उदयपुर की बेटियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो राजस्थान की बेटियां किसी भी मैदान पर देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को टक्कर दे सकती हैं। खेलो इंडिया सिलंबम लीग 2026 के उत्तर क्षेत्रीय चरण में उदयपुर की KVS स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ियों ने कुल 11 पदक अपने नाम किए। इसमें महिला वर्ग में 4 स्वर्ण और 3 रजत पदक शामिल हैं, जबकि पुरुष वर्ग की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में खिलाड़ियों ने 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक जीता।
यह प्रतियोगिता 9 से 11 अक्टूबर 2026 तक पंजाब के अमृतसर में आयोजित हुई थी, जिसमें हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इस स्तर की प्रतियोगिता में इतने पदक जीतना राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
खेलो इंडिया सिलंबम लीग 2026: तीन दिन, पांच राज्य, कड़ा मुकाबला
खेलो इंडिया सिलंबम लीग 2026 का उत्तर क्षेत्रीय चरण कोई छोटी स्पर्धा नहीं थी। युवा मामले और खेल मंत्रालय से मान्यता प्राप्त इस लीग में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के चुने हुए खिलाड़ी उतरे थे। तीन दिन तक चले मुकाबलों में हर वर्ग में कड़ा संघर्ष देखने को मिला, क्योंकि उत्तर क्षेत्र में सिलंबम का स्तर पिछले दो वर्षों में तेजी से ऊपर उठा है।
राजस्थान की ओर से इस स्पर्धा में उतरे KVS स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ियों ने जिस अनुशासन और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया, उसकी चर्चा पूरे आयोजन में रही। कई मुकाबले अंतिम क्षणों तक गए, लेकिन उदयपुर के खिलाड़ियों ने दबाव में घबराने की बजाय अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा किया — और यही भरोसा 11 पदकों में बदला। खेलो इंडिया सिलंबम लीग जैसे मंच पर इतने पदक जीतना किसी भी राज्य अकादमी के लिए गर्व की बात है।
खेलो इंडिया सिलंबम लीग में बेटियों के चार स्वर्ण
महिला वर्ग की सफलता इस जीत की सबसे चमकदार कहानी है। खेलो इंडिया की अस्मिता महिला लीग के तहत आयोजित इस स्पर्धा में KVS कराटे एवं सिलंबम अकादमी की वंशिका, वैभवी सिंह शक्तावत, तमन्ना लोहार और संध्या कंवर ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। नल्लूरी लेहाना चौधरी, अक्षा बोस और एमरीना राही ने रजत पदक हासिल कर अकादमी की झोली भर दी।
खास बात यह है कि इन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में पहली बार इतनी बड़ी चुनौती का सामना करना था, लेकिन उन्होंने दबाव में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। पदक जीतने के बाद खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों में खुशी का माहौल है।
पुरुष वर्ग की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी धमाकेदार शुरुआत
इसी आयोजन के साथ पहली बार आयोजित उत्तर क्षेत्र राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2026 (पुरुष वर्ग) में भी राजस्थान के खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी। प्रहर्ष जैन और जेयश्याम खियांश मन्नव ने स्वर्ण पदक जीते, प्रिंस राज सिंह चूंडावत ने रजत और प्रवेश सिंह ने कांस्य पदक अपने नाम किया। पहली ही राष्ट्रीय चैंपियनशिप में चार पदक जीतना इन युवा खिलाड़ियों के भविष्य के लिए शुभ संकेत है।
पदक तालिका: एक नजर में पूरी उपलब्धि
| वर्ग | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल |
|---|---|---|---|---|
| महिला (अस्मिता लीग) | 4 | 3 | 0 | 7 |
| पुरुष (राष्ट्रीय चैंपियनशिप) | 2 | 1 | 1 | 4 |
| कुल | 6 | 4 | 1 | 11 |
सफलता के पीछे इन प्रशिक्षकों का हाथ
खेलो इंडिया सिलंबम लीग में मिली इस कामयाबी के पीछे अकादमी की संस्थापक और प्रशिक्षक सेंसई नीलमणि पंवार (ज्योति मैम) और राजस्थान सिलंबम एसोसिएशन के महासचिव मांगीलाल सालवी का मार्गदर्शन है। सेंसई नीलमणि पंवार VSKF राजस्थान की महासचिव भी हैं, और उन्होंने वर्षों से उदयपुर में सिलंबम को जड़ से मजबूत करने का काम किया है।
प्रशिक्षकों का कहना है कि इन खिलाड़ियों की तैयारी महीनों पहले शुरू हो गई थी। सुबह-शाम अभ्यास, तकनीकी ड्रिल और मुकाबले जैसी परिस्थितियों में प्रैक्टिस — हर पहलू पर काम किया गया। सिलंबम में छड़ी की गति, फुटवर्क और समय पर हमला — तीनों चीजें एक साथ साधनी पड़ती हैं, और इसी संतुलन को पाने के लिए खिलाड़ियों ने रोज घंटों पसीना बहाया।
इसके अलावा खिलाड़ियों को तकनीकी तैयारी में वंशिका का भी विशेष मार्गदर्शन मिला, जो सिलंबम प्रशिक्षक हैं और मीकाडो इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा भी हैं। यह अनोखा संयोग है — वंशिका ने खुद स्वर्ण पदक जीता और साथ ही साथी खिलाड़ियों को तकनीकी बारीकियां सिखाने में भी अहम भूमिका निभाई। एक खिलाड़ी का साथी खिलाड़ियों को सिखाना अकादमी की उस संस्कृति को दिखाता है, जहां सीनियर जूनियर की मदद को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।
सिलंबम: भारत का प्राचीन युद्ध कला खेल
