खाद्य सुरक्षा गिवअप अभियान: उदयपुर में घर-घर सर्वे शुरू, अपात्र राशन कार्डधारकों के नाम कटेंगे

अगर आप राजस्थान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ ले रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। राज्य के रसद विभाग ने खाद्य सुरक्षा गिवअप अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। इसके तहत अब जांच दल आपके घर तक आएंगे और यह तय करेंगे कि आप वाकई इस योजना के पात्र हैं या नहीं। उदयपुर जिले में यह डोर-टू-डोर सर्वे शुरू हो चुका है और दिसंबर 2026 तक चलेगा।

सबसे अहम बात यह है कि जिन लोगों के नाम अपात्र पाए जाएंगे, उन्हें पहले स्वेच्छा से अपना नाम योजना से हटाने का मौका दिया जाएगा। अगर वे खुद नाम नहीं हटवाते, तो विभाग नोटिस जारी करके कार्रवाई करेगा। यानी सूची से नाम कटना अब सिर्फ कागजी चेतावनी नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन चुका है।

सबसे पहले जानिए: उदयपुर में कहां-कहां होगा घर-घर सर्वे

खाद्य सुरक्षा गिवअप अभियान 2.0 उदयपुर जिले के चयनित शहरी वार्डों में चलाया जा रहा है। विभाग ने साफ किया है कि सर्वे में उन वार्डों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां जनगणना-2011 के आंकड़ों के मुताबिक 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ ले रही है।

फिलहाल अभियान का फोकस इन इलाकों पर है:

जिला नगर निकाय / क्षेत्र चयनित वार्ड
उदयपुर फतेहनगर-सनवाड़ नगर पालिका वार्ड 1, 5, 9 और 10
उदयपुर मावली वार्ड 1

जिला रसद अधिकारी मणि खींची ने बताया कि सर्वे के लिए जांच दलों का गठन कर दिया गया है और हर चयनित वार्ड की लाभार्थी सूची संबंधित जांच अधिकारियों को सौंप दी गई है। यानी टीमें अब सिर्फ मैदान में उतरने का इंतजार नहीं कर रही हैं, काम शुरू हो चुका है।

सिर्फ उदयपुर ही नहीं, प्रदेश के दूसरे जिलों में भी यही प्रक्रिया चल रही है। कोटपूतली-बहरोड़ जिले में गिवअप अभियान के द्वितीय चरण के तहत अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। वहां पहले चरण में पावटा क्षेत्र और नारायणपुर की जोधपुरा ग्राम पंचायत में सर्वे शुरू किया गया है। जिला रसद अधिकारी निकिता राठौड़ के मुताबिक संबंधित अधिकारियों और सर्वे दलों के लिए दैनिक सर्वे लक्ष्य भी तय कर दिए गए हैं, ताकि अभियान समय पर पूरा हो सके।

किन लोगों के नाम कटेंगे: अपात्रता के मानदंड समझिए

खाद्य सुरक्षा गिवअप अभियान का मकसद कोई भी वास्तविक जरूरतमंद परिवार को योजना से बाहर करना नहीं है, बल्कि उन लोगों को सूची से हटाना है जो नियमों के मुताबिक बहिष्करण श्रेणी में आते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तय मानदंडों के अनुसार इन श्रेणियों के लाभार्थियों को अपात्र माना जाएगा:

  • आयकरदाता — जो लोग इनकम टैक्स का भुगतान करते हैं, वे इस योजना के पात्र नहीं हैं।
  • सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति — केंद्र या राज्य सरकार की नौकरी करने वाले कर्मचारियों के परिवार इस सूची से बाहर होंगे।
  • निर्धारित पात्रता मानदंड पूरे न करने वाले अन्य लाभार्थी — जिनकी आर्थिक स्थिति योजना के मापदंडों से ऊपर है।

सर्वे के दौरान जांच दल घर-घर जाकर लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करेगा। अगर कोई परिवार अपात्र पाया जाता है, तो उसे पहले खुद ही अपना नाम योजना से हटवाने यानी “गिव अप” करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्वेच्छा से नाम न हटवाने की स्थिति में नियमानुसार नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

