राजस्थान के राजसमंद जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर यही है कि कांकरोली पुलिसकर्मी फायरिंग मामले में पुलिस को कामयाबी मिली है। एक बाइक का नंबर, जो किसी को मामूली कड़ी लग सकती थी, वही इस पूरे केस का टर्निंग पॉइंट बन गया। उत्तर प्रदेश के हापुड़ में दबिश देकर कांकरोली पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, और दोनों को पूछताछ के लिए राजस्थान लाया गया है। आरोप है कि दोनों ने सुपारी लेकर उस पुलिसकर्मी के घर पर फायरिंग की थी, जो खुद लाखों रुपये की ठगी के मामले में नामजद होने के बाद से करीब दो महीने से फरार बताया जा रहा है।
रात के अंधेरे में गूंजे सात राउंड
कांकरोली थाना क्षेत्र में पांच और छह अक्टूबर की दरमियानी रात को एक पुलिसकर्मी के आवास पर अचानक गोलियां चलीं। करीब सात राउंड फायरिंग की गई। आधी रात को हुई इस वारदात से आसपास के घरों में अफरा-तफरी मच गई। गोलीबारी के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
घटना की सूचना पुलिसकर्मी के परिजनों ने पुलिस नियंत्रण कक्ष को दी। सूचना मिलते ही कांकरोली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शुरुआत में पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं था — अंधेरे में हुई फायरिंग, और कोई गवाह भी ऐसा नहीं था जो हमलावरों को पहचान सकता हो। यही वजह थी कि जांच टीम ने सबसे पहले आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का फैसला किया।
कांकरोली पुलिसकर्मी फायरिंग केस: बाइक का नंबर बना सबसे बड़ा सुराग
सीसीटीवी फुटेज में पुलिस को फायरिंग में इस्तेमाल की गई बाइक का नंबर दिख गया। यहीं से मामले ने रफ्तार पकड़ी। पुलिस ने इस नंबर के आधार पर तकनीकी जांच शुरू की और बाइक के मालिक व उसके सफर का रूट ट्रेस किया। जांच की कड़ियां जुड़ती गईं और आखिरकार तार उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से जुड़ गए।
हापुड़ के थाना देहात क्षेत्र के गांव श्यामपुर तक पहुंची राजस्थान पुलिस की टीम ने वहां दबिश दी और दो युवकों को हिरासत में लिया। गिरफ्तार आरोपियों के नाम कविंद्र पुत्र मुन्नू और प्रिंस पुत्र रामवीर बताए गए हैं। पुलिस का कहना है कि बाइक के नंबर और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोनों की पहचान हुई, जिसके बाद उन्हें पकड़ने के लिए टीम को हापुड़ भेजा गया था।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को राजस्थान पुलिस अपने साथ लेकर आई है। फिलहाल पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है ताकि फायरिंग में उनकी भूमिका और वारदात के पीछे की असली वजह का पता लगाया जा सके।
ठगी का पुराना विवाद और सुपारी का एंगल
इस कांकरोली पुलिसकर्मी फायरिंग मामले को ठगी के पुराने विवाद से जोड़कर भी देखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, संबंधित पुलिसकर्मी पर लाखों रुपये की ठगी का आरोप है। इस मामले में नामजद होने के बाद से वह करीब दो महीने से फरार बताया जा रहा है। ठगी के शिकार कुछ लोग पुलिसकर्मी के परिजनों पर रकम लौटाने का दबाव बना रहे थे। इसी दौरान उसके घर पर फायरिंग की घटना हो गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या फायरिंग ठगी के पैसे को लेकर किया गया दबाव था, या इसके पीछे कोई और साजिश है।
एक और अहम एंगल सुपारी का है। दोनों गिरफ्तार आरोपियों पर सुपारी लेकर फायरिंग करने का आरोप है। मामले में दुबई से सुपारी मिलने की चर्चा भी सामने आई है, लेकिन पुलिस ने इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यानी यह बात साफ नहीं हुई है कि फायरिंग किसके कहने पर की गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। यही वह सवाल है जिसका जवाब राजस्थान पुलिस की पूछताछ से मिलने की उम्मीद है।
घटनाक्रम: रात से गिरफ्तारी तक
| तारीख/समय | घटना |
|---|---|
| 5-6 अक्टूबर की मध्यरात्रि | कांकरोली में पुलिसकर्मी के आवास पर करीब 7 राउंड फायरिंग |
