कालीसिंध थर्मल प्लांट में आग: कूलिंग टावर की आग एक घंटे में बुझी, कोई जनहानि नहीं

सबसे पहले जानिए: आग बुझ गई, कोई हताहत नहीं

सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को झालावाड़ के झालरापाटन में कालीसिंध थर्मल प्लांट आग की खबर आई। प्लांट की यूनिट-1 के कूलिंग टावर में मरम्मत के दौरान आग लगी। अच्छी खबर यह है कि आग करीब एक घंटे में बुझा ली गई और कोई जनहानि नहीं हुई। आग टावर तक ही सीमित रही। दमकल के पहुंचते ही उसे फैलने से रोक दिया गया।

दूसरी राहत भरी बात यह है कि यह यूनिट पहले से ही वार्षिक मरम्मत के कारण बंद थी। इसलिए आग से कोई चालू उत्पादन अचानक ठप नहीं हुआ। हां, टावर को कितना नुकसान पहुंचा है, यह अभी साफ नहीं है। इसका सही आकलन जांच और निरीक्षण के बाद ही होगा।

कालीसिंध थर्मल प्लांट आग: सोमवार को क्या हुआ

सोमवार को यूनिट-1 के कूलिंग टावर में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान टावर के भीतर लगी प्लास्टिक की जालियों ने आग पकड़ ली। टावर से धुएं का गुबार उठता देख प्लांट में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। बाद में प्लांट प्रशासन ने उच्च अधिकारियों की आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसमें कारणों की शुरुआती समीक्षा हुई। पत्रिका की रिपोर्ट दोपहर करीब 2:56 बजे और ईटीवी भारत की करीब 3:50 बजे प्रकाशित हुई। दोनों इस बात पर एकमत हैं कि कालीसिंध थर्मल प्लांट आग सोमवार को लगी और करीब एक घंटे में बुझा ली गई।

कालीसिंध थर्मल प्लांट आग की वजह: आशंका क्या, पुष्टि क्या

आग की वजह को लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रारंभिक आशंका यह है कि मरम्मत के दौरान वेल्डिंग से निकली चिंगारी ने टावर की प्लास्टिक सामग्री को पकड़ लिया। प्लांट के टेक्निकल असिस्टेंट हिमांशु बोलिया ने भी इसी आशंका का जिक्र किया है। लेकिन आशंका और पुष्टि में फर्क होता है, और सोशल मीडिया की अटकलों को सच मानना सही नहीं होगा।

इसीलिए एक विशेष तकनीकी कमेटी गठित की गई है। कालीसिंध थर्मल प्लांट आग की जांच में यह देखा जाएगा कि आग किन परिस्थितियों में लगी, मरम्मत के दौरान अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था या नहीं, और टावर को कितना नुकसान पहुंचा है। टावर की प्लास्टिक जालियां गर्म पानी का हवा से संपर्क बढ़ाती हैं, इसलिए वे आग की चपेट में तेजी से आ सकती हैं। मेंटेनेंस में गर्म काम के समय बचाव उपाय और भी अहम हो जाते हैं।

कालीसिंध प्लांट कितना बड़ा है, इसे समझिए

कालीसिंध थर्मल पावर स्टेशन झालावाड़ जिले में है। इसका संचालन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) करता है। प्लांट की कुल क्षमता 1200 मेगावाट है, जो 600-600 मेगावाट की दो इकाइयों से बनती है। दोनों इकाइयां 2014 में चालू हुई थीं। यह कोयला आधारित प्लांट है और इसे पानी कालीसिंध बांध के जलाशय से मिलता है।

कूलिंग टावर का काम टरबाइन से निकलने वाले गर्म पानी को ठंडा करके दोबारा इस्तेमाल लायक बनाना है। टावर क्षतिग्रस्त हो तो यूनिट दोबारा चालू करने से पहले उसकी मरम्मत और सुरक्षा जांच जरूरी होती है। इसलिए कालीसिंध थर्मल प्लांट आग के बाद सबसे बड़ा सवाल टावर की मरम्मत का समय है। हाल ही में सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट का रबी सीजन से पहले CMD निरीक्षण भी खबरों में रहा था, जिसमें प्लांटों की तैयारी और रखरखाव पर जोर दिया गया था।

यूनिट-1 पहले से बंद थी: इसका क्या मतलब है

इस घटना का सबसे जरूरी तथ्य यह है कि यूनिट-1 पहले से वार्षिक मरम्मत के लिए बंद थी। रिपोर्टों में मरम्मत की अवधि को लेकर अलग-अलग जानकारी है — एक में करीब दो महीने और दूसरी में करीब एक महीने की बात है — लेकिन सभी इस बात पर सहमत हैं कि यूनिट शटडाउन पर थी और काम समय पर पूरा न होने से उसकी अवधि बढ़ाई गई थी।

