बुधवार की दोपहर जयपुर का विद्युत भवन कुछ अलग ही रंग में दिखा। प्रदेशभर से आए करीब 200 कर्मचारी यहां जुटे थे — मन में एक ही सवाल: आखिर उनकी वर्षों पुरानी मांग पर फैसला कब होगा? विद्युत कर्मचारी ज्ञापन सौंपने के इस कार्यक्रम के बाद जयपुर डिस्कॉम की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आरती डोगरा को खुद सामने आकर ज्ञापन लेना पड़ा और अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देने पड़े।
ये कर्मचारी राजस्थान की पांचों विद्युत कंपनियों में मंत्रालयिक संवर्ग के पदों के पुनर्गठन की मांग कर रहे हैं। वित्त विभाग का आदेश पहले से मौजूद है, बस उसे पूरी तरह लागू करने की जरूरत है।
विद्युत कर्मचारी ज्ञापन के पीछे: 200 कर्मचारी क्यों एकजुट हुए
विद्युत कर्मचारी ज्ञापन की जड़ में मंत्रालयिक संवर्ग के पुनर्गठन की पुरानी मांग है। दो कर्मचारी संगठनों के संयुक्त नेतृत्व में कर्मचारी बुधवार को जयपुर पहुंचे। उनकी मुख्य मांगें दो हैं:
पहली — मंत्रालयिक संवर्ग के पदों का पुनर्गठन किया जाए। यानी जो पद-ढांचा वर्षों पहले तय हुआ था, उसे मौजूदा जरूरतों के हिसाब से दोबारा व्यवस्थित किया जाए।
दूसरी — संस्थापन अधिकारी सहित अन्य पदों का सृजन किया जाए। कर्मचारियों का तर्क है कि इन पदों से मंत्रालयिक कामकाज में स्पष्टता और जवाबदेही बढ़ेगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान विभिन्न जिलों से आए रमेश चौधरी, रामकेश रेगर, पवन कुमार शर्मा, उदय कुमावत, योगिता मीणा और पूजा चावड़ा सहित अनेक कर्मचारी मौजूद रहे। इतने जिलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी बताती है कि यह मांग किसी एक जिले की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के कर्मचारियों की साझा आवाज है।
पांचों बिजली कंपनियां: पूरा हिसाब
विद्युत कर्मचारी ज्ञापन पांचों विद्युत कंपनियों से जुड़ा है। राजस्थान में बिजली का काम इन्हीं कंपनियों के बीच बंटा है:
| क्रम | कंपनी का नाम | मुख्यालय | प्रमुख कार्य |
|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर विद्युत वितरण निगम (JVVNL) | जयपुर | जयपुर संभाग सहित कई जिलों में बिजली वितरण |
| 2 | अजमेर विद्युत वितरण निगम (AVVNL) | अजमेर | अजमेर संभाग और आसपास के क्षेत्रों में वितरण |
| 3 | जोधपुर विद्युत वितरण निगम (JdVVNL) | जोधपुर | पश्चिमी राजस्थान में बिजली आपूर्ति |
| 4 | राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम (RVPN) | जयपुर | हाईटेंशन लाइनों से बिजली का प्रसारण |
| 5 | राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम (RVUNL) | जयपुर | थर्मल और अन्य स्रोतों से बिजली उत्पादन |
इन सभी कंपनियों में मंत्रालयिक संवर्ग के हजारों कर्मचारी काम करते हैं। कर्मचारियों के अनुसार पुनर्गठन की मांग सभी पांचों पर एक जैसा लागू होनी चाहिए।
वित्त विभाग का आदेश: मांग की सबसे मजबूत नींव
विद्युत कर्मचारी ज्ञापन में जिस सबसे ठोस बिंदु का हवाला दिया गया है, वह है राजस्थान सरकार के वित्त विभाग का आदेश। कर्मचारी संगठनों ने ज्ञापन में आदेश क्रमांक एफ. 8(12)(01) वित्त/व्यय/2022, जयपुर, दिनांक 24 अक्टूबर 2025 का हवाला दिया है।
उनका कहना है कि इस आदेश के अनुरूप मंत्रालयिक संवर्ग में संस्थापन अधिकारी सहित अन्य पदों का पुनर्गठन जरूरी है। सीधी भाषा में कहें तो — नियम पहले से बना हुआ है, अब उसे पांचों कंपनियों में अक्षरशः लागू करने की बारी है।
आरती डोगरा का जवाब: प्रबंधन की ओर से क्या आया
