राजस्थान संपर्क 181: शिकायत निस्तारण 44% से बढ़कर 85% हुआ, सीएम भजनलाल ने HCM RIPA में दिया बड़ा संदेश

जयपुर। अगर आपकी कोई सरकारी शिकायत महीनों से फाइलों में अटकी पड़ी है, तो यह खबर आपके काम की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को जयपुर में बताया कि राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन पर शिकायतों के निस्तारण की दर 43-44 प्रतिशत से बढ़कर 84-85 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यानी कभी आधी से भी कम शिकायतें सुलझ पाती थीं, अब दस में से आठ से ज्यादा शिकायतों का समाधान हो रहा है। मुख्यमंत्री ने यह बात हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान लोक प्रशासन संस्थान (HCM RIPA) के बी.एस. मेहता सभागार में प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कही। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस संबोधन की जानकारी सोशल मीडिया पर भी साझा की है।

मुख्यमंत्री ने इसका श्रेय किसी एक योजना को नहीं, बल्कि ऊपर से नीचे तक की लगातार निगरानी को दिया। उन्होंने बताया कि वे खुद, मुख्य सचिव और विभागीय सचिव जब भी मौका मिलता है, शिकायत निस्तारण केंद्रों का दौरा करते हैं और निस्तारण की स्थिति की नियमित समीक्षा करते हैं। प्रशिक्षु अधिकारियों से उनका संदेश साफ था — शिकायत निपटाना कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि अधिकारी के काम का असली केंद्र है।

आम आदमी के लिए इस आंकड़े का मतलब क्या है

राजस्थान संपर्क 181 एक सिंगल-विंडो टोल-फ्री व्यवस्था है, जहां नागरिक सरकारी सेवाओं से जुड़ी अपनी शिकायत एक ही नंबर पर दर्ज करा सकते हैं। बिजली का बिल गड़बड़ हो, पानी की सप्लाई रुकी हो, पेंशन अटकी हो, राशन न मिल रहा हो, जमीन का रिकॉर्ड उलझा हो या नरेगा की मजदूरी रुकी हो — ऐसे तमाम मामलों में यही नंबर काम आता है।

181 पर शिकायत कैसे दर्ज करें

शिकायत दर्ज करना बेहद आसान रखा गया है, ताकि पढ़ा-लिखा हो या कम पढ़ा-लिखा, हर नागरिक इसका इस्तेमाल कर सके:

  • फोन से: टोल-फ्री नंबर 181 पर कॉल करें। कॉल सेंटर में बैठा ऑपरेटर आपकी शिकायत दर्ज करेगा और आपको एक रेफरेंस नंबर देगा। इसी नंबर से आप अपनी शिकायत की स्थिति जान सकते हैं।
  • ऑनलाइन: राजस्थान संपर्क पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है, जहां शिकायत का पूरा ट्रैक रिकॉर्ड देखा जा सकता है।
  • केंद्र पर जाकर: पंचायत समिति और जिला स्तर पर चल रहे संपर्क केंद्रों पर भी निःशुल्क शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

शिकायत दर्ज करते समय अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर और समस्या का साफ विवरण जरूर बताएं। बिजली, पानी, भूमि, पुलिस, स्वास्थ्य, राशन और पेंशन जैसे करीब 55 विभागों से जुड़े मामले इसके दायरे में आते हैं। रेफरेंस नंबर संभालकर रखें, क्योंकि उसी से आपकी शिकायत की पहचान होती है।

आंकड़ों में राजस्थान संपर्क का सफर

पहलू पहले की स्थिति अब की स्थिति
शिकायत निस्तारण दर लगभग 43-44 प्रतिशत लगभग 84-85 प्रतिशत
रोजाना निस्तारित शिकायतें लगभग 5,000 से 6,000 25,000 तक पहुंचीं
हर महीने मिलने वाली शिकायतें — 40 लाख से ज्यादा
पोर्टल पर लंबित शिकायतें — लगभग एक लाख
नागरिक संतुष्टि स्तर — 80 प्रतिशत से ऊपर

ये आंकड़े बताते हैं कि बदलाव सिर्फ एक नंबर का नहीं है। रोजाना निस्तारण चार गुना से ज्यादा बढ़ना बताता है कि व्यवस्था की रफ्तार ही बदल गई है। हालांकि हर महीने 40 लाख से ज्यादा शिकायतें आने वाली व्यवस्था में एक लाख का बैकलॉग यह भी याद दिलाता है कि काम अभी पूरा नहीं हुआ है।

