पुष्कर कार्तिक स्नान शुरू: घाटों पर उमड़ी भीड़, 24 नवंबर को महास्नान

पुष्कर कार्तिक स्नान शुरू हो गया है और अजमेर जिले के तीर्थराज पुष्कर में सरोवर के घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। कार्तिक मास के आरंभ के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पवित्र सरोवर में डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं। स्नान के बाद श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ भगवान ब्रह्मा का आशीर्वाद लेते हैं।

अगर आप भी इस बार पुष्कर जाने की सोच रहे हैं, तो सबसे काम की बात यह है कि कार्तिक स्नान का सबसे अहम पड़ाव अभी आगे है। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक का पांच दिन का स्नान सबसे पुण्यदायी माना जाता है। इस साल ये पांच दिन 20 नवंबर से 24 नवंबर तक रहेंगे और कार्तिक पूर्णिमा के दिन महास्नान के साथ इस धार्मिक अवधि का समापन होगा।

पुष्कर कार्तिक स्नान की अहम तारीखें एक नजर में

जानकारी विवरण
कार्तिक स्नान की शुरुआत कार्तिक मास के आरंभ के साथ, अक्टूबर 2026 में शुरू
पंच दिवसीय विशेष स्नान 20 नवंबर से 24 नवंबर 2026 तक
कार्तिक पूर्णिमा महास्नान 24 नवंबर 2026 (मंगलवार) को समापन
मुख्य स्थल पुष्कर सरोवर, अजमेर जिला, राजस्थान
प्रमुख दर्शन जगतपिता ब्रह्मा मंदिर, सावित्री मंदिर
सरोवर के घाट परंपरागत रूप से 52 घाट बताए जाते हैं

पुष्कर कार्तिक स्नान: घाटों पर कैसा है माहौल

पुष्कर सरोवर के घाटों पर इन दिनों भक्तिमय माहौल बना हुआ है। सुबह से ही श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंच रहे हैं और स्नान के बाद पूजा-पाठ तथा धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से आए यात्री भी सरोवर में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।

कार्तिक मास में तीर्थ स्नान और पूजा-अर्चना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि कार्तिक मास लगते ही पुष्कर में श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा देखने को मिलता है।

पुष्कर को तीर्थराज क्यों कहते हैं

पुष्कर को भगवान ब्रह्मा की नगरी के रूप में जाना जाता है और इसी कारण इसे तीर्थराज कहा जाता है। यहां स्थित जगतपिता ब्रह्मा मंदिर भारतीय मंदिर परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ है। गर्भगृह में भगवान ब्रह्मा की चार मुखों वाली प्रतिमा विराजमान है, जिनके चार मुख चार वेदों और चार दिशाओं के प्रतीक माने जाते हैं। उनके साथ देवी गायत्री का स्वरूप भी प्रतिष्ठित है।

पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्माजी ने यहीं यज्ञ संपन्न किया था और इसी से पुष्कर का धार्मिक महत्व जुड़ा है। एक पहाड़ी पर देवी सावित्री का मंदिर स्थित है, जबकि दूसरी ओर गायत्री देवी की उपासना की जाती है। पुष्कर सरोवर के चारों ओर अनेक घाट बने हैं और परंपरागत रूप से इनकी संख्या 52 बताई जाती है। ब्रह्म घाट, वराह घाट और गौ घाट इनमें प्रमुख हैं।

धार्मिक मान्यता यह भी है कि कार्तिक मास के दौरान विशेष तिथियों में पुष्कर सरोवर में 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। इसी आस्था के चलते देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक स्नान-दान और पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व रहता है।

पंच दिवसीय स्नान का क्या महत्व है

जो श्रद्धालु पूरे कार्तिक महीने तक पुष्कर में स्नान नहीं कर सकते हैं, उनके लिए अंतिम पांच दिन का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक पांच दिनों के दौरान स्नान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य माना जाता है। इस साल ये पांच दिन 20 नवंबर, शुक्रवार से 24 नवंबर, मंगलवार तक रहेंगे।

कार्तिक पूर्णिमा पुष्कर का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्माजी ने यहां यज्ञ संपन्न किया था। इस अवधि में हजारों श्रद्धालु पवित्र सरोवर में स्नान और ब्रह्मा मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं।

पुष्कर पहुंचने से पहले ये जानना जरूरी है

पुष्कर अजमेर शहर से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए ज्यादातर यात्री पहले अजमेर पहुंचते हैं। अजमेर जंक्शन रेलवे स्टेशन देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है और वहां से पुष्कर के लिए बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती है। सड़क मार्ग से जयपुर से भी पुष्कर पहुंचा जा सकता है।

ठहरने के लिए पुष्कर में धर्मशालाओं से लेकर होटल तक कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के आसपास भीड़ बढ़ने पर पहले से बुकिंग कराना समझदारी रहती है। घाटों पर स्नान करते समय घाटों के नियमों, जल की स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

इसी मौसम में पुष्कर मेला भी खींचता है पर्यटकों को

कार्तिक मास के दौरान आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेला भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता है। मेले में देश-विदेश से पर्यटकों के साथ लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद रहती है। धार्मिक आयोजनों के अलावा पुष्कर की सांस्कृतिक परंपराएं और पर्यटन गतिविधियां भी लोगों को आकर्षित करती हैं।

कार्तिक स्नान, पंचतीर्थ स्नान और अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले के चलते आने वाले दिनों में तीर्थराज पुष्कर में धार्मिक उत्साह और पर्यटकों की चहल-पहल बढ़ने की संभावना है। पुष्कर से जुड़ी धार्मिक यात्राओं का सिलसिला हाल के हफ्तों में भी चर्चा में रहा है — लोकमंथन यात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत भी तीर्थराज पुष्कर से हुई थी। वहीं, पुष्कर में बागेश्वर धाम से जुड़े प्रस्तावित विशाल धार्मिक परिसर की योजना भी धार्मिक पर्यटन के लिहाज से चर्चा में रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पुष्कर में कार्तिक स्नान कब तक चलेगा?

कार्तिक स्नान कार्तिक मास के आरंभ से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। इस साल इसका समापन 24 नवंबर 2026 को महास्नान के साथ होगा।

पंच दिवसीय कार्तिक स्नान की तारीखें क्या हैं?

देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक का पंच दिवसीय स्नान 20 नवंबर से 24 नवंबर 2026 तक रहेगा। इन पांच दिनों में स्नान का विशेष पुण्य माना जाता है।

पुष्कर कैसे पहुंचा जा सकता है?

पुष्कर अजमेर से करीब 14 किलोमीटर दूर है। अजमेर जंक्शन तक ट्रेन से पहुंचकर वहां से बस या टैक्सी से पुष्कर जाया जा सकता है। जयपुर से सड़क मार्ग भी उपलब्ध है।

कार्तिक स्नान के दौरान क्या सावधानी रखनी चाहिए?

घाटों पर भीड़ के दौरान घाटों के नियमों का पालन करें, जल की स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखें और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ख्याल रखें। कार्तिक पूर्णिमा के आसपास ठहरने की पहले से बुकिंग करा लें।

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