राजस्थान को केंद्र से ₹16,619 करोड़: 6 महीने में योजनाओं पर ₹1.02 लाख करोड़ खर्च, पिछले साल से 16.28% ज्यादा

राजस्थान केंद्र राशि के मोर्चे पर वित्त वर्ष 2026-27 के पहले छह महीनों में विकास योजनाओं ने रफ्तार पकड़ी है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच राज्य सरकार ने नियोजित योजनाओं पर ₹1,01,969.52 करोड़ खर्च कर दिए, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹87,695.12 करोड़ से 16.28 प्रतिशत ज्यादा है। इसी दौरान केंद्र सरकार से विभिन्न योजनाओं के लिए राज्य को ₹16,619.72 करोड़ की राशि मिली, जो पिछले साल की तुलना में 8.18 प्रतिशत अधिक है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर खर्च तथा विकास कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आधे वित्त वर्ष के ये आंकड़े इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये बताते हैं कि बजट में घोषित योजनाएं कागज से जमीन पर कितनी तेजी से उतर रही हैं।

राजस्थान केंद्र राशि में 8.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी

सितंबर 2026 तक केंद्र सरकार से राजस्थान को विभिन्न योजनाओं के लिए कुल ₹16,619.72 करोड़ प्राप्त हुए। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में यह राशि 8.18 प्रतिशत ज्यादा है। केंद्र से मिलने वाली यह राशि उन योजनाओं में लगती है, जिनमें केंद्र और राज्य दोनों की भागीदारी होती है। इसमें सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की योजनाएं शामिल होती हैं, हालांकि ताजा जानकारी में योजना-वार बंटवारा नहीं दिया गया है। राशि का बढ़ना इस बात का संकेत है कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए राज्य की ओर से मांगी गई किस्तें और उपयोग प्रमाणपत्र समय पर पहुंच रहे हैं, क्योंकि केंद्रीय सहायता आमतौर पर खर्च की प्रगति से जुड़ी होती है। यानी पैसा तभी आगे बढ़ता है, जब पहले मिली राशि का सही इस्तेमाल दिखे।

नियोजित योजनाओं पर खर्च: राजस्थान केंद्र राशि से मिली गति

सबसे बड़ा आंकड़ा नियोजित योजनाओं पर हुए कुल खर्च का है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच यह खर्च ₹1,01,969.52 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल की पहली छमाही में यह ₹87,695.12 करोड़ था। दोनों वर्षों की तुलना करें तो करीब ₹14,274 करोड़ की अतिरिक्त राशि इस बार छह महीने में ही खर्च हो गई, जो 16.28 प्रतिशत की वृद्धि है। वित्त वर्ष के आधे समय में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च यह भी दिखाता है कि विभागों ने काम की रफ्तार बढ़ाई है। वित्त वर्ष के दूसरे हिस्से में खर्च आमतौर पर तेज होता है, इसलिए पहली छमाही में ही इस स्तर तक पहुंचना तैयारी का संकेत है। हालांकि यह भी सच है कि खर्च का बढ़ना अपने आप में काम पूरा होने की गारंटी नहीं है, असली कसौटी यह है कि इस राशि से कितनी सड़कें, पेयजल योजनाएं, स्कूल भवन और स्वास्थ्य सुविधाएं जमीन पर पूरी हुईं।

केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं में सबसे तेज उछाल

तीसरा अहम आंकड़ा केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं से जुड़ा है। इन योजनाओं पर अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच ₹12,773.84 करोड़ खर्च हुए, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह राशि ₹10,650.56 करोड़ थी। यानी इस मद में 19.94 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जो तीनों प्रमुख आंकड़ों में सबसे तेज है। केंद्रीय सहायता वाली योजनाएं वे होती हैं, जिनमें केंद्र सरकार एक तय हिस्सेदारी देती है और राज्य सरकार बाकी राशि लगाती है। इन पर खर्च बढ़ने का मतलब है कि केंद्र-राज्य साझेदारी वाली योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। आम नागरिकों के लिहाज से यह वर्ग सबसे ज्यादा दिखाई देता है, क्योंकि ग्रामीण सड़क, पेयजल, आवास और रोजगार से जुड़ी कई योजनाएं इसी श्रेणी में आती हैं।

