नागौर जिले के बरणगांव से पंचायत चुनाव का एक ऐसा नतीजा सामने आया है, जिसकी चर्चा अब गांव की चौपाल से निकलकर पूरे राजस्थान में हो रही है। बरणगांव सरपंच चुनाव परिणाम में राजबाला बेनीवाल ने 982 वोट हासिल करके सरपंची की कुर्सी अपने नाम कर ली है, जबकि उनकी मुकाबले में खड़ी मीरा बेनीवाल को सिर्फ 21 वोट मिले। दोनों के बीच 961 वोटों का भारी अंतर रहा। खास बात यह है कि जीतने वाली और हारने वाली दोनों उम्मीदवार एक ही परिवार की बहुएं हैं और आपस में सगी बहनें भी हैं। इस नतीजे के बाद बरणगांव की सरपंची एक बार फिर बेनीवाल परिवार के पास ही रह गई है।
बरणगांव सरपंच चुनाव परिणाम: वोटों का पूरा गणित
बरणगांव में सरपंच पद के लिए कुल छह महिला उम्मीदवार मैदान में थीं। मतगणना के बाद जो आंकड़े सामने आए, वे इस चुनाव की पूरी कहानी खुद बयां कर देते हैं। राजबाला बेनीवाल को मिले 982 वोटों के सामने बाकी सभी उम्मीदवार काफी पीछे रह गए।
| राजबाला बेनीवाल | 982 | विजेता, नई सरपंच |
| पपीता | 440 | दूसरे स्थान पर |
| पिस्ता | 109 | तीसरे स्थान पर |
| अन्नपूर्णा | 97 | चौथे स्थान पर |
| मीरा बेनीवाल | 21 | पांचवें स्थान पर |
| नोटा | 8 | — |
| निरस्त वोट | 62 | — |
इन आंकड़ों से दो बातें साफ होती हैं। पहली, राजबाला की जीत एकतरफा रही — दूसरे नंबर की उम्मीदवार से भी उनका अंतर 500 वोटों से ज्यादा है। दूसरी, मीरा बेनीवाल को मिले महज 21 वोट सबसे ज्यादा हैरान करने वाले हैं, क्योंकि उनके परिवार का इस गांव की सरपंची से दशकों पुराना नाता रहा है।
बरणगांव सरपंच चुनाव परिणाम: सगी बहनों का मुकाबला
इस चुनाव की सबसे अनोखी बात यह रही कि मुख्य मुकाबला दो सगी बहनों के बीच था। राजबाला बेनीवाल सांसद हनुमान बेनीवाल के बड़े भाई प्रेमसुख बेनीवाल की पत्नी हैं, जबकि मीरा बेनीवाल उनके दिवंगत बड़े भाई रामप्रसाद बेनीवाल की पत्नी हैं। रिश्ते में दोनों देवरानी-जेठानी भी हैं और मायके से सगी बहनें भी। एक ही घर की दो बहुओं के आमने-सामने आ जाने से बरणगांव का यह चुनाव शुरू से ही सुर्खियों में था।
गांव के लोगों के लिए भी यह मुकाबला आसान नहीं रहा होगा — एक तरफ परिवार की एक बहू थीं, दूसरी तरफ दूसरी बहू। लेकिन वोटों का फैसला एकदम साफ रहा।
25 साल की सरपंची की विरासत और गांव की नजर
मीरा बेनीवाल को सिर्फ 21 वोट मिलने की चर्चा इसलिए भी ज्यादा हो रही है, क्योंकि उनके पति रामप्रसाद बेनीवाल करीब 25 साल तक बरणगांव के सरपंच रह चुके हैं। गांव की एक पूरी पीढ़ी ने उन्हीं के कार्यकाल में अपनी पंचायत को देखा है, इसलिए उनकी पत्नी का इतने कम वोटों पर सिमट जाना कई लोगों के लिए अप्रत्याशित रहा।
लंबे कार्यकाल के बाद मतदाताओं में बदलाव की चाहत भी एक बड़ा कारण हो सकती है। गांव के मतदाताओं ने इस बार नए चेहरे पर भरोसा जताया है। हालांकि यह भी सच है कि नया चेहरा भी उसी परिवार से है, इसलिए यह बदलाव पूरी तरह नया नहीं, बल्कि परिवार के भीतर नेतृत्व बदलने का फैसला माना जा रहा है।
हनुमान बेनीवाल ने क्यों बनाई दूरी
इस चुनाव में एक और बात पर सबकी नजर थी — सांसद हनुमान बेनीवाल का रुख। बरणगांव उनका पैतृक गांव है, और मैदान में उनकी दोनों भाभियां थीं। ऐसे में किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करना घर में ही दरार का कारण बन सकता था। उन्होंने प्रचार से पूरी तरह दूरी बनाए रखी और दोनों में से किसी के पक्ष में खुलकर प्रचार नहीं किया। फैसला पूरी तरह मतदाताओं पर छोड़ दिया गया, और मतदाताओं ने बिना किसी बाहरी दबाव के अपना फैसला सुनाया।
