फलोदी ड्रोन क्रैश: वायुसेना का UAV रात 10 बजे खेत में गिरा, गांव में अफरा-तफरी

फलोदी। राजस्थान के सीमावर्ती फलोदी जिले में सोमवार (12 अक्टूबर) की रात एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। फलोदी ड्रोन क्रैश की यह घटना रात करीब 10 बजे हुई, जब बाप तहसील के सोनलपुरा गांव में वायुसेना का एक मानवरहित विमान (UAV) नियंत्रण खोने के बाद पूर्व सरपंच भरमल राम अमरानी के खेत में आ गिरा। खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। राहत की बात यह रही कि न तो कोई हताहत हुआ और न ही संपत्ति का नुकसान हुआ। पुलिस और बाद में सेना के अधिकारियों ने ड्रोन को अपने कब्जे में ले लिया है, और अब इसके गिरने के कारणों की जांच शुरू हो गई है।

फलोदी ड्रोन क्रैश: आधी रात को खेत में गिरी मशीन, ग्रामीणों ने देखा था आसमान में उड़ते हुए

सोनलपुरा गांव के लोगों का कहना है कि हादसे से करीब एक घंटे पहले से ही एक ड्रोन गांव और आसपास के इलाके में आसमान में उड़ता हुआ दिखाई दे रहा था। रात के अंधेरे में आसमान में मंडराती इस मशीन को देखकर कई ग्रामीण पहले तो हैरान हुए, फिर धीरे-धीरे चिंता बढ़ने लगी। करीब 10 बजे अचानक वह ड्रोन गांव के पूर्व सरपंच भरमल राम अमरानी के खेत में आ गिरा।

खेत में गिरी मशीन देखने में बिल्कुल आम ड्रोन जैसी नहीं थी। ग्रामीणों के मुताबिक, यह एक छोटे हवाई जहाज जैसी बनावट की थी — इसके पंख लंबे थे, पिछले हिस्से में प्रोपेलर लगा हुआ था और निचले हिस्से में सेंसर जैसी संरचनाएं दिखाई दे रही थीं। इस अलग तरह की बनावट को देखकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे जासूसी यंत्र समझा, तो कुछ ने तकनीकी खराबी से गिरा सेना का उपकरण माना। रात में मोबाइल की टॉर्च जलाकर दर्जनों ग्रामीण खेत में पहुंचे और देर तक इस मशीन को घेरकर देखते रहे।

खबर फैलते ही बाप थाना पुलिस मौके पर पहुंची। बाप थाना अधिकारी महेश श्रीमाली ने पुष्टि की कि यह ड्रोन सेना का था। पुलिस ने भीड़ को हटाकर घटना स्थल को सुरक्षित किया और ड्रोन की सुरक्षा व्यवस्था संभाली। इसके बाद सेना और सैन्य खुफिया (मिलिट्री इंटेलिजेंस) के अधिकारियों को सूचना दी गई, जो मौके पर पहुंचे और ड्रोन को अपने कब्जे में ले गए।

पोखरण लाठी रेंज से उड़ा था ड्रोन, तकनीकी खराबी के बाद इमरजेंसी लैंडिंग

प्रारंभिक जांच और सेना से मिली जानकारी के मुताबिक, यह ड्रोन जैसलमेर के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज (लाठी रेंज) से नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर भेजा गया था। फलोदी ड्रोन क्रैश के पीछे की शुरुआती जानकारी यही बताती है कि उड़ान के दौरान ड्रोन में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे उसका नियंत्रण टूट गया और उसने फलोदी के खेत में इमरजेंसी लैंडिंग कर दी।

सूत्रों के अनुसार, यह ड्रोन किसी विदेशी कंपनी का नहीं, बल्कि एक निजी भारतीय कंपनी का बनाया हुआ था। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि यह कथित तौर पर DYNAUTON LIMITED नामक कंपनी का विकसित किया गया प्रोटोटाइप टेस्ट यूनिट था — यानी वह मशीन अभी परीक्षण के दौर से गुजर रही थी। यही वजह मानी जा रही है कि सेना ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और सैन्य खुफिया अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया।

हालांकि, ड्रोन का नियंत्रण आखिर किस तकनीकी वजह से टूटा और वह अपनी निर्धारित रेंज से इतना बाहर फलोदी के रिहायशी इलाके तक कैसे पहुंचा — इन सवालों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। सेना की ओर से इस मामले में विस्तृत बयान का इंतजार है।

