जयपुर के 125 बाजारों में दीपावली कॉर्निवाल का बहिष्कार, इस बार नहीं सजेंगे बाजार

दीपावली की रात जयपुर के बाजारों का नजारा इस शहर की पहचान है — रोशनी से जगमगाती सड़कें, बाजारों में बने स्वागत द्वार, झालरों और लाइटिंग से सजे शोरूम। लेकिन इस बार जयपुर दीपावली कॉर्निवाल बहिष्कार की खबर ने इस रौनक पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। शहर के 125 व्यापार मंडलों ने दीपावली कॉर्निवाल-2026 का सामूहिक बहिष्कार करते हुए ऐलान किया है कि इस साल बाजारों में कोई सामूहिक सजावट नहीं होगी। यानी दीपावली पर गुलाबी नगरी के बाजार उस जगमगाहट के बिना नजर आ सकते हैं, जिसके लिए वे देशभर में मशहूर हैं।

यह फैसला 18 अक्टूबर को जयपुर व्यापार मंडल की आपात बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। नाराजगी की दो बड़ी वजहें हैं — नगर निगम की ओर से सजावट के लिए महज 11 दिन की निःशुल्क अनुमति, और सड़क चौड़ीकरण में टूटी दुकानों के पुनर्वास व मुआवजे पर अब तक कोई फैसला न होना।

जयपुर दीपावली कॉर्निवाल बहिष्कार की दो बड़ी वजहें

बैठक में व्यापारियों ने अपनी नाराजगी खुलकर रखी। पहली वजह है समय की कमी। नगर निगम ने इस बार बाजारों की सजावट के लिए सिर्फ 11 दिन की निःशुल्क अनुमति दी है। व्यापार मंडल का कहना है कि 11 दिन में सजावट की पूरी व्यवस्था खड़ी करना और फिर उसे सुरक्षित तरीके से हटाना व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं है।

बाजारों की सजावट एक दिन का काम नहीं होती। कारीगरों की व्यवस्था, स्वागत द्वार बनाना, बिजली की लाइटिंग, झालरें और सजावटी सामग्री जुटाने में हफ्तों लगते हैं। दीपावली के बाद सारी सजावट को सुरक्षित तरीके से हटाना भी उतना ही जरूरी है। कम समय में काम कराने से लागत बढ़ जाती है और अच्छे कारीगर भी नहीं मिलते।

दूसरी वजह पुरानी लेकिन गहरी है। सड़क चौड़ीकरण के दौरान जिन दुकानदारों की दुकानें टूटीं, उनके पुनर्वास और मुआवजे पर अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई। व्यापार मंडल का कहना है कि बिना पुनर्वास के सजावट की बात करना प्रभावित कारोबारियों के जख्मों पर नमक जैसा है।

18 अक्टूबर की आपात बैठक में क्या तय हुआ?

आपात बैठक 18 अक्टूबर को होटल सफारी में हुई, जिसकी अध्यक्षता व्यापार मंडल के संरक्षक पवन कुमार गोयल ने की। इसमें अध्यक्ष डॉ. ललित सांचोरा समेत वैशाली नगर, चित्रकूट, अजमेर रोड, मानसरोवर, न्यू सांगानेर, मालवीय नगर, झोटवाड़ा, कालवाड़ रोड और खातीपुरा जैसे शहर के तमाम बड़े बाजारों के व्यापार मंडलों के पदाधिकारी शामिल हुए।

बैठक में एक स्वर में कहा गया कि बाजारों की सामूहिक सजावट दीपावली की परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ी है, इसलिए इसके लिए पर्याप्त समय मिलना जरूरी है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए 125 व्यापार मंडलों ने इस साल सामूहिक सजावट न करने पर सहमति जताई।

बैठक का एक और अहम फैसला रहा — व्यापार मंडल अब दोनों मुद्दों पर मुख्यमंत्री तथा महापौर को ज्ञापन सौंपेगा। मांग है कि सजावट के लिए पर्याप्त अवधि की अनुमति दी जाए और सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास-मुआवजे पर स्पष्ट निर्णय किया जाए।

सड़क चौड़ीकरण का पुराना घाव अब भी हरा

बहिष्कार के फैसले को समझने के लिए सड़क चौड़ीकरण वाले मुद्दे को समझना जरूरी है। जयपुर में विकास परियोजनाओं के नाम पर सड़कों का चौड़ीकरण तेजी से हो रहा है। न्यू सांगानेर रोड पर हाईकोर्ट के निर्देश पर जेडीए की कार्रवाई इसका ताजा उदाहरण है, जिसमें 210 से ज्यादा मकान, दुकानें और शोरूम दायरे में आए थे।

