राजस्थान में गांव की सरकार चुनने का काउंटडाउन अब अंतिम दौर में है और पंचायत चुनाव 2026 तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर तेज़ हो गई हैं। पहले चरण के नामांकन की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर सामने खड़ी है, और इसी पृष्ठभूमि में शनिवार को राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरे प्रदेश की चुनाव तैयारियों की बड़ी समीक्षा की। आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने जयपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागीय आयुक्तों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और चुनाव कार्यों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए गए सख्त निर्देश
मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने समीक्षा बैठक में साफ कहा कि चार चरणों में होने वाले पंचायतीराज आम चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, भयमुक्त और शांतिपूर्ण ढंग से निर्धारित समयसीमा में पूरे होने चाहिए। उन्होंने सभी अधिकारियों से कहा कि हाल ही में सम्पन्न नगरीय निकाय आम चुनावों के अनुभवों से सीख लेकर आपसी समन्वय, टीम भावना और पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वाचन संबंधी दायित्व निभाएं।
बैठक में कुछ अहम बिंदुओं पर खास जोर दिया गया:
- आदर्श आचार संहिता का सख्त पालन: निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान आचार संहिता की गंभीरता से पालना सुनिश्चित की जाए।
- समयसीमा का पालन: चुनाव से जुड़ा हर कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा हो — देरी बर्दाश्त नहीं होगी।
- लापरवाही पर रोक: चुनावी व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए; सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी करने को कहा गया।
- पारदर्शिता और व्यवस्था: निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।
आयोग ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे सौंपे गए दायित्वों का पूरी गंभीरता और तत्परता से निर्वहन करें।
चुनाव तैयारियों में प्रशासन का रोल: कलक्टर से लेकर मतदान दल तक
पंचायतीराज चुनाव में प्रशासनिक मशीनरी की भूमिका निर्णायक होती है। जिला निर्वाचन अधिकारी के तौर पर कलक्टर पूरे जिले की कमान संभालते हैं — मतदान दलों का गठन, ईवीएम और मतदान सामग्री का वितरण, मतदान केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था और मतगणना की प्रक्रिया, यह सब उन्हीं की निगरानी में होता है। संभागीय आयुक्त संभाग स्तर पर विभिन्न जिलों के बीच समन्वय बनाते हैं, ताकि कहीं भी व्यवस्था में कमी न रहे।
मतदान दल मतदान से एक दिन पहले रवाना होते हैं। मतदान दल में पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी और सुरक्षा कर्मी शामिल होते हैं। मतदान केंद्र पर ईवीएम का सही संचालन, मतदाताओं की पहचान की जांच, स्याही लगाना और रिकॉर्ड रखना — यह सारी प्रक्रिया इन्हीं दलों की जिम्मेदारी होती है। यही वजह है कि आयोग इन दलों के प्रशिक्षण और समय पर रवाना होने पर खास जोर दे रहा है।
नगरीय निकाय चुनावों के अनुभव से क्या सीख मिली
समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने विशेष रूप से हाल ही में सम्पन्न नगरीय निकाय आम चुनावों के अनुभवों का जिक्र किया। निकाय चुनावों में जो अच्छी व्यवस्थाएं रही हैं, उन्हें पंचायत चुनावों में दोहराने और जहां कमियां रहीं, उन्हें दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान, पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती और मतदान के दिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति — इन सभी बिंदुओं पर जिला स्तर पर पहले से योजना बनाने को कहा गया है।
मतदान के दिन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। भीड़भाड़ वाले मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी और संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च जैसी व्यवस्थाएं आमतौर पर अपनाई जाती हैं।
चार चरणों में चुनाव: पूरा कार्यक्रम एक नज़र में
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 का कार्यक्रम पहले ही जारी हो चुका है। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे।
| चरण | पोलिंग पार्टी रवाना | मतदान (जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य) | पंच-सरपंच मतदान |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | 21 अक्टूबर | 22 अक्टूबर | 24 अक्टूबर (नामांकन 23 अक्टूबर) |
| दूसरा चरण | 27 अक्टूबर | 28 अक्टूबर | 30 अक्टूबर (नामांकन 29 अक्टूबर) |
| तीसरा चरण | 2 नवंबर | 3 नवंबर | 5 नवंबर (नामांकन 4 नवंबर) |
उप सरपंच का चुनाव पहले चरण में 25 अक्टूबर, दूसरे में 31 अक्टूबर और तीसरे में 6 नवंबर को होगा। बता दें कि पंचायत चुनाव 2026 का विस्तृत कार्यक्रम आयोग पहले ही घोषित कर चुका है।
धनतेरस की वजह से बदला कार्यक्रम
कार्यक्रम में एक अहम बदलाव पहले ही किया जा चुका है। धनतेरस पर्व को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने पोलिंग पार्टियों के प्रस्थान की तारीखें एक दिन पहले कर दी थीं। धार्मिक आस्था और जनभावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया यह फैसला बताता है कि आयोग हर पहलू पर नज़र रख रहा है। धनतेरस बदलाव की पूरी जानकारी आप यहां पढ़ सकते हैं।
