त्योहारी सेल साइबर ठगी का खतरा इस बार त्योहारों की खुशियों के साथ ही दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। दिवाली से पहले फ्लिपकार्ट की ‘बिग बिलियन डेज़’ और अमेज़न की ‘ग्रेट इंडियन फेस्टिवल’ जैसी बड़ी सेल शुरू होते ही साइबर ठग भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर आए हैं। इसी को देखते हुए राजस्थान पुलिस के साइबर क्राइम ब्रांच (R4C) ने आम लोगों के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजस्थान राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर जारी इस एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि भारी छूट और लिमिटेड टाइम ऑफर के नाम पर ठग आपकी जेब पर नजर गड़ाए बैठे हैं।
त्योहारी सेल साइबर ठगी के 5 बड़े जाल
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि त्योहारी सेल साइबर ठगी के मामलों में ठग लोगों की जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं।
1. “आज ही खरीदें, वरना ऑफर खत्म” का दबाव: ठग “केवल 2 मिनट बाकी” जैसे संदेश भेजकर सोचने का वक्त नहीं देते। असली सेल के ऑफर घंटों-दिनों तक चलते हैं, मिनटों में खत्म नहीं होते।
2. फर्जी वेबसाइटें: बड़ी ई-कॉमर्स साइटों जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइटों पर भुगतान करते ही आपके कार्ड या UPI की जानकारी ठगों तक पहुंच जाती है।
3. नकली मोबाइल ऐप: व्हाट्सऐप पर आए लिंक से “एक्सक्लूसिव डील ऐप” डाउनलोड करने को कहा जाता है। ये ऐप फोन का डेटा — संपर्क, मैसेज, बैंकिंग जानकारी — चुरा लेते हैं।
4. संदिग्ध लिंक और फर्जी कैशबैक: व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या SMS पर “90% छूट” के लिंक भेजे जाते हैं, जो फिशिंग पेज या मैलवेयर तक ले जाते हैं।
5. UPI और QR कोड की ठगी: रिफंड या कैशबैक के नाम पर UPI पिन या QR स्कैन मांगा जाता है। याद रखें — पैसे पाने के लिए कभी UPI पिन की जरूरत नहीं होती।
DGP के निर्देश पर R4C की एडवाइजरी में क्या कहा गया
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (R4C) की एडवाइजरी के मुताबिक, ऑनलाइन खरीदारी में थोड़ी-सी सावधानी और आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल ही त्योहारी सेल साइबर ठगी से बचने का सबसे आसान तरीका है। ऑफर की प्रामाणिकता जांचे बिना कभी भुगतान न करें।
पुलिस ने खास चेतावनी दी है कि एड्रेस बार में ताले का निशान (HTTPS) दिखना अपने आप में वेबसाइट के असली होने की गारंटी नहीं है। ठग HTTPS वाली फर्जी साइटें भी बना लेते हैं। असली पहचान डोमेन की सही स्पेलिंग और आधिकारिक चैनल से मिली जानकारी ही है।
गौरतलब है कि राजस्थान पुलिस साइबर अपराधों पर लगातार नजर रखे हुए है। हाल ही में शादी के कार्ड के नाम पर भेजी जा रही खतरनाक APK फाइलों को लेकर भी पुलिस ने साइबर अलर्ट जारी किया था, जिसमें व्हाट्सऐप पर आने वाले फर्जी निमंत्रण लिंक से सावधान रहने की सलाह दी गई थी।
फर्जी वेबसाइट और नकली ऐप की पहचान
त्योहारी सेल साइबर ठगी से बचने के लिए फर्जी वेबसाइट और नकली ऐप की पहचान करना जरूरी है:
- डोमेन नाम गौर से पढ़ें: flipkart-sale-offer2026.com जैसे पते आधिकारिक नहीं होते। असली साइट का पता हमेशा छोटा और जाना-पहचाना होता है।
- ऐप सिर्फ आधिकारिक स्टोर से: शॉपिंग ऐप केवल Google Play Store या Apple App Store से ही डाउनलोड करें। व्हाट्सऐप या टेलीग्राम से मिले APK लिंक कभी न खोलें।
- जल्दबाजी में भुगतान न करें: भारी छूट देखकर तुरंत पेमेंट न करें। पहले ऑफर को आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर खुद जांचें।
- अनजान लिंक से खरीदारी नहीं: व्हाट्सऐप, SMS, टेलीग्राम या सोशल मीडिया पर आए अनजान लिंक पर क्लिक करके सीधे खरीदारी न करें।
