राजस्थान के सैकड़ों प्लॉट खरीदारों के लिए 14 अक्टूबर 2026 का दिन बड़ी खबर लेकर आया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हेडक्वार्टर्स इन्वेस्टिगेशन यूनिट-II, नई दिल्ली ने ओशन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड (OSBPL) के मामले में लगभग 136.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत की गई है।
इससे पहले जब्त 51.57 करोड़ रुपये को जोड़ दिया जाए, तो ओशन सेवन बिल्डटेक मामले में कुल जब्ती अब लगभग 188 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। कंपनी के प्रमोटर स्वराज सिंह यादव, उनकी पत्नी सुनीता स्वराज और कंपनी के पांच बैंक खातों की रकम भी इस कार्रवाई की जद में आई है।
यह उन हजारों खरीदारों की कहानी है जिन्होंने जयपुर और कोटपूतली-बहरोड़ में अपने घर या प्लॉट का सपना देखा था — पैसे चुकाए, कई ने रजिस्ट्री भी कराई — लेकिन आज तक उन्हें न प्लॉट का कब्जा मिला, न रकम वापस हुई।
136 करोड़ की जब्ती में क्या-क्या शामिल है?
ताजा कार्रवाई में जब्त संपत्ति में जयपुर के बिलोंची गांव और कोटपूतली-बहरोड़ की जमीन, गुरुग्राम सेक्टर-102 का एक रिहायशी प्लॉट, और कंपनी व प्रमोटर स्वराज सिंह यादव व उनकी पत्नी के पांच बैंक खातों की रकम (करीब 69.06 लाख रुपये) शामिल है।
गौर करने वाली बात: एफआईआर के बाद भी आरोपियों ने लगभग 39 एकड़ जमीन सहयोगियों के नाम कर दी थी — ED ने वो भी जब्त कर ली है।
ओशन सेवन बिल्डटेक के चार प्रोजेक्ट: 118 करोड़ की वसूली कैसे हुई
ED की जांच में कंपनी के काम करने के तरीके का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दिसंबर 2006 से मार्च 2015 के दौरान ओशन सेवन बिल्डटेक ने राजस्थान में अपने चार प्रोजेक्ट्स के लिए प्लॉट खरीदारों से 118 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए थे:
| प्रोजेक्ट का नाम | स्थान |
|---|---|
| एम्बर गार्डन | बिलोंची गांव, जयपुर |
| कोट रेजिडेंसी | कोटपूतली-बहरोड़ |
| कोट फार्म्स | कोटपूतली-बहरोड़ |
| कोट इंडस्ट्रियल एस्टेट | कोटपूतली-बहरोड़ |
खरीदारों से यह पैसा इस वादे पर लिया गया था कि प्रोजेक्ट विकसित होंगे और आवंटित प्लॉट का कब्जा तीन से चार साल के भीतर सौंप दिया जाएगा। लेकिन हकीकत कुछ और थी।
जांच में सामने आया कि ‘एम्बर गार्डन’ में खरीदारों से पैसे जमा करने का काम दिसंबर 2006 में ही शुरू हो गया था, जबकि कंपनी ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में प्रोजेक्ट के नक्शे के लिए आवेदन तक नहीं किया था। यानी प्लान कागज पर भी नहीं था, और पैसे वसूलने का सिलसिला शुरू हो चुका था।
JDA और राजस्व अधिकारियों की साइट जांच से पता चला कि ये प्रोजेक्ट कभी विकसित ही नहीं किए गए — साइटों का ज्यादातर हिस्सा आज भी खाली पड़ा है। जिन खरीदारों ने पूरी कीमत चुका दी थी, और कई मामलों में रजिस्टर्ड कन्वेयंस डीड और कब्जा पत्र भी हासिल कर लिए थे, उन्हें कभी कब्जा नहीं दिया गया। उनके प्लॉट का सीमांकन तक कभी नहीं किया गया।
पैसा गया कहां?
