शिक्षक भर्ती 2018 में टीएसपी का रास्ता साफ: हाईकोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील

आठ साल से चल रही एक कानूनी लड़ाई का अंत आखिरकार अभ्यर्थी के पक्ष में हुआ है। शिक्षक भर्ती 2018 टीएसपी फैसला उन अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है, जो सालों से नियुक्ति की आस लगाए थे। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी है और निर्देश दिया है कि अभ्यर्थी शीतल अमेटा की उम्मीदवारी पर टीएसपी श्रेणी की अभ्यर्थी के रूप में विचार किया जाए। अदालत ने यह भी कहा है कि अगर वह योग्यता सूची में स्थान हासिल करती हैं, तो उन्हें टीएसपी क्षेत्र में नियमानुसार नियुक्ति दी जाए। यह सिर्फ एक अभ्यर्थी की जीत नहीं है — ऐसे कई मामलों में अब इस फैसले को नजीर माना जाएगा।

शिक्षक भर्ती 2018 टीएसपी फैसले में अदालत ने क्या कहा

खंडपीठ ने सरकार की विशेष अपील में कोई आधार नहीं पाया और एकलपीठ का आदेश बरकरार रखा। निर्देश स्पष्ट है — शीतल अमेटा की उम्मीदवारी पर टीएसपी श्रेणी में विचार हो, और योग्यता सूची में जगह बनने पर नियमानुसार नियुक्ति दी जाए।

अहम बात यह है कि अदालत ने सीधी नियुक्ति का आदेश नहीं दिया है — नियुक्ति योग्यता सूची में स्थान मिलने पर निर्भर करेगी, मेरिट ही अंतिम कसौटी रहेगी। अदालत ने मनीष कुमार नागदा बनाम राजस्थान राज्य मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें समान परिस्थितियों में टीएसपी श्रेणी में विचार का निर्देश दिया गया था।

टीएसपी श्रेणी क्या है और मामला क्यों उलझा

टीएसपी यानी जनजातीय उप-योजना क्षेत्र — राजस्थान के जनजातीय बहुल अनुसूचित इलाकों के लिए अलग पद आरक्षित होते हैं, और विज्ञापन भी टीएसपी व गैर-टीएसपी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग जारी होते हैं।

शीतल अमेटा का मामला इसी बंटवारे में उलझ गया था। उनका विवाह टीएसपी क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति से हुआ था, लेकिन आवेदन के समय लागू नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, जिसके तहत टीएसपी क्षेत्र के निवासी से विवाह करने वाली गैर-टीएसपी महिला को टीएसपी क्षेत्र की अभ्यर्थी माना जा सके। इसलिए उन्होंने गैर-टीएसपी अभ्यर्थी के रूप में विज्ञापन 5/2018 के तहत आवेदन किया; टीएसपी पदों वाले विज्ञापन 6/2018 के तहत अलग आवेदन नहीं किया था।

बाद में सरकार ने 21 अक्टूबर 2019 को नई अधिसूचना जारी की — टीएसपी निवासी से विवाह करने वाली गैर-टीएसपी महिला भी टीएसपी अभ्यर्थी मानी जाएगी, और इसे 16 जून 2013 से प्रभावी घोषित किया गया। शीतल अमेटा ने इसी आधार पर टीएसपी श्रेणी में विचार मांगा, लेकिन सरकार ने अनुरोध ठुकरा दिया और मामला अदालत पहुंचा।

2018 से 2026: कानूनी लड़ाई का सफर

तारीख क्या हुआ
31 जुलाई 2018 बीकानेर निदेशालय ने विज्ञापन 5/2018 और 6/2018 जारी किए — तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-द्वितीय, विज्ञान-गणित
2018 शीतल अमेटा ने उस समय के नियमों के अनुसार गैर-टीएसपी श्रेणी में आवेदन किया
21 अक्टूबर 2019 नई अधिसूचना — टीएसपी निवासी से विवाह करने वाली महिला भी टीएसपी अभ्यर्थी, 16 जून 2013 से प्रभावी
2019 के बाद टीएसपी विचार की मांग ठुकराई गई, हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई
23 जनवरी 2023 एकलपीठ ने अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला सुनाया — टीएसपी अभ्यर्थी मानते हुए नियमानुसार लाभ का निर्देश
2023 के बाद सरकार ने एकलपीठ के आदेश को खंडपीठ में विशेष अपील से चुनौती दी
31 अक्टूबर 2026 खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज की — टीएसपी श्रेणी में विचार और मेरिट पर नियुक्ति का निर्देश

