सांवलिया सेठ को 7 लाख की चांदी भेंट: दिल्ली कारोबारी ने चढ़ाए चांदी के 2 शोरूम

कभी आपने सुना है कि कोई व्यक्ति भगवान को अपना शोरूम ही चढ़ा दे? वो भी चांदी का बना हुआ, जिसकी कीमत सात लाख रुपये से ज्यादा हो! चित्तौड़गढ़ के मंडफिया में स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां दिल्ली के एक ज्वेलरी कारोबारी ने सांवलिया सेठ चांदी शोरूम के दो भव्य मॉडल भगवान के चरणों में अर्पित किए।

इन दोनों मॉडलों का कुल वजन 3 किलो 370 ग्राम है और राजस्थान सर्राफा संघ के प्रदेश महामंत्री किशन पिछोलिया के मुताबिक, मौजूदा चांदी के बाजार भाव के हिसाब से इनकी कीमत करीब 7 लाख 7 हजार 700 रुपये बनती है। चांदी के इन शोरूमों को देखकर मंदिर पहुंचे श्रद्धालु भी हैरान रह गए — बारीक कारीगरी से तैयार ये मॉडल असली इमारतों की हूबहू प्रतिकृति जैसे लग रहे हैं।

7 लाख की चांदी भेंट: सांवलिया सेठ चांदी शोरूम की खासियत

जो दो मॉडल मंदिर में भेंट किए गए हैं, वे कोई साधारण चांदी के टुकड़े नहीं हैं। इन्हें चार मंजिला इमारतों जैसी प्रतिकृति के रूप में तैयार किया गया है। दोनों मॉडलों पर संबंधित शोरूम के नाम भी अंकित हैं, ताकि साफ पता चले कि भेंट किस प्रतिष्ठान से जुड़ी है।

पहले मॉडल पर “गिरी जेवर महल काशी” लिखा है। यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी में महमूगंज इलाके में शुरू होने जा रहे नए ज्वेलरी शोरूम की प्रतिकृति है। दूसरे मॉडल पर “गिरी जेवर अरिहंत” नाम अंकित है, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खुलने वाले शोरूम को दर्शाता है।

मंदिर मंडल की ओर से इस अनोखी भेंट को सुरक्षित रखवाया गया और भगवान सांवरिया सेठ के चरणों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना भी संपन्न कराई गई।

काशी और रायपुर: दो शहरों में खुल रहे नए शोरूम

कारोबारी परिवार के दो नए ज्वेलरी शोरूम जल्द ही शुरू होने वाले हैं। वाराणसी के महमूगंज स्थित शोरूम का उद्घाटन 26 अक्टूबर को निर्धारित है, जबकि रायपुर स्थित शोरूम 1 नवंबर को खुलेगा।

परिवार ने नए प्रतिष्ठानों की खुशी में ही चांदी के मॉडल बनवाकर मंदिर में भेंट किए हैं। यानी कारोबार के विस्तार से पहले भगवान का आशीर्वाद लेना और फिर सफलता की खुशी में आभार जताना — यही इस परिवार की परंपरा है।

सालों पुरानी परंपरा: हर नए शोरूम पर चांदी की भेंट

श्री सांवलियाजी मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी प्रथम राहुल धाकड़ के अनुसार, गिरी जेवर महल से जुड़ा यह कारोबारी परिवार लंबे समय से भगवान सांवरा सेठ का भक्त है। परिवार के सदस्य नियमित रूप से मंदिर में दर्शन करने आते हैं।

राहुल धाकड़ ने बताया कि जब भी परिवार के कारोबार में कोई नई शुरुआत होती है या नया शोरूम खोला जाता है, तो उस प्रतिष्ठान की चांदी की प्रतिकृति बनवाई जाती है और फिर उसे मंदिर में भेंट किया जाता है। यह सिलसिला कई वर्षों से जारी है — इस बार भी दो नए शोरूमों की प्रतिकृतियां इसी परंपरा के तहत अर्पित की गई हैं।

सांवलिया सेठ चांदी शोरूम से पहले आईं अनोखी भेंटें

सांवलियाजी मंदिर में अनोखी भेंटों का यह कोई पहला मामला नहीं है। यहां भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर ऐसी-ऐसी चीजें चढ़ाते हैं, जिनके बारे में सुनकर हर कोई दंग रह जाता है:

