कोटा पत्रकार गिरफ्तार होने की खबर ने गुरुवार को शहर में हलचल मचा दी। बोरखेड़ा थाना पुलिस की दबिश में दैनिक भास्कर के पत्रकार पंकज मित्तल सहित कुल 9 लोग जुआ खेलने के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस ने मौके से 92 हजार 60 रुपये नकद और 312 ताश के पत्ते जब्त किए हैं। लेकिन इस कार्रवाई के साथ ही एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है — क्या यह पुलिस की सामान्य कानूनी कार्रवाई है, या फिर पुलिस के खिलाफ लगातार खबरें लिखने वाले पत्रकार को निशाना बनाने का मामला है? कोटा में पत्रकार गिरफ्तार होने के बाद से ही यह सवाल हर तरफ चर्चा में है, और निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
कोटा पत्रकार गिरफ्तार: 21 अक्टूबर की रात कैसे पड़ी बोरखेड़ा पुलिस की दबिश
घटना की शुरुआत 21 अक्टूबर 2026 की है। बोरखेड़ा थानाधिकारी सीआई अजीत बगडोलिया पुलिस जाप्ते के साथ इलाके में गश्त पर थे। इसी दौरान उन्हें मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली कि बजरंग नगर स्थित आदित्य आवास के मकान नंबर 184 में कुछ लोग ताश के पत्तों पर रुपये-पैसों का दांव लगाकर जुआ खेल रहे हैं।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश के प्रावधानों के तहत तलाशी वारंट हासिल किया। वारंट मिलने के बाद पुलिस टीम मकान पर पहुंची और नियमानुसार तलाशी अभियान चलाया। पुलिस के मुताबिक, मकान के ड्राइंग रूम में नौ व्यक्ति ताश के पत्तों पर रुपयों का दांव लगाते हुए रंगे हाथ पकड़े गए। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी नौ को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
इस पूरी कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला नाम पंकज मित्तल का था। पुलिस के अनुसार पंकज मित्तल (53 वर्ष) छावनी, गुमानपुरा इलाके के रहने वाले हैं और दैनिक भास्कर से जुड़े पत्रकार हैं। पत्रकार का नाम गिरफ्तारों की सूची में सामने आते ही मामला सुर्खियों में आ गया।
कोटा पत्रकार गिरफ्तार केस: 9 आरोपी और जब्त माल की पूरी सूची
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान मौके से भारी नकदी और ताश के पत्ते बरामद किए हैं। कुल 92 हजार 60 रुपये नकद और 312 ताश के पत्ते जब्त किए गए हैं। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों का ब्योरा इस प्रकार है:
| आरोपी का नाम | उम्र | पता |
|---|---|---|
| श्रीपुल गर्ग | 41 वर्ष | पुखराज औरा, बजरंग नगर |
| लोकेश पीपलानी | 43 वर्ष | आदित्य आवास, बोरखेड़ा |
| पूरण पीपलानी | 60 वर्ष | राजीव गांधी स्पेशल, विज्ञान नगर |
| हिमांशु नंदवानी | 35 वर्ष | विज्ञान नगर |
| जयप्रकाश मेघवाल | 44 वर्ष | हनुमान बस्ती, दादाबाड़ी |
| संजीव विजय | 52 वर्ष | सब्जी मंडी, छावनी, गुमानपुरा |
| अमित पीपलानी | 48 वर्ष | मकान नंबर 184, आदित्य आवास |
| पंकज मित्तल | 53 वर्ष | सरकारी स्कूल के पीछे, छावनी |
| अकील अहमद | 62 वर्ष | डडवाड़ा, भीमगंजमंडी |
मामले में राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह सूचना के आधार पर और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई है।
कोटा पत्रकार गिरफ्तार पर क्यों उठे सवाल? दोनों पक्ष जानिए
कोटा पत्रकार गिरफ्तार मामले को लेकर बहस की जड़ यह है कि पंकज मित्तल लंबे समय से पुलिस के खिलाफ खबरें लिख रहे थे। सूत्रों के हवाले से यह आरोप सामने आ रहा है कि पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाली रिपोर्टिंग की वजह से पत्रकार को साजिश के तहत फंसाया गया है। हालांकि यह सिर्फ आरोप है — अभी तक किसी निष्पक्ष जांच में यह साबित नहीं हुआ है कि गिरफ्तारी प्रतिशोध के चलते की गई।
पुलिस का पक्ष साफ है: कार्रवाई मुखबिर की पुख्ता सूचना पर हुई, तलाशी वारंट लिया गया और ड्राइंग रूम में नौ लोग ताश पर दांव लगाते मिले। पुलिस के अनुसार यह एक रूटीन अपराध-विरोधी अभियान था, जिसमें पत्रकार भी मौके पर मौजूद मिले।
दूसरी तरफ पत्रकारिता से जुड़े हलकों का कहना है कि अगर किसी पत्रकार को उसकी रिपोर्टिंग की वजह से निशाना बनाया गया हो तो यह प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला होगा। उनका कहना है कि दोनों पक्षों — पुलिस के आधिकारिक बयान और पत्रकार के पक्ष — को सामने आना चाहिए और साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके।