- संपर्क जानकारी जांचें: असली ई-कॉमर्स साइटों पर कस्टमर केयर नंबर, पता और रिटर्न पॉलिसी साफ लिखी होती है। फर्जी साइटों पर ये या तो होती नहीं या नकली होती हैं।
UPI ठगी से बचाव: पिन और QR कोड का सही नियम
सबसे जरूरी बात — त्योहारी सेल साइबर ठगी से बचने के लिए समझ लें कि UPI पिन पैसे पाने के लिए नहीं, सिर्फ भुगतान करने के लिए होता है। अगर कोई “रिफंड”, “कैशबैक” या “प्राइज मनी” के नाम पर UPI पिन डालने या QR कोड स्कैन करने को कहे, तो समझ जाएं कि यह ठगी है। QR कोड स्कैन करना भी असल में भुगतान को अधिकृत करना होता है।
इसी तरह ठग बैंक खातों का दुरुपयोग भी करते हैं। राजस्थान में म्यूल अकाउंट स्कैम में 82 हजार संदिग्ध खाते चिन्हित हुए थे। इसलिए अपना बैंक खाता, UPI ID या OTP कभी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें।
ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें: 1930 हेल्पलाइन
अगर सावधानियों के बावजूद आप त्योहारी सेल साइबर ठगी का शिकार हो जाएं, तो घबराएं नहीं — तुरंत एक्शन लें:
| स्थिति | तुरंत क्या करें |
|---|---|
| पैसे कट गए हों | तुरंत 1930 (राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें — जल्दी शिकायत पर रकम फ्रीज होने की संभावना ज्यादा |
| संदिग्ध लिंक खुल गया हो | फोन को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट करें, बैंक ऐप के पासवर्ड बदलें |
| OTP या पिन साझा कर दिया हो | तुरंत बैंक को सूचित कर खाता/कार्ड ब्लॉक कराएं |
| ऑनलाइन शिकायत | cybercrime.gov.in पोर्टल पर विस्तृत शिकायत दर्ज करें |
| सबूत संभालें | स्क्रीनशॉट, ट्रांजेक्शन ID, ठग का नंबर — सब सुरक्षित रखें |
राजस्थान पुलिस ने हाल के महीनों में साइबर अपराधियों पर शिकंजा भी कसा है — अश्लील सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में हजारों लिंक और मोबाइल नंबर ब्लॉक हुए थे। लेकिन पुलिस की कार्रवाई के साथ आम लोगों की जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: त्योहारी सेल में सबसे आम साइबर ठगी कौन-सी है?
उत्तर: फर्जी वेबसाइट और नकली ऐप के जरिए भुगतान की जानकारी चुराना सबसे आम तरीका है। “लिमिटेड टाइम ऑफर” का दबाव बनाकर जल्दबाजी में पेमेंट करवाना और रिफंड के नाम पर UPI पिन मांगना भी बड़े खतरे हैं।
प्रश्न 2: क्या HTTPS वाली वेबसाइट हमेशा सुरक्षित होती है?
उत्तर: नहीं। राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि ताले का निशान अपने आप में असली होने की गारंटी नहीं देता। डोमेन की सही स्पेलिंग और आधिकारिक स्रोत से पुष्टि ही असली पहचान है।
प्रश्न 3: साइबर ठगी होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
उत्तर: सबसे पहले 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत कॉल करें। फिर cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें और बैंक को सूचित कर लेनदेन रुकवाएं। स्क्रीनशॉट और ट्रांजेक्शन डिटेल संभालकर रखें।
प्रश्न 4: राजस्थान पुलिस की यह एडवाइजरी किसके लिए है?
उत्तर: त्योहारी सेल साइबर ठगी को लेकर यह एडवाइजरी DGP राजस्थान राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर क्राइम ब्रांच (R4C) ने जारी की है — खास तौर पर उन लोगों के लिए जो दिवाली सीजन में फ्लिपकार्ट बिग बिलियन डेज़ और अमेज़न ग्रेट इंडियन फेस्टिवल जैसी सेल में ऑनलाइन खरीदारी करते हैं।
निष्कर्ष: त्योहारी सीजन खुशियों का है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही इसे ठगों के मौके में बदल सकती है। त्योहारी सेल साइबर ठगी पर राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी का सार एक ही है — जल्दबाजी न करें, हर ऑफर को आधिकारिक स्रोत से जांचें, और UPI पिन व OTP किसी से साझा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित खरीदारी करें।
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