शिखर अग्रवाल मामला: गोयल फैशन्स का पैकेज रोका, ACB जांच तक नहीं मिलेगा लाभ

शिखर अग्रवाल गोयल फैशन्स मामले में राजस्थान सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है — गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत स्वीकृत कस्टमाइज्ड पैकेज के लाभों पर रोक लगा दी गई है। अब एसीबी की प्रारंभिक जांच पूरी होने तक कंपनी को इस पैकेज के तहत कोई रियायत या परिलाभ नहीं मिलेगा। उद्योग विभाग की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने यह फैसला लिया है और उद्योग आयुक्त ने आदेश जारी कर दिए हैं।

अब तक यह प्रकरण एक अधिकारी के एपीओ तक सीमित दिख रहा था, लेकिन पैकेज पर रोक से इसका सीधा असर कंपनी के कारोबार और सरकारी खजाने से जुड़े फैसलों पर पड़ने लगा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद संज्ञान लिया है और सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात दोहरा रही है।

शिखर अग्रवाल गोयल फैशन्स: सरकार ने क्या फैसला लिया

राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने मैसर्स गोयल फैशन्स को स्वीकृत कस्टमाइज्ड पैकेज पर रोक लगा दी है। यह पैकेज कंपनी को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) के तहत दिया गया था। रोक का मतलब यह है कि एसीबी की प्रारंभिक जांच पूरी होने तक कंपनी को स्वीकृत परिलाभों का वितरण और छूट का लाभ नहीं दिया जाएगा।

सरकार का कहना है कि निवेश बढ़ाना प्राथमिकता है, लेकिन सरकारी रियायतों का इस्तेमाल पारदर्शिता और तय नियमों से ही होना चाहिए। कस्टमाइज्ड पैकेज की रियायतें कंपनी के लिए बड़ी आर्थिक राहत होती हैं, इसलिए उन पर रोक तत्काल वित्तीय झटका है।

एसीबी जांच में कौन-कौन से सवाल उठ रहे हैं

एसीबी शिखर अग्रवाल पर पद के कथित दुरुपयोग से गोयल फैशन्स को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की प्रारंभिक जांच कर रही है। सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत आगे की जांच की अनुमति भी दे दी है — इसके बिना लोक सेवक के आधिकारिक फैसलों की जांच आगे नहीं बढ़ सकती।

पहला सवाल संपत्ति खरीद का है। आरोप है कि अग्रवाल और उनके परिवार ने कंपनी के उदयपुर (बुझड़ा) और अलवर (अजाबगढ़) स्थित ‘अनंता’ रिसॉर्ट्स में बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर विला-कॉटेज खरीदे।

दूसरा सवाल खरीद और सरकारी लाभों के बीच कथित संबंध का है — क्या रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में छूट, बिना सत्यापन के प्रमाणपत्रों की मंजूरी और विशेष पैकेज किसी अनुचित लेन-देन का नतीजा थे।

तीसरा सवाल समय का है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मार्च 2026 में अलवर संपत्तियों की रजिस्ट्री और कंपनी को विशेष पैकेज जारी होने की तिथि एक ही थी। ब्यूरो को आशंका है कि इन फैसलों से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, अभी ये सभी बिंदु केवल जांच के विषय हैं, कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।

मामला यहां तक कैसे पहुंचा

शिखर अग्रवाल उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रह चुके हैं, जो निवेश प्रोत्साहन और कस्टमाइज्ड पैकेज जैसे फैसलों से सीधे जुड़ा होता है — इसलिए उनकी भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक था। बीते दिनों सरकार ने उन्हें एपीओ कर दिया था, यानी तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त करके पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा में रखा गया था। शिखर अग्रवाल को एपीओ किए जाने की खबर में इस कार्रवाई का पूरा ब्योरा दिया गया था।

