राजस्थान में कम आय वाले परिवारों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री जन आवास योजना का नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें सस्ते मकानों के नियमों में अहम बदलाव प्रस्तावित हैं। सबसे बड़ा बदलाव: अब बिल्डर EWS और LIG के मकान अपने मुख्य प्रोजेक्ट से मनमर्जी की दूरी पर नहीं बना सकेंगे — शहर की आबादी के हिसाब से यह दूरी सिर्फ 2 से 5 किलोमीटर के दायरे में सीमित रहेगी।
यह बदलाव उन हजारों परिवारों से जुड़ा है जो सालों से सस्ते मकान का इंतजार कर रहे हैं। अब तक की सबसे बड़ी शिकायत यही थी कि सस्ते मकान मुख्य प्रोजेक्ट से दूर, सुविधाओं से कटी जगहों पर बना दिए जाते थे। नए ड्राफ्ट में इसी शिकायत को दूर करने के साथ बिल्डरों को अतिरिक्त निर्माण अधिकार और शुल्क छूट का प्रोत्साहन भी प्रस्तावित है।
अब दूरी नहीं होगी मनमर्जी, आबादी तय करेगी दायरा
सबसे चर्चित प्रावधान दूरी की अधिकतम सीमा है। पहले कई बिल्डर मुख्य प्रोजेक्ट में EWS-LIG फ्लैट बनाने के बजाय दूसरी जगह सस्ती जमीन लेकर वहां आवास तैयार कर देते थे, जिससे उन परिवारों को सड़क, पानी, परिवहन और स्कूल-अस्पताल जैसी सुविधाओं में भारी परेशानी होती थी। अब यह मनमानी बंद होगी।
ड्राफ्ट के अनुसार, दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में मुख्य प्रोजेक्ट से अधिकतम 5 किलोमीटर, एक से दस लाख तक की आबादी में 3 किलोमीटर, तथा एक लाख तक की आबादी में अधिकतम 2 किलोमीटर की दूरी पर ही EWS-LIG आवास बनाए जा सकेंगे। यानी मुख्यमंत्री जन आवास योजना के सस्ते मकान अब मुख्य बसावट के करीब ही बनने होंगे।
मुख्यमंत्री जन आवास योजना के नए ड्राफ्ट के मुख्य नियम एक नजर में
| नियम | नया प्रस्ताव |
|---|---|
| अधिकतम दूरी | 10 लाख+: 5 किमी; 1–10 लाख: 3 किमी; 1 लाख तक: 2 किमी |
| ग्रुप हाउसिंग अनिवार्यता | 5,000 से बढ़ाकर 10,000 वर्गमीटर भूखंड |
| दूसरी जगह आवास | मानचित्र स्वीकृति पर ही प्रस्ताव + 10% अतिरिक्त क्षेत्र |
| अतिरिक्त बीएआर | EWS-LIG पर 1.0; अलग प्रोजेक्ट पर 0.75 से 2.0 तक |
| शुल्कों में छूट | भू-रूपांतरण सहित विभिन्न शुल्कों में 100% छूट |
| निजी जमीन फ्लैट प्रोजेक्ट | निर्मित क्षेत्र का न्यूनतम 60% EWS-LIG हेतु |
| सरकारी जमीन प्रोजेक्ट | न्यूनतम 1 हेक्टेयर; 75% तक भूमि EWS-LIG हेतु |
| EWS हिस्सेदारी | EWS-LIG में कम से कम 25% यूनिट EWS की |
छोटे भूखंडों को राहत, लेकिन पारदर्शिता की शर्त सख्त
दूसरा बदलाव ग्रुप हाउसिंग की अनिवार्यता सीमा से जुड़ा है। पहले 5 हजार वर्गमीटर से बड़े भूखंड पर EWS-LIG आवास बनाना अनिवार्य था; अब यह सीमा 10 हजार वर्गमीटर करने का प्रस्ताव है, जिससे छोटे भूखंडों वाले बिल्डरों को राहत मिलेगी।
लेकिन राहत के साथ पारदर्शिता की शर्त भी सख्त की गई है। दूसरी जगह EWS-LIG आवास बनाने का प्रस्ताव बिल्डर को भवन मानचित्र की स्वीकृति के समय ही देना होगा, साथ में 10 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र भी देना होगा। यानी बाद में चुपचाप जगह बदलने का रास्ता बंद होगा।
बिल्डरों को प्रोत्साहन: अतिरिक्त बीएआर और शुल्कों में पूरी छूट
सिर्फ बंदिशें काफी नहीं, इसलिए बिल्डरों को प्रोत्साहन भी प्रस्तावित है। EWS-LIG आवास बनाने पर 1.0 अतिरिक्त बीएआर (निर्माण अधिकार) मिलेगा। अलग आवासीय प्रोजेक्ट पर ऊंचाई के अनुसार 0.75 से 2.0 तक अतिरिक्त बीएआर और भू-रूपांतरण सहित विभिन्न शुल्कों में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान भी है।
