दिवाली से ठीक पहले देशभर के करोड़ों व्यापारियों और UPI इस्तेमाल करने वाले आम ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। 15 अक्टूबर से UPI के कुछ कारोबारी लेनदेन पर लगने वाला UPI MDR शुल्क अब दिवाली तक लागू नहीं होगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर को यह फैसला लिया है। त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस व्यवस्था को टाल दिया गया है — यानी दशहरा, नवरात्रि और दिवाली के दौरान दुकानों पर बिना अतिरिक्त शुल्क की चिंता के UPI से भुगतान होता रहेगा।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि त्योहारी सीजन में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल काफी बढ़ जाता है, ऐसे में इस निर्णय से देश के छोटे-बड़े करीब 5 करोड़ व्यापारियों को सीधी राहत मिलेगी। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश पाटोदिया ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे करोड़ों छोटे दुकानदारों, ग्राहकों और पूरे डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को बड़ी राहत मिली है।
15 अक्टूबर से क्या लगना था: UPI MDR शुल्क का पूरा गणित
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले व्यापारी से लिया जाता है। NPCI के प्रस्ताव के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजेक्शन पर 0.40 प्रतिशत की दर से MDR लगाया जाना था। यानी अगर कोई ग्राहक दुकान पर 2,500 रुपये का UPI भुगतान करता, तो व्यापारी को उस पर करीब 10 रुपये शुल्क देना पड़ता।
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है — UPI MDR शुल्क सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होने वाला था। NPCI ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित व्यवस्था केवल चुनिंदा P2M ट्रांजेक्शन पर ही लागू होगी। हर UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की कोई घोषणा नहीं हुई थी। आम ग्राहक द्वारा दोस्त या रिश्तेदार को किया जाने वाला व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन हमेशा की तरह पूरी तरह निःशुल्क बना रहेगा।
NPCI की स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर को लिया फैसला
NPCI की UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर को बैठक के बाद निर्णय लिया कि 15 अक्टूबर से प्रस्तावित इस व्यवस्था को फिलहाल टाल दिया जाए। चुनिंदा P2M UPI ट्रांजेक्शन पर MDR दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। कुछ रिपोर्टों में नई तारीख 1 जनवरी 2027 बताई गई है, हालांकि आधिकारिक तौर पर नई तारीख की अलग से जानकारी जारी की जाएगी।
इस फैसले की सबसे बड़ी वजह त्योहारी सीजन है। अक्टूबर से दिसंबर का समय देश के खुदरा व्यापारियों के लिए पूरे साल का सबसे मुख्य कारोबारी सीजन होता है। कैट के सुरेश पाटोदिया का कहना है कि ऐसे समय में शुल्क लागू होने से डिजिटल लेनदेन की रफ्तार धीमी पड़ती और बाजारों में भारी भ्रम बन जाता।
राजस्थान में भी दिवाली से पहले बाजारों में खरीदारी जोरों पर है। जयपुर समेत प्रदेश के बाजारों में इस साल दिवाली कारोबार का बड़ा अनुमान लगाया गया है, और त्योहारी सोना-चांदी की खरीदारी के साथ UPI का इस्तेमाल भी हर साल बढ़ रहा है। ऐसे में शुल्क टलना प्रदेश के व्यापारियों के लिए भी राहत है।
एक नजर में: UPI MDR पर नया फैसला
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| फैसला लेने वाली संस्था | NPCI की UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी |
| फैसले की तारीख | 13 अक्टूबर 2026 |
| प्रस्तावित MDR दर | 0.40% (चुनिंदा P2M ट्रांजेक्शन पर) |
| लागू होने की पुरानी तारीख | 15 अक्टूबर 2026 |
| नई स्थिति | दिवाली के बाद तक टला; नई तारीख जल्द घोषित होगी |
| प्रभावित लेनदेन | ₹2,000 से ऊपर के चुनिंदा P2M (मर्चेंट) पेमेंट |
| अप्रभावित लेनदेन | सभी P2P (व्यक्ति-से-व्यक्ति) UPI पेमेंट पूरी तरह मुफ्त |
| राहत का दायरा | देश के करीब 5 करोड़ व्यापारी |
व्यापारियों का विरोध: ‘नो यूपीआई डे’ से स्थगन तक का सफर
यह फैसला एक दिन में नहीं आया। MDR के प्रस्ताव के खिलाफ देशभर के व्यापारी संगठन पिछले कुछ हफ्तों से मोर्चा खोले हुए थे। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने इसका कड़ा विरोध किया था और भारत के सभी प्रांतों के व्यापारियों ने अपने-अपने स्तर पर 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाया था — यानी उस दिन दुकानों पर UPI से भुगतान स्वीकार नहीं किया गया था।
व्यापारियों का तर्क था कि UPI देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बन चुकी है और निम्नवर्गीय व मध्यमवर्गीय व्यापारियों के भुगतान का मुख्य जरिया है। ऐसे में इस पर अतिरिक्त भार लादना उचित नहीं है। कैट का कहना है कि वह लगातार सरकार और NPCI से बातचीत कर रहा है, ताकि 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले छोटे व्यवसायों को आगे भी इन नियमों से पूरी तरह मुक्त रखा जा सके।
आम ग्राहक के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर आप आम उपभोक्ता हैं, तो तीन बातें जानना जरूरी हैं:
पहली, दोस्तों या रिश्तेदारों को भेजा जाने वाला व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI लेनदेन हमेशा की तरह मुफ्त रहेगा।
दूसरी, दुकानों को किए जाने वाले भुगतानों (P2M) पर भी दिवाली तक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा — त्योहारी खरीदारी में बिना चिंता के UPI इस्तेमाल करें।
तीसरी, दिवाली के बाद जब यह व्यवस्था लागू होगी, तो भी शुल्क ग्राहक से नहीं, व्यापारी से लिया जाएगा।
त्योहारी सीजन में डिजिटल भुगतान का रुझान हर साल बढ़ता जा रहा है। ऐसे में इस फैसले से बाजार में सकारात्मक माहौल बनेगा। NPCI की आधिकारिक जानकारी npci.org.in पर देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
UPI MDR शुल्क क्या है और यह कब से लगना था?
डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क। 2,000 रुपये से ऊपर के चुनिंदा P2M UPI ट्रांजेक्शन पर 0.40% की दर से इसे 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना था, जिसे अब दिवाली तक टाल दिया गया है।
क्या अब सभी UPI पेमेंट पर शुल्क लगेगा?
नहीं। यह व्यवस्था केवल चुनिंदा P2M ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित थी। P2P लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। दिवाली तक तो P2M पेमेंट पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।
दिवाली के बाद MDR कब और कैसे लागू होगा?
NPCI ने 13 अक्टूबर को इसे टालने का फैसला लिया है। नई तारीख की अलग से घोषणा होगी — कुछ रिपोर्टों में 1 जनवरी 2027 का जिक्र है। किन मर्चेंट श्रेणियों पर यह लागू होगा, यह भी अभी स्पष्ट नहीं है।
व्यापारी संगठनों की मुख्य मांग क्या है?
40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले छोटे व्यवसायों को इन नियमों से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। कैट और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल सरकार और NPCI से लगातार बातचीत कर रहे हैं।