भरतपुर। जसवंत पशु मेला भरतपुर ने इस बार शुरुआत से पहले ही कमाई के मोर्चे पर नया रिकॉर्ड बना दिया है। मेले के औपचारिक शुभारंभ से पहले ही आयोजन से 1 करोड़ 17 लाख 98 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो चुकी है, जबकि पिछले पूरे मेले की कुल आय 92 लाख रुपये थी। यानी इस बार मेला शुरू होने से पहले ही पिछले साल के कुल आंकड़े को पार कर चुका है। गुरुवार 15 अक्टूबर को ध्वजारोहण के साथ मेले के 107वें आयोजन का आगाज हो गया, जो 25 अक्टूबर तक चलेगा।
जसवंत पशु मेला भरतपुर: 1920 से चली आ रही 107 साल की विरासत
भरतपुर रियासत के समय 1920 में महाराजा किशन सिंह ने अपने दादा महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति में इस मेले की शुरुआत की थी। उस दौर में इसका मकसद उन्नत पशुपालन को बढ़ावा देना था। समय के साथ यह सिर्फ पशु व्यापार का बाजार नहीं रहा — पूर्वी राजस्थान की पहचान बन गया। वर्ष 1963 से इसे प्रतिवर्ष राज्य स्तरीय मेले के रूप में आयोजित किया जा रहा है, और आज यह राजस्थान के 10 प्रमुख मेलों में गिना जाता है।
शुभारंभ समारोह में गृह राज्य एवं पशुपालन राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम और जिला कलक्टर कमर चौधरी ने पूजा-अर्चना के बाद ध्वजारोहण किया और फीता खोलकर मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मेयर अनुराधा सिंह सहित जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
| तथ्य | विवरण |
| मेले की शुरुआत | 1920, महाराजा किशन सिंह द्वारा (महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति में) |
| इस वर्ष कौन-सा आयोजन | 107वां |
| राज्य स्तरीय दर्जा | 1963 से प्रतिवर्ष |
| आयोजन अवधि | 15 से 25 अक्टूबर 2026 (11 दिन) |
| भाग लेने वाले राज्य | राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा |
| पिछले वर्ष की आय | 92 लाख रुपये |
| इस वर्ष अब तक की आय | 1 करोड़ 17 लाख 98 हजार रुपये से अधिक |
| उद्घाटन | गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, जिला कलक्टर कमर चौधरी |
पशुपालकों और व्यापारियों के लिए इस बार क्या खास है
जसवंत पशु मेला भरतपुर की असली जान इसके पशुपालक और व्यापारी हैं। मेला अधिकारी एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अरविंद चौधरी के अनुसार राजस्थान और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों सहित देशभर से पशुपालक, व्यापारी और आमजन यहां पहुंचते हैं। इस बार दिल्ली, मध्य प्रदेश और हरियाणा से भी दुकानदारों के आने की पुष्टि हुई है, यानी मेला अब पांच राज्यों के कारोबारियों का साझा मंच बन चुका है।
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मंत्री ने कहा कि मेले संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के साथ रोजगार के अवसर भी देते हैं। इनके माध्यम से आमजन को जरूरत का सामान भी एक ही स्थान पर मिल जाता है। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेल प्रतियोगिताओं का ऐतिहासिक स्वरूप बनाए रखने के साथ-साथ व्यापारियों के संरक्षण, आमजन की सुरक्षा और मनोरंजन की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
मेले के दौरान 22 और 23 अक्टूबर को तकनीकी सेमिनार भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, उद्यानिकी, वर्मी कम्पोस्ट, दुग्ध उत्पादन और पशु चिकित्सा जैसे विषयों के विशेषज्ञ किसानों और पशुपालकों को व्यावहारिक जानकारी देंगे। यह सेमिनार मेले को ज्ञान के मंच में बदल देता है।
जसवंत पशु मेला भरतपुर में मनोरंजन: कुश्ती दंगल से नौटंकी तक
जसवंत पशु मेला भरतपुर में भजन, जकड़ी, नौटंकी और ढोला गायन की प्रस्तुतियां होंगी, साथ ही राष्ट्रीय स्तर का कुश्ती दंगल, सांस्कृतिक संध्या और रावण दहन भी आयोजित होगा।
बच्चों और परिवारों के मनोरंजन के लिए झूले, सर्कस, मौत का कुआं, ब्रेक डांस, ड्रैगन, नाव और जादू जैसे आकर्षण भी लगाए गए हैं। यानी मेला पशु व्यापार के साथ-साथ पूरे परिवार के लिए एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुका है।
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सुविधाओं का नया चेहरा: नुमाइश मैदान और जलभराव का समाधान
इस बार प्रशासन ने मेले की बुनियादी सुविधाओं पर खास ध्यान दिया है। जिला कलक्टर कमर चौधरी ने बताया कि मेले में सुविधाओं के विस्तार और व्यापारियों के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। मेला मैदान और नुमाइश स्थल के स्वरूप को निखारने के साथ जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नाला निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
नुमाइश मैदान के विकास के अनेक कार्य प्रगतिरत हैं, यानी जसवंत पशु मेला भरतपुर आने वाले वर्षों में और आधुनिक सुविधाओं के साथ होगा।
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक खुशीराम मीना, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मृदुल सिंह, अतिरिक्त कलेक्टर शहर राहुल सैनी, जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा, गिरधारी तिवारी, सत्येंद्र गोयल, रूपेंद्र सिंह और जगत सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
जसवंत पशु मेला भरतपुर: जाने वालों के लिए काम की जानकारी
- तारीख: 15 से 25 अक्टूबर 2026 तक, भरतपुर जिला मुख्यालय का नुमाइश/मेला मैदान
- तकनीकी सेमिनार: 22 और 23 अक्टूबर को — पशुपालन से जुड़े विषयों के विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे
- कैसे पहुंचें: भरतपुर दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर स्थित है; आगरा से सड़क मार्ग से लगभग एक घंटे की दूरी पर है। भरतपुर संभाग की ताजा खबरें यहां पढ़ें
- क्या देखें: पशु प्रदर्शनी, कुश्ती दंगल, नौटंकी, लोक गायन, सांस्कृतिक संध्या और रावण दहन
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कुल मिलाकर जसवंत पशु मेला भरतपुर इस बार विरासत, व्यापार और मनोरंजन का अनोखा संगम लेकर आया है — और शुरुआत से पहले बना आय का रिकॉर्ड बता रहा है कि यह मेला हर साल और बड़ा होता जा रहा है।
प्रश्न 1: जसवंत पशु मेला भरतपुर कब से कब तक लगेगा?
उत्तर: मेले का 107वां आयोजन 15 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। 15 अक्टूबर को ध्वजारोहण के साथ इसका शुभारंभ हुआ।
प्रश्न 2: जसवंत मेले की शुरुआत किसने और कब की थी?
उत्तर: 1920 में भरतपुर के महाराजा किशन सिंह ने अपने दादा महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति में इस मेले की शुरुआत की थी। 1963 से यह राज्य स्तरीय मेले के रूप में आयोजित हो रहा है।
प्रश्न 3: मेले में कौन-कौन से राज्यों के व्यापारी आते हैं?
उत्तर: राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से भी पशुपालक, व्यापारी और दुकानदार इस मेले में हिस्सा लेते हैं।
प्रश्न 4: इस बार मेले से कितनी आय हुई है?
उत्तर: मेले के शुभारंभ से पहले ही 1 करोड़ 17 लाख 98 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष पूरे मेले की आय 92 लाख रुपये थी।