केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने शुक्रवार देर रात अफीम नीति 2026-27 जारी कर दी है। इस घोषणा के साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान के हजारों अफीम किसानों का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। पिछले साल के मुकाबले करीब 40 दिन की देरी से आई इस नीति के बाद अब किसान अफीम की खेती की तैयारियां आगे बढ़ा सकेंगे — खेतों की जुताई से लेकर बुवाई तक का काम अब रफ्तार पकड़ेगा।
चित्तौड़गढ़ के सांसद सीपी जोशी ने नई अफीम नीति जारी होने की जानकारी साझा करते हुए किसानों को बधाई दी है। हालांकि एक बात का ध्यान रहे — नीति का आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड होना अभी बाकी है, इसलिए पात्रता और शर्तों के विस्तृत प्रावधान आधिकारिक पोर्टल पर आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगे।
अब खेतों में उतरेगी बुवाई की गाड़ी: किसानों की सबसे बड़ी राहत
इस नीति का सबसे बड़ा और सीधा असर उन किसानों पर पड़ेगा जो महीनों से असमंजस में थे कि इस बार खेत तैयार करें या नहीं। मध्य प्रदेश के नीमच, मंदसौर और रतलाम के साथ राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और झालावाड़ जिलों में बड़ी संख्या में किसान लाइसेंस लेकर अफीम की खेती करते हैं। नीति जारी होने से पट्टाधारक किसानों को सबसे बड़ी राहत मिली है — अब उन्हें यह तय करने में देरी नहीं होगी कि बुवाई के लिए खेत की तैयारी कब शुरू करनी है।
अफीम की खेती में समय का विशेष महत्व होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बुवाई का सबसे अनुकूल समय 30 सितंबर से 10 अक्टूबर तक माना जाता है। देरी होने पर जब चीरा लगाने का वक्त आता है, तब तक गर्म मौसम शुरू हो जाता है, जिससे डोडे से निकलने वाली अफीम का उत्पादन घट जाता है। कई बार नारकोटिक्स विभाग द्वारा तय मात्रा से कम उत्पादन मिलने पर किसानों के पट्टे तक निरस्त हो जाते हैं। यही वजह है कि इस बार की देरी किसानों के लिए सिर्फ इंतजार नहीं, बल्कि उनकी पूरी फसल के भविष्य का सवाल बन गई थी।
40 दिन की देरी ने कैसे बढ़ा दी थी किसानों की धड़कनें
आमतौर पर केंद्र सरकार और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो हर साल सितंबर के पहले या दूसरे हफ्ते तक वार्षिक अफीम नीति जारी कर देते हैं। लेकिन इस बार नीति आने में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 40 दिन ज्यादा लग गए। बुवाई का समय नजदीक आने के बावजूद नीति घोषित नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही थी, और कई इलाकों में देरी के विरोध में आंदोलन की चर्चाएं भी शुरू हो गई थीं।
देरी से परेशान किसानों ने अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 9 सितंबर को भारतीय किसान संघ का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिला था और अफीम किसानों की समस्याओं का मांगपत्र सौंपा था। इसके बाद 15 अक्टूबर को लंबरदार प्रतिनिधि राधे सुथार ने केंद्रीय वित्त मंत्री को ईमेल के जरिए पत्र भेजकर किसान हित में नीति शीघ्र जारी कराने की मांग की थी। किसान संगठनों की इन्हीं कोशिशों के बीच अब नीति जारी हो गई है।
अफीम नीति में आखिर तय क्या होता है? पट्टा, मार्फिन और दाम का पूरा गणित
कई पाठकों के मन में सवाल होगा कि आखिर इस नीति में ऐसा क्या होता है, जिसका किसानों को हर साल इंतजार रहता है। दरअसल, अफीम की खेती देश में लाइसेंस (पट्टा) के बिना नहीं की जा सकती — भारत संयुक्त राष्ट्र द्वारा अफीम गोंद उत्पादन के लिए अधिकृत इकलौता देश है, और यहां खेती केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की निगरानी में चुनिंदा इलाकों में ही होती है। हर साल जारी होने वाली नीति में ये बातें तय होती हैं:
– पात्रता: किन किसानों को इस बार अफीम की खेती का लाइसेंस मिलेगा
– मार्फिन की मात्रा: प्रति हेक्टेयर कितना मार्फिन देना अनिवार्य होगा
– न्यूनतम उपज: फसल की न्यूनतम तय उपज कितनी रहेगी
– खरीद के दाम: सरकार किसानों से अफीम किस भाव पर खरीदेगी
– खेती की पद्धति: पारंपरिक चीरा (लुवाई-चिराई) पद्धति से खेती होगी या सीपीएस पद्धति से
पिछले साल की नीति (2025-26) में किसानों को 10-10 आरी के पट्टे दिए गए थे और प्रति हेक्टेयर 5.9 किलो मार्फिन देना अनिवार्य किया गया था। तय मात्रा में मार्फिन न देने पर अगले साल लाइसेंस नहीं मिलने की शर्त भी रखी गई थी। देशभर में करीब 50 हजार अफीम काश्तकार इस व्यवस्था से जुड़े हैं। 2026-27 की नीति के विस्तृत प्रावधान आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड होने के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन जानकारों का मानना है कि पात्रता का मूल ढांचा पिछले वर्षों जैसा ही रहने की संभावना है।
