जयपुर: फर्जी इकरारनामे से 2 प्लॉट हड़पने की साजिश का आरोप, CBI कर्मी ने लगाई न्याय की गुहार

केंद्रीय जांच एजेंसी में काम करने वाला कर्मचारी खुद न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है — जयपुर में शनिवार को यही तस्वीर सामने आई। जयपुर फर्जी इकरारनामा प्लॉट विवाद में सीबीआई कार्मिक ओंकार मीणा और उनके बड़े भाई सुखदेव मीणा ने पिंक सिटी प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि भू-माफिया ने फर्जी दस्तावेज तैयार करके उनके दो कीमती प्लॉट हड़पने की साजिश रची, और सात साल से थाने में दर्ज एफआईआर का अब तक कोई अंतिम नतीजा नहीं निकला। परिवार की मांग है कि जांच प्रतापनगर थाने से हटाकर किसी वरिष्ठ निष्पक्ष अधिकारी को सौंपी जाए।

पिंक सिटी प्रेस क्लब में शनिवार को क्या हुआ

शनिवार को जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में ओंकार मीणा अपने बड़े भाई सुखदेव मीणा के साथ पहुंचे और अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि फर्जी कागज बनाने वालों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रेस वार्ता में दोनों ने मामले की निष्पक्ष जांच किसी उच्च अधिकारी से करवाने की मांग दोहराई और कहा कि उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।

जयपुर फर्जी इकरारनामा प्लॉट विवाद की जड़ें: 1994 से 2020 तक

इस विवाद की कहानी तीन दशक पुरानी है। पीड़ित पक्ष के मुताबिक घटनाक्रम इस प्रकार रहा:

  • 1994: दोनों भाइयों के पिता ने शिवशंकर हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसाइटी, जयपुर से उनके नाम पर 200-200 वर्गगज के दो प्लॉट खरीदे।
  • 2008 (कथित): आरोप है कि इन्हीं प्लॉटों को हड़पने की नीयत से जितेंद्र भंडारी, राकेश कुमार व्यास और सतीश दलाल ने 2008 का एक कथित फर्जी इकरारनामा तैयार किया।
  • जनवरी 2020: जब परिवार ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में लीजडीड के लिए आवेदन किया, तब इस विवादित इकरारनामे की जानकारी सामने आई। आरोप है कि 2008 का बताया जा रहा दस्तावेज करीब 12 साल बाद जेडीए के सामने पेश किया गया।
  • 2020: इसके बाद परिवार ने प्रतापनगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई।

इकरारनामे में वो खामियां जिन पर उठे सवाल

परिवार का कहना है कि कथित इकरारनामे में कई विसंगतियां हैं:

  1. नाबालिग की उम्र: दस्तावेज में ओंकार मीणा की जो उम्र दर्शाई गई है, उस हिसाब से वे उस समय नाबालिग थे।
  2. हस्ताक्षर का फर्क: दस्तावेज में उनके हस्ताक्षर हिंदी में दिखाए गए हैं, जबकि वे हमेशा अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हैं।
  3. हाथ से जोड़ी गई जानकारी: पता, आयु, क्रेता का नाम और राशि टाइप किए प्रारूप में बाद में हाथ से जोड़ी गई बताई जा रही है।
  4. 12 साल की देरी: 2008 का दस्तावेज अगर असली था तो 2020 तक सामने क्यों नहीं आया।

सात साल से अटकी FIR: जांच पर सवाल

विवरण जानकारी
FIR संख्या 69/2020
थाना प्रतापनगर, जयपुर
धाराएं IPC 420, 467, 468, 471, 120बी
बीता समय करीब 7 वर्ष
स्थिति जांचाधीन, निस्तारण लंबित

धोखाधड़ी (420), जाली दस्तावेज (467, 468), जाली कागज के इस्तेमाल (471) और आपराधिक साजिश (120बी) जैसी गंभीर धाराओं के बावजूद सात साल में निस्तारण न होना ही इस जयपुर फर्जी इकरारनामा प्लॉट मामले का सबसे बड़ा सवाल है।

इन धाराओं का मतलब समझिए

  • 420: धोखाधड़ी से संपत्ति हड़पने का आरोप।
  • 467/468: मूल्यवान दस्तावेज की जालसाजी और बेईमान इरादे से फर्जीवाड़ा।
  • 471: जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करना।
  • 120बी: एक से ज्यादा लोगों की मिलीभगत वाली आपराधिक साजिश।

इन धाराओं का एक साथ लगना बताता है कि शुरुआती जांच में मामले को संगठित फर्जीवाड़े की श्रेणी में रखा गया था।

उल्टा मुकदमा: दबाव बनाने का आरोप

परिवार का आरोप है कि इसी विवादित इकरारनामे के आधार पर उनके खिलाफ बजाज नगर थाने में मुकदमा संख्या 107/2021 दर्ज करवाया गया है। उनके मुताबिक इसका मकसद उन्हें दबाव में लेकर डराना-धमकाना है, ताकि वे अपने प्लॉटों का दावा छोड़ दें। परिवार ने इस मुकदमे की निष्पक्ष समीक्षा और आधार न मिलने पर अंतिम रिपोर्ट (एफआर) की मांग की है।

प्लॉट खरीददारों के लिए सबक: 7 जरूरी सावधानियां

  1. मूल दस्तावेज जांचें: सिर्फ फोटोकॉपी पर भरोसा न करें।
  2. जेडीए रिकॉर्ड मिलाएं: जेडीए की आधिकारिक वेबसाइट पर प्लॉट का रिकॉर्ड जरूर जांचें।
  3. पुरानी तारीख परखें: अचानक सामने आए पुराने दस्तावेज की प्रामाणिकता की गहराई से जांच करवाएं।
  4. हस्ताक्षर मिलाएं: दस्तावेज के हस्ताक्षर व्यक्ति के अन्य रिकॉर्ड से मिलाएं।
  5. रेरा जांचें: बड़ी परियोजनाओं में रेरा पंजीकरण देखना न भूलें।
  6. वकील की राय: बड़े सौदे से पहले प्रॉपर्टी वकील से कानूनी जांच करवाएं।
  7. तुरंत शिकायत: संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पुलिस में शिकायत करें और धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: यह मामला कब सामने आया?
उत्तर: 10 अक्टूबर 2026 को पिंक सिटी प्रेस क्लब की प्रेस कॉन्फ्रेंस में, हालांकि विवाद 1994 की खरीद और 2008 के कथित फर्जी इकरारनामे से जुड़ा है।

प्रश्न 2: FIR में कौन-सी धाराएं हैं?
उत्तर: FIR 69/2020 (प्रतापनगर थाना) में IPC 420, 467, 468, 471 और 120बी लगाई गई हैं। सात साल बाद भी निस्तारण लंबित है।

प्रश्न 3: परिवार की मांग क्या है?
उत्तर: जांच प्रतापनगर थाने से हटाकर वरिष्ठ निष्पक्ष अधिकारी को सौंपी जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और मुकदमा 107/2021 की समीक्षा कर एफआर लगाई जाए।

प्रश्न 4: फर्जी इकरारनामे से कैसे बचें?
उत्तर: मूल दस्तावेज जांचें, जेडीए रिकॉर्ड से मिलान करें और बड़े सौदों से पहले प्रॉपर्टी वकील की राय लें।

नोट: खबर में लगाए गए आरोप पीड़ित पक्ष के दावों पर आधारित हैं। दूसरा पक्ष सामने आने पर खबर अपडेट की जाएगी।

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