बीकानेर क्रॉस वोटिंग विवाद: गहलोत के सामने निष्पक्ष जांच की मांग

बहुमत होने के बावजूद डिप्टी मेयर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की हार — बीकानेर में यह सवाल अब पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के दरवाजे पर पहुंच गया है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक समाज से जुड़े नेताओं ने मंगलवार रात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने बीकानेर क्रॉस वोटिंग की निष्पक्ष जांच की मांग रखी, साथ ही पार्टी के भीतर रहकर पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

गंगाशहर स्थित होटल चंद्ररतन पैलेस में हुई इस मुलाकात में नेताओं ने कहा कि नगर निगम के डिप्टी मेयर चुनाव में कांग्रेस के पास संख्या बल था, फिर भी प्रत्याशी नसीमा बानो की हार यह बताती है कि पार्टी के ही कुछ लोगों ने क्रॉस वोटिंग की। बीकानेर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति के लिहाज से इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।

बीकानेर क्रॉस वोटिंग की जांच पर कांग्रेस नेताओं की 3 बड़ी मांगें

गहलोत के सामने नेताओं ने तीन साफ मांगें रखीं। पहली — बीकानेर क्रॉस वोटिंग की निष्पक्ष जांच हो। नेताओं का कहना था कि जब कांग्रेस के पास बहुमत था, तो पार्टी प्रत्याशी की हार के पीछे के कारणों की तह तक जाना जरूरी है।

दूसरी मांग पार्टी के भीतर कथित तौर पर संघी विचारधारा से जुड़े लोगों को लेकर थी। आरोप है कि पार्टी के अंदर रहकर ही कुछ लोग पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल हैं। उनकी पहचान हो और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

तीसरी मांग जवाबदेही तय करने की थी। नेताओं ने कहा कि क्रॉस वोटिंग को केवल हार-जीत के चश्मे से नहीं देखना चाहिए — यह भी पता लगाना चाहिए कि अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं करने वाले कौन थे। कार्यकर्ताओं के बीच स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि अनुशासन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। नेताओं ने बताया कि वे यह मामला पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के सामने भी उठा चुके हैं।

बीकानेर क्रॉस वोटिंग विवाद के केंद्र में कौन: नसीमा बानो से पंकज तक

विवाद की जड़ बीकानेर नगर निगम का डिप्टी मेयर चुनाव है। कांग्रेस ने नसीमा बानो को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वे हार गईं और भाजपा के पंकज डिप्टी मेयर बन गए। अल्पसंख्यक नेताओं का दावा है कि संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में था — फिर भी हार यह बताती है कि पार्टी के ही कुछ लोगों ने क्रॉस वोटिंग की।

मंगलवार रात गहलोत से मिलने वालों में कांग्रेस नेता शब्बीर अहमद, आजम अली और मेहराज खान सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। मुलाकात के दौरान पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला और कांग्रेस नेता यशपाल गहलोत भी मौजूद रहे।

घटनाक्रम समय
डिप्टी मेयर चुनाव: भाजपा के पंकज जीते, नसीमा बानो हारीं चुनाव के दिन
PCC चीफ से मुलाकात, क्रॉस वोटिंग जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति की बात इससे पहले
गहलोत का बीकानेर दौरा: नाल में सभा, शोक कार्यक्रम मंगलवार (13 अक्टूबर)
होटल चंद्ररतन पैलेस में मुलाकात, निष्पक्ष जांच की मांग मंगलवार रात
श्रीडूंगरगढ़ दौरा रद्द, गहलोत दिल्ली रवाना बुधवार (14 अक्टूबर)

गहलोत के बीकानेर दौरे की असल वजह और ‘चौथी बार सरकार’ के नारे

गहलोत का बीकानेर दौरा मुख्य रूप से पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी के पिता रुघनाथ सिंह भाटी के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए था। नाल एयरपोर्ट पर स्वागत के बाद उन्होंने नाल बड़ी गांव में पत्रकारों से बातचीत की और एक सभा को संबोधित किया। इसके बाद वे हदां पहुंचे, जहां शोकाकुल परिजनों से मिलकर सांत्वना दी।

