जयपुर में गुरुवार की देर रात मुख्यमंत्री कार्यालय से एक ऐसा आदेश जारी हुआ, जिसने पूरे प्रशासनिक और पुलिस तंत्र को हिला दिया। राजस्थान सरकार के मुखिया भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार के 21 अलग-अलग प्रकरणों में 27 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति दे दी है। दूसरे शब्दों में — 27 अधिकारी अभियोजन स्वीकृति का मतलब है कि अब इन अधिकारियों के खिलाफ अदालतों में मुकदमे चलेंगे और कानूनी शिकंजा कसेगा। इस फैसले में उपखंड अधिकारी (SDM) से लेकर पुलिस उपाधीक्षक (DSP) तक, कोई छोटा चेहरा नहीं है।
इस स्वीकृति का सबसे बड़ा संदेश साफ है: भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी कितने भी बड़े पद पर बैठे हों, अब उन पर सीधे अदालत का दरवाजा खुल गया है। 27 अधिकारी अभियोजन स्वीकृति का यह आदेश राजस्थान की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को जमीन पर उतारने वाला कदम बताया जा रहा है।
क्यों अहम है यह फैसला: वर्षों से अटकी थीं फाइलें
पहले समझिए कि अभियोजन स्वीकृति क्या होती है। जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) या किसी जांच एजेंसी की जांच में किसी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उसके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने के लिए सरकार की अनुमति जरूरी होती है — इसी को अभियोजन स्वीकृति कहते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन 21 प्रकरणों की जांच ACB और संबंधित एजेंसियों ने काफी पहले पूरी कर ली थी, लेकिन फाइलें महीनों से अभियोजन स्वीकृति का इंतजार कर रही थीं। बिना इस हरी झंडी के न चार्जशीट दाखिल हो सकती थी, न अदालती कार्यवाही आगे बढ़ सकती थी। मुख्यमंत्री स्तर से स्वीकृति मिलते ही अब संबंधित अदालतों में जल्द ही चार्जशीट दाखिल होगी और मुकदमों का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
27 अधिकारी अभियोजन स्वीकृति: गाज किस पर गिरी, SDM से DSP तक
राज्य सरकार की ओर से जारी विवरण के मुताबिक, इस कार्रवाई के दायरे में आए अधिकारी ये हैं:
- 2 उपखंड अधिकारी (SDM) — भू-राजस्व और जमीन के फर्जीवाड़े के मामलों में
- 1 पुलिस उपाधीक्षक (DSP) — भ्रष्ट गतिविधियों और आय से अधिक संपत्ति के आरोप में
- 1 राजस्थान लेखा सेवा (ALS) अधिकारी — सरकारी धन के वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी पर
- 1 विकास अधिकारी (BDO) — ग्रामीण विकास से जुड़ी अनियमितताओं में
- 15 अन्य अधिकारी — 8 प्रमुख राज्य विभागों के विभिन्न प्रकरणों में
कुल मिलाकर 21 प्रकरणों में 27 अधिकारियों पर यह एक्शन हुआ है।
2 SDM: जमीन के खेल में फंसे
पहले SDM का मामला कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजन के लिए नियम विरुद्ध नियमन और भू-उपयोग परिवर्तन करने से जुड़ा है। आरोप है कि अधिकारी ने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी स्वार्थ के लिए भूमि का रूपांतरण कर दिया, जिससे राज्य सरकार के राजस्व को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा।
दूसरे SDM का मामला और भी गंभीर है — पद का गलत इस्तेमाल कर नियम विरुद्ध तरीके से खातेदारी भूमि का दावा डिक्री करवाने और इसके बदले में अवैध परितोषण (रिश्वत) लेने का। जांच एजेंसियों को मिले साक्ष्यों के आधार पर इनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई है।
DSP पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप
पुलिस तंत्र पर भी हंटर चला है। एक तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक के खिलाफ भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त रहने, पद के प्रभाव से अवैध राशि वसूलने और ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्तियां अर्जित करने के मामले में अभियोजन स्वीकृति दी गई है।
