जयपुर रोडवेज बस हादसा ने एक बार फिर सरकारी परिवहन की लापरवाही उजागर कर दी है। बुधवार दोपहर सीकर रोड पर एक रोडवेज बस ने चार वाहनों को टक्कर मार दी — बाइक पर बेटे के साथ जा रहीं 49 साल की तुलसी देवी की मौत हो गई, दो लोग घायल हुए। सबसे खतरनाक पहलू: जिस सरकारी बस ने जान ली, उस पर पहले से 13 यातायात चालान पेंडिंग थे, कुल जुर्माना 92 हजार रुपये। सवाल उस सिस्टम पर है जो चालानों की गठरी लिए बसों को सड़कों पर दौड़ने देता है।
92 हजार रुपये के 13 चालान — फिर भी बस रूट पर कैसे?
हादसे के बाद जब परिवहन विभाग का रिकॉर्ड खंगाला गया तो जो तस्वीर सामने आई, वो चौंकाने वाली है। श्रीमाधोपुर से जयपुर आ रही इसी बस के खिलाफ यातायात नियमों के उल्लंघन के 13 चालान लंबित मिले हैं। सबसे बड़ा हिस्सा बिना परमिट शाहजहांपुर टोल से गुजरने के सात चालानों का है — जनवरी में कटे ये सातों चालान 10-10 हजार रुपये के हैं, यानी अकेले इनका योग 70 हजार रुपये बनता है। इसके अलावा ओवरस्पीड के तीन चालान, प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं होने का चालान और नो-पार्किंग से जुड़े चालान भी रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
यहां सबसे बड़ा सवाल उठता है — इतने पेंडिंग चालानों के बावजूद बस रूट पर कैसे चल रही थी? जानकार बताते हैं कि राजस्थान में सरकारी वाहनों के चालान को लेकर निगरानी और वसूली की प्रक्रिया निजी वाहनों के मुकाबले ढीली पड़ती है। विभागीय जिम्मेदारी और फील्ड अमल के बीच की यही खाई बुधवार को सीकर रोड पर एक जान ले बैठी। अब पुलिस और परिवहन विभाग दोनों के लिए यह जांच का विषय है कि क्या चालान वसूली में बरती गई लापरवाही इस हादसे की पृष्ठभूमि है।
हादसे के 90 सेकंड: खेतान चौराहे पर क्या-क्या हुआ
बुधवार दोपहर करीब 2:45 बजे मुरलीपुरा के खेतान चौराहे पर जो हुआ, वह सीसीटीवी में कैद है। श्रीमाधोपुर से जयपुर आ रही रोडवेज बस कट पर खड़ी एक नीली कार से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार चालक का नियंत्रण छूटा और कार बगल में खड़ी बाइक से भिड़ गई।
उस बाइक पर मुरलीपुरा के भगत की ढाणी निवासी तुलसी देवी अपने बेटे धीरेंद्र सैनी के साथ सवार थीं। मां-बेटा सड़क पर गिर पड़े — और इसी बीच कार का पहिया तुलसी देवी के ऊपर से निकल गया। गंभीर हालत में उन्हें कांवटिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्होंने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
यहीं कहानी खत्म नहीं हुई। कार को टक्कर मारने के बाद बस ने एक स्कूटी और एक अन्य कार को भी अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर के झटके में स्कूटी बस के अगले पहिए के नीचे फंस गई। स्कूटी चला रहे महेश चौधरी के पैर में फ्रैक्चर हो गया और उन्हें कई अन्य चोटें आईं। हादसे के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई, यातायात ठप हुआ और पुलिस को क्षतिग्रस्त वाहन हटाकर सड़क बहाल करनी पड़ी।
13 चालानों का पूरा हिसाब — एक नजर में
| चालान का प्रकार | संख्या | प्रति चालान जुर्माना | कुल |
|---|---|---|---|
| बिना परमिट टोल क्रॉसिंग (शाहजहांपुर टोल, जनवरी) | 7 | 10,000 रुपये | 70,000 रुपये |
| ओवरस्पीड | 3 | — | रिकॉर्ड में दर्ज |
| प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं | 1 | — | रिकॉर्ड में दर्ज |
