Udaipur Seva Setu Shivir: पहले ही दिन 223 आवेदन, 69 प्रमाणपत्र जारी — नामांतरण और भवन अनुमति से नगर निगम को 4.03 लाख की आय

उदयपुर के नगर निगम ने बुधवार को सेवा सेतु अभियान के तहत शहरी सेवा शिविर की शुरुआत ऐसी रफ्तार से की कि पहले ही दिन के आंकड़े कहानी कहने लगे। एक ही दिन में 223 आवेदन दर्ज हुए, 69 प्रमाणपत्र हाथों-हाथ जारी कर दिए गए और नामांतरण व भवन निर्माण अनुमति जैसे प्रकरणों के निस्तारण से निगम की तिजोरी में 4.03 लाख रुपये की आय भी जुड़ गई। यानी सरकार के “दफ्तरों के चक्कर खत्म” वाले वादे को पहले दिन ही जमीनी पैमाने पर तौला जा सका — और तराजू जनता की तरफ झुका।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यह भीड़ सिर्फ औपचारिकता के लिए नहीं आई थी। निगम परिसर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में सुबह से ही शहरवासी अपने लंबित कार्यों का गट्ठर लेकर पहुंच गए। जिनके दस्तावेज पूरे मिले, उनके काम मौके पर ही निपटा दिए गए; जिनके कागजात अधूरे थे, उन्हें जरूरी दस्तावेजों की सूची देकर मार्गदर्शन किया गया ताकि अगली बार वे पूरी तैयारी से आएं।

पहले दिन का हिसाब: 223 आवेदन, 69 प्रमाणपत्र, 4.03 लाख की आय

शिविर प्रभारी एवं निगम उपायुक्त हरि सिंह देवल के मुताबिक, पहले दिन का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन जैसे बुनियादी कामों के लिए 223 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 69 प्रमाणपत्र तुरंत जारी कर दिए गए। यानी हर तीन आवेदन में से एक का निस्तारण मौके पर — नगर निगम जैसी संस्थाओं के लिए यह अनुपात वाकई असामान्य है, जहां आमतौर पर फाइलें हफ्तों दफ्तरों के गलियारों में घूमती रहती हैं।

काम पहले दिन का परिणाम
जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन 223 आवेदन, 69 प्रमाणपत्र जारी (अधूरे दस्तावेज वालों को मार्गदर्शन)
स्वास्थ्य एवं सफाई शिकायतें 15 प्राप्त, 5 निस्तारित
विद्युत संबंधी आवेदन 19 में से 13 निस्तारित, स्ट्रीट लाइट दुरुस्त और नई लाइटें लगाई गईं
नामांतरण 12 प्रकरण निस्तारित, निगम को 2.20 लाख रुपये आय
भवन निर्माण अनुमति 2 मामले निस्तारित, 1.83 लाख रुपये आय
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र 2 निस्तारित
पालनहार योजना 4 लाभार्थियों को लाभ

4.03 लाख की आय वाला खाका: नामांतरण और भवन अनुमति

नगर निगमों के लिए सेवा शिविर सिर्फ जनसंपर्क का मंच नहीं होते — वे राजस्व का भी स्रोत हैं। उदयपुर में पहले ही दिन नामांतरण के 12 प्रकरण निपटने से निगम को 2.20 लाख रुपये की आय हुई, जबकि भवन निर्माण अनुमति के सिर्फ 2 मामलों के निस्तारण से 1.83 लाख रुपये मिले। दोनों को मिलाकर 4.03 लाख रुपये — एक दिन में। यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि नगर निगमों की वित्तीय सेहत को लेकर हाल ही में सरकार ने खुद चिंता जताई थी। जब नागरिकों के अटके काम निपटते हैं और निगम को आय भी मिलती है, तो यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद सौदा बनता है।

बिजली और सफाई: छोटे काम, बड़ा असर

शिविर में विद्युत संबंधी 19 आवेदनों में से 13 का निस्तारण हो गया। खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने के साथ-साथ जिन स्थानों पर लाइट की जरूरत थी, वहां नई लाइटें लगाने की कार्रवाई भी की गई। स्वास्थ्य एवं सफाई से जुड़ी 15 शिकायतें आईं, जिनमें से 5 का मौके पर समाधान किया गया।

