Anupgarh Bandh: सिंचाई पानी की मांग पर किसानों ने बंद किया शहर, ADM कार्यालय घेराव की तैयारी — सरसों बुवाई पर संकट

किसानों की तीन बड़ी मांगें क्या हैं?

श्रीगंगानगर। रबी सीजन की दहलीज पर खड़े किसानों के लिए अक्टूबर का महीना सबसे अहम होता है, और इसी समय श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ में सिंचाई पानी को लेकर किसानों का गुस्सा सड़क पर उतर आया है। बुधवार, 30 सितंबर को किसान-मजदूर-व्यापारी संघर्ष समिति के आह्वान पर अनूपगढ़ में पूर्ण बंद रहा। अनूपगढ़ मंडी समेत शहर के ज्यादातर व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और किसानों ने ADM कार्यालय के घेराव का ऐलान भी कर दिया है। किसानों का साफ कहना है कि सिर्फ मौखिक आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा — पानी का लिखित रेगुलेशन जारी होना चाहिए।

किसान नेता श्योपत राम के मुताबिक, अनूपगढ़ शाखा (कैनाल) में किसानों को पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं मिल पा रहा है। इसको लेकर संघर्ष समिति की मांगें बेहद स्पष्ट हैं:

मांगविवरण
समूहवार पानी का बंटवाराअनूपगढ़ शाखा के चार समूहों में से दो समूहों को तुरंत सिंचाई पानी उपलब्ध कराया जाए
अक्टूबर में दो बारियांअक्टूबर महीने में किसानों को दो बार पानी की नियत बारियां दी जाएं, ताकि बुवाई समय पर हो सके
लिखित रेगुलेशनपानी के रेगुलेशन को लिखित रूप में जारी किया जाए, सिर्फ मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं होगा

किसानों का तर्क सीधा है — जब तक सरकार की ओर से लिखित आदेश नहीं आता, तब तक उन्हें भरोसा नहीं होता कि पानी कब और कितना मिलेगा। बैठक में प्रशासन ने पानी छोड़ने का आश्वासन तो दिया था, लेकिन समिति के अनुसार वह भरोसा कागज पर नहीं उतरा।

सरसों की बुवाई से क्यों जुड़ा है पूरा मामला?

अनूपगढ़ इलाके में किसान अक्टूबर के पहले पखवाड़े में सरसों की बुवाई शुरू कर देते हैं। खेत की तैयारी, पलेवा (पहली सिंचाई) और सही समय पर बीज की बुवाई — तीनों के लिए नहर का पानी जरूरी है। अगर अक्टूबर में समय पर दो बारियां नहीं मिलीं, तो बुवाई पिछड़ जाएगी और इसका सीधा असर उपज पर पड़ेगा।

सरसों इस क्षेत्र की प्रमुख रबी फसल है। बुवाई में एक-दो हफ्ते की देरी भी फसल चक्र को बिगाड़ देती है और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। यही वजह है कि किसानों ने अक्टूबर की दो बारियों की मांग को सबसे ऊपर रखा है — यह सिर्फ पानी की मांग नहीं, पूरे सीजन की कमाई का सवाल है।

प्रशासन की ओर से अब तक क्या हुआ?

मांगों को लेकर प्रशासन के साथ बैठक हुई थी। बैठक में अनूपगढ़ शाखा में पानी छोड़ने का मौखिक आश्वासन दिया गया। लेकिन किसानों का अनुभव रहा है कि मौखिक आश्वासन कई बार अमल में नहीं बदलते। इसलिए संघर्ष समिति ने फैसला किया कि जब तक पानी के रेगुलेशन का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

इसी फैसले के तहत 30 सितंबर को पूर्ण बंद और ADM कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम तय किया गया। समिति ने किसानों से अपील की है कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से ADM कार्यालय को चारों ओर से घेरा जाए और कार्यालय का कामकाज ठप किया जाए। बंद को व्यापारिक संगठनों का भी समर्थन मिला है, जिससे शहर में आंदोलन का असर और बढ़ गया।

ADM कार्यालय घेराव की तैयारी, पुलिस अलर्ट पर

घेराव के ऐलान को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। ADM कार्यालय के आसपास बैरिकेडिंग लगाई गई है और अलग-अलग स्थानों पर पुलिस के करीब 150 जवान तैनात किए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने भीड़ और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही को लेकर भी इंतजाम किए हैं।

DYSP कैलाश दान का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में कानून-व्यवस्था को भंग नहीं होने दिया जाएगा और सभी लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें, कानून के दायरे में रहकर प्रदर्शन करें।

आंदोलन की पृष्ठभूमि: चक्का जाम से बंद तक

यह आंदोलन एक दिन में नहीं भड़का। इससे पहले भी किसान सिंचाई पानी की मांग को लेकर चक्का जाम कर चुके हैं। उस समय प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन किसानों के मुताबिक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। अनूपगढ़-घड़साना इलाके में किसानों और प्रशासन के बीच वार्ता भी हुई, लेकिन वह बेनतीजा रही।

किसानों का कहना है कि वे लगातार प्रशासन के संपर्क में रहे, मांगें लिखित में भी दी गईं, लेकिन अमल के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिले। इसी निराशा ने आंदोलन को तेज किया और अब किसान “आर-पार के मूड” में नजर आ रहे हैं। बंद और घेराव इसी बढ़ते दबाव का नतीजा है।

आगे क्या हो सकता है?

अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर हैं। किसानों की मांग लिखित रेगुलेशन की है, और अगर प्रशासन ने इसे जारी कर दिया तो आंदोलन थम सकता है। लेकिन अगर वार्ता फिर बेनतीजा रही, तो आंदोलन के और तेज होने की आशंका है — किसान पहले ही चक्का जाम जैसा कदम उठा चुके हैं।

किसानों के लिए फिलहाल सबसे अहम सलाह यही है कि वे संघर्ष समिति के आधिकारिक बयानों पर नजर रखें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाते रहें। वहीं प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह लिखित रेगुलेशन के जरिए किसानों का भरोसा जीते, ताकि रबी सीजन की बुवाई प्रभावित न हो। पानी का यह संघर्ष सिर्फ अनूपगढ़ का नहीं — यह उस हर किसान की कहानी है जो फसल की एक बारी के लिए नहर की ओर देखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. अनूपगढ़ में बंद क्यों बुलाया गया है?

सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसान-मजदूर-व्यापारी संघर्ष समिति के आह्वान पर 30 सितंबर को अनूपगढ़ में पूर्ण बंद रखा गया, जिसमें मंडी और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे।

2. किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?

किसान चाहते हैं कि अनूपगढ़ शाखा के चार समूहों में से दो समूहों को पानी दिया जाए, अक्टूबर में दो पानी की बारियां मिलें ताकि सरसों की बुवाई समय पर हो, और पानी का रेगुलेशन लिखित रूप में जारी किया जाए।

3. ADM कार्यालय का घेराव कब होगा?

संघर्ष समिति ने 30 सितंबर को ही ADM कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है। किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से कार्यालय को चारों ओर से घेरने की योजना बनाई है।

4. क्या प्रशासन ने पानी देने का कोई भरोसा दिया है?

हां, बैठक में प्रशासन ने अनूपगढ़ शाखा में पानी छोड़ने का मौखिक आश्वासन दिया था। लेकिन किसानों का कहना है कि सिर्फ मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा — लिखित रेगुलेशन जारी होना चाहिए।

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