इसके साथ ही राजस्थान लेखा सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ सरकारी धन के वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में, तथा एक विकास अधिकारी के खिलाफ ग्रामीण विकास से जुड़े मामलों में भी अभियोजन की मंजूरी दी गई है।
इन 8 विभागों के 15 प्रकरण भी दायरे में
| विभाग | प्रकरणों की संख्या |
|---|---|
| कृषि एवं उद्यानिकी विभाग | 5 |
| सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) | 3 |
| वाणिज्यिक कर विभाग | 2 |
| चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग | 1 |
| पशु चिकित्सा विभाग | 1 |
| देवस्थान विभाग | 1 |
| इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) | 1 |
| सहकारिता विभाग | 1 |
| कुल | 15 |
इन विभागों के प्रकरणों में जनता को परेशान करने, वित्तीय अनियमितता बरतने और पद के दुरुपयोग के आरोप हैं। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग में सबसे ज्यादा 5 प्रकरण हैं।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति: 27 अधिकारी अभियोजन स्वीकृति का बड़ा संदेश
यह पहली बार नहीं है जब भजनलाल सरकार ने भ्रष्टाचार पर सख्ती दिखाई हो। सरकार के मुताबिक पिछले ढाई वर्षों में:
- एक आईएएस समेत 103 अधिकारी निलंबित किए गए
- 6 अधिकारी बर्खास्त हुए
- 11 अधिकारियों की आजीवन पेंशन रोक दी गई
- 108 प्रकरणों में पहले ही अभियोजन स्वीकृति दी जा चुकी है
अब 27 अधिकारियों के खिलाफ 21 नए प्रकरणों में मंजूरी के साथ यह सूची और लंबी हो गई है। सरकार के अधिकारियों का कहना है कि आम जनता की सुनवाई सुनिश्चित करने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी था कि भ्रष्टाचार में लिप्त बड़े से बड़े अधिकारी पर भी बिना किसी दबाव के सीधी कार्रवाई हो।
अब आगे क्या होगा: चार्जशीट से लेकर मुकदमे तक
अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद की प्रक्रिया सीधी है:
- चार्जशीट दाखिल होगी — ACB और संबंधित जांच एजेंसियां अब संबंधित अदालतों में जल्द ही चार्जशीट पेश करेंगी।
- अदालत में सुनवाई — चार्जशीट पर अदालत विचार कर मुकदमे की कार्यवाही शुरू करेगी।
- विभागीय कार्रवाई — अदालती कार्यवाही के साथ-साथ संबंधित विभाग अपने स्तर पर भी नियमानुसार विभागीय कार्रवाई चला सकते हैं।
गौरतलब है कि सरकार की ओर से जारी जानकारी में अधिकारियों के नाम और उनके जिलों का ब्योरा नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद नाम सार्वजनिक होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: 27 अधिकारी अभियोजन स्वीकृति का फैसला किसने लिया?
उत्तर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 23 अक्टूबर 2026 की देर रात जारी आदेश में भ्रष्टाचार के 21 प्रकरणों में 27 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति दी है।
प्रश्न: इन 27 अधिकारियों में कौन-कौन शामिल हैं?
उत्तर: 2 उपखंड अधिकारी (SDM), 1 पुलिस उपाधीक्षक (DSP), 1 राजस्थान लेखा सेवा अधिकारी, 1 विकास अधिकारी (BDO) और 8 प्रमुख विभागों के 15 अन्य अधिकारी इस दायरे में हैं।
प्रश्न: अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अब क्या होगा?
उत्तर: अब ACB और जांच एजेंसियां संबंधित अदालतों में चार्जशीट दाखिल करेंगी, जिसके बाद मुकदमों की सुनवाई शुरू होगी।
प्रश्न: क्या यह पहली बार हुआ है?
उत्तर: नहीं। सरकार के मुताबिक पिछले ढाई वर्षों में 108 प्रकरणों में पहले ही अभियोजन स्वीकृति दी जा चुकी है, 103 अधिकारी निलंबित और 6 बर्खास्त किए गए हैं।
Raj News पर राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ते रहें। भ्रष्टाचार के खिलाफ पहले हुई बड़ी कार्रवाइयों की जानकारी भी यहां उपलब्ध है।