बाबूलाल कटारा RPSC: जेल की सलाखों के पीछे ही खत्म हुआ कार्यकाल, बर्खास्तगी की कार्यवाही अधूरी — आयोग में अब 4 पद खाली

राजस्थान लोक सेवा आयोग के जिस सदस्य के एक हस्ताक्षर से लाखों युवाओं के भविष्य का फैसला होता था, उसी बाबूलाल कटारा RPSC सदस्य का कार्यकाल बुधवार को जेल की सलाखों के पीछे ही समाप्त हो गया। राज्य सरकार चाहती थी कि कार्यकाल खत्म होने से पहले ही उन्हें बर्खास्त कर दिया जाए — इसके लिए राष्ट्रपति को रेफरेंस भी भेजा गया था — लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और कटारा जेल में रहते हुए ही आयोग से बाहर हो गए। उनके जाने के बाद आयोग में सदस्यों के खाली पदों की संख्या चार हो गई है, और जून से आयोग बिना स्थायी अध्यक्ष के चल रहा है।

बाबूलाल कटारा को सरकार बर्खास्त क्यों नहीं कर सकी

संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को सिर्फ राष्ट्रपति ही हटा सकते हैं, और दुर्व्यवहार के मामलों में यह फैसला उच्चतम न्यायालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर होता है। राज्य सरकार ने कटारा के खिलाफ राष्ट्रपति को रेफरेंस भेजा था, लेकिन जांच और प्रक्रिया में इतना समय लग गया कि 14 अक्टूबर को उनका कार्यकाल ही समाप्त हो गया। कोई बर्खास्तगी आदेश जारी नहीं हुआ — यानी जिसे सरकार हटाना चाहती थी, वह तकनीकी रूप से “कार्यकाल पूरा करके” बाहर हुआ, और संवैधानिक बर्खास्तगी की कार्यवाही अधूरी रह गई।

बाबूलाल कटारा के बाद RPSC में चार पद खाली

कटारा के जाने के बाद आयोग में सदस्यों के चार पद खाली हो गए हैं, और जून से आयोग बिना स्थायी अध्यक्ष के चल रहा है — अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के पास है। उनके साथ प्रो. अयूब खान, हेमंत प्रियदर्शी, प्रो. दीपक शर्मा, प्रो. सुशील बिस्सू और प्रो. संतोष आनंद सदस्य के तौर पर काम कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि खाली पदों का सीधा असर भर्ती परीक्षाओं के कैलेंडर और परिणामों पर पड़ता है। RPSC भर्ती 2026 का हाल पहले ही चर्चा में रहा है — नेतृत्व की यह कमी अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ा सकती है।

पेपर लीक से जेल तक: कैसे फंसे थे बाबूलाल कटारा

बाबूलाल कटारा का नाम पहली बार 18 अप्रैल 2023 को सुर्खियों में आया, जब राज्य के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने उन्हें वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया। उनके साथ आयोग के बर्खास्त ड्राइवर गोपाल सिंह और विजय कटारा को भी गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया था कि पेपर लीक के इस नेटवर्क की कड़ियां आयोग के अंदर तक पहुंची हुई थीं।

इसके बाद तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने जनवरी 2024 में कटारा को निलंबित कर दिया। जांच आगे बढ़ी तो कटारा की पुलिस उप निरीक्षक (SI) भर्ती-2021 के पेपर लीक प्रकरण में भी संलिप्तता पाई गई। इसी SI भर्ती-2021 मामले में परीक्षा रद्द होने के बाद सैकड़ों चयनित कर्मचारियों की सेवा पर भी असर पड़ा था।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कटारा की संपत्ति का ब्योरा जुटाया, और सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी जांच में शामिल हुए — मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू भी सामने आए। हाल ही में कटारा ने बेटे डॉ. दीपेश कटारा के विवाह (12 दिसंबर) का हवाला देकर 60 दिन की अंतरिम जमानत मांगी, लेकिन अदालतों ने याचिकाएं खारिज कर दीं। तीन मामलों में उन्हें पुलिस अभिरक्षा में विवाह कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति जरूर मिली।

टाइमलाइन: कटारा प्रकरण की अहम तारीखें

तारीखघटना
18 अप्रैल 2023वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 पेपर लीक में SOG ने बाबूलाल कटारा, गोपाल सिंह और विजय कटारा को गिरफ्तार किया
जनवरी 2024तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने कटारा को RPSC सदस्य पद से निलंबित किया
2024SI भर्ती-2021 पेपर लीक में भी संलिप्तता उजागर, ACB ने संपत्ति का ब्योरा जुटाया
9 अक्टूबर 2026बेटे की शादी के लिए अंतरिम जमानत याचिकाएं खारिज, कटारा जेल में ही रहे
14 अक्टूबर 2026जेल में रहते हुए RPSC सदस्य का कार्यकाल समाप्त, बर्खास्तगी की कार्यवाही अधूरी

वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक मामले में जांच अभी भी जारी है — हाल ही में SOG ने इस नेटवर्क की 70वीं गिरफ्तारी की थी, जो बताता है कि यह मामला कितना गहरा है।

अभ्यर्थियों के लिए इसका क्या मतलब है

बाबूलाल कटारा का कार्यकाल खत्म होना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है — यह भर्ती व्यवस्था में विश्वास का सवाल है। पेपर लीक के मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा हिलाया है। SI भर्ती-2021 रद्द होने से लेकर वरिष्ठ अध्यापक भर्ती के विवाद तक, सबसे ज्यादा नुकसान मेहनत करने वाले युवाओं का हुआ।

अब आयोग में चार पद खाली हैं और स्थायी अध्यक्ष नहीं है। अभ्यर्थी RPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर भर्ती कैलेंडर और नोटिफिकेशन पर नजर रखें, और परीक्षा से जुड़ी हर सूचना सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करें। पेपर लीक के बाद आयोग ने प्रक्रिया में सुधार किए हैं — जैसे OMR में पांचवां विकल्प — लेकिन संस्थागत खालीपन भरना अब सरकार की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बाबूलाल कटारा कौन थे?

बाबूलाल कटारा राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्य थे। वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 और SI भर्ती-2021 के पेपर लीक मामलों में नाम आने के बाद SOG ने उन्हें अप्रैल 2023 में गिरफ्तार किया था, और जनवरी 2024 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

बाबूलाल कटारा का RPSC कार्यकाल कब समाप्त हुआ?

14 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को उनका कार्यकाल समाप्त हुआ। उस समय वह पेपर लीक और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जेल में बंद थे।

सरकार उन्हें बर्खास्त क्यों नहीं कर सकी?

संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत RPSC सदस्य को हटाने के लिए राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट की जांच रिपोर्ट के आधार पर आदेश जारी करना होता है। सरकार ने रेफरेंस भेजा था, लेकिन प्रक्रिया कार्यकाल समाप्त होने से पहले पूरी नहीं हो सकी।

अब RPSC में कितने पद खाली हैं?

कटारा के जाने के बाद आयोग में सदस्यों के चार पद खाली हो गए हैं। जून 2026 से आयोग में स्थायी अध्यक्ष भी नहीं है; लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।

पेपर लीक के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। SOG की जांच जारी है, अदालतों में मामले लंबित हैं, और आयोग को नए सिरे से भरोसा जीतना होगा। अभ्यर्थियों के लिए संदेश साफ है — मेहनत जारी रखें, लेकिन हर सूचना को आधिकारिक स्रोत से ही सत्यापित करें।

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