पहले चरण का बड़ा चित्र: 80.09 प्रतिशत मतदान, 3,314 पंचायतें
बरणगांव का नतीजा अकेला नहीं है। यह पंचायत चुनाव 2026 के पहले चरण का हिस्सा है, जिसमें शनिवार, 24 अक्टूबर को प्रदेश के 16 जिलों की 3,314 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए मतदान हुआ था। शाम 6 बजे तक प्रदेश में 80.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। बाड़मेर की मांगटा पंचायत समिति में सबसे ज्यादा 91.42 प्रतिशत वोट पड़े, जबकि पाली की रानी स्टेशन पंचायत समिति में सबसे कम 56.82 प्रतिशत मतदान हुआ।
पहले चरण में करीब 85 लाख मतदाताओं ने वोट डाले। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव ईवीएम से हुए थे। मतदान खत्म होते ही मतगणना शुरू हो गई थी, और देर रात तक नतीजे घोषित किए गए। पहले चरण के मतदान की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।
इसी चरण में कुछ गांवों से सर्वसम्मति की कहानियां भी सामने आईं, जहां बिना वोट डाले ही पूरी पंचायत चुन ली गई। बीकानेर के पार्वती तलाई गांव में 36 कौमों ने बिना चुनाव के सरपंच और सभी वार्ड पंच चुन लिए थे। बरणगांव का नतीजा इससे ठीक उल्टा है — यहां मुकाबला हुआ, और वह भी परिवार के भीतर, लेकिन फैसला मतदाताओं ने एकतरफा तरीके से सुनाया।
नई सरपंच के सामने अब क्या काम है
राजबाला बेनीवाल के लिए अब असली परीक्षा शुरू होगी। सरपंच के तौर पर उनके सामने गांव की रोजमर्रा की जरूरतें हैं — पेयजल की व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, आवास योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना, मनरेगा के काम और राशन व्यवस्था की निगरानी। मतदाताओं ने उन्हें भारी बहुमत दिया है, और इतने बड़े जनादेश के साथ उम्मीदें भी उतनी ही बड़ी होंगी।
रविवार, 25 अक्टूबर को नवनिर्वाचित वार्ड पंच मिलकर उपसरपंच का चुनाव करेंगे। इसके बाद नई पंचायत का गठन पूरा हो जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी sec.rajasthan.gov.in पर देखी जा सकती है।
बरणगांव का यह नतीजा एक संदेश भी देता है — मतदाता परिवार, विरासत और रिश्तों से ऊपर उठकर भी फैसला ले सकता है, और जब लेता है तो वह एकतरफा भी हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: बरणगांव की नई सरपंच कौन बनीं?
उत्तर: राजबाला बेनीवाल 982 वोटों से बरणगांव की नई सरपंच चुनी गई हैं। वे सांसद हनुमान बेनीवाल के बड़े भाई प्रेमसुख बेनीवाल की पत्नी हैं।
प्रश्न: मीरा बेनीवाल को कितने वोट मिले?
उत्तर: मीरा बेनीवाल को सिर्फ 21 वोट मिले। वे हनुमान बेनीवाल के दिवंगत बड़े भाई रामप्रसाद बेनीवाल की पत्नी हैं, जो करीब 25 साल तक बरणगांव के सरपंच रहे थे।
प्रश्न: बरणगांव में सरपंच पद के लिए कितने उम्मीदवार थे?
उत्तर: कुल छह महिला उम्मीदवार मैदान में थीं। राजबाला के बाद पपीता को 440, पिस्ता को 109 और अन्नपूर्णा को 97 वोट मिले।
प्रश्न: पंचायत चुनाव के पहले चरण में कितना मतदान हुआ?
उत्तर: 24 अक्टूबर को 16 जिलों की 3,314 ग्राम पंचायतों में 80.09 प्रतिशत मतदान हुआ। इस चरण में करीब 85 लाख मतदाताओं ने वोट डाले।