इसके साथ ही अभियान का एक और पहलू पौधरोपण और स्वच्छता पर फोकस रहा। अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों पर 25 पौधे लगाए गए और एक पार्क में करीब 300 वर्गमीटर क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया गया। यानी प्रशासनिक कामों के साथ-साथ शहर की हरियाली और सफाई का भी एजेंडा साथ-साथ चला।

कल, 8 अक्टूबर: वार्ड 10 से 18 के लिए शिविर — क्या लेकर जाएं

सेवा सेतु अभियान का अगला चरण गुरुवार, 8 अक्टूबर को होगा, जब वार्ड संख्या 10 से 18 के निवासियों के लिए शिविर लगाया जाएगा। शिविर नगर निगम परिसर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार के भूतल पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगा।

शिविर में जाने से पहले यह तैयारी रखें:

  1. दस्तावेज पूरे करके जाएं — जन्म/मृत्यु/विवाह पंजीयन के लिए संबंधित प्रमाण, नामांतरण के लिए रजिस्ट्री/वसीयत के कागजात, भवन अनुमति के लिए नक्शा और मालिकाना दस्तावेज साथ रखें।
  2. फोटो और पहचान पत्र — आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो हर आवेदन में लगभग अनिवार्य होते हैं।
  3. पुरानी रसीदें न भूलें — अगर पहले कभी आवेदन किया था तो उसकी रसीद या संदर्भ संख्या साथ रखें।
  4. समय से पहुंचें — शिविर सुबह 10 बजे शुरू होगा; पहले आने वालों को प्राथमिकता मिलती है।

नगर निगम महापौर पारस सिंघवी ने शहरवासियों से अपील की है कि वे सेवा सेतु अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने लंबित कार्यों के निस्तारण के लिए निर्धारित शिविर में जरूरी दस्तावेजों के साथ उपस्थित हों।

सेवा सेतु अभियान क्या है: राज्यभर में एक ही छत के नीचे समाधान

सेवा सेतु अभियान राज्य सरकार के निर्देश पर चलाया जा रहा है और इसका मूल मंत्र है — नागरिक को अपने काम के लिए दफ्तर-दफ्तर न भटकना पड़े। इसके तहत नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अन्य शहरी संस्थाएं एक ही स्थान पर शिविर लगाकर सफाई, सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, सीवर, नामांतरण, भवन अनुमति, जन्म-मृत्यु पंजीयन, फायर एनओसी, ट्रेड लाइसेंस जैसे दर्जनों कामों का निस्तारण करती हैं।

उदयपुर से पहले जयपुर में जेडीए और भीलवाड़ा में यूआईटी भी 7 से 16 अक्टूबर के बीच ऐसे ही शिविर लगा रहे हैं। यानी यह अभियान सिर्फ एक शहर की कहानी नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में शहरी प्रशासन को नागरिकों के दरवाजे तक लाने की एक बड़ी कवायद है। उदयपुर के पहले दिन के आंकड़े बता रहे हैं कि अगर क्रियान्वयन सही हो तो यह मॉडल काम करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: सेवा सेतु शिविर में कौन-कौन से काम हो सकते हैं?

जवाब: जन्म-मृत्यु-विवाह पंजीयन, नामांतरण, भवन निर्माण अनुमति, ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र, पालनहार योजना, स्ट्रीट लाइट और विद्युत शिकायतें, सफाई शिकायतें, पट्टा, लीज मुक्ति, ट्रेड लाइसेंस आदि।

सवाल: क्या शिविर में फीस लगती है?

जवाब: आवेदन निःशुल्क दर्ज होते हैं; नामांतरण, भवन अनुमति जैसे कार्यों पर नियमानुसार निर्धारित शुल्क लागू होता है।

सवाल: 8 अक्टूबर का शिविर किसके लिए है?

जवाब: यह वार्ड संख्या 10 से 18 के निवासियों के लिए है। शिविर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार, नगर निगम परिसर, उदयपुर में चलेगा।

सवाल: अधूरे दस्तावेज होने पर क्या होगा?

जवाब: आवेदन रद्द नहीं होगा — आपको जरूरी कागजातों की सूची दी जाएगी ताकि आप पूरी तैयारी के साथ दोबारा आ सकें।

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