जयपुर की न्यू सांगानेर रोड चौड़ीकरण परियोजना एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां विकास की परिभाषा और लोगों की जिंदगी आमने-सामने हैं। जेडीए के लाल निशान लगने के बाद न्यू सांगानेर रोड के कई परिवार सरकारी बुलडोजर का इंतजार किए बिना खुद ही अपने मकानों और दुकानों का हिस्सा तोड़ रहे हैं — ताकि कार्रवाई में होने वाला नुकसान कुछ कम हो सके। लेकिन इस बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक जेडीए की कार्रवाई पर रोक लगा दी है, जिससे प्रभावित परिवारों को अंतरिम राहत मिली है। दीपावली से ठीक पहले घर के ऊपर छत का संकट झेल रहे ये लोग अब सिर्फ एक मांग कर रहे हैं — जमीन का उचित मुआवजा और सुनवाई का निष्पक्ष मौका।
न्यू सांगानेर रोड पर चल रही कार्रवाई के पीछे एक लंबा कानूनी और प्रशासनिक इतिहास है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने हाईकोर्ट के आदेशों के आधार पर सोल्जर से गुर्जर की थड़ी तक करीब 24 किलोमीटर हिस्से में 100 फीट सड़क सीमा चिह्नित की है। डिमार्केशन के बाद 210 नोटिस दिए गए और 5 अक्टूबर को रोड साइड के चबूतरे, सीढ़ियां और अन्य निर्माण ध्वस्त किए गए। यह मामला जुलाई 2021 में शुरू हुआ था, जब हाईकोर्ट ने पहली बार अतिक्रमण चिह्नित कर हटाने के निर्देश दिए थे। तब से लेकर अब तक हाईकोर्ट कई बार जेडीए से एक्शन प्लान मांग चुका है, और अगस्त 2026 में अदालत ने अतिक्रमण हटाने के लिए दो महीने का समय दिया था। इसी कड़ी में 27 सितंबर को डिमार्केशन और 5 अक्टूबर को बुलडोजर कार्रवाई हुई — और अब 14 अक्टूबर को अदालत ने ही कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है।
घर भी टूट रहा, रोजगार भी छिन रहा — प्रभावित परिवारों की आपबीती
न्यू सांगानेर रोड पर अपने मकान का हिस्सा खुद तुड़वा रही महिला रामपाली देवी की कहानी यहां के दर्द को पूरी तरह बयां करती है। उनके पास करीब 40 साल पुराना पट्टा है। परिवार ने बाजार से पैसा उधार लेकर और उस पर ब्याज चुकाकर यह घर बनाया था। घर की एक-एक ईंट में परिवार की मेहनत लगी है, लेकिन आज वही आशियाना अपने हाथों से तोड़ना पड़ रहा है। मकान का हिस्सा तुड़वाने में करीब 40 हजार रुपये का खर्च भी उन्हीं को उठाना पड़ रहा है। घर के नीचे रोजगार के लिए बनाई गई दुकान भी सड़क सीमा की जद में आ रही है — ऐसे में घर भी टूट रहा है और रोजगार भी छिन रहा है।
स्थानीय महिला संतोष टिक्कीवाल के तीन पोते-पोतियां हैं। मकान के ऊपर परिवार रहता था और नीचे बेटा दुकान चलाकर खर्च उठाता था। अब घर और दुकान दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उनका आरोप है कि जब मकान बनाए जा रहे थे, तब निर्माण होने दिया गया — अब उसी निर्माण को अवैध बताकर तोड़ा जा रहा है, जबकि उनके पास सोसायटी का पट्टा भी मौजूद है। एक अन्य बुजुर्ग महिला विमला ने बताया कि उनके मकान का करीब 5 से 6 फीट हिस्सा टूटने की स्थिति में है। छह महीने के बच्चे की मां अल्का को समझ नहीं आ रहा कि आधे से ज्यादा मकान प्रभावित होने के बाद बच्चे को लेकर कहां जाएंगी। स्थानीय निवासी अनीता अग्रवाल के घर पर जेडीए ने लाल निशान लगाया है — करीब 9 फीट जमीन प्रभावित होने की बात कही जा रही है। घर की जिस रसोई में वह रोज खाना बनाती हैं, उसी को तोड़ना पड़ा। नेहा सैनी ने बताया कि इस इलाके में पहले कृषि भूमि हुआ करती थी — उनके दादा-परदादा यहां खेती करते थे, और जयपुर के विस्तार के साथ करीब 40 साल पहले यहां दुकानें और निर्माण विकसित होने लगे। अब सड़क चौड़ीकरण के नाम पर निर्माण हटाया जा रहा है, लेकिन मुआवजा नहीं मिल रहा। अनीता ने बताया कि पहले मोहल्ले की महिलाएं एक जगह जुटती थीं तो तीज-त्योहार की खुशियों की बातें होती थीं — अब वही महिलाएं अपने घर-दुकानों को बचाने की चिंता में इकट्ठा होती हैं। डायमंड कटर से निर्माण हटाने के दौरान सुरक्षा की चिंता भी सामने आई है — स्थानीय लोगों के अनुसार, एक परिवार के दो सदस्यों पर बिल्डिंग मेटेरियल गिर गया था, जिन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।
