वित्तीय वर्ष 2026-27 का आधा समय बीत चुका है, लेकिन राजस्थान में योजनाओं पर खर्च की रफ्तार अभी भी धीमी है। सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में सामने आया कि 28 सितंबर तक राज्य अपने कुल योजनागत बजट प्रावधान 2,62,781 करोड़ रुपये का सिर्फ 39 प्रतिशत ही खर्च कर पाया है। यानी करीब 1.03 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और 1.59 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम अभी भी बची हुई है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए सभी विभागों को साफ निर्देश दिए हैं — अब हर हफ्ते खर्च की समीक्षा होगी और हर 15 दिन में वित्त विभाग को खर्च की योजना भेजनी होगी। सवाल सीधा है: जब पैसा खजाने में रखा है, तो सड़क, पानी, स्कूल और अस्पताल के काम जमीन पर क्यों नहीं दिख रहे?
बैठक में क्या-क्या सामने आया?
मंगलवार को राज्य सचिवालय में हुई इस अहम बैठक में 2026-27 के योजनागत बजट और व्यय की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार बैठक में तीन बातों पर खास ध्यान दिया गया — केंद्र से मिली सहायता की स्थिति, लंबित पड़ी ‘मदर सैंक्शन’ यानी मूल स्वीकृतियों के मामले और उन विभागों की प्रगति जिनका बजट उपयोग बाकियों के मुकाबले काफी कम रहा है।
बैठक में जल संसाधन, कौशल एवं उद्यमिता, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक निर्माण, गृह और जनजाति क्षेत्रीय विकास जैसे अहम विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी मौजूद रहे। यानी यह कोई रूटीन बैठक नहीं थी — जिन विभागों के पास सबसे बड़े विकास कार्य हैं, उन सबको एक साथ बैठाकर हिसाब मांगा गया है।
आंकड़े क्या कहते हैं? राज्य कोष और केंद्र का हिस्सा
खर्च के आंकड़े खुद पूरी कहानी कहते हैं। कुल 1.03 लाख करोड़ रुपये के खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा राज्य कोष का है, जबकि केंद्र से मिली सहायता का उपयोग तुलनात्मक रूप से कम रहा है।
| कुल योजनागत बजट प्रावधान 2026-27 | ₹2,62,781 करोड़ |
| 28 सितंबर तक कुल खर्च | करीब ₹1,03,206 करोड़ (39%) |
| राज्य कोष से खर्च | ₹89,555 करोड़ |
| केंद्रीय सहायता से खर्च | ₹13,651 करोड़ |
| अभी बचा हुआ बजट | करीब ₹1,59,575 करोड़ (61%) |
| समीक्षा की तारीख | 28 सितंबर 2026 तक की स्थिति |
सरल भाषा में समझिए — साल के छह महीने बीत जाने के बाद भी हर 100 रुपये में से सिर्फ 39 रुपये ही योजनाओं पर खर्च हो पाए हैं। बचे हुए छह महीनों में बाकी 61 प्रतिशत खर्च करना विभागों के लिए बड़ी चुनौती होगा। अगर रफ्तार नहीं बढ़ी, तो वित्तीय वर्ष के आखिर में या तो पैसा लैप्स होगा या फिर मार्च महीने में जल्दबाजी में खर्च होगा — दोनों ही स्थितियां जनता के लिए नुकसानदायक मानी जाती हैं।
मुख्य सचिव के निर्देश: हर हफ्ते समीक्षा, हर 15 दिन योजना
बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने विभागों को दो-टूक निर्देश दिए। पहला, हर विभाग अपने खर्च की हर सप्ताह समीक्षा करेगा, ताकि कहां अड़चन आ रही है, वह समय रहते पकड़ में आए। दूसरा, हर 15 दिन में विभागों को अपनी खर्च योजना वित्त विभाग को भेजनी होगी।
इसके साथ ही केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन की भी अलग से समीक्षा की गई। विभागों से कहा गया कि लंबित अनुमोदनों और मदर सैंक्शन से जुड़े मामलों को जल्द से जल्द निपटाया जाए और आवंटित राशि का पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई बार केंद्र की योजनाओं का पैसा सिर्फ कागजी मंजूरियों के चक्कर में अटका रह जाता है और जमीन पर काम शुरू ही नहीं हो पाता।
आम आदमी के लिए इस खबर के मायने क्या हैं?
बजट खर्च की रफ्तार का सीधा असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। बजट में घोषित सड़कें, पेयजल योजनाएं, स्कूल भवन, अस्पतालों का विस्तार और कौशल प्रशिक्षण जैसे काम तभी पूरे होते हैं, जब पैसा समय पर खर्च हो। खर्च में देरी का मतलब है — काम अगले साल पर टलना, लागत बढ़ना और कई बार योजना का आकार छोटा हो जाना।
दूसरी तरफ, यह भी सच है कि सरकार ने अब साप्ताहिक समीक्षा और पाक्षिक योजना की व्यवस्था बनाकर निगरानी कड़ी कर दी है। अगर विभाग इस रफ्तार को बनाए रखते हैं, तो बचे हुए छह महीनों में खर्च का आंकड़ा तेजी से सुधर सकता है। असली परीक्षा यही होगी कि अक्टूबर से मार्च के बीच जमीन पर कितने काम शुरू और पूरे होते हैं। Raj News इस समीक्षा के अगले अपडेट पर नजर बनाए रखेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: राजस्थान का 2026-27 का कुल योजनागत बजट कितना है?
जवाब: आधिकारिक समीक्षा के अनुसार 2026-27 के लिए योजनागत बजट प्रावधान कुल 2,62,781 करोड़ रुपये है।
सवाल 2: 28 सितंबर तक कितना बजट खर्च हो चुका है?
जवाब: 28 सितंबर 2026 तक करीब 1.03 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जो कुल प्रावधान का 39 प्रतिशत है। इसमें 89,555 करोड़ रुपये राज्य कोष से और 13,651 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता से खर्च हुए हैं।
सवाल 3: मुख्य सचिव ने विभागों को क्या निर्देश दिए हैं?
जवाब: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने निर्देश दिए हैं कि हर विभाग हर सप्ताह अपने खर्च की समीक्षा करे और हर 15 दिन में खर्च की योजना वित्त विभाग को भेजे। साथ ही लंबित मंजूरियों और मदर सैंक्शन के मामले जल्द निपटाने को कहा गया है।
सवाल 4: बजट खर्च धीमा होने से जनता पर क्या असर पड़ता है?
जवाब: खर्च धीमा होने से सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं के काम देर से पूरे होते हैं। कई बार वित्तीय वर्ष खत्म होने पर आवंटित राशि लैप्स भी हो जाती है, जिससे घोषित काम अधूरे रह जाते हैं।