कभी-कभी एक हादसा हमें ये याद दिला जाता है कि लापरवाही की कीमत जान से चुकानी पड़ती है। बुधवार, 21 अक्टूबर की दोपहर प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गांव रेणंदा में भी ठीक ऐसा ही हुआ। पंचायत चुनाव की तैयारियों पर चर्चा के लिए इकट्ठा हुए करीब 150 लोग उस वक्त अफरा-तफरी में भागने लगे, जब तेज हवा से उखड़ता टेंट ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन से जा टकराया। लोहे के पाइपों में फैले करंट की चपेट में आकर दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 14 लोग गंभीर रूप से झुलस गए।
मृतकों की पहचान अर्जुन (57) और मोहन (45) के रूप में हुई है — अर्जुन डेमरीपाड़ा गांव के रहने वाले थे, जबकि मोहन रेणंदा के ही निवासी थे। दोनों का इलाज प्रतापगढ़ जिला अस्पताल में चल रहा था, लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और बाकी का इलाज जिला अस्पताल में ही जारी है। गांव में शोक का माहौल है, और हादसे ने एक साथ कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं — सबसे बड़ा सवाल ये कि हाईटेंशन लाइन के ठीक नीचे टेंट लगाने की इजाजत आखिर किसने दी?
दोपहर 2:30 बजे: तेज हवा ने एक मिनट में बदल दिया माहौल
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा दोपहर करीब 2:30 बजे हुआ। रेणंदा गांव में तिराबावजी मंदिर के पास पंचायत चुनाव के चौथे चरण की तैयारियों को लेकर कांग्रेस की एक बैठक बुलाई गई थी। बैठक शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट हुए थे कि मौसम ने करवट ली — अचानक तेज हवा चलने लगी और आयोजन स्थल पर लगा टेंट उखड़ने लगा।
ग्रामीणों ने बताया कि टेंट को संभालने के लिए कई लोग दौड़े और उसके लोहे के पाइप पकड़ लिए। लेकिन तभी टेंट ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गया। देखते ही देखते करंट पूरे टेंट के लोहे के ढांचे में फैल गया और पाइप पकड़े खड़े लोग झुलसने लगे। मौके पर अफरा-तफरी मच गई, लोग एक-दूसरे पर गिरते-पड़ते भागने लगे।
एक घायल के बयान के अनुसार, हवा तेज होते ही कुछ लोगों ने पाइप पकड़कर टेंट को जमीन से उठने से रोकने की कोशिश की थी। उसी दौरान पाइप बिजली की तार से जा लगा और कई लोग एक साथ करंट की चपेट में आ गए। हादसे के कुछ ही मिनट में पुलिस को सूचना दी गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया जाने लगा।
कौन-कौन झुलसा: घायलों की सूची और गंभीरता
हादसे में कुल 14 लोग घायल हुए हैं। घायलों के नाम इस प्रकार सामने आए हैं: छगन, विकास, कालू, किशन, लक्ष्मण, गोवर्धन, सुरेश, प्रकाश, शंकर, विजीया, कैलाश, धेरिया, शवजी और कालू। सभी को प्रतापगढ़ जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के अनुसार, इनमें तीन घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। बाकी घायलों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि झुलसे हुए मरीजों का उपचार प्रोटोकॉल के अनुसार चल रहा है और गंभीर मरीजों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यहां एक बात और ध्यान देने लायक है — बैठक में तीन गांवों के करीब 150 लोग मौजूद थे। अगर टेंट पूरी तरह गिरता या करंट और देर तक फैलता, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। मौजूद लोगों के समय पर भागने से बड़ा अनर्थ टल गया, लेकिन जिन दो परिवारों ने अपने लोगों को खोया, उनके लिए ये नुकसान अपूरणीय है।
हादसे के आंकड़े: एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
| हादसे की तारीख और समय | 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार), दोपहर ~2:30 बजे |
| स्थान | रेणंदा गांव, पीपलखूंट उपखंड, जिला प्रतापगढ़ |
| आयोजन | पंचायत चुनाव (चौथे चरण) को लेकर कांग्रेस की बैठक |
| उपस्थित लोग | करीब 150 (तीन गांवों से) |
| मौतें | 2 (अर्जुन, 57 — डेमरीपाड़ा; मोहन, 45 — रेणंदा) |
| घायल | 14 (तीन की हालत गंभीर) |
| हादसे का कारण | तेज हवा से टेंट उखड़ा, लोहे के पाइप हाईटेंशन लाइन से टकराए |
| अस्पताल | जिला चिकित्सालय, प्रतापगढ़ |
| दौरा करने वाले अधिकारी | एडीएम विजेश पंड्या, एसपी जयदेव सिहाग |
बैठक क्यों बुलाई गई थी: पंचायत चुनाव का चौथा चरण
ये बैठक पंचायत चुनाव-2026 के चौथे चरण की तैयारियों को लेकर बुलाई गई थी। रेणंदा गांव में तिराबावजी मंदिर के समीप आयोजन स्थल तैयार किया गया था, जहां भोजन की व्यवस्था भी रखी गई थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बैठक में कांग्रेस के घाटोल विधायक नानालाल के मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित था।
पंचायत चुनाव को लेकर इन दिनों पूरे प्रदेश में बैठकों और तैयारियों का दौर चल रहा है। प्रतापगढ़ सहित कई जिलों में पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए गांव-गांव बैठकें कर रही हैं। ऐसी ही एक बैठक रेणंदा में भी हो रही थी, जो देखते ही देखते मातम में बदल गई।
ग्रामीणों के गंभीर आरोप: “एंबुलेंस एक घंटे देर से आई”
हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बावजूद पीपलखूंट से कोई प्रशासनिक अधिकारी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचा। इससे भी ज्यादा गंभीर आरोप ये है कि एंबुलेंस पहुंचने में करीब एक घंटे की देरी हुई।
ग्रामीणों के अनुसार, देरी की वजह से कई घायलों को मोटरसाइकिलों पर लादकर प्रतापगढ़ जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ा। उनका कहना है कि अगर समय पर एम्बुलेंस और प्रशासनिक मदद मिलती, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं।
घटना के काफी समय बाद प्रतापगढ़ पुलिस, एडीएम विजेश पंड्या और एसपी जयदेव सिहाग जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने घायलों के उपचार और अस्पताल में की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली। लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा कम नहीं हुआ — उनका कहना है कि जब मदद सबसे ज्यादा जरूरी थी, तब प्रशासन गायब था।
सबसे बड़ा सवाल: हाईटेंशन लाइन के नीचे टेंट कैसे लगा?