“विकास से इनकार नहीं, मुआवजा तो मिले” — व्यापारियों और निवासियों की मांग
स्थानीय निवासी राजेंद्र राजोरिया का कहना है कि वे सड़क चौड़ीकरण या विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं — उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि सड़क के लिए ली जा रही जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए। कई जगह तीन मंजिला तक बने मकानों का हिस्सा टूट रहा है। लोगों की मांग है कि सरकार जमीन के बदले जमीन दे या जमीन की डीएलसी दर के अनुसार मुआवजा दे, ताकि वे परिवार के लिए दूसरी जगह का इंतजाम कर सकें।
न्यू सांगानेर रोड व्यापार मंडल के संरक्षक ओम राजोरिया ने जेडीए की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि व्यापारियों का पक्ष सुने बिना कार्रवाई की जा रही है और प्रभावित लोगों को केवल छह दिन का नोटिस दिया गया। कई व्यापारियों के पास दुकान की रजिस्ट्री, साइट प्लान और यूडी टैक्स की रसीदें मौजूद हैं। उनका सीधा सवाल है — यदि निर्माण पूरी तरह अवैध था तो उस पर टैक्स क्यों वसूला गया? नेहा सैनी नाम की निवासी ने भी यही सवाल उठाया कि अगर निर्माण अवैध था तो उस पर सालों से टैक्स क्यों लिया गया? प्रभावित लोगों ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन व्यापक राहत नहीं मिल सकी — हालांकि हाल में सुप्रीम कोर्ट से कुछ लोगों को मिली सीमित अवधि की राहत से सामान हटाने का समय जरूर मिला है। इस मामले में जेडीए को कुल 124 आपत्तियां मिली हैं — इनमें से 89 आपत्तियां नगर निगम को भेजी गई हैं और 35 मामले जेडीए की प्रवर्तन शाखा के पास हैं। सुनवाई के दौरान जेडीए ने आपत्तियों की जांच और शेष हिस्से में कार्रवाई के लिए समय मांगा था। प्रभावितों का आग्रह है कि त्योहारों के सीजन से ठीक पहले पहले दस्तावेजों, नक्शों और आपत्तियों की स्थिति साफ की जाए, और मुआवजे-पुनर्वास की व्यवस्था के बिना घरों का हिस्सा न तोड़ा जाए।
न्यू सांगानेर रोड चौड़ीकरण विवाद: पूरी टाइमलाइन एक नजर में
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 30 जुलाई 2021 | हाईकोर्ट ने सड़क के अतिक्रमण चिह्नित कर हटाने के निर्देश जेडीए को दिए |
| 29 अक्टूबर 2021 | हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क की चौड़ाई अदालत ने तय नहीं की; जेडीए अपने रिकॉर्ड के आधार पर सीमांकन करे |
| 19 मार्च 2024 | हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जेडीए ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया तेज की |
| 29 अप्रैल 2024 | जेडीए ने करीब 125 लोगों को धारा 72 के तहत नोटिस दिए |
| 21 जनवरी 2025 | हाईकोर्ट ने जेडीए से सड़क निर्माण और अतिक्रमण हटाने का एक्शन प्लान मांगा |
| 18 मार्च 2025 | सड़क की एलाइनमेंट बदलने का फैसला लिया गया |
| 15 जुलाई 2025 | जेडीए की बीपीसी ने बदली हुई एलाइनमेंट और लेआउट को मंजूरी दी |
| 17 फरवरी 2026 | सोल्जर से गुर्जर की थड़ी तक अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट ने सरकार, निगम और जेडीए को नोटिस दिए |
| 7 अगस्त 2026 | हाईकोर्ट ने सोल्जर-गुर्जर की थड़ी के 24 किलोमीटर हिस्से से अतिक्रमण हटाने को जेडीए को दो महीने का समय दिया |
| 27 सितंबर 2026 | जेडीए की ओर से डिमार्केशन; 100 फीट सड़क सीमा में 210 नोटिस दिए गए |
| 5 अक्टूबर 2026 | जेडीए ने सोल्जर-गुर्जर की थड़ी वाले हिस्से में कार्रवाई शुरू की |
| 14 अक्टूबर 2026 | हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक कार्रवाई स्थगित की; प्रभावितों को अंतरिम राहत |
हाईकोर्ट की अगली सुनवाई तक कार्रवाई स्थगित — क्या मिली राहत?