मद अप्रैल-सितंबर 2025-26 अप्रैल-सितंबर 2026-27 बदलाव
केंद्र से प्राप्त राशि पिछले साल से +8.18% ₹16,619.72 करोड़ +8.18%
नियोजित योजनाओं पर कुल खर्च ₹87,695.12 करोड़ ₹1,01,969.52 करोड़ +16.28%
केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं पर खर्च ₹10,650.56 करोड़ ₹12,773.84 करोड़ +19.94%

आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा

आंकड़ों की भाषा से हटकर देखें तो राजस्थान केंद्र राशि और योजना खर्च की इन संख्याओं का सीधा मतलब यह है कि राज्य में चल रही विकास योजनाओं के लिए पैसा रुक नहीं रहा है। जब खर्च की रफ्तार बढ़ती है, तो ठेकेदारों को भुगतान समय पर होता है, निर्माण कार्य बीच में नहीं अटकते और नई योजनाओं की शुरुआत के लिए जगह बनती है। दूसरी तरफ, खर्च बढ़ने के साथ जवाबदेही भी बढ़नी चाहिए। नागरिकों को यह जानने का हक है कि उनके जिले में कौन सी योजना को कितनी राशि मिली और काम किस स्तर पर है। राज्य सरकार का कहना है कि वह खर्च और विकास कार्यों की निगरानी कर रही है, और यही निगरानी दूसरे छह महीनों में भी जारी रहनी चाहिए। अगर दूसरी छमाही में भी यही रफ्तार रही, तो वित्त वर्ष के अंत तक नियोजित योजनाओं का कुल खर्च पिछले साल से काफी आगे निकल सकता है।

आगे किन बातों पर नजर रहेगी

पहली छमाही के आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन असली परीक्षा अक्टूबर से मार्च के बीच होगी। इस दौरान यह देखना होगा कि क्या खर्च की गुणवत्ता भी उसी रफ्तार से बनी रहती है, क्या केंद्र से बाकी किस्तें समय पर आती हैं, और क्या जिलों के स्तर पर योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है। किन विभागों ने सबसे ज्यादा खर्च किया, यह भी अगले आंकड़ों से साफ होगा। फिलहाल, 26 अक्टूबर 2026 को सामने आए ये आंकड़े राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत हैं। इस खबर का स्रोत आईएएनएस की रिपोर्ट है, जिसे BhaskarLive और पंजाब केसरी ने प्रकाशित किया है। राज्य की अन्य आर्थिक खबरों के लिए आप राजस्थान बजट से जुड़ी खबरें, मुख्य सचिव से जुड़ी खबरें और सरकारी योजनाओं की खबरें भी पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान को केंद्र से सितंबर 2026 तक कितनी राशि मिली?

सितंबर 2026 तक केंद्र सरकार से विभिन्न योजनाओं के लिए राजस्थान को ₹16,619.72 करोड़ मिले, जो पिछले साल की इसी अवधि से 8.18 प्रतिशत ज्यादा है।

अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच नियोजित योजनाओं पर कितना खर्च हुआ?

इस अवधि में नियोजित योजनाओं पर कुल ₹1,01,969.52 करोड़ खर्च हुए, जबकि पिछले साल की पहली छमाही में यह आंकड़ा ₹87,695.12 करोड़ था, यानी 16.28 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं पर खर्च में कितनी बढ़ोतरी हुई?

केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं पर खर्च ₹10,650.56 करोड़ से बढ़कर ₹12,773.84 करोड़ हो गया, जो 19.94 प्रतिशत की वृद्धि है।

ये आंकड़े किसने साझा किए और कब?

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने 26 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अप्रैल-सितंबर 2026 के इन आंकड़ों को साझा किया था।

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