| 6 अक्टूबर (रात) | परिजनों ने पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचना दी, थाना पुलिस मौके पर पहुंची |
| 6-7 अक्टूबर | घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, बाइक का नंबर मिला |
| 7-8 अक्टूबर | बाइक नंबर के आधार पर तकनीकी जांच, तार हापुड़ के श्यामपुर गांव से जुड़े |
| 9 अक्टूबर | हापुड़ में दबिश, कविंद्र और प्रिंस गिरफ्तार, दोनों को राजस्थान लाया गया |
| आगे | दोनों से पूछताछ जारी, सुपारी व ठगी एंगल की पड़ताल, मास्टरमाइंड की तलाश |
पूछताछ में अब क्या सामने आएगा
पुलिस के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फायरिंग के पीछे असली मकसद क्या था। जांच के तीन मुख्य बिंदु साफ दिख रहे हैं। पहला — क्या दोनों आरोपियों को वाकई सुपारी दी गई थी, और अगर हां, तो सुपारी देने वाला कौन है। दूसरा — क्या यह घटना पुलिसकर्मी पर लगे ठगी के आरोपों से जुड़ी है, क्योंकि फरार पुलिसकर्मी के परिजनों पर पैसे लौटाने का दबाव पहले से था। तीसरा — दुबई कनेक्शन की चर्चा में कितनी सच्चाई है।
राजस्थान पुलिस हाल के दिनों में अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करती दिख रही है। प्रदेशभर में एक ही दिन में 17 हजार से ज्यादा ठिकानों पर दबिश देने वाला एरिया डोमिनेशन अभियान इसका बड़ा उदाहरण है, जिसमें हजारों अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं अवैध हथियारों के खिलाफ कोटा में चलाया गया ऑपरेशन हॉक भी दिखाता है कि पुलिस अब हथियारबंद अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। ऐसे में कांकरोली फायरिंग केस में भी पुलिस पर जल्दी खुलासे का दबाव बना हुआ है।
ऐसी घटनाओं से आम लोगों के लिए सीख
इस तरह की वारदातें आम लोगों के लिए भी कुछ जरूरी संदेश छोड़ती हैं। अगर आपके आसपास देर रात गोलियों की आवाज सुनाई दे, तो सबसे पहले सुरक्षित जगह पर जाएं और तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष (112) पर सूचना दें। घटना के बाद मौके को न छुएं, ताकि सबूत न मिटें — कांकरोली केस में सीसीटीवी फुटेज ही सबसे बड़ा सबूत बनी, इसलिए घरों और दुकानों पर कैमरे लगवाना अब सिर्फ सुविधा नहीं, सुरक्षा की जरूरत है। अगर कोई आप पर या आपके परिजनों पर पैसे को लेकर दबाव बना रहा है, तो खुद निपटने के बजाय थाने में शिकायत दर्ज कराएं। फरार या वांछित व्यक्ति की जानकारी मिले तो उसे पुलिस को दें, खुद कानून हाथ में न लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. कांकरोली में पुलिसकर्मी के घर फायरिंग कब हुई थी?
पांच और छह अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि को कांकरोली थाना क्षेत्र में एक पुलिसकर्मी के आवास पर करीब सात राउंड फायरिंग की गई थी। घटना के बाद परिजनों ने पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचना दी थी।
2. हापुड़ से किन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है?
कांकरोली पुलिस ने हापुड़ के थाना देहात क्षेत्र के गांव श्यामपुर में दबिश देकर कविंद्र पुत्र मुन्नू और प्रिंस पुत्र रामवीर को गिरफ्तार किया है। दोनों को पूछताछ के लिए राजस्थान लाया गया है।
3. बाइक के नंबर से आरोपियों तक पुलिस कैसे पहुंची?
फायरिंग के बाद घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर फायरिंग में इस्तेमाल बाइक का नंबर सामने आया। इसी नंबर के आधार पर तकनीकी जांच से तार हापुड़ से जुड़े और पुलिस ने वहां दबिश दी।
4. क्या फायरिंग ठगी के विवाद से जुड़ी है और दुबई सुपारी की बात सच है?
संबंधित पुलिसकर्मी पर लाखों रुपये की ठगी का आरोप है और वह करीब दो महीने से फरार है, इसलिए फायरिंग को ठगी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। दुबई से सुपारी मिलने की चर्चा है, लेकिन पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की है। जांच जारी है।