नामांकन की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर: टिकटों की जंग तेज
पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया 8 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और अंतिम तारीख 13 अक्टूबर तय है। शनिवार 10 अक्टूबर और रविवार 11 अक्टूबर को अवकाश होने से राजनीतिक दलों के पास उम्मीदवारों के नाम तय करने का समय बेहद सीमित रह गया है। भाजपा 11 अक्टूबर को पहले चरण के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस भी 12 अक्टूबर तक अपनी सूची जारी कर सकती है। पहले चरण के नामांकन की पूरी जानकारी यहां देखें।
चुनावों का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है — बड़ी संख्या में शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगने के कारण कक्षा 9 से 12 की अर्धवार्षिक परीक्षाएं अब 25 नवंबर से 7 दिसंबर तक आयोजित होंगी।
टिकट वितरण: राजनीतिक दलों में तेज़ मंथन
प्रशासनिक तैयारियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों में भी टिकट वितरण को लेकर हलचल तेज़ है। भाजपा ने प्रत्याशी चयन के लिए समन्वय समिति, जिला चुनाव प्रभारी और पंचायत समिति स्तर पर प्रभारी नियुक्त किए हैं। 11 और 12 अक्टूबर को जिला और पंचायत स्तर के प्रभारी संभावित प्रत्याशियों के पैनल लेकर जयपुर के प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ समेत वरिष्ठ नेताओं के साथ नामों पर मंथन होगा। पार्टी पहले चरण के प्रत्याशियों की पहली सूची 11 अक्टूबर को जारी कर सकती है।
वहीं कांग्रेस भी 12 अक्टूबर तक अपनी सूची जारी करने की तैयारी में है। शनिवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) की प्रदेश चुनाव समिति ने भी जयपुर में बैठक कर टिकटों को लेकर जिलेवार मंथन किया। नामांकन की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर होने से दावेदारों और दलों — दोनों के पास समय बेहद कम बचा है, जिससे टिकटों की जंग और दिलचस्प होने की उम्मीद है।
मतदाताओं और उम्मीदवारों के लिए काम की बातें
- मतदाता सूची: अपना नाम मतदाता सूची में ज़रूर जांच लें — मतदान केंद्र की जानकारी पहले से नोट कर लें।
- उम्मीदवार: नामांकन पत्र के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज़ पूरे रखें; अधूरी फाइलें नामांकन रद्द का कारण बन सकती हैं।
- आचार संहिता: प्रचार के दौरान आचार संहिता के नियमों का उल्लंघन न करें — आयोग इस बार सख्त मूड में है।
- चुनाव ड्यूटी: जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है, वे अपने प्रशिक्षण और भत्तों की जानकारी समय पर लें। चुनाव ड्यूटी पर जाने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी जिला स्तर पर चलाए जाते हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट sec.rajasthan.gov.in पर चुनाव कार्यक्रम और अधिसूचनाएं देखी जा सकती हैं।
पंचायत चुनाव क्यों हैं खास: गांव की सरकार का महत्व
पंचायतीराज संस्थाएं गांव स्तर पर लोकतंत्र की सबसे मज़बूत कड़ी हैं। जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि ही तय करते हैं कि गांव में सड़क, पानी, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं कैसे पहुंचेंगी। सरपंच और पंच ग्राम सभा के माध्यम से विकास योजनाओं की निगरानी करते हैं, जबकि जिला परिषद सदस्य जिले की योजनाओं पर नज़र रखते हैं।
यही वजह है कि पंचायत चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी आम तौर पर विधानसभा और लोकसभा चुनावों से ज़्यादा होती है। गांव का हर मतदाता अपने सरपंच और पंच को सीधे जानता है, इसलिए वोटिंग प्रतिशत ऊंचा रहता है। इस बार भी आयोग ने मतदाता जागरूकता अभियानों के माध्यम से अधिकतम मतदान का लक्ष्य रखा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पंचायत चुनाव 2026 में मतदान कब-कब होगा?
पहले चरण का मतदान 22 अक्टूबर, दूसरे का 28 अक्टूबर और तीसरे का 3 नवंबर को होगा। पंच-सरपंच के लिए क्रमशः 24 अक्टूबर, 30 अक्टूबर और 5 नवंबर को मतदान होगा।
नामांकन की आखिरी तारीख क्या है?
पहले चरण के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर 2026 है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने समीक्षा में क्या कहा?
राजेश्वर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, भयमुक्त और शांतिपूर्ण ढंग से समय पर पूरे हों, आचार संहिता का सख्त पालन हो और किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।
धनतेरस पर मतदान क्यों नहीं होगा?
धार्मिक आस्था और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आयोग ने पोलिंग पार्टियों के प्रस्थान की तारीखें एक दिन पहले कर दी हैं।
पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां अब निर्णायक मोड़ पर हैं। आयोग की इस समीक्षा बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि प्रशासन चुनाव को सुचारु रूप से कराने के लिए पूरी तरह सतर्क है। आने वाले दिनों में प्रत्याशियों की सूचियां जारी होंगी और सियासी सरगर्मी और तेज़ होगी। राज न्यूज़ पर चुनाव से जुड़ी हर बड़ी खबर सबसे पहले पढ़ें।