रबी की बुवाई नजदीक आते ही खेतों में सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ने वाली है। इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम (RVUN) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेंद्र श्रृंगी ने सोमवार को सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की सभी इकाइयों का निरीक्षण किया। सूरतगढ़ थर्मल पावर प्रदेश का सबसे बड़ा तापीय विद्युत गृह है, जिसकी कुल क्षमता 2820 मेगावाट है। CMD ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रबी सीजन में प्रदेश को बिजली की किल्लत न हो — सभी इकाइयां अधिकतम उपलब्धता के साथ चलें।
रबी सीजन में बिजली की मांग क्यों बढ़ जाती है
अक्टूबर के आखिर से नवंबर तक रबी की बुवाई जोरों पर होती है। गेहूं, सरसों, चना और जौ की बुवाई के बाद ट्यूबवेल और कृषि मोटरें घंटों चलती हैं, जिससे कृषि फीडरों पर बिजली की खपत चरम पर पहुंच जाती है। ऐसे में कोई बड़ी इकाई बंद हो या कोयला आपूर्ति अटके, तो सीधा असर सिंचाई और घरों की बिजली पर पड़ता है। इसीलिए हर साल रबी से पहले बड़े प्लांटों की तैयारी की समीक्षा होती है — इस बार CMD खुद सूरतगढ़ पहुंचे। धौलपुर में भी रबी से पहले किसानों को तय समय पर बिजली का भरोसा मिला था।
सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन: 2820 मेगावाट की ताकत
सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में स्थित है और राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम द्वारा संचालित प्रदेश का सबसे बड़ा कोयला आधारित विद्युत गृह है। इसकी कुल 2820 मेगावाट क्षमता 6 इकाइयों (प्रत्येक 250 मेगावाट) और 2 सुपरक्रिटिकल इकाइयों (प्रत्येक 660 मेगावाट) से मिलकर बनी है। सुपरक्रिटिकल तकनीक वाली इकाइयां पारंपरिक इकाइयों के मुकाबले कम कोयले में ज्यादा बिजली बनाती हैं और प्रदूषण भी अपेक्षाकृत कम करती हैं। प्रदेश की कुल बिजली जरूरत का एक बड़ा हिस्सा अकेले इसी प्लांट से पूरा होता है, इसलिए इसकी एक भी इकाई का बंद रहना पूरे ग्रिड पर दबाव डाल देता है। CMD के निरीक्षण का सबसे बड़ा संदेश यही था — सर्दियों और रबी के महीनों में सभी 8 इकाइयां पूरी दक्षता के साथ चलनी चाहिए।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली: पीक आवर्स का नया समाधान
निरीक्षण के दौरान CMD ने सूरतगढ़ थर्मल पावर में लगाई जा रही 2×125 मेगावाट ऑवर क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) की प्रगति की भी समीक्षा की। आसान भाषा में कहें तो BESS बिजली का एक विशाल “पावर बैंक” है — मांग कम होने पर अतिरिक्त बिजली बैटरियों में जमा होती है और शाम के पीक आवर्स में यही बिजली ग्रिड को वापस मिल जाती है। इससे महंगी बिजली खरीदने या कटौती की नौबत नहीं आती। CMD ने इस परियोजना में तेजी लाकर इसे दिसंबर 2026 की समय-सीमा से पहले पूरा करने के निर्देश दिए।
सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल स्थापित क्षमता | 2820 मेगावाट |
| इकाइयां | 6 x 250 MW + 2 x 660 MW (सुपरक्रिटिकल) |
| संचालक | राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम (RVUN) |
| निरीक्षण की तारीख | 12 अक्टूबर 2026 |
| निरीक्षणकर्ता | CMD देवेंद्र श्रृंगी |
| BESS परियोजना | 2 x 125 मेगावाट ऑवर, लक्ष्य दिसंबर 2026 से पहले |
| मुख्य उद्देश्य | रबी सीजन में निर्बाध विद्युत उत्पादन |
कोयले के भंडार और कंट्रोल रूम की समीक्षा