सीमा के नजदीक अभ्यास क्षेत्र: सुरक्षा के नजरिए से क्यों अहम है यह घटना

फलोदी जिले का पश्चिमी हिस्सा भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद नजदीक है, और बाप क्षेत्र में सैन्य अभ्यास नियमित रूप से होते रहते हैं। ऐसे में निगरानी और प्रशिक्षण के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल भी आम बात है। लेकिन जिस रात यह हादसा हुआ, उसके कुछ ही दिन पहले श्रीगंगानगर के रावला इलाके में BSF और ANTF ने ड्रोन से गिराई गई हथियारों और विस्फोटक की खेप बरामद की थी — इसलिए सीमा पर ड्रोन की किसी भी गतिविधि को लेकर सुरक्षा एजेंसियां इस समय बेहद सतर्क हैं।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि गिरा हुआ ड्रोन पूरी तरह नष्ट होने के बजाय लगभग साबुत हालत में मिला है। सेना के तकनीकी विशेषज्ञ अब जांचेंगे कि यह विशुद्ध तकनीकी खराबी थी, या ड्रोन के सिस्टम में कोई ऐसी कमजोरी थी जिसे आगे के अभ्यासों से पहले दूर किया जाना जरूरी है।

प्रमुख तथ्य जानकारी
घटना की तिथि और समय 12 अक्टूबर (सोमवार) रात करीब 10 बजे
स्थान सोनलपुरा गांव, बाप तहसील, फलोदी जिला
खेत के मालिक पूर्व सरपंच भरमल राम अमरानी
ड्रोन का मालिक भारतीय वायुसेना/सेना (प्रशिक्षण उड़ान)
उड़ान का स्रोत पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज, जैसलमेर
गिरने की वजह (शुरुआती) तकनीकी खराबी के बाद नियंत्रण टूटना
नुकसान कोई हताहत या संपत्ति का नुकसान नहीं
वर्तमान स्थिति सेना और सैन्य खुफिया अधिकारियों के कब्जे में

अब आगे क्या होगा: जांच और सुरक्षा समीक्षा

फिलहाल ड्रोन सेना के कब्जे में है और बाप थाना पुलिस ने घटना की प्राथमिक जानकारी दर्ज कर ली है। सेना की तकनीकी टीमें अब इस बात की जांच करेंगी कि ड्रोन का नियंत्रण किस वजह से टूटा — क्या यह हार्डवेयर की खराबी थी, सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी, या संचार लिंक टूटने का मामला था। अगर यह प्रोटोटाइप टेस्ट यूनिट था, तो इस घटना की रिपोर्ट निर्माता कंपनी को भी दी जाएगी, ताकि डिजाइन में सुधार किया जा सके। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि अगर भविष्य में कोई संदिग्ध ड्रोन दिखाई दे, तो वे खुद उसे न छुएं और तुरंत पुलिस को सूचना दें।

संबंधित खबरें: सीमा पर ड्रोन से तस्करी की कोशिश पर पहले भी सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की है। फलोदी और सीमावर्ती जिलों में सैन्य गतिविधियों की और खबरें यहां पढ़ें। (स्रोत: ETV Bharat)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: फलोदी में ड्रोन कहां और कब गिरा?
उत्तर: 12 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे फलोदी जिले की बाप तहसील के सोनलपुरा गांव में पूर्व सरपंच भरमल राम अमरानी के खेत में यह ड्रोन गिरा।

प्रश्न 2: क्या इस हादसे में कोई घायल हुआ?
उत्तर: नहीं। ड्रोन खेत में गिरा था, इसलिए न तो कोई हताहत हुआ और न ही संपत्ति का कोई नुकसान हुआ।

प्रश्न 3: यह ड्रोन किसका था और कहां से उड़ा था?
उत्तर: प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह भारतीय वायुसेना/सेना का ड्रोन था जो जैसलमेर के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज से नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था।

प्रश्न 4: ड्रोन गिरने की वजह क्या बताई जा रही है?
उत्तर: शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी आई, जिससे ड्रोन का नियंत्रण टूट गया और उसने इमरजेंसी लैंडिंग कर दी। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

Leave a Comment