राजस्थान के तीन जिलों के लिए क्यों खास है ये खबर
राजस्थान में अफीम की खेती मुख्य रूप से चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और झालावाड़ जिलों में होती है। इन इलाकों के हजारों परिवारों की आजीविका सीधे अफीम की फसल से जुड़ी है। नीति में देरी का सबसे ज्यादा असर इन्हीं किसानों पर पड़ रहा था, क्योंकि बुवाई का सही समय निकलता जा रहा था।
चित्तौड़गढ़ के सांसद सीपी जोशी अफीम किसानों के मुद्दों को लगातार सरकार के सामने उठाते रहे हैं। इससे पहले उनके प्रयासों से ही अफीम की शुद्धता के मानकों में बड़ा बदलाव हुआ था — अब शुद्धता के लिए सिर्फ मार्फिन का प्रतिशत देखा जाता है, और 9 प्रतिशत से कम मार्फिन वाली अफीम को ही घटिया माना जाता है। पहले राख की मात्रा जैसे अन्य कारकों की वजह से भी कई किसानों की अफीम घटिया घोषित हो जाती थी और उनके पट्टे कट जाते थे। साथ ही अब FT-NIR स्पेक्ट्रोमीटर मशीन से जांच होती है, जिसकी रिपोर्ट 3-4 घंटे में आ जाती है, जबकि पहले इसमें करीब 7 दिन लगते थे।
अब आगे क्या: किसानों के लिए काम की 5 बातें
- आधिकारिक वेबसाइट पर नजर रखें: नीति का विस्तृत दस्तावेज अभी cbn.gov.in पर अपलोड होना बाकी है। पात्रता और शर्तों की आधिकारिक जानकारी वहीं से लें।
- पात्र किसानों की सूची जांचें: हर साल CBN पात्र और अपात्र किसानों की जिलेवार सूची जारी करता है। अपनी सूची में नाम जरूर देख लें।
- खेत की तैयारी में देरी न करें: नीति आते ही जुताई और बुवाई की तैयारी शुरू कर दें, क्योंकि अनुकूल बुवाई का समय पहले ही काफी आगे बढ़ चुका है।
- पिछले साल का रिकॉर्ड संभाल कर रखें: लाइसेंस की पात्रता पिछले वर्षों की उपज और मार्फिन मात्रा से जुड़ी होती है, इसलिए अपने रिकॉर्ड तैयार रखें।
- किसी बिचौलिए के झांसे में न आएं: पट्टे और लाइसेंस से जुड़ा हर काम सिर्फ अधिकृत नारकोटिक्स कार्यालय के जरिए ही करें।
एक नजर में: अफीम नीति 2026-27
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| नीति जारी करने वाली संस्था | केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) |
| जारी होने की तारीख | 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार देर रात) |
| पिछले साल से देरी | करीब 40 दिन |
| मध्य प्रदेश के प्रभावित जिले | नीमच, मंदसौर, रतलाम |
| राजस्थान के प्रभावित जिले | चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, झालावाड़ |
| देशभर में अफीम काश्तकार (अनुमानित) | करीब 50 हजार |
| बुवाई का अनुकूल समय | 30 सितंबर से 10 अक्टूबर |
| विस्तृत प्रावधान | आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड होना बाकी |
कुल मिलाकर, 40 दिन की देरी के बाद जारी हुई अफीम नीति 2026-27 ने किसानों के चेहरे पर राहत की मुस्कान लौटा दी है। अब सबकी निगाहें आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तृत प्रावधानों के अपलोड होने पर टिकी हैं — इन्हीं के आधार पर तय होगा कि किन किसानों को इस बार अफीम की खेती का लाइसेंस मिलेगा और उन्हें किन शर्तों का पालन करना होगा। बुवाई का समय पहले ही आगे बढ़ चुका है, इसलिए किसानों के लिए अब हर दिन कीमती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: अफीम नीति 2026-27 कब जारी हुई?
जवाब: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने 23 अक्टूबर 2026 की देर रात अफीम नीति 2026-27 जारी की। पिछले साल के मुकाबले इस बार नीति करीब 40 दिन की देरी से आई है।
सवाल 2: इस नीति से राजस्थान के किन जिलों के किसानों को फायदा होगा?
जवाब: राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और झालावाड़ जिलों में लाइसेंस लेकर अफीम की खेती करने वाले हजारों किसानों को सीधा फायदा होगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश के नीमच, मंदसौर और रतलाम के किसान भी इससे जुड़े हैं।
सवाल 3: क्या बिना लाइसेंस के अफीम की खेती की जा सकती है?
जवाब: बिल्कुल नहीं। भारत में अफीम की खेती सिर्फ केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो से जारी लाइसेंस (पट्टा) लेकर ही की जा सकती है। बिना लाइसेंस खेती करना गंभीर अपराध है।
सवाल 4: नीति के विस्तृत प्रावधान कहां देखे जा सकते हैं?
जवाब: नीति के विस्तृत प्रावधान और पात्र किसानों की जिलेवार सूची केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट cbn.gov.in पर देखी जा सकती है। फिलहाल नई नीति का अपलोड होना बाकी है, इसलिए वेबसाइट पर नियमित नजर बनाए रखें।
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स्रोत: mpbreakingnews.in, ETV Bharat, खासखबर, अमर उजाला। नीति के विस्तृत प्रावधान आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड होने के बाद स्पष्ट होंगे।