जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट: 2 मजदूरों की मौत, 4 घायल

उत्तर प्रदेश के चंदौली से आया 19 साल का रजनीश और मध्य प्रदेश के रीवा की 45 साल की सरस्वती — दोनों जयपुर के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में सोने की चेन बनाने वाली एक फैक्ट्री में रोज़ी-रोटी कमाते थे। गुरुवार की दोपहर को जब फैक्ट्री की भट्टी में ज़ोरदार विस्फोट हुआ, तो धुआं इतनी तेज़ी से फैला कि अंदर काम कर रहे मज़दूरों को बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिला। इस जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट में महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान रजनीश और सरस्वती ने दम तोड़ दिया, जबकि चार अन्य मज़दूर अब भी अस्पताल में ज़िंदगी की जंग लड़ रहे हैं, जिनमें से दो की हालत नाज़ुक बताई जा रही है।

जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट: गुरुवार दोपहर एक बजे क्या हुआ

समाचार एजेंसी भाषा (पीटीआई) की रिपोर्ट के मुताबिक, जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट गुरुवार दोपहर करीब एक बजे सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित आइडियल फिस्कल सर्विसेज लिमिटेड नाम की फैक्ट्री में हुआ। यह फैक्ट्री सोने की चेन बनाने का काम करती है। हादसे के वक्त फैक्ट्री में करीब 15 लोग काम कर रहे थे।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सोना गलाने वाली भट्टी में अचानक ज़ोरदार विस्फोट हुआ, जिसके बाद आग फैल गई और पूरे परिसर में घना धुआं भर गया। धुआं इतना घना था कि मुख्य द्वार से अंदर पहुंचना भी मुश्किल हो गया। जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद अंदर फंसे मज़दूरों को निकालने के लिए जेसीबी मशीन से फैक्ट्री की दीवार तोड़नी पड़ी, तब जाकर रास्ता बन पाया।

पुलिस और दमकल की टीमें छहों मज़दूरों को महात्मा गांधी अस्पताल ले गईं, जहां डॉक्टरों ने दो को मृत घोषित कर दिया।

छह नाम, छह कहानियां

जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट की सबसे दर्दनाक बात यह है कि मारे गए और घायल हुए सभी छह मज़दूर प्रवासी हैं — कोई उत्तर प्रदेश से, कोई मध्य प्रदेश से, कोई पश्चिम बंगाल से।

स्थिति नाम उम्र निवासी
मृतक रजनीश 19 चंदौली, उत्तर प्रदेश
मृतक सरस्वती 45 रीवा, मध्य प्रदेश
घायल (गंभीर, ICU) बबोल 32 रीवा, मध्य प्रदेश
घायल (गंभीर, ICU) लालमोहन 52 मिदनापुर, पश्चिम बंगाल
घायल संदीप सिंह 19 दामोदरगढ़, मध्य प्रदेश
घायल अजयपाल 26 बरेली, उत्तर प्रदेश

डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ घायलों का रक्तचाप काफी कम था और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। दो घायल आईसीयू में भर्ती हैं। दोनों मृतकों के शव मॉर्च्यूरी में रखवाए गए हैं। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है; उनके जयपुर पहुंचने के बाद शवों का पोस्टमार्टम होगा।

सेंसर लॉक बना मौत का जाल

दैनिक नवज्योति की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैक्ट्री में आने-जाने वालों की तीन चरणों में जांच होती है, पूरे परिसर में सेंसर लॉक लगे हैं और आने-जाने का एक ही रास्ता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि आग लगने और धुआं फैलने के बाद फैक्ट्री के सेंसर लॉक अपने आप सक्रिय हो गए, जिससे अंदर मौजूद कर्मचारियों के लिए बाहर निकलना नामुमकिन हो गया। यानी सुरक्षा के नाम पर लगाए गए लॉक ही उस दिन सबसे बड़ा खतरा बन गए।

यही वह बिंदु है, जहां जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट की जांच का सबसे अहम सवाल टिका है — क्या फैक्ट्री में आपातकालीन निकास की पर्याप्त व्यवस्था थी? क्या आग लगने की स्थिति में लॉक खुलने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद थी?

जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट की जांच में क्या सामने आ रहा है

पुलिस के मुताबिक, जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी) और तकनीकी दलों की मदद से जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि भट्टी का तापमान निर्धारित सीमा से अधिक बढ़ गया था और स्वचालित नियंत्रण प्रणाली में तकनीकी खराबी के कारण विस्फोट हुआ होगा।

दैनिक नवज्योति के मुताबिक भी आशंका यही है — भट्टी का तापमान स्वचालित प्रणाली से नियंत्रित होता है, लेकिन इस बार तापमान अधिक बढ़ गया और भट्टी निर्धारित प्रक्रिया से बंद नहीं हुई। हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) के मुताबिक सभी छह घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया था, और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फैक्ट्री सुरक्षा के नियम क्या कहते हैं

कारखाना अधिनियम, 1948 के तहत हर फैक्ट्री मालिक की यह कानूनी ज़िम्मेदारी है कि कामगारों के लिए सुरक्षित कार्य-वातावरण सुनिश्चित किया जाए — अग्नि सुरक्षा के उपाय, आपातकालीन निकास द्वार, नियमित सुरक्षा ऑडिट और आपातकालीन प्रशिक्षण इसमें शामिल हैं।

मज़दूरों के लिए कुछ ज़रूरी बातें जानना बेहद ज़रूरी है:

आपातकालीन निकास जानें: जिस फैक्ट्री या इकाई में काम करते हैं, वहां आग या हादसे की स्थिति में बाहर निकलने के सभी रास्तों की जानकारी पहले से रखें।

सुरक्षा उपकरणों की मांग करें: अग्निशामक यंत्र, धुआं अलार्म और आपातकालीन लाइटिंग हर औद्योगिक इकाई में होनी चाहिए।

शिकायत का अधिकार: सुरक्षा मानकों का उल्लंघन दिखे तो राजस्थान के श्रम विभाग या फैक्ट्री निरीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

मुआवज़े का हक: कार्य के दौरान हुई दुर्घटना में कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत घायल या मृतक के परिजन मुआवज़े के हकदार होते हैं।

सीतापुरा का यह हादसा याद दिलाता है कि सुरक्षा नियम कागज़ों तक सीमित नहीं रहने चाहिए — उनकी कीमत मज़दूर अपनी जान देकर चुकाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: जयपुर में यह हादसा कहां हुआ?

जवाब: जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट सांगानेर सदर इलाके के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित आइडियल फिस्कल सर्विसेज लिमिटेड नाम की फैक्ट्री में हुआ, जहां सोने की चेन बनाने का काम होता है।

सवाल: हादसे में कितने लोग हताहत हुए?

जवाब: 19 वर्षीय रजनीश (चंदौली, यूपी) और 45 वर्षीय सरस्वती (रीवा, एमपी) की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हैं — दो आईसीयू में हैं।

सवाल: ब्लास्ट का कारण क्या माना जा रहा है?

जवाब: आशंका है कि भट्टी का तापमान सीमा से अधिक बढ़ गया था और स्वचालित नियंत्रण प्रणाली की खराबी से विस्फोट हुआ। एफएसएल जांच जारी है।

सवाल: मज़दूर अंदर कैसे फंस गए?

जवाब: जयपुर गोल्ड फैक्ट्री ब्लास्ट के वक्त फैक्ट्री के सेंसर लॉक सक्रिय हो गए और धुआं भरने से मुख्य द्वार से प्रवेश मुश्किल हो गया, इसलिए जेसीबी से दीवार तोड़कर मज़दूरों को बाहर निकाला गया।

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स्रोत: समाचार एजेंसी भाषा (पीटीआई), दैनिक नवज्योति

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