पात्र और वंचित परिवारों के लिए राहत: नए नाम भी जुड़ेंगे

खाद्य सुरक्षा गिवअप अभियान सिर्फ नाम काटने तक सीमित नहीं है। इसका दूसरा और उतना ही अहम पहलू यह है कि जो पात्र और जरूरतमंद परिवार अब तक योजना से बाहर हैं, उन्हें भी इससे जोड़ा जाएगा।

सर्वे के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी वास्तविक पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे। सर्वे में चिन्हित ऐसे परिवारों के आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करवाए जाएंगे, ताकि उन्हें नियमानुसार खाद्यान्न का लाभ मिल सके।

जिला रसद अधिकारी का कहना है कि पारदर्शी डोर-टू-डोर सर्वे से दो फायदे होंगे — एक तो अपात्र लाभार्थियों को हटाने से राज्य के खाद्यान्न बजट पर पड़ने वाला अनावश्यक भार कम होगा, और दूसरा सरकार की कल्याणकारी योजना का लाभ सही मायनों में जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचेगा।

गिवअप अभियान 2.0: स्वेच्छा से नाम हटाने का मतलब क्या है

“गिव अप” का सीधा मतलब है — योजना का लाभ स्वेच्छा से छोड़ देना। सरकार का तर्क है कि जो लोग अब आर्थिक रूप से सक्षम हो चुके हैं या शुरू से ही अपात्र थे, वे खुद आगे आकर अपना नाम हटवाएं। इससे किसी पर जबरन कार्रवाई की नौबत नहीं आएगी और सूची साफ-सुथरी रहेगी।

यह प्रक्रिया पूरी तरह गिवअप अभियान 2.0 के तहत चलाई जा रही है। विभागीय अधिकारियों को योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोग खुद ही आगे आकर अपना नाम हटवा सकें।

दिसंबर तक की टाइमलाइन: सर्वे कैसे होगा

खाद्य सुरक्षा गिवअप अभियान का पूरा शेड्यूल तय है:

  1. अक्टूबर 2026 — सर्वे की शुरुआत; चयनित वार्डों में जांच दलों का घर-घर दौरा।
  2. नवंबर 2026 — सत्यापन का काम जारी; अपात्रों को स्वेच्छा से नाम हटवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
  3. दिसंबर 2026 — सर्वे कार्य का समापन; नाम न हटवाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई।

जिला रसद अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सर्वे कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा किया जाएगा, ताकि खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंच सके।

अगर आप राशन कार्ड धारक हैं, तो एक बात ध्यान रखें — सर्वे दल जब आपके घर आए, तो मांगे गए दस्तावेज जरूर दिखाएं और सही जानकारी दें। गलत जानकारी देने पर कार्रवाई हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: खाद्य सुरक्षा गिवअप अभियान क्या है?

जवाब: यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना की लाभार्थी सूची को साफ करने का अभियान है। इसमें अपात्र लोगों के नाम हटाए जाते हैं और पात्र वंचित परिवारों के नाम जोड़े जाते हैं।

सवाल: उदयपुर में सर्वे कब तक चलेगा?

जवाब: उदयपुर जिले में डोर-टू-डोर सर्वे अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक चलेगा।

सवाल: किन लोगों के नाम सूची से कट सकते हैं?

जवाब: आयकरदाता, सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के बहिष्करण मानदंडों में आने वाले अन्य लाभार्थियों के नाम कट सकते हैं।

सवाल: अगर मेरा नाम अपात्र पाया गया तो क्या होगा?

जवाब: पहले आपको स्वेच्छा से नाम हटवाने का मौका मिलेगा। नाम न हटवाने पर विभाग नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई करेगा।

सवाल: क्या नए पात्र परिवार भी योजना से जुड़ सकते हैं?

जवाब: हां, सर्वे में चिन्हित पात्र और वंचित परिवारों के आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करवाकर उन्हें योजना से जोड़ा जाएगा।

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आधिकारिक जानकारी: खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए राजस्थान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की वेबसाइट food.rajasthan.gov.in देखें।

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