अजमेर महिला जेल प्रकरण: दो बंदियों को अवैध रूप से घर ले जाने वाली निलंबित जेलर कोटा से गिरफ्तार

अजमेर की महिला बंदी सुधार गृह से दो महिला बंदियों को नियमों के खिलाफ जेल से निकालकर अपने निजी घर ले जाने के आरोप में निलंबित चल रही तत्कालीन जेलर को अजमेर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी जेलर दिव्या चौधरी मुकदमा दर्ज होने के बाद से फरार चल रही थीं, और मंगलवार 6 अक्टूबर को पुलिस की विशेष टीम ने साइबर सेल की मदद से ट्रैकिंग करके उन्हें कोटा जिले के एक आवासीय फ्लैट से दबोच लिया। करीब तीन महीने से फरारी काट रही आरोपी से अब पुलिस गहन पूछताछ कर रही है।

साइबर ट्रैकिंग से टूटा फरारी का सन्नाटा

अजमेर की सिविल लाइंस थाना पुलिस ने इस मामले को गंभीर मानते हुए एक विशेष टीम गठित की थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़ और वृत्त अधिकारी शिवम जोशी के निर्देशन में थानाधिकारी शंभू सिंह के नेतृत्व में बनी इस टीम ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और पुराने रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण किया। इसके बाद साइबर सेल की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रैक की गई।

मंगलवार 6 अक्टूबर को अजमेर पुलिस की टीम ने कोटा जिले के एक रिहायशी फ्लैट पर दबिश दी और वहां छिपी 37 वर्षीय दिव्या चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में सहायक उप-निरीक्षक मोईनुद्दीन, साइबर सेल के एएसआई आशीष, हेड कांस्टेबल परिना बानो, कांस्टेबल ऋष्वेंद्र सिंह — जिनका विशेष योगदान बताया गया है — और साइबर सेल के कांस्टेबल अभय सिंह शामिल रहे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी से प्रकरण में शामिल अन्य सहयोगियों और बंदियों को बाहर ले जाने के पीछे की असली वजह के बारे में गहन पूछताछ और अनुसंधान जारी है।

12 जुलाई की वह घटना जिसने जेल प्रशासन को हिला दिया

पुलिस अनुसंधान और तकनीकी साक्ष्यों के अनुसार, तत्कालीन प्रभारी जेलर दिव्या चौधरी — जो भीलवाड़ा की रहने वाली बताई गई हैं — ने अपनी सहयोगी महिला प्रहरी सोनिया चौधरी के साथ मिलकर साजिश रची थी। 12 जुलाई 2026 को उन्होंने महिला बंदी सुधार गृह के मुख्य द्वार पर तैनात जेल कर्मियों के विरोध के बावजूद उन्हें डरा-धमकाकर आजीवन कारावास की सजा काट रही महिला बंदी किरण उर्फ सेठा और एक विचाराधीन बंदी सना को अवैध रूप से जेल से बाहर निकाल लिया।

आरोप है कि इसके बाद दोनों बंदियों को व्यक्तिगत स्वार्थ और निजी हित के लिए एआरजी सिटी स्थित उनके निजी आवास पर ले जाया गया। अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि आरोपी जेलर ने अपने पद का दुरुपयोग किया और जेल के सुरक्षाकर्मियों को डरा-धमकाकर आजीवन कारावास से दंडित सजायाफ्ता तथा एक विचाराधीन महिला बंदी को जबरन जेल से बाहर निकाला था।

शिकायत से गिरफ्तारी तक: मामले की टाइमलाइन

  • 12 जुलाई 2026 — दोनों महिला बंदियों को अवैध रूप से जेल से निकालकर निजी आवास ले जाया गया।
  • 5 अगस्त 2026 — अजमेर केंद्रीय कारागृह के प्रहरी महिपाल मांगलोदा की रिपोर्ट पर सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज।
  • अगस्त 2026 — जुर्म प्रमाणित पाए जाने के बाद आरोपी जेलर निलंबित; गिरफ्तारी से बचने के लिए मुख्यालय से बिना बताए फरार।
  • अगस्त से अक्टूबर — सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और रिकॉर्ड का विश्लेषण; साइबर सेल की मदद से ट्रैकिंग।
  • 6 अक्टूबर 2026 — कोटा के आवासीय फ्लैट पर दबिश; आरोपी जेलर गिरफ्तार।

जेलों की सुरक्षा पर सवाल, विभाग की साख पर असर

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जेल जैसा संवेदनशील संस्थान सीधे तौर पर इसमें कटघरे में है। आजीवन कारावास की सजा काट रही एक सजायाफ्ता और एक विचाराधीन बंदी को दिन के उजाले में जेल से बाहर निकाल ले जाना जेल सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के विरोध के बावजूद जबरन बंदियों को ले जाना यह भी बताता है कि संस्थान के भीतर अनुशासन और नियंत्रण की स्थिति चिंताजनक थी।

ऐसे मामलों में आम तौर पर जेल विभाग आंतरिक जांच भी शुरू करता है, और यह देखा जाना बाकी है कि इस प्रकरण के बाद अजमेर के कारागृहों की सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं। फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान आरोपी से पूछताछ पर है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बंदियों को निजी आवास पर ले जाने का मकसद क्या था और इस साजिश में और कौन-कौन शामिल था।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: अजमेर महिला जेल मामले में जेलर पर क्या आरोप है?

जवाब: आरोप है कि तत्कालीन जेलर दिव्या चौधरी ने 12 जुलाई 2026 को अपनी सहयोगी महिला प्रहरी के साथ मिलकर दो महिला बंदियों — एक सजायाफ्ता और एक विचाराधीन — को जेल कर्मियों को धमकाकर अवैध रूप से जेल से निकालकर अपने निजी आवास पर ले गई थीं।

सवाल: आरोपी जेलर की गिरफ्तारी कहां से हुई?

जवाब: मुकदमा दर्ज होने के बाद से फरार चल रही आरोपी को 6 अक्टूबर को अजमेर पुलिस की विशेष टीम ने साइबर सेल की ट्रैकिंग की मदद से कोटा जिले के एक आवासीय फ्लैट से गिरफ्तार किया।

सवाल: मामले में कब शिकायत दर्ज हुई थी?

जवाब: 5 अगस्त 2026 को अजमेर केंद्रीय कारागृह के प्रहरी महिपाल मांगलोदा की रिपोर्ट पर सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया था। जुर्म प्रमाणित पाए जाने के बाद आरोपी निलंबित हुईं और फिर फरार हो गई थीं।

सवाल: अब आगे क्या कार्रवाई होगी?

जवाब: पुलिस आरोपी से पूछताछ करके प्रकरण के अन्य सहयोगियों और बंदियों को ले जाने के पीछे की मुख्य वजह का पता लगाने की कोशिश कर रही है। अनुसंधान जारी है और न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

नोट: यह मामला अभी जांच के अधीन है। आरोपी के खिलाफ लगे आरोप पुलिस अनुसंधान और न्यायालय की प्रक्रिया से गुजरेंगे। खबर में दी गई जानकारी पुलिस के बयानों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर आधारित है।

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