विद्युत कर्मचारी ज्ञापन प्राप्त करने के बाद जयपुर डिस्कॉम की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आरती डोगरा ने तत्काल प्रतिक्रिया दी — ज्ञापन लाने वाले प्रतिनिधिमंडल से उन्होंने पूरे बिंदु सुने और फिर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य सरकार के आदेश की अक्षरशः पालना सुनिश्चित की जाए।
यह जवाब कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण बना। प्रबंधन के निर्देशों के बाद कर्मचारी संगठनों ने कहा कि उन्हें समाधान की उम्मीद जगी है। 200 कर्मचारियों की एकजुटता ने संगठनों की गंभीरता भी सामने रखी।
कर्मचारियों के तर्क: क्यों जरूरी है पदों का पुनर्गठन
ज्ञापन देने आए कर्मचारियों के तीन बड़े तर्क हैं:
पहला तर्क — पदोन्नति के रास्ते साफ होंगे: स्पष्ट पद-ढांचा न होने से कई कर्मचारी सालों से एक ही पद पर अटके हैं। पुनर्गठन से पदोन्नति की सीढ़ी साफ होगी।
दूसरा तर्क — प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी: संस्थापन अधिकारी जैसे पदों से दफ्तरी कामकाज में जवाबदेही बढ़ेगी।
तीसरा तर्क — उचित अधिकार: कर्मचारियों का कहना है कि वित्त विभाग का आदेश उनके हक में है। इसे लागू करना कोई एहसान नहीं, उनका उचित अधिकार है।
ये तीनों तर्क मिलकर विद्युत कर्मचारी ज्ञापन को एक नीतिगत मांग में बदल देते हैं।
विद्युत कर्मचारी ज्ञापन के बाद आगे क्या? तीन संभावित रास्ते
अब सवाल यह है कि इस विद्युत कर्मचारी ज्ञापन के बाद क्या होगा। तीन रास्ते दिखते हैं:
रास्ता 1 — आदेश की पालना: आरती डोगरा के निर्देशों के बाद अगर पांचों कंपनियां वित्त विभाग के आदेश को लागू करती हैं, तो मामला शांतिपूर्वक सुलझ सकता है।
रास्ता 2 — आगे का दबाव: कार्रवाई में देरी हुई तो संगठन अगले चरण की रणनीति बनाएंगे — ज्यादा जिलों से समर्थन या सरकार के उच्च स्तर पर ज्ञापन।
रास्ता 3 — समिति गठन: कई बार ऐसी मांगों पर अध्ययन समिति बनती है। पदों के पुनर्गठन की रूपरेखा के लिए भी समिति बन सकती है।
फिलहाल कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि आदेश की प्रभावी पालना से लंबित मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई होगी। आने वाले हफ्ते बताएंगे कि यह उम्मीद कितनी पूरी होती है।
मुख्य मांगें एक नजर में — विद्युत कर्मचारी ज्ञापन के बिंदु
- पांचों विद्युत कंपनियों में मंत्रालयिक संवर्ग के पदों का पुनर्गठन हो
- संस्थापन अधिकारी सहित अन्य पदों का सृजन किया जाए
- वित्त विभाग के आदेश (एफ. 8(12)(01) वित्त/व्यय/2022, दिनांक 24 अक्टूबर 2025) की अक्षरशः पालना हो
- आदेश पांचों कंपनियों में एक जैसा लागू हो, चुनिंदा में नहीं
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: विद्युत कर्मचारी ज्ञापन किसने सौंपा?
उत्तर: दो कर्मचारी संगठनों के संयुक्त नेतृत्व में विभिन्न जिलों के करीब 200 कर्मचारियों ने जयपुर के विद्युत भवन में प्रदर्शन के बाद यह ज्ञापन सौंपा।
प्रश्न 2: कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: पांचों कंपनियों में मंत्रालयिक पदों का पुनर्गठन, संस्थापन अधिकारी सहित पदों का सृजन, और वित्त विभाग के 24 अक्टूबर 2025 के आदेश की पूरी पालना।
प्रश्न 3: ज्ञापन किसे सौंपा गया?
उत्तर: जयपुर डिस्कॉम की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आरती डोगरा को। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आदेश की अक्षरशः पालना के निर्देश दिए।
प्रश्न 4: क्या यह मांग नई है?
उत्तर: नहीं। कर्मचारी संगठनों के अनुसार पदों के पुनर्गठन की मांग लंबे समय से लंबित है। वित्त विभाग का आदेश आने के बाद यह और तेज हो गई है।
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