैं।

राजनीतिक मैदान: सभी दलों की नजर गांव की सरकार पर

ये पंचायतीराज चुनाव सभी दलों के लिए राजनीतिक ताकत मापने का बड़ा मंच बन गए हैं। गांवों की सरकार पर कब्जा जमाने के लिए मुख्य मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के अलावा सीपीआईएम, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, भारतीय आदिवासी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और आम आदमी पार्टी जैसे दल भी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं। जिला प्रमुख और प्रधान के पदों पर अधिकतम जीत सभी दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है, और आचार संहिता लागू होते ही गांवों में राजनीतिक बैठकों और चुनावी सरगर्मी का दौर तेज हो गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचायत चुनाव 2026 में मतदान कब होगा?

सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव चार चरणों में होंगे — 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को। पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव भी चार चरणों में कराए जाएंगे, जिनका विस्तृत कार्यक्रम आयोग की वेबसाइट पर अपलोड होगा।

आचार संहिता कब से लागू हुई है?

3 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। अब नई योजनाओं की घोषणा, शिलान्यास, लोकार्पण और तबादलों पर रोक रहेगी।

सरपंच का चुनाव कैसे होगा?

सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से, बिना किसी पार्टी सिंबल के होंगे। मतदान खत्म होते ही उसी बूथ पर मतगणना शुरू कर दी जाएगी।

नामांकन कब से और कैसे भरें?

लोकसूचना 8 अक्टूबर से जारी होगी। नामांकन की चरणवार अंतिम तिथियां 8, 13, 19 और 21 अक्टूबर हैं। नामांकन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक दाखिल किए जा सकेंगे। उम्मीदवार विस्तृत कार्यक्रम और जरूरी दस्तावेजों की सूची राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जरूर देख लें।

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