आठ लाख रुपये। दो पेपर। दो डमी अभ्यर्थी। और एक सरकारी नौकरी। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में हुए फर्जीवाड़े की यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां परीक्षा हॉल में बैठा चेहरा असली था, लेकिन उसके पीछे की पहचान नकली थी। इस RPSC डमी अभ्यर्थी गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंध लगाने वाले गिरोह कितने संगठित तरीके से काम करते हैं। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने इस मामले के मुख्य मध्यस्थ राजमोहन मीणा को गिरफ्तार कर लिया है, और अदालत ने उसे 21 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
8 लाख का सौदा: परीक्षा हॉल से चयन तक का खेल
SOG की जांच के मुताबिक, इस पूरे फर्जीवाड़े की जड़ में एक सीधा-सादा सौदा था — 8 लाख रुपये में दो अलग-अलग विषयों की परीक्षा में डमी अभ्यर्थी बैठाने की डील। मूल अभ्यर्थी अरुण कुमार मीणा ने अपनी जगह परीक्षा दिलवाने के लिए राजमोहन मीणा से यह सौदा तय किया था। राजमोहन ने ही दोनों डमी अभ्यर्थियों की व्यवस्था की, जिन्होंने टोंक के परीक्षा केंद्रों पर बैठकर असली अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दी।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि डमी अभ्यर्थी सिर्फ एक पेपर के लिए नहीं बैठाया गया था। जांच में सामने आया है कि दोनों विषयों — सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान और विज्ञान — की परीक्षा में अलग-अलग डमी चेहरे इस्तेमाल किए गए। यानी गिरोह ने परीक्षा केंद्र के दस्तावेजी सत्यापन को दो बार चकमा दिया। डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा पास करने के बाद अरुण कुमार मीणा का वरिष्ठ अध्यापक (विज्ञान विषय) के पद पर अंतिम चयन भी हो गया था। मतलब, एक फर्जी प्रक्रिया से होकर कोई व्यक्ति सरकारी शिक्षक बनने की कतार में खड़ा हो गया।
कौन हैं ये दोनों चेहरे: अरुण कुमार मीणा और राजमोहन मीणा
इस मामले के दो केंद्रीय पात्र हैं, और दोनों की कहानी अलग-अलग जिलों से जुड़ी है। मूल अभ्यर्थी अरुण कुमार मीणा टोंक जिले की उनियारा तहसील के लसाड़िया गांव का निवासी है। वही व्यक्ति है जिसकी जगह डमी अभ्यर्थी बैठे, और जिसका चयन वरिष्ठ अध्यापक के पद पर हो गया। SOG उसे पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
दूसरा पात्र है राजमोहन मीणा — वह मध्यस्थ, जिसने इस सौदे की पूरी व्यवस्था की। राजमोहन सवाई माधोपुर जिले के कुंडेरा थाना क्षेत्र के हिंगोनी गांव का रहने वाला है। SOG के अनुसार, उसी ने 8 लाख रुपये की डील के तहत दोनों डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने के लिए तैयार किया। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद SOG इस नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की भूमिका की जांच कर रही है। ADG SOG विशाल बंसल के मुताबिक, आरोपी से पूछताछ का मकसद इस कथित नेटवर्क से जुड़ी और जानकारी जुटाना है।
24 दिसंबर 2022 की वह परीक्षा: रद्द पेपर और दोबारा परीक्षा की पूरी पृष्ठभूमि
इस फर्जीवाड़े को समझने के लिए परीक्षा की पृष्ठभूमि जानना जरूरी है। RPSC, अजमेर ने वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 का आयोजन 24 दिसंबर 2022 को किया था। उस दिन दो विषयों की परीक्षा हुई थी — सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान, और विज्ञान। लेकिन सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान का पेपर लीक हो जाने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। बाद में इस विषय की परीक्षा 29 जनवरी 2023 को दोबारा कराई गई।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भर्ती परीक्षा | RPSC वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 |
| परीक्षा की तारीख | 24 दिसंबर 2022 |
| विषय | सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान, विज्ञान |