ऐसी कार्रवाइयों में कई दुकानदारों की दुकानें पूरी तरह या आंशिक रूप से टूट गईं, लेकिन प्रभावित कारोबारियों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। एक तरफ दुकान टूटने का दर्द, दूसरी तरफ सजावट के लिए कम समय — इन दोनों के बीच फंसे व्यापारी अब सामूहिक विरोध के रास्ते पर हैं।

नाराजगी सिर्फ सजावट तक सीमित नहीं

गौर करने वाली बात है कि जयपुर के व्यापारियों की नाराजगी इन दिनों कई मोर्चों पर सामने आ रही है। कुछ दिन पहले परकोटा क्षेत्र में वन-वे यातायात व्यवस्था के विरोध में करीब 400 दुकानदारों ने प्रतिष्ठान बंद रखे थे, जिसके बाद व्यापारियों और पुलिस के बीच बैठक में टू-वे व्यवस्था जारी रखने पर सहमति बनी थी। त्योहारी सीजन के ऐन वक्त पर व्यापारी वर्ग प्रशासनिक फैसलों से खासा नाराज है, और अब यह नाराजगी बहिष्कार जैसे कड़े फैसलों में बदल रही है।

व्यापारियों की प्रमुख मांगें: एक नजर में

क्रम मांग मौजूदा स्थिति
1 बाजार सजावट के लिए पर्याप्त अवधि की अनुमति नगर निगम ने महज 11 दिन की निःशुल्क अनुमति दी है
2 सड़क चौड़ीकरण से टूटी दुकानों का पुनर्वास अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं
3 प्रभावित कारोबारियों को उचित मुआवजा निर्णय लंबित
4 मुख्यमंत्री और महापौर से संवाद ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया गया

अब आगे क्या होगा?

व्यापार मंडल का अगला कदम मुख्यमंत्री और महापौर को ज्ञापन सौंपना है। अगर सजावट की अवधि बढ़ा दी जाती है और पुनर्वास-मुआवजे पर ठोस घोषणा होती है, तो बहिष्कार का फैसला वापस भी लिया जा सकता है। लेकिन कोई सकारात्मक पहल न हुई तो इस बार जयपुर की दीपावली बाजारों की पारंपरिक रौनक के बिना ही मनेगी।

दीपावली का सीजन व्यापारियों के लिए साल का सबसे कमाऊ समय होता है, और दिवाली सीजन में UPI शुल्क को लेकर मिली राहत से पता चलता है कि इस बार त्योहारी कारोबार को लेकर उम्मीदें काफी ज्यादा हैं। ऐसे में बहिष्कार व्यापारियों के लिए भी कठिन फैसला है — संदेश साफ है कि वे सजावट करना चाहते हैं, लेकिन सम्मानजनक शर्तों पर। गेंद अब सरकार और नगर निगम के पाले में है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: जयपुर दीपावली कॉर्निवाल बहिष्कार का फैसला किसने लिया?

उत्तर: जयपुर व्यापार मंडल की 18 अक्टूबर को हुई आपात बैठक में शहर के 125 व्यापार मंडलों ने सर्वसम्मति से दीपावली कॉर्निवाल-2026 का सामूहिक बहिष्कार करने का फैसला लिया। बैठक की अध्यक्षता मंडल के संरक्षक पवन कुमार गोयल ने की।

प्रश्न: बाजारों में सजावट न करने की वजह क्या है?

उत्तर: दो मुख्य वजहें हैं — नगर निगम ने सजावट के लिए महज 11 दिन की निःशुल्क अनुमति दी है, जो नाकाफी है; और सड़क चौड़ीकरण में टूटी दुकानों के पुनर्वास व मुआवजे पर अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है।

प्रश्न: क्या यह फैसला वापस लिया जा सकता है?

उत्तर: व्यापार मंडल अब मुख्यमंत्री और महापौर को ज्ञापन सौंपेगा। अगर सजावट की अवधि बढ़ा दी जाती है और पुनर्वास-मुआवजे पर ठोस घोषणा होती है, तो बहिष्कार का फैसला वापस लिए जाने की संभावना है।

प्रश्न: 11 दिन की अनुमति नाकाफी क्यों बताई जा रही है?

उत्तर: सजावट में कारीगरों की व्यवस्था, स्वागत द्वार बनाना, लाइटिंग और झालरें लगाना, और त्योहार के बाद सजावट को सुरक्षित तरीके से हटाना शामिल है। इतने कम समय में यह सब कराना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है और लागत भी बढ़ जाती है।

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