गौरतलब है कि कोटा में हाल के दिनों में पुलिस की सक्रियता बढ़ी हुई है। ऑपरेशन हॉक के तहत हिस्ट्रीशीटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई और कांग्रेस प्रत्याशी की हिस्ट्रीशीट खुलने जैसे मामलों में भी पुलिस की टाइमिंग पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में बोरखेड़ा की इस कार्रवाई की टाइमिंग और इसके पीछे की मंशा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश: कानूनी पहलू क्या कहता है
राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश राज्य में जुए के खिलाफ मुख्य कानून है। इसके तहत सार्वजनिक जगह पर या किसी मकान में जुए का फड़ चलाने और जुआ खेलने पर गिरफ्तारी और अभियोजन का प्रावधान है। जुए के आरोप में पकड़े गए लोगों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाता है, जहां मामले की प्रकृति के अनुसार जमानत और आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होती है।
इस मामले में भी पुलिस ने सभी नौ आरोपियों को गिरफ्तार करके कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जब्त नकदी और ताश के पत्ते केस के सबूत के तौर पर पेश किए जाएंगे। आगे की जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या यह फड़ नियमित रूप से चल रहा था और क्या इसमें कोई संगठित नेटवर्क शामिल था। राजस्थान पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर नागरिक अपनी शिकायतें और जानकारी दर्ज करा सकते हैं।
आगे क्या होगा? जांच का रुख तय करेगा सच
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी। पुलिस ने अपनी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, लेकिन पत्रकार की गिरफ्तारी पर उठे सवालों ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है।
उम्मीद की जा रही है कि पत्रकार संगठनों की तरफ से भी इस मामले में प्रतिक्रिया आएगी और निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ेगी। अगर आरोप सही साबित होते हैं कि पत्रकार को उनकी रिपोर्टिंग की वजह से फंसाया गया, तो यह न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएगा, बल्कि प्रेस की आजादी के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बनेगा। वहीं अगर जांच में पुलिस की कार्रवाई सही पाई जाती है, तो यह संदेश जाएगा कि कानून सबके लिए बराबर है — चाहे वह पत्रकार ही क्यों न हो।
फिलहाल कोटा पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई जारी रखी है और आगे की जांच पुलिस कर रही है। इस खबर से जुड़ी हर नई जानकारी के लिए बने रहिए राज न्यूज के साथ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: कोटा में जुए के फड़ पर पुलिस की दबिश में कितने लोग गिरफ्तार हुए?
जवाब: बोरखेड़ा थाना पुलिस की कार्रवाई में कुल 9 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। मौके से 92 हजार 60 रुपये नकद और 312 ताश के पत्ते जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई 21 अक्टूबर 2026 को बजरंग नगर के आदित्य आवास स्थित मकान नंबर 184 में हुई थी।
सवाल 2: गिरफ्तार पत्रकार पंकज मित्तल कौन हैं?
जवाब: पंकज मित्तल (53 वर्ष) दैनिक भास्कर से जुड़े पत्रकार हैं और कोटा के छावनी, गुमानपुरा इलाके के रहने वाले हैं। वे बोरखेड़ा पुलिस की दबिश में मौके पर मौजूद मिले और उन्हें अन्य 8 लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया।
सवाल 3: इस कार्रवाई पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
जवाब: सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पंकज मित्तल लंबे समय से पुलिस के खिलाफ खबरें लिख रहे थे। कुछ हलकों में यह आरोप लगाया जा रहा है कि उन्हें रिपोर्टिंग की वजह से साजिश के तहत फंसाया गया है। हालांकि अभी तक यह आरोप साबित नहीं हुआ है और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
सवाल 4: राजस्थान में जुए के खिलाफ कौन सा कानून लागू है?
जवाब: राजस्थान में राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश लागू है। इसके तहत जुए का फड़ चलाने या जुआ खेलने पर गिरफ्तारी और अभियोजन का प्रावधान है। पकड़े गए आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाता है।
स्रोत: उदित भास्कर, थिनक्यू360 — प्रकाशन: 23 अक्टूबर 2026