कोटा NMCH प्रसूता मौत मामला: ड्रग विभाग की बड़ी कार्रवाई, 6 दवाओं के इस्तेमाल और सप्लाई पर रोक

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत के मामले में अब दवाओं की गुणवत्ता पर सीधा सवाल खड़ा हो गया है। इस कोटा NMCH प्रसूता मौत प्रकरण में औषधि नियंत्रण विभाग ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए इंजेक्शन सहित छह दवाओं के संदिग्ध बैचों के इस्तेमाल और सप्लाई पर तत्काल रोक लगा दी है। विभाग की टीम ने इन दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों महिलाओं की मौत के पीछे दवा की घटिया गुणवत्ता या साल्ट रिएक्शन था, या मरीजों की पहले से नाजुक हालत — इसका जवाब ड्रग टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट के बाद ही मिलेगा।

कोटा NMCH प्रसूता मौत: ड्रग विभाग का एक्शन

सहायक औषधि नियंत्रक प्रहलाद मीणा के नेतृत्व में ड्रग विभाग की टीम रविवार को NMCH पहुंची। कोटा NMCH प्रसूता मौत मामले की जांच के तहत टीम ने मरीजों को दी जा रही दवाओं की पड़ताल की और छह अलग-अलग दवाओं के नमूने एकत्र किए। जांच में सामने आया कि सिजेरियन के बाद पीड़ित महिलाओं को इंजेक्शन लगाते ही तेज कंपकंपी छूटने लगी थी। इसी के बाद विभाग ने संबंधित बैच की सभी दवाओं के वितरण और प्रयोग पर तत्काल रोक लगा दी, ताकि किसी और मरीज की जान जोखिम में न पड़े। इस अस्पताल के मामले पर पहले भी सियासी बयानबाजी हो चुकी है — विस्तार से पढ़ें। गौरतलब है कि घटना के पहले दिन एक आईवी फ्लूइड पर भी संदेह जताया गया था, लेकिन पूर्व जांच रिपोर्ट में वह मानकों के अनुरूप पाया गया था।

किन 6 दवाओं पर लगी रोक

दवा बैच नंबर
मेरोपेनम इंजेक्शन (1 ग्राम) D0032631B, D0032640A
एनएस 100 एमएल 2614041065
हाइड्रोकोर्टिसोन सोडियम सक्सीनेट इंजेक्शन HC125095
डोपामाइन हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन DHA12505
पेरासिटामोल इन्फ्यूजन 26EPC013

कोटा NMCH प्रसूता मौत मामले में इन सभी बैचों के सैंपल ड्रग टेस्टिंग लैब को भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि मौतों के पीछे दवाओं की खराब गुणवत्ता थी या कोई और वजह।

कोटा NMCH प्रसूता मौत — रेशमा और रोशन की कहानी

पहली घटना 40 वर्षीय रेशमा से जुड़ी है। 14 अक्टूबर को NMCH में उनकी चौथी सिजेरियन डिलीवरी हुई। प्रसव के बाद उन्हें गुर्दे से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो गईं। हालत न सुधरने पर परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए, जहां शुक्रवार रात उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि रेशमा को एक इंजेक्शन लगाने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी।

कोटा NMCH प्रसूता मौत मामले की दूसरी घटना बारां की रोशन बैरवा की है। गंभीर एनीमिया से पीड़ित इस हाई-रिस्क मरीज को शुक्रवार शाम निजी अस्पताल से NMCH रेफर किया गया था। रात करीब 12 बजे दर्द बढ़ने पर सर्जरी हुई। सुबह करीब सात बजे अचानक घबराहट और सांस की तकलीफ शुरू हुई, अत्यधिक ब्लीडिंग के बाद शनिवार सुबह 11:30 बजे उनकी मौत हो गई। एक अन्य महिला की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के आईसीयू में चल रहा है।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष

कोटा NMCH प्रसूता मौत पर NMCH अधीक्षक आशुतोष शर्मा के अनुसार रोशन हाई-रिस्क मरीज थीं और सी-सेक्शन के बाद उन्हें प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बावजूद ब्लीडिंग नहीं रुकी। शर्मा ने स्पष्ट किया कि मौत गंभीर पोस्टपार्टम हैमरेज से हुई, किडनी फेलियर से इसका कोई लेना-देना नहीं था। प्रशासन की प्राथमिक रिपोर्ट में भी हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, गंभीर कुपोषण और अत्यधिक रक्तस्राव को संभावित कारण बताया गया है। हालांकि उसी रिपोर्ट में यह तथ्य भी दर्ज है कि एक प्रसूता को इंजेक्शन लगाने के कुछ ही देर बाद तबीयत अचानक बिगड़ी थी — इसलिए दवा में खामी या रिएक्शन की आशंका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।