यह प्रोत्साहन इसलिए अहम है कि बिल्डरों के अनुसार सस्ते मकान में लागत ज्यादा, मुनाफा कम होता है। अतिरिक्त निर्माण अधिकार और शुल्क छूट से लागत का एक हिस्सा संतुलित होगा, जिससे ज्यादा बिल्डर मुख्यमंत्री जन आवास योजना में आगे आएंगे।
सरकारी जमीन पर बनेंगे तो 75% भूमि सस्ते आवासों के लिए
सरकारी जमीन पर निजी बिल्डर के प्रोजेक्ट के नियम भी साफ हैं। न्यूनतम एक हेक्टेयर जमीन जरूरी होगी — 75 प्रतिशत तक भूमि EWS-LIG के लिए, 25 प्रतिशत अन्य श्रेणियों के लिए। EWS-LIG में कम से कम 25 प्रतिशत यूनिट EWS श्रेणी की होनी चाहिए, ताकि सबसे कमजोर वर्ग को वास्तविक लाभ मिले।
निजी जमीन पर फ्लैट प्रोजेक्ट्स में कुल निर्मित क्षेत्र का न्यूनतम 60 प्रतिशत EWS-LIG के लिए आरक्षित रखना होगा। शेष 40 प्रतिशत में अन्य श्रेणियों के मकान बन सकेंगे, लेकिन इसमें भी कम से कम आधा क्षेत्र एमआईजी-ए श्रेणी के लिए रखना होगा, ताकि सस्ते मकान सिर्फ दिखावे के लिए न रहें।
पुरानी योजना की कमियों से सबक लेकर बना है ड्राफ्ट
नए ड्राफ्ट में पुरानी योजना की कमियों — निर्माण में देरी और प्रोजेक्ट्स का अटकना — को भी आधार बनाया गया है। कई परिवारों को सालों इंतजार करना पड़ा, क्योंकि प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हुए। दूरी की सीमा और मानचित्र स्वीकृति पर ही प्रस्ताव की शर्त, इसी देरी और मनमानी को रोकने के लिए है।
मुख्यमंत्री जन आवास योजना 2015 से चल रही है — निजी बिल्डरों और आवासन मंडल के प्रोजेक्ट्स में EWS व LIG परिवारों के लिए तय कीमत पर मकान आरक्षित होते हैं, आवंटन लॉटरी से होता है, संचालन नगरीय विकास विभाग (UDH) करता है। नया ड्राफ्ट इसी व्यवस्था को ज्यादा व्यावहारिक और पारदर्शी बनाएगा।
मुख्यमंत्री जन आवास योजना: किसे मिलेगा फायदा
इस ड्राफ्ट का सीधा फायदा कम आय वर्ग के उन परिवारों को होगा जो शहरों में तय कीमत पर पक्का मकान चाहते हैं। अभी यह ड्राफ्ट चरण में है, इसलिए पात्रता, आवेदन की तारीख और लॉटरी के अंतिम नियम बाद में ही स्पष्ट होंगे। इच्छुक परिवार आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें, किसी बिचौलिए के झांसे में न आएं।
राज्य की अन्य आवास योजनाएं भी उपयोगी हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण, आवासन मंडल की 649 फ्लैट योजनाएं और टीडीआर पॉलिसी 2026 का प्रारूप भी देखें।
यह खबर ड्राफ्ट पर आधारित है, अंतिम नियमों में बदलाव संभव है। आवेदन या भुगतान से पहले आधिकारिक अधिसूचना जरूर पढ़ें। स्रोत: पत्रिका की मूल खबर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: मुख्यमंत्री जन आवास योजना का नया ड्राफ्ट क्या है?
उत्तर: राज्य सरकार का प्रस्तावित नियम-प्रारूप है — EWS-LIG मकानों की दूरी, आरक्षण, बिल्डरों को छूट और सरकारी जमीन प्रोजेक्ट्स के नए नियम। अंतिम रूप से पहले बदलाव संभव है।
प्रश्न 2: सस्ते मकान अब मुख्य प्रोजेक्ट से कितनी दूर बन सकेंगे?
उत्तर: आबादी पर निर्भर करेगा — दस लाख से अधिक में अधिकतम 5 किलोमीटर, एक से दस लाख तक में 3 किलोमीटर और एक लाख तक में अधिकतम 2 किलोमीटर।
प्रश्न 3: बिल्डरों को क्या फायदा मिलेगा?
उत्तर: EWS-LIG पर 1.0 अतिरिक्त बीएआर, अलग प्रोजेक्ट पर ऊंचाई अनुसार 0.75 से 2.0 तक अतिरिक्त बीएआर और भू-रूपांतरण सहित शुल्कों में 100 प्रतिशत छूट का प्रस्ताव है।
प्रश्न 4: मुख्यमंत्री जन आवास योजना में मकान कैसे मिलते हैं?
उत्तर: तय कीमत पर मकान आरक्षित होते हैं, आवंटन लॉटरी से होता है, संचालन नगरीय विकास विभाग करता है। आवेदन की अंतिम जानकारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद स्पष्ट होगी।