न्यू सांगानेर रोड पर फिलहाल 100 फीट सड़क सीमा में आ रहे निर्माण हटाने की कार्रवाई के बीच प्रभावित लोग खुद अपने घर और दुकानें तोड़ रहे हैं। हालांकि, राजस्थान हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक जेडीए की कार्रवाई स्थगित कर दी है। इससे प्रभावित परिवारों और व्यापारियों को अंतरिम राहत तो मिली है, लेकिन उनकी चिंता अभी खत्म नहीं हुई है।
कुछ लोगों ने अपने मकानों के बाहर अदालत से मिले स्थगन आदेशों से जुड़े नोटिस भी चस्पा कर रखे हैं। व्यापार मंडल के अनुसार, कुछ लोगों को वर्ष 2004 में पिंक ऑपरेशन के दौरान स्थगन आदेश मिले थे, जबकि हाल में सुप्रीम कोर्ट से कुछ लोगों को मिली राहत सीमित अवधि की है — इससे लोगों को सामान हटाने का समय तो मिल सकता है, लेकिन पूरे मामले का समाधान नहीं हुआ है। प्रभावितों की मांग है कि कार्रवाई से पहले सभी संबंधित आदेशों, दस्तावेजों और आपत्तियों की स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि किसी को अनावश्यक नुकसान न हो। जेडीए के पुलिस उपाधीक्षक (प्रवर्तन शाखा) इस्लाम खान के अनुसार, डिमार्केशन के बाद 210 नोटिस दिए गए थे और 5 अक्टूबर को रोड साइड के अतिक्रमण हटाए गए थे; आपत्तियों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
प्रभावित लोगों के लिए आगे का रास्ता: ये बातें जरूर ध्यान रखें
- आपत्ति दर्ज कराएं: जेडीए को अब तक 124 आपत्तियां मिली हैं। यदि आपका मकान या दुकान प्रभावित हो रहा है तो अपनी आपत्ति संबंधित जोन कार्यालय में लिखित में जरूर दर्ज कराएं और उसकी पावती संभालकर रखें।
- दस्तावेज संभालकर रखें: पट्टा, रजिस्ट्री, साइट प्लान, यूडी टैक्स की रसीदें और बिजली-पानी के बिल — ये सभी दस्तावेज मुआवजे के दावे में काम आएंगे।
- कानूनी सलाह लें: कुछ प्रभावितों को अदालत से स्थगन आदेश मिले हैं। अपने मामले की स्थिति जानने के लिए वकील से सलाह लेना बेहतर होगा।
- सुरक्षा का ध्यान रखें: घर तोड़ते समय डायमंड कटर जैसे उपकरणों से आसपास के मकानों को नुकसान पहुंचने का खतरा है — दो लोगों पर मलबा गिरने की घटना भी सामने आ चुकी है।
न्यू सांगानेर रोड चौड़ीकरण का यह मामला अब सिर्फ सड़क की चौड़ाई का नहीं, बल्कि विकास और विस्थापन के बीच संतुलन का सवाल बन गया है। हाईकोर्ट की अगली सुनवाई तक सभी की नजरें टिकी हैं — क्या प्रभावितों को उचित मुआवजा मिलेगा? क्या उनकी आपत्तियों पर निष्पक्ष सुनवाई होगी? इन सवालों के जवाब का इंतजार अभी बाकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: न्यू सांगानेर रोड चौड़ीकरण में कितने फीट सड़क सीमा तय है?
उत्तर: जेडीए की ओर से 100 फीट सड़क सीमा में आ रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। इसी सीमा के आधार पर 210 नोटिस दिए गए थे।
प्रश्न 2: क्या न्यू सांगानेर रोड पर जेडीए की कार्रवाई पर रोक लगी है?
उत्तर: हां, राजस्थान हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक जेडीए की कार्रवाई स्थगित कर दी है। इससे प्रभावित परिवारों को अंतरिम राहत मिली है, लेकिन स्थायी समाधान अगली सुनवाई के बाद ही होगा।
प्रश्न 3: प्रभावित लोगों ने जेडीए के सामने कितनी आपत्तियां दर्ज की हैं?
उत्तर: जेडीए को कुल 124 आपत्तियां मिली हैं — इनमें से 89 आपत्तियां नगर निगम को भेजी गई हैं और 35 मामले जेडीए की प्रवर्तन शाखा के पास लंबित हैं।
प्रश्न 4: न्यू सांगानेर रोड के प्रभावित लोग क्या मांग कर रहे हैं?
उत्तर: प्रभावित लोग विकास का विरोध नहीं कर रहे। उनकी मांग है कि सड़क के लिए ली जा रही जमीन का उचित मुआवजा मिले — या तो जमीन के बदले जमीन, या डीएलसी दर के अनुसार मुआवजा — और कार्रवाई से पहले उनकी आपत्तियों की निष्पक्ष सुनवाई हो।
स्रोत: ETV Bharat