जनआक्रोश — डॉक्टरों की मौजूदगी पर सवाल

कोटा NMCH प्रसूता मौत की इन दो घटनाओं के बाद शहर में भारी आक्रोश है। पूर्व पार्षद ओम गुंजल ने आरोप लगाया कि अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टरों और विभागाध्यक्षों की नियमित मौजूदगी नहीं रहती, जिससे जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को फोन पर सलाह लेकर गंभीर मरीजों का इलाज करना पड़ता है। उन्होंने सरकारी दवाओं की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की मांग की है। स्थानीय निवासी डॉ. दीपांशु श्रृंगी ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों पर काम का अत्यधिक दबाव है और आईसीयू-ऑपरेशन थिएटर में वरिष्ठ विशेषज्ञों की 24 घंटे मौजूदगी के साथ दवाओं की नियमित लैब जांच जरूरी है।

पांच महीने पहले भी ऐसा ही मामला

कोटा NMCH प्रसूता मौत का यह पहला मामला नहीं है — करीब पांच महीने पहले इसी अस्पताल में सिजेरियन के बाद 12 महिलाओं के गुर्दे खराब होने की शिकायत आई थी, जिनमें से पांच की मौत हो गई थी। उस मामले में चार जांच कमेटियों की क्लीनचिट के बाद निलंबित तीनों डॉक्टरों को बहाल कर दिया गया था। अब एक बार फिर उसी अस्पताल में सिजेरियन के बाद मौतों ने चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब आगे क्या

कोटा NMCH प्रसूता मौत मामले में अब सबकी नजरें ड्रग टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट पर हैं। अगर दवाओं में खामी मिलती है तो पूरे प्रदेश में सरकारी सप्लाई की दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल उठेगा। अगर दवाएं मानकों पर खरी उतरती हैं तो जांच का फोकस इलाज की प्रक्रिया और अस्पताल प्रबंधन पर लौटेगा। किसी भी सूरत में प्रसूताओं की सुरक्षा को लेकर पारदर्शी जांच अब अपरिहार्य हो गई है।

घटनाक्रम

14 अक्टूबर: रेशमा की चौथी सिजेरियन डिलीवरी, बाद में किडनी जटिलताएं

16 अक्टूबर: रेशमा की निजी अस्पताल में मौत; रोशन NMCH रेफर

17 अक्टूबर: सुबह 11:30 बजे रोशन की मौत; दूसरी महिला आईसीयू में

18 अक्टूबर: ड्रग विभाग ने 6 दवाओं के सैंपल लिए

19 अक्टूबर: 6 दवाओं के खास बैचों की सप्लाई और इस्तेमाल पर रोक

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: किन दवाओं पर रोक लगाई गई है?

उत्तर: मेरोपेनम इंजेक्शन, नॉर्मल सैलाइन 100 एमएल, हाइड्रोकोर्टिसोन सोडियम सक्सीनेट इंजेक्शन, डोपामाइन हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन और पेरासिटामोल इन्फ्यूजन के खास बैचों पर। कुल छह दवाओं के सैंपल जांच को भेजे गए हैं।

प्रश्न 2: क्या कोटा NMCH प्रसूता मौत के पीछे दवा की खामी है?

उत्तर: अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ड्रग टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट के बाद ही यह साफ होगा। इंजेक्शन के बाद कंपकंपी की कड़ी ने शक जरूर बढ़ाया है।

प्रश्न 3: अस्पताल प्रशासन का क्या कहना है?

उत्तर: अधीक्षक आशुतोष शर्मा के अनुसार दोनों प्रसूताएं हाई-रिस्क थीं और मौत का कारण गंभीर रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हैमरेज) था। लापरवाही के आरोपों से इनकार किया गया है।

प्रश्न 4: क्या पहले भी ऐसा हुआ था?

उत्तर: हां। पांच महीने पहले इसी अस्पताल में सिजेरियन के बाद 12 महिलाओं के गुर्दे खराब हुए थे, पांच की मौत हुई थी। जांच के बाद डॉक्टरों को क्लीनचिट मिल गई थी।

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