कोटा में फिर सिजेरियन के बाद 2 प्रसूताओं की किडनी फेल: रेशमा-अनीता ICU में, 5 महीने पहले 12 केसों में 5 की गई थीं जान

कोटा प्रसूता किडनी केस ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद दो प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने के मामले सामने आए हैं। दोनों महिलाएं इस समय ICU में हैं और उनका इलाज नेफ्रोलॉजी विभाग की निगरानी में चल रहा है। चिंता की बात यह है कि करीब पांच महीने पहले इसी अस्पताल में सिजेरियन के बाद 12 प्रसूताओं की किडनी फेल हुई थी, जिनमें पांच महिलाओं की मौत हो गई थी। नए मामलों ने अस्पताल की प्रसव-उपरांत निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो प्रसूताएं, दो ICU: रेशमा और अनीता की कहानी

कोटा प्रसूता किडनी केस की पहली पीड़िता रेशमा हैं, जो छावनी इलाके में मीनार मस्जिद के पास रहती हैं। बुधवार को उनका सिजेरियन ऑपरेशन न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुआ था। ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालत बिगड़ती देख परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए, जहां उन्हें ICU में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।

दूसरी प्रसूता अनीता हैं, जो निमोदा हरि जी गांव की रहने वाली हैं। उन्हें 13 अक्टूबर को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था और 14 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे सिजेरियन के जरिए उनका प्रसव हुआ। 15 अक्टूबर की सुबह करीब 5 बजे अचानक उन्हें सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और पेशाब बनना बंद हो गया। जांच में उनकी प्लेटलेट्स तेजी से गिरती पाई गईं, जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत सिंगल डोनर प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह दी।

यहीं अस्पताल की एक और कमजोरी उजागर हुई — मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में मशीन खराब होने के कारण प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसे में परिजनों को एमबीएस अस्पताल स्थित ब्लड बैंक तक भागना पड़ा। बाद में अनीता को सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के नेफ्रोलॉजी ICU में शिफ्ट कर दिया गया।

कोटा प्रसूता किडनी केस पर अस्पताल प्रशासन का बयान

अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा के अनुसार दोनों प्रसूताओं के यूरिन आउटपुट में कमी आई है और उन्हें नेफ्रोलॉजी विभाग के अधीन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। यूरिन आउटपुट पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन उसमें कुछ समस्या जरूर आई है।

हालांकि किडनी प्रभावित होने के पीछे की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। कोटा प्रसूता किडनी केस में क्या किसी दवा का असर रहा, क्या संक्रमण की भूमिका थी, या ऑपरेशन से जुड़ी कोई जटिलता सामने आई — इन सवालों का जवाब जांच और चिकित्सकीय आकलन के बाद ही मिल सकेगा।

मई 2026: वह मामला जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया था

कोटा प्रसूता किडनी केस की जड़ें पांच महीने पुरानी घटना से जुड़ी हैं। 5 मई 2026 को इसी अस्पताल में सिजेरियन के बाद 12 प्रसूताओं की किडनी फेल होने का मामला उजागर हुआ था। उस समय सरकार ने 12 प्रसूताओं को संक्रमित माना था, जिनमें से पांच की मौत हो गई थी — चार प्रसूताएं और एक गर्भवती महिला।

इस पुराने मामले में जांच का लंबा सिलसिला चला। चार जांच कमेटियों की क्लीनचिट के बाद तीनों निलंबित डॉक्टर बहाल हो गए — इस पर हमारी पहले की खबर यहां पढ़ें। इसके बाद 7 अक्टूबर को डायलिसिस के सहारे जी रहीं पांच प्रसूताएं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कोटा कैंप कार्यालय पहुंचीं और किडनी ट्रांसप्लांट की मांग उठाई — पूरी खबर यहां पढ़ें।

अब दो नए मामले सामने आने के बाद पुरानी जांचों के निष्कर्षों पर भी सवाल उठने लगे हैं। अगर पुराने मामलों के कारणों का पूरी तरह पता चल गया था, तो उसी अस्पताल में उसी तरह की जटिलता दोबारा कैसे सामने आ गई?

