जयपुर में RERA की बड़ी कार्रवाई: शिवशक्ति रियलहोम डिफॉल्टर घोषित, प्रमोटरों के नाम-फोटो होंगे सार्वजनिक

जयपुर में घर खरीदने का सपना देखने वालों के लिए बड़ी खबर है। शिवशक्ति रियलहोम रेरा प्रकरण में राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने जयपुर की निर्माण कंपनी शिवशक्ति रियलहोम प्राइवेट लिमिटेड को डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। रेरा ने कंपनी के तीनों निदेशकों और प्रमोटरों — संजीव सांघी, राजीव सांघी और ओम सांघी — के नाम और फोटो अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के आदेश दिए हैं। ₹124.50 करोड़ की परियोजना शिवराज रेजिडेंसी में पैसे लगाने वाले खरीदारों के लिए यह फैसला नई उम्मीद लेकर आया है।

शिवशक्ति रियलहोम रेरा कार्रवाई: क्या हुआ, कब और कैसे

यह आदेश रेरा के सदस्य सुधीर कुमार शर्मा द्वारा पारित किया गया है। मामला राजस्थान रेरा में दर्ज शिकायत संख्या 2021-4718 और 2021-4717 से जुड़ा है — नीरू जैन बनाम शिवशक्ति रियलहोम प्राइवेट लिमिटेड। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता योगेश शर्मा उपस्थित हुए, लेकिन कंपनी की ओर से कोई भी प्रतिनिधि सुनवाई में नहीं आया।

रेरा के रिकॉर्ड के मुताबिक कंपनी ने पूर्व में पारित आदेशों की पालना नहीं की थी, इसलिए प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया। रेरा का कहना है कि आदेशों की अवहेलना और अनुपालनों में लगातार चूक को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

शिवराज रेजिडेंसी की रेरा फाइल में क्या-क्या मिला

कंपनी की जयपुर स्थित शिवराज रेजिडेंसी परियोजना के रेरा विवरण से जो तथ्य सामने आए हैं, वे घर खरीदारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं:

विवरण जानकारी
कंपनी का नाम शिवशक्ति रियलहोम प्राइवेट लिमिटेड
परियोजना का नाम शिवराज रेजिडेंसी, जयपुर
परियोजना का मूल्य ₹124.50 करोड़
कुल फ्लैट 432
रेरा पंजीकरण स्थिति LAPSED (समाप्त)
तिमाही अनुपालन डिफॉल्ट 20 तिमाही
वार्षिक अनुपालन डिफॉल्ट सभी 6 वार्षिक अनुपालन
निदेशक/प्रमोटर संजीव सांघी, राजीव सांघी, ओम सांघी
आदेश पारित करने वाले रेरा सदस्य सुधीर कुमार शर्मा

किसी भी परियोजना का रेरा पंजीकरण LAPSED होना गंभीर संकेत है — यानी परियोजना रेरा की वैध निगरानी से बाहर हो गई है। 20 तिमाही और सभी 6 वार्षिक अनुपालनों में डिफॉल्ट दिखाता है कि कंपनी ने निर्माण प्रगति और वित्तीय स्थिति जैसे अनिवार्य खुलासों को लगातार नजरअंदाज किया।

पुरानी शिकायतों की कहानी: रिकवरी सर्टिफिकेट तक का सफर

यह पहली बार नहीं है जब शिवशक्ति रियलहोम रेरा के रडार पर आई हो। इससे पहले एक अन्य मामले में रेरा ने कंपनी के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया था। वह मामला शिकायत संख्या RAJ-RERA-C-2024-7071 से जुड़ा था, जिसमें शिकायतकर्ता प्रज्ञा सिंह तोमर को 13 फरवरी 2025 के आदेश के तहत उनकी जमा राशि ₹35,61,975 ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया गया था। ब्याज की दर एसबीआई के उच्चतम एमसीएलआर से 2% अधिक यानी 9.10% तय की गई थी और आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना था।

लेकिन चार महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी कंपनी ने आदेश का पालन नहीं किया, तो शिकायतकर्ता ने निष्पादन आवेदन दायर किया। 1 जुलाई 2025 को हुई सुनवाई में भी कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जबकि 16 और 22 मई 2025 को नोटिस जारी किए गए थे। प्राधिकरण ने पाया कि कंपनी जानबूझकर आदेश का पालन करने से बच रही है। इसके बाद रेरा ने रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने और रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 40(1) के तहत रिकवरी कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया और रजिस्ट्री को जिला कलेक्टर को मामला भेजने के निर्देश दिए।

