जयपुर लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा: वैष्णव-भजनलाल का कांग्रेस पर हमला, गहलोत को खुली चुनौती

जयपुर। गुरुवार, 5 नवंबर को राजधानी जयपुर में भाजपा की जयपुर लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा ने शहर की सियासत को गरमा दिया। रामलीला मैदान में हुई बड़ी जनसभा के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एक साथ सड़कों पर उतरे और करीब सवा किलोमीटर लंबी पदयात्रा में शामिल हुए। इस दौरान दोनों नेताओं ने SIR, ईवीएम और अग्निवीर पर कांग्रेस पर तीखे हमले बोले और मुख्यमंत्री ने गहलोत को खुली चुनौती दे डाली।

रामलीला मैदान से त्रिपोलिया गेट तक: जयपुर लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा का पूरा कार्यक्रम

जयपुर लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा की शुरुआत रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा से हुई। सभा में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया ने कार्यकर्ताओं और आमजन को संबोधित किया। इसके बाद पदयात्रा रामलीला मैदान से शुरू होकर चौड़ा रास्ता होते हुए त्रिपोलिया गेट तक पहुंची। यह रास्ता करीब सवा किलोमीटर लंबा था और इसे सांकेतिक रखा गया था, ताकि व्यापारियों और आम लोगों को कम परेशानी हो।

पदयात्रा में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बागड़ी, संगठन महामंत्री अजय कुमार, कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, पार्टी पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की संयोजक जयपुर सांसद मंजू शर्मा थीं।

दिन की शुरुआत में वैष्णव गोविंददेवजी मंदिर गए, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे मुख्यमंत्री से उनके आवास पर मिले और फिर सभा में पहुंचे।

सीएम भजनलाल का गहलोत पर सीधा हमला: ‘झूठ है तो साबित करो’

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस पर सीधा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने जोधपुर में गहलोत को लेकर दिए अपने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उनके आरोपों से कांग्रेसी तिलमिला गए हैं। मुख्यमंत्री ने चुनौती दी कि यदि उनके लगाए आरोप गलत हैं तो कांग्रेस उन्हें साबित करके दिखाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अभी तो एक बार आरोप लगाया, इसी में तिलमिला गए। अभी तो आगे-आगे देखिए, होता है क्या… अभी तो और तिलमिलाओगे।”

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार के दौरान आरपीएससी सदस्य की नियुक्ति, ओएसडी की भाषा, तत्कालीन मंत्री के जेल जाने और जल जीवन मिशन में कथित घोटाले को लेकर सवाल उठाए।

कांग्रेस की अंदरूनी बयानबाजी पर भी मुख्यमंत्री ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी में होड़ मची है कि कौन क्या बोले और मुख्यमंत्री उस पर जवाब दें, ताकि उसका राजनीतिक कद बढ़ जाए। लेकिन राजनीतिक कद बयान देने से नहीं, जनता के बीच जाकर काम करने से बढ़ता है। सीएम ने कांग्रेस को परिवारवाद की पार्टी बताते हुए कहा कि 34 महीने बनाम पांच साल के कार्यकाल का हिसाब भी जनता के सामने रखा जाना चाहिए।

वैष्णव ने SIR और EVM पर कांग्रेस को घेरा

सभा में केंद्रीय रेल और सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कांग्रेस पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस SIR को लेकर झूठ फैलाकर अराजकता पैदा करना चाहती है। वैष्णव ने सवाल किया कि क्या यह पहला SIR है? मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया पहले भी कई बार होती रही है और SIR पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए जरूरी है।

ईवीएम को लेकर भी रेल मंत्री ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ईवीएम कौन लेकर आया था? कांग्रेस ही ईवीएम लेकर आई थी। ईवीएम पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को चुनाव परिणामों के समय अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी को संसद में आकर बहस करने की चुनौती भी दी और कहा कि चर्चा सोशल मीडिया पर नहीं, सदन में होनी चाहिए।

अग्निवीर योजना पर वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस शुरुआत से ही इस योजना पर सवाल उठाती रही है, जबकि इसमें दो साल का एक्सटेंशन दिए जाने से युवाओं में उत्साह है।

अपने संबोधन में वैष्णव ने जयपुर से अपने जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैं इसी धरती का बेटा हूं। कभी दामाद तो कभी फूफा बना देते हैं, लेकिन मैं नाराज फूफा नहीं हूं। मैं तो खुश हूं कि जयपुर से रिश्ता बन गया है।”

SIR क्या है और जयपुर में यह मुद्दा क्यों गरमाया

SIR यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची की गहन जांच करके फर्जी, डुप्लीकेट या अयोग्य नाम हटाए जाते हैं और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। भाजपा का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए है, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि इसके जरिए मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।

इसी विवाद के जवाब में भाजपा ने देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है। राजस्थान में इस अभियान की शुरुआत 30 अक्टूबर को कोटा से हुई थी। इसके बाद 3 नवंबर को जोधपुर में भी इसी अभियान के तहत पदयात्रा निकाली गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गांधी मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। जयपुर की 5 नवंबर की पदयात्रा इसी कड़ी की तीसरी बड़ी कड़ी थी, जिसमें पहली बार केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव भी शामिल हुए।

जयपुर लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा: मुख्य तथ्य एक नजर में

तथ्य विवरण
तारीख 5 नवंबर 2026, गुरुवार
स्थान रामलीला मैदान, जयपुर
रूट रामलीला मैदान — चौड़ा रास्ता — त्रिपोलिया गेट (करीब 1.25 किमी)
मुख्य नेता अश्विनी वैष्णव, भजनलाल शर्मा, मदन राठौड़, संजय भाटिया
भीड़ का लक्ष्य 10 हजार से अधिक लोग
अभियान लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ
मुख्य मुद्दे SIR, EVM, अग्निवीर, गहलोत पर आरोप
कार्यक्रम संयोजक जयपुर सांसद मंजू शर्मा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. जयपुर लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा कब और कहां निकली? 5 नवंबर 2026 को निकली। शुरुआत रामलीला मैदान में जनसभा से हुई, फिर पदयात्रा चौड़ा रास्ता होते हुए त्रिपोलिया गेट तक पहुंची।

2. जयपुर लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा में कौन-कौन शामिल हुआ? केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया, उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा और कई मंत्री व जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

3. पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था? भाजपा के अनुसार, यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कथित हमलों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा थी।

4. सीएम भजनलाल शर्मा ने गहलोत को क्या चुनौती दी? मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर उनके लगाए आरोप गलत हैं तो कांग्रेस उन्हें साबित करके दिखाए। उन्होंने आरपीएससी सदस्य की नियुक्ति, ओएसडी की भाषा, तत्कालीन मंत्री के जेल जाने और जल जीवन मिशन में कथित घोटाले को लेकर सवाल उठाए।

डिस्क्लेमर: इस लेख की जानकारी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। नेताओं के बयानों की अंतिम पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से ही हो सकती है।

स्रोत: ETV Bharat Rajasthan

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