Next-Gen Jan Sampark और Sampark GPT ने कैसे बदली तस्वीर

इस बदलाव के पीछे ‘नेक्स्ट-जेन जन संपर्क’ नाम का दस चरणों वाला सुधार कार्यक्रम है। इसके तहत वरिष्ठ अधिकारियों को जन संपर्क केंद्रों का दौरा करने और शिकायतकर्ताओं से सीधे बात करने को कहा गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बॉट्स के जरिए नागरिकों की संतुष्टि भी दर्ज की जाती है, और असंतुष्ट शिकायतकर्ता का मामला एक स्तर ऊपर उठा दिया जाता है।

इसी कड़ी में ‘संपर्क GPT’ नाम का एआई टूल भी काम कर रहा है, जो शिकायतों का विश्लेषण करके यह पहचानता है कि कौन-सी समस्याएं बार-बार सामने आ रही हैं, ताकि विभाग जड़ तक जाकर सुधार कर सकें।

पहले भी सीएम की सीधी निगरानी रही है

यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था को सीधे हाथ में लिया हो। 9 अक्टूबर 2026 को उन्होंने शासन सचिवालय स्थित हेल्पलाइन केंद्र का औचक निरीक्षण किया था और शिकायतकर्ताओं से खुद फोन पर बात की थी। 5 अक्टूबर को प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने भी शिकायतकर्ताओं को खुद फोन लगाकर उनकी समस्याएं सुनी थीं।

इन दौरों का मकसद एक ही रहा है — यह भरोसा बनाना कि 181 पर की गई शिकायत सिर्फ दर्ज होकर नहीं रह जाएगी। प्रशिक्षु अधिकारियों को दिया गया संदेश भी इसी सिलसिले की अगली कड़ी है: नई पीढ़ी के अधिकारी अपने पद को अधिकार नहीं, बल्कि जनसेवा का उत्तरदायित्व समझें।

अगर आपकी शिकायत अटके तो क्या करें

तमाम सुधारों के बावजूद अगर आपकी शिकायत तय समय में नहीं सुलझती, तो घबराएं नहीं। सबसे पहले अपने रेफरेंस नंबर से शिकायत की स्थिति जांचें। संतुष्ट न होने पर शिकायत को दोबारा उठाया जा सकता है, और व्यवस्था में असंतुष्ट मामलों को ऊपर के स्तर तक ले जाने का प्रावधान है। शिकायत दर्ज करते समय सही मोबाइल नंबर देना इसलिए जरूरी है, ताकि विभाग आपसे संपर्क कर सके।

ध्यान रखें कि राजस्थान में 181 नंबर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन के रूप में काम करता है। शिकायत का विवरण जितना साफ और तथ्यात्मक होगा, विभाग के लिए कार्रवाई उतनी ही आसान होगी।

कुल मिलाकर, 44 से 85 प्रतिशत तक का सफर यह दिखाता है कि लगातार निगरानी और तकनीक से सरकारी शिकायत व्यवस्था को बदला जा सकता है। असली परीक्षा अब यह होगी कि प्रशिक्षु अधिकारी जब जिलों में तैनात होंगे, तो क्या यही रफ्तार जमीन पर भी दिखेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन क्या है?
यह राजस्थान सरकार की टोल-फ्री शिकायत निवारण व्यवस्था है, जहां नागरिक सरकारी सेवाओं से जुड़ी शिकायतें एक ही नंबर 181 पर दर्ज करा सकते हैं।

181 पर शिकायत कैसे दर्ज करें?
181 पर कॉल करके, राजस्थान संपर्क पोर्टल के जरिए या पंचायत समिति व जिला स्तर के संपर्क केंद्र पर जाकर निःशुल्क शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज होने पर एक रेफरेंस नंबर मिलता है।

शिकायत का समाधान कितने दिन में होता है?
हर शिकायत के लिए तय समय सीमा होती है। असंतुष्ट होने पर मामला ऊपर के स्तर तक ले जाया जाता है।

शिकायत से संतुष्ट न हों तो क्या करें?
रेफरेंस नंबर से स्थिति जांचें और शिकायत को दोबारा उठाएं। व्यवस्था में असंतुष्ट मामलों को एक स्तर ऊपर भेजने का प्रावधान है, ताकि मामला अटका न रहे।

संबंधित खबरें: मुख्यमंत्री के हालिया निरीक्षण के बारे में पढ़ें — सीएम हेल्पलाइन 181 निरीक्षण: भजनलाल शर्मा का औचक दौरा और राजस्थान संपर्क-181: प्रमुख शासन सचिव ने खुद शिकायतकर्ताओं को लगाए फोन। इस खबर का स्रोत: Nation Press की रिपोर्ट।

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