रूपबस अस्पताल भूमि विवाद: 20 पंचायतों का विरोध, रोज सुबह 11 बजे धरना

भरतपुर जिले के रूपबस कस्बे में इन दिनों एक ऐसा मुद्दा गरमाया है, जिसका सीधा असर आसपास की करीब 20 ग्राम पंचायतों के लोगों की सेहत से जुड़ा है। रूपबस अस्पताल भूमि विवाद अब सड़कों पर उतर आया है — शुक्रवार को अखिल राजस्थान जन विकास मंच के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग उपखंड कार्यालय पहुंचे और जमीन आवंटन के खिलाफ धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया है कि मांग न माने जाने तक रोज सुबह 11 बजे से उपखंड अधिकारी कार्यालय के सामने क्रमिक धरना जारी रहेगा।

मामला उप जिला चिकित्सालय के भवन हेतु जमीन आवंटन का है। स्वीकृति के बाद प्रशासन ने ग्राम पंचायत चैकोरा के गांव नगला देविया में भूमि आवंटित कर दी — कस्बे से 4-5 किमी दूर, जबकि कस्बे के अंदर ही सरकार के पास पर्याप्त जमीन मौजूद है।

50 साल पुराना अस्पताल और नई जगह का फासला

रूपबस अस्पताल भूमि विवाद की जड़ समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। कस्बे में पिछले करीब 50 साल से एक अस्पताल चल रहा है, जो रेलवे स्टेशन से महज 150 मीटर की दूरी पर है। बीच कस्बे में होने से मरीज आसानी से पहुंच जाते हैं — बस स्टैंड और बाजार पास हैं, आने-जाने के साधन भी सुलभ हैं।

अब सरकार उप जिला चिकित्सालय का नया भवन बनाना चाहती है, लेकिन जगह नगला देविया में तय की गई है — कस्बे से 4 से 5 किलोमीटर दूर। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इतनी दूर अस्पताल बनने से बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर मरीजों को भारी परेशानी होगी। वहां पहुंचने के लिए फिलहाल कोई सुगम साधन भी नहीं है।

एक और गंभीर चिंता नई जगह के आसपास के माहौल को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां नया अस्पताल बनाने की योजना है, उसके पास ही नगर पालिका कचरा इकट्ठा करती है। ऐसे में वहां संक्रमण फैलने का डर हमेशा बना रहेगा — और अस्पताल जैसी जगह पर यह खतरा और बड़ा हो जाता है।

रूपबस अस्पताल भूमि विवाद में 195 बीघा जमीन का दावा

धरने में सबसे तीखा आरोप जमीन के चयन को लेकर लगा। संघर्ष समिति के संयोजक और पार्षद धीरज शुक्ला (एडवोकेट) ने कहा कि उप जिला चिकित्सालय का भवन नगर पालिका क्षेत्र रूपबस में ही किसी सुविधाजनक स्थान पर बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि भिडयानी क्षेत्र — जो नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत आता है — में नेशनल हाईवे के पास सरकार के पास लगभग 195 बीघा भूमि उपलब्ध है।

इसके बावजूद रूपबस से 4 किमी दूर नगला देविया में भूमि आवंटित कर दी गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भू-माफियाओं के दबाव में जमीन का चयन मनमाने ढंग से हुआ है।

मंच के प्रदेश अध्यक्ष हरिशंकर शर्मा ने कहा कि अस्पताल दूर बनने से रूपबस का विकास अवरुद्ध होगा और कस्बे के व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होगा। मंच के सह संयोजक अरुण परमार ने बताया कि अस्पताल के 4 किलोमीटर दूर बनने से लगभग 20 ग्राम पंचायतों की जनता सीधे प्रभावित होगी।

रूपबस अस्पताल भूमि विवाद पर SDM से वार्ता, सोमवार को पेश होंगे कागजात

शुक्रवार को उपखंड कार्यालय के सामने रूपबस अस्पताल भूमि विवाद पर हुए धरने की अध्यक्षता मंच के प्रदेश अध्यक्ष हरिशंकर शर्मा ने की। धरने में नगर पालिका के पार्षदों और शहर के प्रबुद्धजनों ने भाग लिया। वक्ताओं ने एक स्वर में मांग रखी कि नगला देविया में हुआ भूमि आवंटन निरस्त कर रूपबस कस्बे के भीतर ही अस्पताल के लिए भूमि आवंटित की जाए।

