दक्षिण राजस्थान के आदिवासी बहुल इलाकों के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। राज्य सरकार के हाईवे मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के तहत सलूंबर बांसवाड़ा हाईवे (स्टेट हाईवे-32) को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। करीब 83 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर लगभग 3226 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अभी इस परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी चल रही है, और इसके पूरा होते ही काम आगे बढ़ेगा।
सलूंबर और बांसवाड़ा जैसे इलाकों से उदयपुर या अन्य बड़े शहरों तक पहुंचना आज भी कई लोगों के लिए लंबा और थकाऊ सफर है। सड़कें टूटी-फूटी हैं, तो बारिश के मौसम में हालत और बिगड़ जाती है। ऐसे में ये नई सड़क सिर्फ डामर और पत्थर की परत नहीं होगी — ये लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने वाला रास्ता बनेगी।
सलूंबर बांसवाड़ा हाईवे: परियोजना एक नजर में
पहले समझ लीजिए कि सलूंबर बांसवाड़ा हाईवे प्रोजेक्ट असल में क्या है:
| विवरण | जानकारी |
| मार्ग | सलूंबर-बांसवाड़ा स्टेट हाईवे-32 |
| लंबाई | लगभग 83 किलोमीटर |
| अनुमानित लागत | करीब 3226 करोड़ रुपये |
| योजना | राजस्थान हाईवे मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट |
| वित्त पोषण | विश्व बैंक के सहयोग से |
| निगरानी एजेंसी | राजस्थान स्टेट हाईवेज अथॉरिटी (RSHA) |
| वर्तमान स्थिति | फिजिबिलिटी स्टडी जारी |
सलूंबर-बांसवाड़ा मार्ग अकेला नहीं है। राजस्थान में 14 प्रमुख स्टेट हाईवे को आधुनिक बनाने की बड़ी योजना पर काम चल रहा है। इनमें से कई परियोजनाओं पर काम पहले से जारी है, जबकि कुछ पूरी भी हो चुकी हैं।
सलूंबर बांसवाड़ा हाईवे: आदिवासी इलाकों के लिए क्यों अहम
सलूंबर और बांसवाड़ा दक्षिण राजस्थान के वो इलाके हैं, जहां बड़ी आबादी आदिवासी समुदायों की है। इन गांवों से जिला मुख्यालय या उदयपुर तक पहुंचने में आज भी घंटों लग जाते हैं। मरीज को अस्पताल ले जाना हो या बच्चे को कॉलेज पहुंचाना हो — खराब सड़क हर काम मुश्किल बना देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सलूंबर बांसवाड़ा हाईवे का उन्नयन सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से इन इलाकों में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और आदिवासी बहुल क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। स्कूल और अस्पताल की दूरी घटेगी, बाजार नजदीक आएगा।
किसानों, व्यापारियों और पर्यटन को क्या मिलेगा
बेहतर सड़क संपर्क का सबसे सीधा लाभ कृषि और व्यापार क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। दक्षिण राजस्थान के किसान अपनी उपज को तेजी से मंडियों और बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। आज कई बार खराब सड़क की वजह से परिवहन में देरी होती है, जिससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है और लागत बढ़ती है। आधुनिक हाईवे बनने के बाद माल ढुलाई में लगने वाला समय घटेगा और परिवहन लागत भी कम हो सकती है।
पर्यटन के लिहाज से भी ये सड़क अहम है। दक्षिण राजस्थान प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। बांसवाड़ा और उसके आसपास के इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य व्यवसायों को नया अवसर मिलेगा। पर्यटक जब आसानी से पहुंचेंगे, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे — चाहे वो गाइड का काम हो, होमस्टे हो या स्थानीय हस्तशिल्प की बिक्री।
इसके अलावा, सड़क निर्माण के दौरान भी स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में मजदूरी से लेकर तकनीकी काम तक, कई तरह के रोजगार पैदा होते हैं।
विश्व बैंक की मदद और राज्य के 14 हाईवे वाला बड़ा प्लान
ये प्रोजेक्ट अकेला नहीं चल रहा। राजस्थान सरकार ने राज्य के 14 प्रमुख स्टेट हाईवे को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित करने का बड़ा प्लान बनाया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को विश्व बैंक के सहयोग से लागू किया जा रहा है। कई परियोजनाओं पर काम जारी है और कुछ पूरी भी हो चुकी हैं।
राजस्थान स्टेट हाईवेज अथॉरिटी (RSHA) इन परियोजनाओं की निगरानी कर रही है। जानकारी के मुताबिक, टोल वसूली का काम भी स्टेट हाईवे अथॉरिटी करेगी, जिससे सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। यानी ये सड़कें सिर्फ खर्च का बोझ नहीं, बल्कि लंबे समय में राजस्व का जरिया भी बनेंगी।
बजट 2026 में भी सड़क सुरक्षा और हाईवे विकास पर जोर दिया गया था। ‘मिशन जीरो’ के तहत साल 2047 तक सड़क दुर्घटनाओं में 90 प्रतिशत कमी का लक्ष्य रखा गया है। आधुनिक, चौड़ी और सुरक्षित सड़कें इस लक्ष्य की बुनियाद हैं।
फिजिबिलिटी स्टडी के बाद क्या होगा — आगे का रास्ता
फिलहाल सलूंबर बांसवाड़ा हाईवे परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी चल रही है। इसका मतलब है कि मार्ग का तकनीकी सर्वे, लागत का विस्तृत आकलन, पर्यावरणीय पहलुओं की जांच और जमीन से जुड़े मामलों का अध्ययन किया जा रहा है। फिजिबिलिटी स्टडी किसी भी बड़े प्रोजेक्ट का पहला और सबसे अहम चरण होता है — इसी से तय होता है कि काम कैसे, कब और कितनी लागत में होगा।
स्टडी पूरी होने के बाद टेंडर प्रक्रिया, निर्माण एजेंसी का चयन और फिर वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होगा। 83 किलोमीटर के इस मार्ग पर आधुनिक मानकों के अनुरूप सड़क बनेगी, जिसमें सुरक्षा के सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाएगा।
प्रदेश में विकास प्राधिकरण और एजेंसियां अब सड़क योजनाओं को कागज से निकालकर जमीन पर उतारने की ठान चुकी हैं। भरतपुर में BDA ने हाल ही में 36 मीटर सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़ा अभियान चलाया था, और जयपुर में JDA ने 575 करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी दी है। सलूंबर-बांसवाड़ा हाईवे उसी विकास की कड़ी का अगला बड़ा कदम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: सलूंबर बांसवाड़ा हाईवे परियोजना की लागत कितनी है?
जवाब: इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3226 करोड़ रुपये है। 83 किलोमीटर लंबे स्टेट हाईवे-32 को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
सवाल: इस परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है?
जवाब: फिलहाल परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी चल रही है। इसके पूरा होने के बाद टेंडर और निर्माण कार्य की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सवाल: इस हाईवे से किन इलाकों को फायदा मिलेगा?
जवाब: सलूंबर, बांसवाड़ा और आसपास के आदिवासी तथा ग्रामीण इलाकों को सीधा लाभ मिलेगा। उदयपुर तक की यात्रा तेज, आरामदायक और सुरक्षित होगी।
सवाल: इस परियोजना को वित्त पोषण कौन दे रहा है?
जवाब: ये परियोजना राजस्थान के 14 स्टेट हाईवे मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसे विश्व बैंक के सहयोग से लागू किया जा रहा है। निगरानी राजस्थान स्टेट हाईवेज अथॉरिटी (RSHA) कर रही है।
स्रोत: उदयपुर टाइम्स (मूल खबर)