कोटा नाव हादसा: दुर्गा विसर्जन में नाव पलटी, 4 युवक लापता — SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

कोटा नाव हादसा मंगलवार की शाम पूरे शहर को हिला गया। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए कोटड़ी नहर में उतरी एक छोटी सी लकड़ी की नाव बीच पानी में अचानक पलट गई, और उसमें सवार चार युवक नहर के तेज बहाव में बह गए। हादसे के कई घंटे बाद भी रात में टॉर्च और सर्चलाइट की रोशनी में गोताखोर और एसडीआरएफ के जवान नहर का हर कोना खंगाल रहे थे, लेकिन खबर लिखे जाने तक चारों का कोई सुराग नहीं मिला था।

ये सिर्फ एक नाव पलटने की कहानी नहीं है। इसके साथ गंभीर सवाल भी उठे हैं — क्या विसर्जन के लिए चुनी गई जगह सुरक्षित थी? और सबसे बड़ा सवाल, जिसे खुद राज्य के शिक्षा मंत्री ने उठाया है, कि जिस इलाके में विसर्जन हो रहा था, वहां तो विसर्जन की अनुमति ही नहीं थी।

कोटा नाव हादसा: मंगलवार शाम 5:30 बजे नहर के बीच क्या हुआ

मंगलवार, 20 अक्टूबर की शाम करीब साढ़े पांच बजे सात लोग एक छोटी नाव पर सवार होकर कोटा के नाग-नागिन मंदिर के पास कोटड़ी नहर के बीच तक पहुंचे थे। ये सभी विज्ञान नगर के संजय नगर इलाके के बताए जा रहे हैं और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए नहर पर आए थे।

विसर्जन की प्रक्रिया चल ही रही थी कि अचानक नाव का संतुलन बिगड़ गया। छोटी और लकड़ी की ये नाव बीच पानी में पलट गई और सातों लोग तेज बहाव में जा गिरे। नाव पलटते ही चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव की कोशिश शुरू की और तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया — कुछ रिपोर्टों के मुताबिक तीनों तैरकर खुद किनारे आ गए थे। लेकिन चार युवक बहाव में बह गए। लापता युवकों के नाम केशु, गोलू, सुरेश और राहुल बताए गए हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

रेस्क्यू ऑपरेशन: SDRF के 17 जवान, गोताखोर और सिविल डिफेंस रातभर तलाश में

सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू हो गया। नगर निगम की विशेष गोताखोर टीम, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर तैनात हैं। एसडीआरएफ के करीब 15 से 17 प्रशिक्षित जवान इस रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं।

बचाव कार्य आसान बनाने के लिए नहर में पानी की आवक तत्काल बंद करवा दी गई, ताकि तेज बहाव गोताखोरों के काम में बाधा न बने। इसके बावजूद जमा पानी और कीचड़ तलाश को मुश्किल बना रहा है।

कोटा के जिला कलेक्टर पीयूष समारिया और सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम खुद घटनास्थल पर पहुंचीं और ऑपरेशन का जायजा लिया। सिटी एसपी ने बताया कि नाव में सात लोग सवार थे, तीन सुरक्षित हैं और चार के फंसे होने की सूचना है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया।

एक नजर में: कोटा नाव हादसा विवरण
घटना दुर्गा विसर्जन के दौरान नाव पलटने से 4 युवक लापता
स्थान कोटड़ी नहर, नाग-नागिन मंदिर के पास, कोटा
समय 20 अक्टूबर 2026, शाम करीब 5:30 बजे
नाव में सवार कुल 7 लोग
लापता 4 युवक (नाम बताए गए: केशु, गोलू, सुरेश, राहुल)
सुरक्षित 3 लोग
बचाव टीमें एसडीआरएफ (15-17 जवान), गोताखोर टीम, सिविल डिफेंस

प्रतिबंधित इलाके में हो रहा था विसर्जन — मंत्री मदन दिलावर का बड़ा खुलासा

इस हादसे का सबसे चौंकाने वाला पहलू शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयान से सामने आया। जानकारी मिलते ही उन्होंने पंचायत चुनाव का प्रचार बीच में रोक दिया और सीधे घटनास्थल पहुंचे। वहां उन्होंने प्रशासन को हरसंभव संसाधन लगाने के निर्देश दिए।