घर खरीदारों के लिए शिवशक्ति रियलहोम रेरा फैसले के मायने

रेरा ने डिफॉल्टर सूची प्रकाशित करने और निदेशकों की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है, ताकि नए खरीदार लेन-देन से पहले सच्चाई जान सकें। अगर आप जयपुर में फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो निवेश से पहले रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर परियोजना का पंजीकरण स्टेटस जरूर जांचें — ACTIVE, LAPSED या REVOKED, तीनों का मतलब अलग है।

जिन खरीदारों का पैसा शिवराज रेजिडेंसी में फंसा है, उनके लिए कानूनी रास्ता शिकायत और निष्पादन आवेदन का है। रेरा के आदेश दिखाते हैं कि नियामक लगातार पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ रिकवरी तक की कार्रवाई कर सकता है, लेकिन खरीदारों को अपने मामले को सक्रिय होकर आगे बढ़ाना पड़ता है।

रेरा का नया सख्त रुख: नाम-फोटो सार्वजनिक क्यों

बिल्डर कंपनियों के खिलाफ रेरा का यह कदम बड़ा संदेश है। नाम और फोटो सार्वजनिक करने का प्रावधान इसलिए है ताकि कोई प्रमोटर एक कंपनी बंद करके दूसरी कंपनी से वही काम न दोहरा सके। रियल एस्टेट में खरीदार की सबसे बड़ी कमजोरी जानकारी की कमी होती है — सार्वजनिक डिफॉल्टर सूची इसी कमी को पूरा करने का प्रयास है।

एक वर्ष से आदेश की पालना न होने पर डिफॉल्टर घोषित करने की यह कार्रवाई संकेत देती है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अन्य प्रमोटरों पर भी ऐसी ही कार्रवाई हो सकती है। जयपुर में प्राधिकरणों की सख्ती का एक और ताजा उदाहरण जेडीए के नए विज्ञापन नियम हैं, जिनमें बिना अनुमति होर्डिंग पर दोगुना शुल्क तय किया गया है।

आगे क्या होगा

अब सवाल यही है कि कंपनी के जिम्मेदार व्यक्तियों से प्रभावी जवाबदेही कब और कैसे तय होगी — क्या डिफॉल्टर सूची प्रकाशित होगी और क्या प्रभावित आवंटियों को वास्तविक राहत मिलेगी? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि यह कार्रवाई सिर्फ कागजी आदेश बनकर रहती है या खरीदारों को वास्तविक न्याय मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. शिवशक्ति रियलहोम को रेरा ने डिफॉल्टर क्यों घोषित किया?
शिवशक्ति रियलहोम रेरा प्रकरण में कंपनी ने रेरा के पूर्व आदेशों की पालना नहीं की और 20 तिमाही तथा सभी 6 वार्षिक अनुपालनों में डिफॉल्ट दर्ज है। शिकायतकर्ता नीरू जैन की सुनवाई में कंपनी का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद रेरा सदस्य सुधीर कुमार शर्मा ने डिफॉल्टर घोषित करने का आदेश पारित किया।

2. शिवराज रेजिडेंसी परियोजना कहां है और इसमें कितने फ्लैट हैं?
शिवराज रेजिडेंसी जयपुर में स्थित शिवशक्ति रियलहोम की ₹124.50 करोड़ की आवासीय परियोजना है, जिसमें 432 फ्लैट प्रस्तावित हैं। इसका रेरा पंजीकरण स्टेटस फिलहाल LAPSED है।

3. रेरा की वेबसाइट पर नाम-फोटो सार्वजनिक होने से क्या होगा?
रेरा ने कंपनी के निदेशकों संजीव सांघी, राजीव सांघी और ओम सांघी के नाम और फोटो आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के आदेश दिए हैं ताकि नए खरीदार निवेश से पहले कंपनी की साख जांच सकें और प्रमोटर दूसरी कंपनी से वही काम न दोहरा सकें।

4. फ्लैट में पैसा फंसाने वाले खरीदार क्या कर सकते हैं?
खरीदार रेरा में शिकायत दर्ज कर सकते हैं और आदेश की पालना न होने पर निष्पादन आवेदन दायर कर सकते हैं। इससे पहले प्रज्ञा सिंह तोमर के मामले में रेरा ने ₹35.61 लाख के रिफंड पर रिकवरी सर्टिफिकेट तक की कार्रवाई की थी.

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