नाल की सभा में एक वाकये ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा। गहलोत बता रहे थे कि लोगों के आशीर्वाद से उन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला, तभी समर्थकों ने ‘चौथी बार अशोक गहलोत सरकार’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पर गहलोत ने कहा कि ऐसे नारे नहीं लगाने चाहिए, क्योंकि इससे पार्टी में गलतफहमी पैदा होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला कांग्रेस आलाकमान — राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी — करता है। दौरे का संचालन पूर्व मंत्री गोविन्दराम मेघवाल कर रहे थे।

पंचायत चुनाव के बीच कांग्रेस की दोहरी मुश्किल

बीकानेर क्रॉस वोटिंग का विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस पहले से कई मोर्चों पर जूझ रही है। एक तरफ निकाय चुनावों में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए पार्टी की कमेटी काम कर रही है, दूसरी तरफ पंचायत चुनाव की रणनीति को लेकर जयपुर में पार्टी का वॉर रूम सक्रिय है। टिकट रणनीति को लेकर भी अंदरूनी खींचतान की खबरें आती रही हैं।

पंचायत चुनावों के बीच बीकानेर से क्रॉस वोटिंग और भीतरघात के आरोप पार्टी के लिए असहज स्थिति है। यही वजह है कि अल्पसंख्यक नेताओं ने मामला सीधे गहलोत जैसे वरिष्ठ नेता के सामने रखा। कार्यक्रम में बदलाव के चलते बुधवार का प्रस्तावित श्रीडूंगरगढ़ दौरा रद्द हो गया है; गहलोत बीकानेर से सीधे दिल्ली रवाना होंगे।

आगे क्या: जांच होगी या मामला ठंडा पड़ जाएगा?

अब सवाल यही है कि कांग्रेस नेतृत्व जांच की मांग पर क्या फैसला लेता है। पार्टी के पास पहले से क्रॉस वोटिंग की जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति का प्रस्ताव है। अल्पसंख्यक नेताओं की मांग है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो।

जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनावों के बीच नेतृत्व कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहेगा जिससे अंदरूनी कलह बढ़े, लेकिन मांग को नजरअंदाज करना भी मुश्किल है — शिकायत सीधे गहलोत के सामने रखी गई है। एक बात साफ है: बीकानेर क्रॉस वोटिंग का यह विवाद अब सिर्फ एक चुनावी हार का मामला नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर अनुशासन और एकजुटता का सवाल बन गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: बीकानेर क्रॉस वोटिंग विवाद क्या है? उत्तर: डिप्टी मेयर चुनाव में बहुमत के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी नसीमा बानो हार गईं। अल्पसंख्यक नेताओं का आरोप है कि पार्टी के ही कुछ लोगों ने क्रॉस वोटिंग की। इसी की निष्पक्ष जांच की मांग हो रही है।

प्रश्न 2: गहलोत से किन नेताओं ने मुलाकात की? उत्तर: मंगलवार रात होटल चंद्ररतन पैलेस में शब्बीर अहमद, आजम अली और मेहराज खान सहित कार्यकर्ताओं ने गहलोत से मुलाकात की। पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला और यशपाल गहलोत भी मौजूद थे।

प्रश्न 3: डिप्टी मेयर चुनाव में कौन जीता? उत्तर: भाजपा के पंकज डिप्टी मेयर बने, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी नसीमा बानो को हार का सामना करना पड़ा।

प्रश्न 4: ‘चौथी बार सरकार’ के नारों पर गहलोत ने क्या कहा? उत्तर: गहलोत ने कहा कि ऐसे नारे नहीं लगाने चाहिए, क्योंकि इससे गलतफहमी पैदा होती है। मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह फैसला कांग्रेस आलाकमान करता है।

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