| नो-पार्किंग | 1+ | — | रिकॉर्ड में दर्ज |
| कुल पेंडिंग चालान | 13 | 92,000 रुपये |
ड्राइवर का दावा बनाम पुलिस की जांच
पुलिस ने बस चालक राकेश कुमार बिजारणियां को गिरफ्तार कर लिया है। थानाधिकारी वीरेंद्र कुरील के मुताबिक बस के ब्रेक नहीं लगने से वह अनियंत्रित हुई — चालक का यही दावा है।
लेकिन जांच को तीन सवालों के जवाब चाहिए — क्या बस की फिटनेस सही थी? क्या 13 पेंडिंग चालानों वाली बस को रूट पर उतारने में विभागीय चूक हुई? क्या चालक पर पहले भी कोई कार्रवाई दर्ज है? बस के मेंटेनेंस रिकॉर्ड मांगे गए हैं और सीसीटीवी फुटेज पहले ही पुलिस के पास है।
पीड़ित परिवार के लिए आगे क्या — मुआवजे की प्रक्रिया
हादसे में जान गंवाने वाली तुलसी देवी मुरलीपुरा के पथ नंबर 7 की रहने वाली थीं। उनके बेटे धीरेंद्र और स्कूटी सवार महेश चौधरी का इलाज चल रहा है। अब परिवार के सामने दो कानूनी रास्ते हैं।
पहला रास्ता मोटर वाहन अधिनियम की धारा 163ए के तहत नो-फॉल्ट लायबिलिटी का है, जिसमें बिना दोष सिद्ध किए तय मुआवजा मिलता है। दूसरा रास्ता मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) में दावा दायर करने का है, जहां परिवार की आय, मृतक की उम्र और आश्रितों की संख्या के आधार पर मुआवजा तय होता है। रोडवेज बस के मामले में दावा आमतौर पर राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के खिलाफ दायर होता है, और निगम का बीमा/फंड से भुगतान होता है। वकीलों की सलाह है कि परिवार को FIR की कॉपी, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, अस्पताल के कागजात और आय के प्रमाण तुरंत संभालकर रखने चाहिए।
आप भी जांच सकते हैं — किसी भी वाहन का चालान ऑनलाइन कैसे देखें
इस हादसे से आम नागरिकों के लिए भी सबक है। आप जिस वाहन में सफर कर रहे हैं, उसका चालान रिकॉर्ड खुद देख सकते हैं — parivahan.gov.in के “eChallan” सेक्शन में वाहन नंबर डालकर पेंडिंग चालान सामने आ जाते हैं। राजस्थान में ई-डिटेक्शन से 18 लाख चालान कट चुके हैं और जयपुर में AI ट्रैफिक कैमरों से चालान की व्यवस्था लागू है। सड़क हादसों में मुआवजे की प्रक्रिया पर कोटा के हालिया मामले की रिपोर्ट भी पढ़ें।
FAQ
जयपुर में रोडवेज बस हादसा कहां और कब हुआ? बुधवार दोपहर करीब 2:45 बजे सीकर रोड पर खेतान चौराहे के पास, मुरलीपुरा थाना क्षेत्र में। श्रीमाधोपुर से जयपुर आ रही रोडवेज बस ने दो कारों, एक स्कूटी और एक बाइक को टक्कर मारी।
हादसे में कितने लोग हताहत हुए? 49 वर्षीय तुलसी देवी की मौत हो गई। उनके बेटे धीरेंद्र सैनी और स्कूटी सवार महेश चौधरी घायल हुए हैं, महेश के पैर में फ्रैक्चर है।
बस पर कितने चालान पेंडिंग थे? कुल 13 चालान, जिनका जुर्माना 92 हजार रुपये है। इनमें 70 हजार रुपये के सात बिना-परमिट टोल चालान, तीन ओवरस्पीड और प्रदूषण-नो-पार्किंग के चालान शामिल हैं।
ड्राइवर का क्या कहना है? चालक राकेश कुमार का दावा है कि बस के ब्रेक फेल हो गए थे। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और बस की फिटनेस व चालान रिकॉर्ड की जांच चल रही है।
पीड़ित परिवार मुआवजे के लिए क्या करे? MACT में दावा दायर किया जा सकता है। FIR, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, अस्पताल के कागजात और आय प्रमाण संभालकर रखें। रोडवेज के मामले में दावा निगम के खिलाफ होता है।