सिलंबम भारत की सबसे पुरानी युद्ध कलाओं में से एक है, जिसका मूल तमिलनाडु माना जाता है। इसमें लंबी बांस की छड़ी (स्टाफ) से हमला और बचाव दोनों की तकनीकें सिखाई जाती हैं। कभी युद्ध के मैदान का हथियार रहा यह खेल अब खेलो इंडिया जैसे राष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने पारंपरिक खेलों को मुख्यधारा में लाने पर जोर दिया है, और सिलंबम इसी अभियान का हिस्सा है। राजस्थान में यह खेल अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन उदयपुर जैसे शहरों में KVS जैसी अकादमियां इसे तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।
अस्मिता लीग: खेलो इंडिया सिलंबम लीग में बेटियों का खास मंच
खेलो इंडिया अस्मिता (Achieving Sports Milestone by Inspiring Women through Action) लीग महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष रूप से बनाई गई प्रतियोगिता है। इसका उद्देश्य खेलों में बेटियों की भागीदारी बढ़ाना और गांव-शहर की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है।
इस सत्र में देशभर में 15 खेल विधाओं में 852 अस्मिता लीग आयोजित करने की योजना है, जिनमें 70,000 से अधिक महिला एथलीटों के हिस्सा लेने का लक्ष्य रखा गया है। अस्मिता लीग क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर आयोजित होती हैं, और यहीं से नई प्रतिभाओं की पहचान की जाती है। खेलो इंडिया सिलंबम लीग का अस्मिता चरण खास तौर पर इसलिए अहम है, क्योंकि पारंपरिक युद्ध कलाओं में लड़कियों की भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत नई है — और ऐसे में उदयपुर की बेटियों का 7 में से 4 स्वर्ण जीतना एक मजबूत संदेश देता है। अधिक जानकारी के लिए आप खेलो इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
राजस्थान के खेल परिदृश्य के लिए इसका क्या मतलब है
राजस्थान में हाल के वर्षों में खेलो इंडिया सिलंबम अस्मिता वूमेंस लीग जैसे आयोजनों में उदयपुर की बेटियों का प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है। सिर्फ दो सप्ताह पहले राज्य स्तरीय लीग में उदयपुर की खिलाड़ियों ने 25 पदक जीते थे, और अब उत्तर क्षेत्रीय स्तर पर 11 पदक — यह सिलसिला बताता है कि राजस्थान में सिलंबम अब महज शौक नहीं, बल्कि पदक जीतने वाली गंभीर खेल विधा बन चुका है।
यह उपलब्धि राजस्थान के युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो पारंपरिक खेलों में करियर बनाने के बारे में सोच रहे हैं। अक्सर माता-पिता क्रिकेट या फुटबॉल जैसे लोकप्रिय खेलों की ओर ही बच्चों को धकेलते हैं, क्योंकि वहां करियर की राह साफ दिखती है। लेकिन खेलो इंडिया जैसे सरकारी मंचों ने पारंपरिक खेलों में भी वही सम्मान और अवसर पैदा कर दिए हैं — नकद पुरस्कार, नौकरी में आरक्षण और राष्ट्रीय पहचान, सब कुछ अब सिलंबम जैसे खेलों में भी मिलता है।
आगे का रास्ता: खेलो इंडिया सिलंबम लीग से राष्ट्रीय मंच तक
उत्तर क्षेत्रीय लीग में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए अब राष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजनों के दरवाजे खुल गए हैं। खेलो इंडिया सिलंबम लीग के अगले चरणों और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में इन खिलाड़ियों से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। अकादमी के प्रशिक्षकों का कहना है कि तैयारी का अगला चरण और कठिन होगा, लेकिन खिलाड़ियों का आत्मविश्वास इस जीत से कई गुना बढ़ा है।
राज्य सरकार की खेल नीति के तहत पदक विजेता खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार और नौकरियों में आरक्षण जैसे लाभ भी मिलते हैं, जो इन युवा खिलाड़ियों के परिवारों के लिए बड़ी राहत होगी। जो माता-पिता अपने बच्चों को खेलों में करियर बनाते देखना चाहते हैं, उनके लिए यह जीत एक भरोसा है — सही अकादमी, सही प्रशिक्षक और लगातार मेहनत से राजस्थान का कोई भी बच्चा राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकता है। खेलो इंडिया सिलंबम लीग जैसे मंच इसी भरोसे को मजबूत करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
खेलो इंडिया सिलंबम लीग 2026 का उत्तर क्षेत्रीय चरण कहां हुआ था?
यह प्रतियोगिता 9 से 11 अक्टूबर 2026 तक पंजाब के अमृतसर में आयोजित हुई, जिसमें पांच राज्यों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
उदयपुर के खिलाड़ियों ने कुल कितने पदक जीते?
KVS स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ियों ने कुल 11 पदक जीते — 6 स्वर्ण, 4 रजत और 1 कांस्य। महिला वर्ग में 7 और पुरुष वर्ग में 4 पदक आए।
महिला वर्ग में स्वर्ण पदक किन्हें मिले?
वंशिका, वैभवी सिंह शक्तावत, तमन्ना लोहार और संध्या कंवर ने स्वर्ण पदक जीते। रजत पदक नल्लूरी लेहाना चौधरी, अक्षा बोस और एमरीना राही को मिले।
सिलंबम खेल क्या है और इसे कहां सीखा जा सकता है?
सिलंबम बांस की छड़ी से खेली जाने वाली भारत की प्राचीन युद्ध कला है। राजस्थान में उदयपुर की KVS स्पोर्ट्स अकादमी सहित कई अकादमियां इसकी ट्रेनिंग देती हैं।