इसका मतलब दो तरह से समझें। पहला, कालीसिंध थर्मल प्लांट आग से बिजली आपूर्ति पर कोई अचानक झटका नहीं लगा, क्योंकि यूनिट पहले से उत्पादन नहीं कर रही थी। दूसरा, सवाल यह है कि लंबी मरम्मत से गुजर रही यूनिट के टावर में आग से उसकी वापसी में और देरी तो नहीं होगी। इसका जवाब जांच के बाद ही मिलेगा। अभी नुकसान को लेकर सिर्फ लाखों रुपये की आशंका है, जो शुरुआती अनुमान है। खबरों में यूनिट-2 के प्रभावित होने की कोई बात नहीं है, इसलिए इसे पूरे प्लांट के ठप होने के तौर पर पेश करना गलत होगा।

जांच में किन सवालों के जवाब मिलने हैं

कमेटी की जांच से चार सवालों के जवाब मिलने हैं। पहला: गर्म काम के लिए सुरक्षा अनुमति और निगरानी की व्यवस्था थी या नहीं। दूसरा: ज्वलनशील सामग्री के पास काम के समय आग बुझाने के उपकरण और कर्मचारी तैयार थे या नहीं। तीसरा: कालीसिंध थर्मल प्लांट आग में टावर को सिर्फ ऊपरी नुकसान पहुंचा है या संरचना भी प्रभावित हुई है। चौथा: इस घटना के बाद सभी थर्मल प्लांटों में मेंटेनेंस के दौरान सुरक्षा जांच और सख्त होगी या नहीं। मेंटेनेंस हर साल होने वाली नियमित प्रक्रिया है, इसलिए ये सवाल आगे के लिए भी मायने रखते हैं। इस बीच जयपुर में माइक्रोटेक के 400 करोड़ रुपये के सोलर प्लांट जैसी खबरें दिखाती हैं कि बिजली व्यवस्था सौर ऊर्जा की तरफ भी बढ़ रही है।

झालावाड़ के लोगों के लिए क्या बदलेगा

आम लोगों के लिए सीधा संदेश यह है कि घबराने की कोई वजह नहीं है — आग बुझ चुकी है, कोई हताहत नहीं हुआ है, और यूनिट पहले से बंद थी। बिजली आपूर्ति पर कोई नया संकट सामने नहीं आया है। अफवाहों से बचना भी जरूरी है, क्योंकि आग की वजह, नुकसान का आंकड़ा और यूनिट की वापसी की तारीख — तीनों अभी जांच के अधीन हैं। सोमवार की कालीसिंध थर्मल प्लांट आग एक चेतावनी के तौर पर दर्ज होगी — रखरखाव में एक छोटी सी चूक भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है, और इस बार वह हादसा टल गया।

तथ्य एक नजर में

बिंदु जानकारी
घटना कालीसिंध थर्मल प्लांट की यूनिट-1 के कूलिंग टावर में आग
स्थान झालरापाटन, जिला झालावाड़, राजस्थान
तारीख सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 (रिपोर्टें दोपहर में प्रकाशित हुईं)
प्लांट क्षमता 1200 मेगावाट (600-600 मेगावाट की 2 इकाइयां)
संचालक राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL)
आग पर काबू करीब 1 घंटे की मशक्कत के बाद
जनहानि कोई नहीं
नुकसान लाखों रुपये की आशंका (शुरुआती अनुमान, अंतिम आंकड़ा जांच के बाद)
आग की आशंका मरम्मत के दौरान वेल्डिंग की चिंगारी से प्लास्टिक जालियों में आग (पुष्टि नहीं)
जांच विशेष तकनीकी कमेटी गठित, अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच होगी
यूनिट की स्थिति यूनिट-1 वार्षिक मरम्मत के लिए पहले से बंद थी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कालीसिंध थर्मल प्लांट आग कब लगी?
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को यूनिट-1 के कूलिंग टावर में मरम्मत के दौरान आग लगी। रिपोर्टें उसी दिन दोपहर में सामने आईं।

क्या इस आग में कोई हताहत हुआ?
नहीं। रिपोर्टों के अनुसार कोई जनहानि नहीं हुई।

आग लगने की वजह क्या है?
प्रारंभिक आशंका वेल्डिंग की चिंगारी से प्लास्टिक जालियों में आग लगने की है। आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

क्या बिजली आपूर्ति पर असर पड़ेगा?
यूनिट पहले से मरम्मत के लिए बंद थी, इसलिए कोई चालू उत्पादन अचानक ठप नहीं हुआ। टावर के नुकसान का आकलन जांच के बाद होगा।

स्रोत: इस लेख की जानकारी पत्रिका की झालावाड़ रिपोर्ट और ईटीवी भारत की झालावाड़ रिपोर्ट पर आधारित है।

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