बीकानेर के युवा निशानेबाजों को अब ओलंपिक स्तर की ट्रेनिंग के लिए अपने शहर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। शहर के ऐतिहासिक सादुल क्लब परिसर में करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक बीकानेर शूटिंग रेंज तैयार की जा रही है। क्लब प्रबंधन ने साफ कहा है कि इस रेंज का लक्ष्य 2028 में लॉस एंजेलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों को ध्यान में रखकर स्थानीय निशानेबाजों को तैयार करना है।
प्रशिक्षण शुरू होने से पहले नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी पदाधिकारी रेंज का निरीक्षण करेंगे, और जरूरी प्रमाणन व प्रशासनिक अनुमति के बाद खिलाड़ियों का अभ्यास शुरू होगा। बीकानेर में निशानेबाजी की जड़ें बहुत गहरी हैं, और अब इंग्लैंड से मंगवाई गई अत्याधुनिक मशीनों के साथ आधुनिक सुविधा की कमी दूर होने जा रही है।
बीकानेर के युवाओं को क्या मिलेगा
शूटिंग में तकनीक, सटीक मशीनें और सही माहौल — तीनों का बड़ा रोल होता है। अब तक बीकानेर के युवाओं को उच्च स्तर के अभ्यास के लिए सीमित संसाधनों में काम चलाना पड़ता था। नई बीकानेर शूटिंग रेंज से उन्हें अपने शहर में ही ओलंपिक स्तर की तकनीक मिलेगी, जिससे समय, पैसा और ऊर्जा — तीनों बचेंगे।
क्लब प्रबंधन ने भरोसा दिया है कि खिलाड़ियों को तकनीकी सुविधाओं की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। प्रशिक्षण के लिए देश के अनुभवी कोच नियुक्त किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर विदेशी कोच की सेवाएं भी ली जाएंगी। अभ्यास के लिए क्लब की ओर से कुछ बंदूकें भी उपलब्ध करवाई जाएंगी — उन परिवारों के लिए बड़ी राहत, जिनके लिए शूटिंग का शुरुआती खर्च एक बड़ी बाधा होता है।
बीकानेर शूटिंग रेंज में क्या-क्या खास है
इस परियोजना पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। रेंज में कुल 17 अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं — 15 ट्रैप और 2 स्कीट स्पर्धा के लिए। ये मशीनें इंग्लैंड की प्रोमेटिक कंपनी से मंगवाई गई हैं। मशीनों की स्थापना के लिए इंग्लैंड से दो इंजीनियर केविन और जोस बीकानेर पहुंचे हैं और वे इन दिनों स्थापना के काम में जुटे हुए हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | सादुल क्लब परिसर, बीकानेर |
| लागत | करीब 7 करोड़ रुपये |
| कुल मशीनें | 17 (15 ट्रैप + 2 स्कीट) |
| मशीन निर्माता | प्रोमेटिक कंपनी, इंग्लैंड |
| लक्ष्य | ओलंपिक 2028, लॉस एंजेलिस की तैयारी |
| अगला चरण | नेशनल राइफल एसोसिएशन का निरीक्षण व प्रमाणन |
ट्रैप और स्कीट — दोनों शॉटगन शूटिंग की स्पर्धाएं हैं, जिनमें उड़ती हुई क्ले टारगेट को निशाना बनाया जाता है। दोनों में तेज रिफ्लेक्स, सटीक अंदाजा और जबरदस्त एकाग्रता चाहिए होती है। इसीलिए ओलंपिक स्तर की मशीनों पर अभ्यास का अनुभव प्रतियोगिताओं में सीधे काम आता है।
लाइव डेमो ने दिखा दी रेंज की ताकत
मशीनों की स्थापना के दौरान युवा निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर ने सिंगल ट्रैप और डबल ट्रैप का लाइव डेमो दिया। इससे साफ हुआ कि नई मशीनें किस सटीकता और गति से टारगेट छोड़ती हैं और खिलाड़ियों को असली प्रतियोगिता जैसा माहौल मिलेगा।
करणी सिंह की विरासत से ओलंपिक 2028 तक
बीकानेर का निशानेबाजी से रिश्ता नया नहीं है। सादुल क्लब के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने याद दिलाया कि महाराजा करणी सिंह और उनकी पुत्री राज्यश्री कुमारी ने इस खेल में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की थीं — डॉ. करणी सिंह को 1961 में और राज्यश्री कुमारी को 1969 में अर्जुन पुरस्कार मिला था। राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और अपूर्वी चंदेला ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय निशानेबाजी को पहचान दिलाई।
