जयपुर एलिवेटेड रोड 37 किमी: द्रव्यवती नदी पर 6000 करोड़ का कॉरिडोर, 15 नवंबर को रिपोर्ट के बाद CM बैठक में होगा बड़ा फैसला

जयपुर के ट्रैफिक जाम से जूझने वालों के लिए बड़ी खबर है। जयपुर एलिवेटेड रोड 37 किमी का प्रस्तावित कॉरिडोर द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र के ऊपर से गुजरेगा और करीब 6000 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा। फिजिबिलिटी रिपोर्ट में इस कॉरिडोर पर सड़क बनाना संभव बताया गया है, हालांकि जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को रिपोर्ट अभी मिलनी बाकी है। 15 नवंबर तक रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ बैठक में तय होगा कि परियोजना एक साथ बनेगी या चरणों में।

इसका महत्व सिर्फ लंबाई या लागत से नहीं है। उत्तर से दक्षिण जाने वाले रास्तों पर दबाव हर साल बढ़ रहा है और पीक आवर्स में अंदरूनी रास्ते रेंगने लगते हैं। नदी के ऊपर बना कॉरिडोर शहर को एक सीधी धुरी से जोड़ देगा, पर रास्ता कहां से उतरेगा और निर्माण के दौरान शहर कैसे चलेगा — ये सवाल अभी बाकी हैं।

जयपुर एलिवेटेड रोड 37 किमी: एक नजर में पूरी परियोजना

बिंदु विवरण
कुल लंबाई करीब 37 किलोमीटर
अनुमानित लागत करीब 6000 करोड़ रुपये
कॉरिडोर द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र के ऊपर
शुरुआती बिंदु स्वर्ण जयंती गार्डन, विद्याधर नगर
अंतिम बिंदु गोनेर के आगे रिंग रोड तक
कनेक्टिविटी पॉइंट 7 स्थानों पर नीचे के मार्गों से जोड़ने का प्रस्ताव
निर्माण तकनीक सिंगल पिलर तकनीक का प्रस्ताव
अगला पड़ाव 15 नवंबर तक रिपोर्ट, फिर CM बैठक में फैसला

परियोजना अभी निर्माण के चरण में नहीं है; अब तक सिर्फ तकनीकी संभावना की जांच हुई है।

कहां से कहां तक जाएगा जयपुर एलिवेटेड रोड 37 किमी का रूट

जेडीए के प्रस्ताव के मुताबिक यह सड़क स्वर्ण जयंती गार्डन, विद्याधर नगर से शुरू होकर गोनेर के आगे रिंग रोड तक जाएगी, यानी एक लंबी उत्तर-दक्षिण धुरी बनेगी। लेकिन सिर्फ लंबी सड़क बना देना ही मकसद नहीं है — असली चुनौती इसे शहर के प्रमुख मार्गों से जोड़ना है।

इसीलिए प्रस्ताव में सात स्थानों पर लेग के जरिए नीचे के प्रमुख मार्गों से जोड़ने की योजना है। इनमें सीकर रोड, अजमेर रोड, न्यू आतिश मार्केट, रिद्धि-सिद्धि हाईलेवल ब्रिज, बी-टू बाइपास, सांगा सेतु और बम्बाला पुलिया शामिल हैं, और आखिर में रिंग रोड तक कनेक्टिविटी का भी जिक्र है। सीकर रोड या अजमेर रोड की ओर से आने वालों के लिए यह एक वैकल्पिक तेज़ रास्ता बन सकता है।

जयपुर एलिवेटेड रोड 37 किमी के दो विकल्पों में क्या फर्क है

रिपोर्ट में सड़क के स्वरूप को लेकर दो विकल्प रखे गए हैं, और मुख्यमंत्री की बैठक में इन्हीं में से एक पर मुहर लग सकती है। पहला विकल्प यह है कि सड़क को सात स्थानों पर लेग के जरिए नीचे के प्रमुख मार्गों से जोड़ा जाए। इसमें हर प्रमुख चौराहे पर उतरने-चढ़ने की व्यवस्था होगी, जिससे ज्यादा इलाकों को सीधा फायदा होगा।

दूसरा विकल्प इसे एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर विकसित करने का है, जिसमें नीचे प्रमुख मार्गों से जोड़ने के लिए लेग बनाए जाएंगे। इसमें न्यू आतिश मार्केट में मेट्रो ट्रैक के ऊपर से सड़क निकालने का विकल्प भी बताया गया है, जहां सड़क की ऊंचाई जमीन से करीब 22 से 25 मीटर तक रहने का अनुमान है। कौन सा विकल्प चुना जाएगा, यह लागत, निर्माण की गति और शहर पर पड़ने वाले असर के संतुलन पर निर्भर करेगा।

सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियां: मेट्रो ट्रैक, हाईटेंशन लाइनें और ऊंचाई

इतनी लंबी एलिवेटेड सड़क बनाना सिर्फ कंक्रीट और पिलर का काम नहीं है। इस कॉरिडोर के रास्ते में मेट्रो ट्रैक आता है, हाईटेंशन बिजली की लाइनें आती हैं और निर्माण के लिए जरूरी जगह की भी अपनी सीमा है। न्यू आतिश मार्केट के पास मेट्रो ट्रैक के ऊपर से सड़क निकालने का मतलब है कि दो बड़ी संरचनाएं एक के ऊपर एक खड़ी होंगी।

हाईटेंशन लाइनों के लिए कहीं शिफ्टिंग तो कहीं डिजाइन में बदलाव करना होगा। सिंगल पिलर तकनीक का प्रस्ताव इसीलिए अहम है, क्योंकि इससे नीचे की सड़क पर कम जगह घिरेगी और ट्रैफिक के लिए रास्ता खुला रहेगा।

यह परियोजना यहां तक कैसे पहुंची: बजट घोषणा से DPR तक का सफर

यह सड़क अचानक सामने नहीं आई है। इसकी जड़ें विधानसभा में हुई बजट संबंधी घोषणा में हैं, जिसमें मुख्यमंत्री ने जेडीए के जरिए द्रव्यवती नदी पर एलिवेटेड रोड बनाने की घोषणा की थी। उस समय कॉरिडोर की लंबाई करीब 36 किलोमीटर बताई गई थी। इसके बाद जुलाई 2026 में जेडीए ने पुणे की एक इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी को करीब 5.8 करोड़ रुपये के अनुबंध पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम सौंपा।

अब लंबाई 37 किलोमीटर बताई जा रही है; अंतिम आंकड़ा जेडीए की रिपोर्ट के बाद पक्का होगा। द्रव्यवती नदी का अपना इतिहास भी इस कहानी का हिस्सा है: नदी पुनरुद्धार परियोजना के तहत इसके 47.5 किलोमीटर हिस्से को करीब 1470.85 करोड़ रुपये की लागत से संवारा गया था और सितंबर 2018 में इसका उद्घाटन हुआ था। इस संदर्भ में जेडीए की 11वीं PWC बैठक, JLN मार्ग सिग्नल-फ्री योजना और जयपुर मेट्रो लाइन-2 की खबरें भी अहम हैं।

जयपुर वालों के लिए इसका मतलब क्या है और आगे क्या देखना है

अगर परियोजना आगे बढ़ती है, तो सबसे बड़ा फायदा लंबी दूरी की यात्रा में मिलेगा। विद्याधर नगर से रिंग रोड तक का सफर बिना बार-बार सिग्नल और जाम में फंसे पूरा हो सकेगा, और शहर के अंदरूनी रास्तों पर भी दबाव कम होगा। निर्माण की तारीख का ऐलान अभी नहीं हुआ है।

असली पड़ाव ये हैं: पहले 15 नवंबर तक फिजिबिलिटी रिपोर्ट का जेडीए तक पहुंचना, फिर मुख्यमंत्री के साथ बैठक में एक साथ या चरणबद्ध निर्माण का फैसला, और उसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट व वित्तीय व्यवस्था पर काम। रूट के आसपास रहने वालों के लिए जमीन व ट्रैफिक डायवर्जन की सूचनाएं भी इन्हीं फैसलों के बाद आएंगी। इस विषय पर विस्तृत मूल रिपोर्ट पत्रिका की खबर में पढ़ी जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

जयपुर एलिवेटेड रोड 37 किमी कहां से कहां तक बनेगी?
प्रस्ताव के मुताबिक यह सड़क विद्याधर नगर से गोनेर के आगे रिंग रोड तक जाएगी और द्रव्यवती नदी के ऊपर से गुजरेगी।

जयपुर एलिवेटेड रोड 37 किमी की लागत कितनी है?
अनुमानित लागत करीब 6000 करोड़ रुपये है; अंतिम लागत बाद की रिपोर्टों से तय होगी।

इस परियोजना पर अगला फैसला कब होगा?
15 नवंबर तक रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है, फिर CM बैठक में एक साथ या चरणों में बनाने का फैसला होगा।

क्या इस एलिवेटेड रोड का निर्माण शुरू हो गया है?
नहीं, निर्माण शुरू नहीं हुआ है; परियोजना अभी फिजिबिलिटी और फैसला लेने के चरण में है।

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