खरीदारों के पैसे का इस्तेमाल प्रोजेक्ट डेवलपमेंट में करने के बजाय ओशन सेवन बिल्डटेक ने उसे दूसरी जगहों पर लगा दिया। ED के मुताबिक, फंड्स से गुरुग्राम में कंपनी के लिए ऑफिस की जगह खरीदी गई और दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए एडवांस भुगतान किया गया। यानी खरीदारों की मेहनत की कमाई से कंपनी ने अपने दूसरे व्यावसायिक हित साधे, जबकि जिन प्रोजेक्ट्स के नाम पर पैसा लिया गया था, वे जमीन पर कभी उतरे ही नहीं।
ओशन सेवन बिल्डटेक पर ED की जांच कैसे शुरू हुई
इस मामले की जड़ में कई एफआईआर हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा, हरियाणा पुलिस और राजस्थान पुलिस ने ओशन सेवन बिल्डटेक, उसके प्रमोटर स्वराज सिंह यादव और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश की एफआईआर दर्ज की थीं। इन्हीं के आधार पर ED ने PMLA के तहत जांच शुरू की।
कार्रवाई का क्रम:
- 9 जनवरी 2026: ED ने पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली की विशेष अदालत (PMLA) में अभियोजन शिकायत दायर की। इससे पहले लगभग 51.57 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी थी।
- 14 अक्टूबर 2026: ताजा कार्रवाई में लगभग 136.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त। कुल जब्ती अब करीब 188 करोड़ रुपये।
खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है?
PMLA के तहत जब्त संपत्तियां सीधे खरीदारों को वापस नहीं मिलतीं, लेकिन उनके पास ये रास्ते हैं:
- अदालत में दावा: PMLA की विशेष अदालत में संपत्ति के निपटान के बाद पीड़ितों के दावों पर विचार हो सकता है।
- RERA में शिकायत: रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स से जुड़े विवादों में RERA एक प्रभावी मंच है।
- पुलिस शिकायत: जिन्होंने अब तक शिकायत दर्ज नहीं की है, वे संबंधित थाने या आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दे सकते हैं।
अगर आपने भी ओशन सेवन बिल्डटेक के किसी प्रोजेक्ट में पैसा लगाया था, तो अपने सभी दस्तावेज — भुगतान की रसीदें, आवंटन पत्र, रजिस्ट्री के कागज — संभालकर रखें। ये किसी भी कानूनी कार्रवाई में आपकी सबसे बड़ी ताकत होंगे।
प्रॉपर्टी खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
- प्रोजेक्ट का RERA रजिस्ट्रेशन जरूर जांचें
- डेवलपर का ट्रैक रिकॉर्ड और पुराने प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी देखें
- कभी भी पूरी रकम एकमुश्त न दें; निर्माण के चरणों में भुगतान करें
- सभी लेन-देन के लिखित सबूत रखें
राजस्थान में ठगी के ऐसे मामलों पर पहले भी कार्रवाई होती रही है। हाल ही में जयपुर में डिजिटल कॉइन के नाम पर 100 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया था, वहीं साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस ने नौ महीनों में 574 करोड़ रुपये की ठगी के मामलों पर बड़ी कार्रवाई की है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: ओशन सेवन बिल्डटेक मामले में ED ने कितनी संपत्ति जब्त की है?
जवाब: ताजा कार्रवाई में 136.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त हुई है; पहले की 51.57 करोड़ रुपये मिलाकर कुल 188 करोड़ हो गया है।
सवाल: ये प्रोजेक्ट्स राजस्थान में कहां थे?
जवाब: चारों प्रोजेक्ट राजस्थान में थे — जयपुर के बिलोंची गांव में ‘एम्बर गार्डन’ और कोटपूतली-बहरोड़ में ‘कोट रेजिडेंसी’, ‘कोट फार्म्स’ और ‘कोट इंडस्ट्रियल एस्टेट’।
सवाल: खरीदारों से कितनी रकम वसूली गई थी?
जवाब: ED की जांच के मुताबिक, दिसंबर 2006 से मार्च 2015 के बीच कंपनी ने इन चार प्रोजेक्ट्स के लिए प्लॉट खरीदारों से 118 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए थे।
सवाल: क्या जब्त संपत्ति खरीदारों को वापस मिलेगी?
जवाब: PMLA के तहत जब्त संपत्ति सीधे खरीदारों को नहीं मिलती, लेकिन अदालत की प्रक्रिया के बाद पीड़ितों के दावों पर विचार हो सकता है। खरीदार RERA शिकायत या पुलिस शिकायत के जरिए भी अपना हक मांग सकते हैं।
यह खबर IANS की रिपोर्ट पर आधारित है। मामले की जांच ED द्वारा जारी है और अदालत में विचाराधीन है।