मौजूदा पीढ़ी भी इस विरासत को आगे बढ़ा रही है — एशियन गेम्स 2026 में स्कीट कांस्य जीतने वाली माहेश्वरी चौहान का उदयपुर में ऐतिहासिक स्वागत हुआ था, और भीलवाड़ा की हरसिद्धि ने राज्य स्तरीय राइफल शूटिंग में रजत जीतकर राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन पक्का किया है। बीकानेर शूटिंग रेंज से ऐसी प्रतिभाओं को शुरुआती दौर में ही बेहतर मंच मिलेगा।
ट्रेनिंग कब शुरू होगी: अभी दो पड़ाव बाकी हैं
रेंज बन जाना ही आखिरी कदम नहीं है। प्रशिक्षण शुरू करने से पहले नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी पदाधिकारी इसका निरीक्षण करेंगे। तकनीकी मानकों की जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसके आधार पर जिला प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर प्रशिक्षण शुरू करने की योजना है। यानी प्रक्रिया में अभी दो औपचारिक पड़ाव बाकी हैं — तकनीकी निरीक्षण और प्रशासनिक अनुमति।
ये प्रक्रिया खिलाड़ियों के हित में है — प्रमाणित रेंज पर अभ्यास करने वालों को प्रतियोगिताओं में कोई तकनीकी अड़चन नहीं आती। जो युवा इस रेंज से जुड़ना चाहते हैं, वे क्लब से प्रशिक्षण शुरू होने की तारीख और प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी लेते रहें।
सादुल क्लब: सिर्फ शूटिंग का अड्डा नहीं
सादुल क्लब की खासियत ये है कि ये सिर्फ एक शूटिंग रेंज नहीं है। सचिव एम.पी. सिंह सोइन ने बताया कि क्लब में बास्केटबॉल, टेनिस, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, तीरंदाजी, क्रिकेट, पिकलबॉल, बैडमिंटन, बिलियर्ड्स और तैराकी की सुविधाएं हैं। यहां औसतन 300 से 400 बच्चे अभ्यास करते हैं।
युवा निशानेबाजों के लिए प्रैक्टिकल बातें
अगर आप या आपके बच्चे शूटिंग में रुचि रखते हैं तो नई रेंज एक अच्छा मौका है, लेकिन तीन बातें पहले से समझ लें। पहली — शूटिंग में सफलता रातोंरात नहीं मिलती; रोजाना अभ्यास, कोच की बात मानना और धैर्य इस खेल की बुनियाद है। दूसरी — उपकरण और प्रशिक्षण की लागत को लेकर क्लब से साफ जानकारी लें, क्योंकि क्लब की ओर से कुछ बंदूकें उपलब्ध करवाने की बात कही गई है। तीसरी — ओलंपिक का सपना देखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन रास्ता जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं से होकर ही जाता है। अच्छी खबर ये है कि अब इस क्रम का पहला पड़ाव बीकानेर में ही मजबूत हो गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: बीकानेर शूटिंग रेंज कहां बन रही है और इसकी लागत कितनी है?
जवाब: बीकानेर के ऐतिहासिक सादुल क्लब परिसर में; लागत करीब 7 करोड़ रुपये।
सवाल 2: बीकानेर शूटिंग रेंज में कितनी मशीनें लगाई गई हैं?
जवाब: कुल 17 मशीनें — 15 ट्रैप, 2 स्कीट; इंग्लैंड की प्रोमेटिक कंपनी से मंगवाई गई हैं।
सवाल 3: बीकानेर शूटिंग रेंज पर प्रशिक्षण कब शुरू होगा?
जवाब: पहले नेशनल राइफल एसोसिएशन का निरीक्षण और प्रमाणन होगा, फिर जिला प्रशासन की अनुमति के बाद प्रशिक्षण शुरू होगा।
सवाल 4: इस रेंज का लक्ष्य क्या है?
जवाब: 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक को ध्यान में रखकर बीकानेर के निशानेबाजों को तैयार करना; अनुभवी और जरूरत पड़ने पर विदेशी कोच भी होंगे।
बीकानेर की इस नई रेंज से एक पुरानी विरासत को नई तकनीक का साथ मिल रहा है। करणी सिंह के शहर में अब युवा निशानेबाजों के पास वो मंच होगा जिसकी उन्हें बरसों से जरूरत थी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि निरीक्षण और अनुमति की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है।
स्रोत: News18 Hindi, बीकानेर शूटिंग रेंज रिपोर्ट (25 अक्टूबर 2026)