कोटा प्रसूता किडनी केस से उठे बड़े सवाल

नए मामलों ने कई सवाल खड़े किए हैं। पहला — सिजेरियन जैसी बड़ी सर्जरी के बाद मरीज की हालत पर लगातार नजर रखना बुनियादी प्रोटोकॉल है, फिर यूरिन आउटपुट में आई गड़बड़ी का पता समय रहते क्यों नहीं चला? दूसरा — मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में प्लेटलेट्स बनाने वाली मशीन का खराब पड़ा होना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। तीसरा — चार कमेटियों ने डॉक्टरों को क्लीनचिट दे दी, डॉक्टर बहाल हो गए, लेकिन पांच महीने बाद फिर दो प्रसूताओं की किडनी प्रभावित हो गई। क्या पुरानी जांच में असली कारण तक पहुंचा ही नहीं गया था?

घटनाक्रम: एक नजर में

तारीख घटना
5 मई 2026 12 प्रसूताओं की किडनी फेल का मामला उजागर, 5 की मौत
2 अक्टूबर 2026 चार जांच कमेटियों की क्लीनचिट, तीनों डॉक्टर बहाल
7 अक्टूबर 2026 डायलिसिस पर पांच प्रसूताएं ओम बिरला के कार्यालय पहुंचीं
13 अक्टूबर 2026 अनीता को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया
14 अक्टूबर 2026 रेशमा-अनीता का सिजेरियन; कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ी
15 अक्टूबर 2026 अनीता को सांस में दिक्कत, यूरिन बंद; नेफ्रोलॉजी ICU में शिफ्ट
16 अक्टूबर 2026 दोनों नए मामले सामने आए; जांच के आदेश, इलाज जारी

आगे क्या: नेफ्रोलॉजी में इलाज जारी, सबकी नजर जांच पर

फिलहाल कोटा प्रसूता किडनी केस की दोनों पीड़िताओं का इलाज नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहा है। चिकित्सा विभाग से उम्मीद है कि इस बार जांच सिर्फ औपचारिकता न रहे। पांच महीने पहले भी जांच हुई थी, कमेटियां बनी थीं, डॉक्टर बहाल हो गए थे — लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। अगर इस बार भी कारणों का सही पता नहीं चला, तो सवाल और गहरा होगा कि आखिर कोटा के इस अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी क्यों फेल हो रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: कोटा प्रसूता किडनी केस में कौन सी दो महिलाएं प्रभावित हुई हैं?

उत्तर: रेशमा (पत्नी मकसूद खान, छावनी) और अनीता (पत्नी हंसराज बैरवा, निमोदा हरि जी)। दोनों का 14 अक्टूबर को सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था।

प्रश्न 2: दोनों की हालत अभी कैसी है?

उत्तर: रेशमा निजी अस्पताल के ICU में भर्ती हैं, जबकि अनीता को सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के नेफ्रोलॉजी ICU में शिफ्ट किया गया है। कोटा प्रसूता किडनी केस में किडनी प्रभावित होने के कारणों की जांच चल रही है।

प्रश्न 3: पांच महीने पहले क्या हुआ था?

उत्तर: 5 मई 2026 को इसी अस्पताल में सिजेरियन के बाद 12 प्रसूताओं की किडनी फेल हुई थी। सरकार ने 12 को संक्रमित माना था, जिनमें से पांच महिलाओं की मौत हो गई थी।

प्रश्न 4: क्या किडनी फेल होने का कारण सामने आया है?

उत्तर: कोटा प्रसूता किडनी केस में अभी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं आया है। अस्पताल अधीक्षक के अनुसार यूरिन आउटपुट में कमी आई है, लेकिन दवा, संक्रमण या ऑपरेशन से जुड़ी जटिलता — किसी भी वजह की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

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