थर्मल प्लांट की जान उसका कोयला है — भंडार खत्म तो उत्पादन ठप। CMD ने निरीक्षण के दौरान विद्युतगृहों में कोयले की उपलब्धता, वर्तमान स्टॉक और आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पर्याप्त कोयला भंडार हर समय बनाए रखा जाए और आपूर्ति शृंखला में कोई रुकावट न आने दी जाए, ताकि विद्युत उत्पादन पर किसी तरह का प्रतिकूल असर न पड़े। इसके साथ ही उन्होंने दोनों विद्युतगृहों के कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया, जहां से इकाइयों के संचालन की पल-पल की निगरानी होती है। कंट्रोल रूम किसी भी तकनीकी गड़बड़ी की सबसे पहले खबर देता है, इसलिए इसके सुचारु कामकाज को CMD ने सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
निरीक्षण के दौरान दिए गए मुख्य निर्देश
निरीक्षण के बाद CMD ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक की, जिसमें विद्युत उत्पादन की वर्तमान स्थिति, कोयला आपूर्ति, इकाइयों के अनुरक्षण और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में ये प्रमुख निर्देश दिए गए:
- सभी उत्पादन इकाइयों का कुशल और प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए, कोई इकाई बिना वजह बंद न रहे।
- अधिकतम उपलब्धता (प्लांट लोड फैक्टर) के साथ विद्युत उत्पादन किया जाए।
- कोयले का पर्याप्त भंडार बनाए रखा जाए और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो।
- BESS परियोजना को दिसंबर 2026 से पहले पूरा करने के लिए काम में तेजी लाई जाए।
- सभी कर्मचारी आपसी समन्वय के साथ काम करें और निर्बाध उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
बैठक में सूरतगढ़ थर्मल के मुख्य अभियंता राकेश शर्मा, सूरतगढ़ सुपरक्रिटिकल के प्लांट हेड पुरुषोत्तम धारीवाल, दोनों तापीय विद्युत गृहों के अतिरिक्त मुख्य अभियंता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
किसान और आम उपभोक्ता के लिए इसका क्या मतलब है
इस निरीक्षण का सीधा फायदा किसानों और उपभोक्ताओं को मिलेगा। रबी में जब सिंचाई की मांग बढ़ेगी, तो सूरतगढ़ थर्मल पावर की सभी इकाइयां पूरी क्षमता से चलेंगी — कृषि फीडरों पर तय समय पर बिजली और घरों में कटौती की कम संभावना। BESS के बाद शाम के पीक आवर्स में भी आपूर्ति स्थिर रहेगी। ऊर्जा ढांचे पर ऐसा ही एक और बड़ा काम अजमेर में 147 करोड़ के गैस आधारित 132 केवी सब-स्टेशन के रूप में चल रहा है। RVUN की आधिकारिक जानकारी निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की कुल क्षमता कितनी है? कुल 2820 मेगावाट — 6 इकाइयां 250-250 MW की और 2 सुपरक्रिटिकल इकाइयां 660-660 MW की। यह राजस्थान का सबसे बड़ा थर्मल पावर प्लांट है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) क्या है और यह कब तक तैयार होगी? BESS बिजली को बैटरियों में संग्रहित करके पीक आवर्स में ग्रिड को वापस देने वाली प्रणाली है। सूरतगढ़ में 2×125 मेगावाट ऑवर की यह परियोजना दिसंबर 2026 से पहले पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
CMD का निरीक्षण क्यों किया गया? आगामी रबी सीजन में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए निरीक्षण किया गया, ताकि सभी इकाइयों से निर्बाध और सुचारु विद्युत उत्पादन सुनिश्चित हो सके और किसानों व उपभोक्ताओं को कटौती का सामना न करना पड़े।
क्या कोयले की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित होगा? CMD ने कोयले की उपलब्धता और स्टॉक की समीक्षा के बाद अधिकारियों को पर्याप्त भंडार बनाए रखने और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि उत्पादन पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।