इस हादसे ने बिजली सुरक्षा के नियमों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टेंट ठीक हाईटेंशन बिजली लाइन के नीचे लगाया गया था — ये अपने आप में एक बड़ी लापरवाही है। नियमों के अनुसार, हाईटेंशन लाइनों के नीचे या उसके निर्धारित सुरक्षा दायरे में कोई भी अस्थायी ढांचा, टेंट या भीड़-भाड़ वाला आयोजन नहीं किया जाना चाहिए।
यहां याद रखने लायक है कि राजस्थान में हाईटेंशन लाइन से जुड़े हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में करौली में करंट हादसे में एक 23 वर्षीय युवक की जान गई थी, तो अलवर के चिरखाना में चुनावी पोस्टर लगाते समय एक युवक हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर मौत का शिकार हुआ था। यानी ये कोई पहली घटना नहीं है — लेकिन फिर भी बिजली विभाग और आयोजकों की ओर से सावधानी नहीं बरती जा रही।
अब सवाल ये है कि इस हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या आयोजन के लिए बिजली लाइन की मौजूदगी की जांच की गई थी? क्या स्थानीय प्रशासन ने स्थल का निरीक्षण किया था? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं, और जब तक जवाब नहीं मिलते, रेणंदा जैसे हादसे दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा।
पुलिस की कार्रवाई और आगे क्या
पुलिस ने हादसे की जानकारी बुधवार को ही सार्वजनिक की। समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार, पुलिस ने बताया कि तेज हवा के कारण टेंट हिलने लगा और उसका लोहे का पाइप ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार के संपर्क में आ गया, जिससे दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य झुलस गए।
अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि हादसे को लेकर किसी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है या नहीं। आम तौर पर ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जांच होती है — आयोजक, टेंट लगाने वाले ठेकेदार और बिजली विभाग के संबंधित अधिकारी, तीनों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। पीड़ित परिवारों को मुआवजे की घोषणा होगी या नहीं, इस पर भी अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
प्रतापगढ़ जिले में पंचायत चुनाव का प्रचार जारी है और ऐसे में ये हादसा प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है — चुनावी बैठकों और रैलियों के आयोजनों में सुरक्षा मानकों का पालन कराना अब जरूरी हो गया है। पंचायत चुनाव को लेकर इन दिनों पूरे प्रदेश में बैठकों का दौर चल रहा है, और हर आयोजन स्थल पर बिजली लाइनों की जांच एक बुनियादी सावधानी होनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: प्रतापगढ़ टेंट करंट हादसा कब और कहां हुआ?
उत्तर: ये हादसा 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को दोपहर करीब 2:30 बजे प्रतापगढ़ जिले के पीपलखूंट उपखंड के रेणंदा गांव में हुआ। यहां तिराबावजी मंदिर के पास पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस की बैठक चल रही थी।
प्रश्न 2: हादसे में कितने लोगों की मौत हुई और कितने घायल हुए?
उत्तर: हादसे में 2 लोगों की मौत हुई — अर्जुन (57, डेमरीपाड़ा) और मोहन (45, रेणंदा)। वहीं 14 लोग घायल हुए हैं, जिनमें तीन की हालत गंभीर है। सभी का इलाज प्रतापगढ़ जिला अस्पताल में चल रहा है।
प्रश्न 3: हादसा कैसे हुआ?
उत्तर: बैठक के दौरान अचानक तेज हवा चलने से टेंट उखड़ने लगा। टेंट संभालने के लिए लोगों ने उसके लोहे के पाइप पकड़ लिए, लेकिन टेंट ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गया। करंट पाइपों में फैल गया और कई लोग झुलस गए।
प्रश्न 4: ग्रामीणों ने प्रशासन पर क्या आरोप लगाए हैं?
उत्तर: ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना के बावजूद पीपलखूंट से कोई प्रशासनिक अधिकारी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचा और एंबुलेंस करीब एक घंटे देर से आई। इस वजह से घायलों को मोटरसाइकिल से अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
1 thought on “प्रतापगढ़ टेंट करंट हादसा: कांग्रेस बैठक में हाईटेंशन लाइन से टकराया टेंट, 2 की मौत, 14 झुलसे”