मीडिया से बातचीत में दिलावर ने कहा कि सात लोग एक छोटी और लकड़ी की असुरक्षित नाव पर सवार थे, जो नहर के बीच में पलट गई। उन्होंने खुलासा किया कि हादसे वाला स्थान प्रतिबंधित इलाका था और वहां दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन की अनुमति नहीं थी। यानी नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित जगह पर विसर्जन हो रहा था — और इसकी कीमत चार परिवार चुका रहे हैं।

अब सवाल उठ रहा है कि प्रतिबंधित इलाके में विसर्जन हो कैसे रहा था और निगरानी की क्या व्यवस्था थी। इस मामले में प्रशासनिक जांच भी संभव है। उधर, कोटा से सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गहरा दुख जताते हुए प्रशासन को तत्परता से काम करने के निर्देश दिए हैं।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे — और विसर्जन में सुरक्षा के 6 नियम

धार्मिक आयोजनों के दौरान जल स्रोतों के पास लापरवाही पहले भी जानलेवा साबित हुई है। वैशाली में गांधी सेतु के पास ग्यारह लोगों से भरी नाव पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और एक लापता हो गया था। कोटा की घटना ने फिर वही सवाल खड़ा किया है — त्योहारों में जलाशयों के पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं होते?

कोटा में त्योहारी सीजन में धार्मिक आयोजनों की धूम रहती है — शहर का कोटा दशहरा मेला हर साल देशभर में चर्चा में रहता है। ऐसे में विसर्जन जैसे कार्यक्रमों की सुरक्षा पर भी उतना ही ध्यान जरूरी है। ये हादसा हम सभी के लिए सीख है — विसर्जन के लिए जाते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  1. निर्धारित घाट पर ही विसर्जन करें — प्रतिबंधित या अनजान इलाकों में कभी नहीं।
  2. नाव की हालत और क्षमता जांचें — क्षमता से ज्यादा लोग सवार न हों; कोटा में छोटी लकड़ी की नाव ही जानलेवा बनी।
  3. तैरना न जानने वाले गहरे पानी से दूर रहें।
  4. बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें।
  5. नाव में लाइफ जैकेट जरूर पहनें।
  6. आपात स्थिति में 112 पर तुरंत सूचित करें। कोटा नगर निगम की 2 नई फायर बाइकें भी आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक कदम हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: कोटा नाव हादसा कहां और कब हुआ?

जवाब: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 5:30 बजे कोटा के नाग-नागिन मंदिर के पास कोटड़ी नहर में। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान नाव पलट गई थी।

सवाल: हादसे में कितने लोग लापता हैं?

जवाब: नाव में सात लोग सवार थे — तीन सुरक्षित बचा लिए गए, चार युवक (केशु, गोलू, सुरेश, राहुल — बताए गए नाम) लापता हैं। एसडीआरएफ, गोताखोर और सिविल डिफेंस तलाश में जुटे हैं।

सवाल: क्या उस जगह विसर्जन की अनुमति थी?

जवाब: नहीं। मंत्री मदन दिलावर के मुताबिक हादसे वाला स्थान प्रतिबंधित इलाका था और वहां विसर्जन की अनुमति नहीं थी। नाव भी छोटी और असुरक्षित थी।

सवाल: रेस्क्यू में कौन-कौन शामिल है?

जवाब: एसडीआरएफ के 15-17 जवान, नगर निगम की गोताखोर टीम और सिविल डिफेंस। नहर की पानी आवक बंद है। कलेक्टर पीयूष समारिया और सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम मौके पर हैं।

नोट: ये खबर तीन स्वतंत्र स्रोतों (पीटीआई-भाषा/प्रभासाक्षी, इंडिया टीवी, ज़ूम न्यूज़) की रिपोर्टों पर आधारित है। रेस्क्यू ऑपरेशन अभी जारी है।

Leave a Comment