सरकार की दलीलें क्यों नहीं चलीं

सरकार की दो मुख्य दलीलें थीं — पहली, शीतल अमेटा ने विज्ञापन 6/2018 के तहत टीएसपी अभ्यर्थी के रूप में मूल आवेदन ही नहीं किया था; दूसरी, भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, इसलिए अब राहत देने से अतिरिक्त अधिसंख्य पद बनाने पड़ सकते हैं।

अधिवक्ता वीएलएस राजपुरोहित ने जवाब दिया कि आवेदन के समय लागू नियमों के अनुसार गैर-टीएसपी श्रेणी में आवेदन करना ही सही प्रक्रिया थी — उस समय कोई और विकल्प नहीं था। बाद में जारी अधिसूचना को पिछली तारीख से प्रभावी किया गया था, इसलिए उसका लाभ अभ्यर्थी को मिलना ही चाहिए। खंडपीठ ने माना कि अभ्यर्थी की कोई गलती नहीं थी — नियम ही ऐसे थे। और जब नियम बाद में बदलकर पिछली तारीख से लागू हुए, तो उनका लाभ रोकना सही नहीं होगा। इसी आधार पर विशेष अपील खारिज हुई।

फैसले का असर और आगे की प्रक्रिया

सीधा असर सबसे पहले शीतल अमेटा पर होगा, जिनकी उम्मीदवारी पर अब टीएसपी श्रेणी में विचार होगा। लेकिन दायरा इससे बड़ा है — 2018 की भर्ती से प्रभावित ऐसे अभ्यर्थी, जिनका मामला विवाह के कारण श्रेणी को लेकर अटका था, उनके लिए भी राहत का रास्ता खुला है। सिद्धांत साफ है — आवेदन के समय सही प्रक्रिया अपनाने वाले अभ्यर्थी को बाद में नियम बदलने पर नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह हफ्ता वैसे भी खबरों भरा रहा है। RSMSSB ने अगले दो महीनों में 7840 पदों पर छह नई भर्तियों के नोटिफिकेशन की तैयारी कर ली है, जिसमें अकेले ग्राम विकास अधिकारी के 4000 पद हैं। वहीं RPSC की सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के गुजराती और पंजाबी विषयों के परिणाम भी 29 अक्टूबर को जारी हो चुके हैं।

फैसले के बाद अब गेंद शिक्षा विभाग के पाले में है — शीतल अमेटा की उम्मीदवारी पर टीएसपी श्रेणी में विचार होगा, और योग्यता सूची में स्थान बनने पर नियमानुसार नियुक्ति दी जाएगी। प्रभावित अभ्यर्थियों को दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए और शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के आदेशों पर नजर रखनी चाहिए। किसी भी बिचौलिए के झांसे में न आएं — पूरी प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े अदालती फैसलों का असर पहले भी मेरिट सूची और नियुक्ति प्रक्रिया पर देखा जा चुका है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: टीएसपी श्रेणी क्या होती है?
उत्तर: टीएसपी यानी जनजातीय उप-योजना क्षेत्र। राजस्थान के जनजातीय बहुल अनुसूचित इलाकों के लिए भर्तियों में अलग पद आरक्षित होते हैं, अलग विज्ञापन और अलग मेरिट होती है।

प्रश्न: क्या शीतल अमेटा को सीधे नियुक्ति मिल गई है?
उत्तर: नहीं। हाईकोर्ट ने उनकी उम्मीदवारी पर टीएसपी श्रेणी में विचार करने का निर्देश दिया है। नियुक्ति तभी मिलेगी जब वह योग्यता सूची में स्थान हासिल करेंगी।

प्रश्न: 2018 भर्ती के अन्य अभ्यर्थियों पर क्या असर होगा?
उत्तर: जिन अभ्यर्थियों की परिस्थितियां इससे मिलती-जुलती हैं — खासकर विवाह के कारण श्रेणी को लेकर जिनका मामला अटका था — उनके लिए यह फैसला नजीर का काम करेगा।

प्रश्न: आगे अभ्यर्थियों को क्या करना चाहिए?
उत्तर: शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के आदेशों पर नजर रखें, दस्तावेज तैयार रखें, बिचौलियों से बचें।

स्रोत: अमर उजाला की 31 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की विशेष अपील खारिज की है।

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