इसके बाद इस प्रकरण की आंच उनकी पत्नी तक भी पहुंची। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को भी एपीओ कर दिया गया। प्रशाखा माथुर के एपीओ के बाद यह मामला नौकरशाही में सबसे ज्यादा चर्चा वाला प्रकरण बन गया, क्योंकि पति-पत्नी दोनों वरिष्ठ अधिकारी कुछ ही दिनों के अंतराल में एपीओ हुए। राजनीतिक स्तर पर भी मुद्दा गरम है — विपक्ष क्लीन चिट का आरोप लगा रहा है, भाजपा ने पलटवार किया है। इसी बीच पैकेज पर रोक सरकार की ठोस कार्रवाई का संकेत मानी जा रही है।

कस्टमाइज्ड पैकेज क्या होता है और रोक का मतलब क्या है

निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत सरकार बड़े निवेशकों को विशेष रियायतें देती है। सामान्य योजना से अलग, कस्टमाइज्ड पैकेज किसी खास बड़ी परियोजना के लिए तैयार किया जाता है, जिसमें कर छूट या अनुदान जैसे परिलाभ हो सकते हैं — मकसद निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास बढ़ाना होता है।

यही खास दर्जा इसे संवेदनशील बनाता है — नियमों से हटकर मिला पैकेज खजाने को नुकसान पहुंचाता है और दूसरे निवेशकों से भेदभाव का सवाल खड़ा करता है। इसलिए जांच के दौरान रोक एक एहतियाती कदम है। गड़बड़ी साबित हुई तो पैकेज रद्द या वसूली हो सकती है, आरोप साबित न हुए तो रोक हट जाएगी।

शिखर अग्रवाल गोयल फैशन्स मामले में आगे क्या होगा

अब सबकी नजर एसीबी की प्रारंभिक जांच पर है। तथ्य आरोपों को बल देते हैं तो नियमित मुकदमा दर्ज हो सकता है, समर्थन नहीं करते तो मामला बंद भी हो सकता है। धारा 17ए की मंजूरी से एजेंसी को आधिकारिक फैसलों की पड़ताल का कानूनी रास्ता मिल गया है।

सरकार के लिए यह प्रतिष्ठा का सवाल है — मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस की कसौटी पर हर अगली कार्रवाई परखी जाएगी। उद्योग जगत के लिए भी संदेश है कि निवेश योजनाएं जारी रहेंगी, पर आवंटन में पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। देखना होगा कि क्या सरकार पैकेज मंजूरी की प्रक्रिया में भी बदलाव करती है।

घटनाक्रम: अब तक क्या-क्या हुआ

तारीख घटनाक्रम
मार्च 2026 अलवर संपत्तियों की रजिस्ट्री और विशेष पैकेज जारी होने की तिथि एक ही बताई जा रही है
29 अक्टूबर 2026 वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को एपीओ किया गया
31 अक्टूबर 2026 उनकी पत्नी, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को भी एपीओ किया गया
2 नवंबर 2026 सरकार ने गोयल फैशन्स के कस्टमाइज्ड पैकेज के लाभों पर रोक लगाई, एसीबी जांच तक कोई परिलाभ नहीं मिलेगा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गोयल फैशन्स का पैकेज क्यों रोका गया है?

एसीबी जांच पूरी होने तक कंपनी को स्वीकृत पैकेज का कोई लाभ नहीं मिलेगा। फैसला उद्योग विभाग की छानबीन समिति ने मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद लिया है।

शिखर अग्रवाल पर क्या आरोप हैं?

आरोप है कि उन्होंने पद का कथित दुरुपयोग कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाए और बदले में परिवार के लिए कम कीमत पर विला-कॉटेज खरीदे। ये आरोप जांच के विषय हैं, अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।

क्या कंपनी को अब कोई लाभ नहीं मिलेगा?

नहीं — जांच पूरी होने तक परिलाभों का वितरण और छूट का लाभ बंद रहेगा। आगे का फैसला जांच के नतीजे पर होगा।

धारा 17ए की मंजूरी का क्या मतलब है?

इस धारा के तहत सरकार की मंजूरी के बिना लोक सेवक के आधिकारिक फैसलों की जांच आगे नहीं बढ़ सकती। मंजूरी मिलने से एसीबी की जांच को कानूनी रास्ता मिल गया है।

स्रोत: ETV Bharat, 2 नवंबर 2026।

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