धरने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी और तहसीलदार से वार्ता की, जिसे सकारात्मक बताया गया। तय हुआ कि रूपबस अस्पताल भूमि विवाद से जुड़ा भूमि संबंधी पूरा रिकॉर्ड सोमवार को उपखंड अधिकारी और तहसीलदार के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि जमीन के दावों की तथ्यात्मक जांच हो सके।

धरना स्थल पर सरपंच उदयभान शर्मा, पार्षद गोविंद सिंह परमार, समाजसेवी मुकेश कटारा और प्रेम प्रकाश पाराशर (एडवोकेट) सहित कई लोगों ने विचार रखे।

रोज सुबह 11 बजे क्रमिक धरना, मांग न मानी तो आंदोलन तेज

प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन लंबा खींचने की तैयारी कर ली है। संयोजक धीरज शुक्ला ने ऐलान किया कि रूपबस अस्पताल भूमि विवाद में मांग न माने जाने तक रोज सुबह 11 बजे से उपखंड अधिकारी कार्यालय के सामने क्रमिक धरना जारी रहेगा। यानी यह एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि अनिश्चितकालीन आंदोलन की शुरुआत है।

यह मुद्दा अब सिर्फ एक कस्बे की जमीन का नहीं रहा — रूपबस अस्पताल भूमि विवाद ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का स्थान तय करते समय आम लोगों की सुविधा को कितनी तरजीह मिलती है।

गौरतलब है कि भरतपुर में विकास के फैसलों पर पहले भी तीखी प्रतिक्रिया होती रही है — BDA की सड़क चौड़ीकरण कार्रवाई भी चर्चा में रही थी। वहीं अजमेर के जेएलएन अस्पताल में ठेका कर्मचारियों के वेतन का मामला भी सामने आया था।

रूपबस अस्पताल भूमि विवाद: एक नजर में पूरा मामला

बिंदु विवरण
स्थान रूपबस कस्बा, जिला भरतपुर (राजस्थान)
विवाद उप जिला चिकित्सालय हेतु नगला देविया (ग्राम पंचायत चैकोरा) में भूमि आवंटन
दूरी कस्बे से करीब 4-5 किलोमीटर
प्रदर्शनकारियों का दावा भिडयानी क्षेत्र में NH के पास सरकार के पास ~195 बीघा भूमि उपलब्ध
मुख्य आरोप भू-माफियाओं के दबाव में मनमाने ढंग से जमीन का चयन
प्रभावित लगभग 20 ग्राम पंचायतों की जनता, कस्बे के व्यापारी
आंदोलन रोज सुबह 11 बजे से उपखंड कार्यालय के सामने क्रमिक धरना
ताजा स्थिति SDM-तहसीलदार से वार्ता सकारात्मक; सोमवार को भूमि रिकॉर्ड पेश होगा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: रूपबस अस्पताल भूमि विवाद क्या है?

जवाब: रूपबस के लिए स्वीकृत उप जिला चिकित्सालय हेतु नगला देविया गांव में भूमि आवंटित हुई है, जो कस्बे से 4-5 किमी दूर है। स्थानीय लोग अस्पताल कस्बे के भीतर चाहते हैं।

सवाल: प्रदर्शनकारी क्या मांग कर रहे हैं?

जवाब: नगला देविया का भूमि आवंटन निरस्त कर रूपबस नगर पालिका क्षेत्र के भीतर — जैसे भिडयानी क्षेत्र में NH के पास उपलब्ध करीब 195 बीघा सरकारी भूमि पर — अस्पताल भवन का निर्माण कराया जाए।

सवाल: नई जगह पर अस्पताल बनाने में क्या दिक्कत है?

जवाब: तीन बड़ी दिक्कतें हैं — (1) 4-5 किमी दूरी पर आने-जाने का कोई सुगम साधन नहीं, (2) नई जगह के पास कचरा डिपो होने से संक्रमण का खतरा, (3) अस्पताल दूर जाने से कस्बे के व्यापारियों का रोजगार प्रभावित होगा।

सवाल: आंदोलन का आगे क्या कार्यक्रम है?

जवाब: रोज सुबह 11 बजे उपखंड कार्यालय के सामने क्रमिक धरना जारी रहेगा। सोमवार को भूमि रिकॉर्ड SDM-तहसीलदार को सौंपा जाएगा।

स्रोत: रॉयल पत्रिका — प्रकाशन तिथि 23 अक्टूबर 2026

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