भेंट वजन/विवरण कारण
चांदी का दिल और ट्यूबवेल — हार्ट ऑपरेशन सफल होने पर
चांदी की किताब — बेटे के 12वीं में 97% अंक लाने पर
चांदी की हथकड़ी 50 ग्राम मामले में हथकड़ी लगने के डर से बचने पर
चांदी की बंदूक और गोली 300 ग्राम मन्नत पूरी होने पर
इलेक्ट्रिक स्कूटर का मॉडल 1 किलो 119 ग्राम तीन भक्तों के स्कूटर व्यवसाय की सफलता पर
चांदी का मकान 500 ग्राम सालों पुरानी मन्नत पूरी होने पर
चांदी का पेट्रोल पंप — डूंगला के कारोबारी का पेट्रोल पंप खुलने पर
रावण का पुतला 141 ग्राम पुतला कारीगर की आस्था
चांदी की 19 सिल्लियां 11 किलो 400 ग्राम करीब 25.65 लाख रुपये मूल्य की भेंट
चांदी की पोशाक पौने 4 किलो सोने की पॉलिश के साथ

इन भेंटों को देखकर समझ आता है कि यहां आस्था का रंग कितना गहरा है।

व्यापारी भगवान को कारोबार में भागीदार क्यों मानते हैं?

मंडफिया स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर की ख्याति देश-विदेश में ऐसे धाम के रूप में है, जहां भक्त भगवान को अपने कारोबार का भागीदार मानते हैं। देशभर के बड़े व्यापारी और उद्योगपति अपने व्यापार में भगवान सांवरिया सेठ के लिए एक निश्चित हिस्सा निर्धारित करते हैं।

जब भी कोई नया काम शुरू करना होता है, व्यापारी पहले मंदिर पहुंचकर मन्नत मांगते हैं। मनचाही सफलता मिलने पर वे सोना, चांदी, नकदी और तरह-तरह के उपहार अर्पित करते हैं। मंदिर का दानपात्र खोले जाने पर कई बार करोड़ों रुपये की नकदी, किलो के हिसाब से सोना-चांदी, विदेशी मुद्रा और अनोखे उपहार निकलते हैं। श्रद्धालु कार, ट्रैक्टर, चांदी के रथ, सोने-चांदी के बर्तन और औजार तक भगवान को भेंट कर चुके हैं।

दिल्ली के आभूषण व्यवसायी की ओर से चांदी के दो शोरूम अर्पित किया जाना भी इसी अटूट आस्था का ताजा उदाहरण है।

मंडफिया मंदिर: इतिहास और दर्शन की जानकारी

श्री सांवलियाजी मंदिर चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गांव में स्थित है और भगवान कृष्ण के सांवरिया सेठ स्वरूप को समर्पित है। यह मंदिर मेवाड़ के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है — सालासर बालाजी लक्खी मेला जैसे आयोजनों की तरह ही यहां भी हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिनमें राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों के भक्त शामिल हैं।

अभी हाल ही में खाटूश्यामजी में पापांकुशा एकादशी पर मासिक मेला भी लगा था, जिसमें हजारों श्याम भक्त उमड़े थे।

मंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्शन की व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर परिसर में भक्तों के ठहरने और भोजन की भी व्यवस्था है।

अगर आप भी सांवरिया सेठ के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। चित्तौड़गढ़ शहर से मंदिर की दूरी करीब 40 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

स्रोत: अमर उजाला की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट से तथ्य सत्यापित।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सांवलिया सेठ मंदिर कहां स्थित है?
श्री सांवलियाजी मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गांव में स्थित है। यह भगवान कृष्ण के सांवरिया सेठ स्वरूप का प्रसिद्ध धाम है।

चांदी के शोरूम भेंट करने वाला कारोबारी कौन है?
दिल्ली का एक आभूषण व्यवसायी परिवार (गिरी जेवर महल) ने यह भेंट अर्पित की है। परिवार के दो नए ज्वेलरी शोरूम वाराणसी और रायपुर में खुलने जा रहे हैं।

चांदी के दोनों शोरूम मॉडलों की कीमत कितनी है?
राजस्थान सर्राफा संघ के प्रदेश महामंत्री किशन पिछोलिया के अनुसार, 3 किलो 370 ग्राम वजनी इन दोनों मॉडलों की कीमत मौजूदा चांदी के भाव पर करीब 7 लाख 7 हजार 700 रुपये है।

सांवलिया सेठ को व्यापारी अपना भागीदार क्यों मानते हैं?
मेवाड़ की परंपरा के अनुसार व्यापारी अपने कारोबार में भगवान सांवरिया सेठ का एक निश्चित हिस्सा निर्धारित करते हैं। नया काम शुरू करने से पहले मन्नत मांगते हैं और सफलता मिलने पर चढ़ावा अर्पित करते हैं।

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