| GK पेपर रद्द होने का कारण | पेपर लीक |
| दोबारा परीक्षा | 29 जनवरी 2023 |
| डमी अभ्यर्थी बैठे | टोंक के परीक्षा केंद्रों पर, दोनों विषयों में |
| सौदे की रकम | 8 लाख रुपये |
| मूल अभ्यर्थी | अरुण कुमार मीणा (लसाड़िया, उनियारा, टोंक) |
| मध्यस्थ | राजमोहन मीणा (हिंगोनी, कुंडेरा, सवाई माधोपुर) |
| मुकदमा दर्ज | 27 दिसंबर 2023, SOG थाना |
| लागू कानून | राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2022 |
| रिमांड | 21 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड |
दिलचस्प बात यह है कि पेपर लीक के कारण एक विषय की परीक्षा रद्द होकर दोबारा हुई, लेकिन डमी अभ्यर्थियों का खेल दोनों ही विषयों में चला। इससे पता चलता है कि गिरोह का नेटवर्क परीक्षा केंद्रों के अंदर तक कितनी गहराई से फैला था।
SOG की जांच: 27 दिसंबर 2023 से 21 अक्टूबर की रिमांड तक
इस मामले में SOG थाने में 27 दिसंबर 2023 को मुकदमा दर्ज किया गया था। मामला राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2022 के तहत दर्ज है — वही कानून जो प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल और फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान करता है। अनुसंधान अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश कुमार शर्मा ने राजमोहन मीणा को गिरफ्तार करने के बाद उसे जयपुर महानगर-द्वितीय के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रम संख्या-3 की अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने आरोपी को 21 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
SOG अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है। जांच का उद्देश्य सिर्फ इस एक सौदे तक सीमित नहीं है — एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, डमी अभ्यर्थी कहां से लाए जाते थे, और क्या इसी तरह के सौदे अन्य भर्तियों में भी हुए हैं। वरिष्ठ अध्यापक भर्ती में SOG की यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है — इससे पहले पेपर लीक मामले में विनोद कुमार जाट उर्फ विनोद रेवाड़ की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, जिसके साथ इस प्रकरण में गिरफ्तारियों की संख्या 70 के पार पहुंच गई थी।
SI भर्ती-2021 से जुड़ा पुराना तार: वही चेहरा, वही तरकीब
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि राजमोहन मीणा और अरुण कुमार मीणा का नाम SI भर्ती-2021 से जुड़े डमी अभ्यर्थी मामले में भी सामने आ चुका है। जांच के अनुसार, SI भर्ती में भी अरुण कुमार मीणा ने खुद परीक्षा देने के बजाय डमी अभ्यर्थी के जरिए परीक्षा पास की थी, और उसका उपनिरीक्षक (SI) के पद पर चयन भी हो गया था। उस मामले में भी आरोपी को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है।
SI भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में SOG अब तक 154 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, और जांच अभी भी जारी है। यानी एक ही व्यक्ति कथित तौर पर दो अलग-अलग बड़ी भर्तियों में डमी अभ्यर्थी की तरकीब से चयनित हुआ — पहले SI भर्ती में, फिर वरिष्ठ अध्यापक भर्ती में। यह पैटर्न बताता है कि डमी अभ्यर्थी का धंधा कोई एक बार की घटना नहीं, बल्कि एक संगठित व्यवस्था है।
अभ्यर्थियों के लिए सबक: कानून क्या कहता है और आगे क्या होगा
राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2022 के तहत प्रतियोगी परीक्षा में फर्जीवाड़ा, पेपर लीक और डमी अभ्यर्थी बैठाने जैसे अपराधों पर कठोर सजा का प्रावधान है। इस कानून के बनने के बाद से SOG को ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करने का अधिकार मिला है, और वरिष्ठ अध्यापक भर्ती से लेकर SI भर्ती तक — कई मामलों में गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है।
21 अक्टूबर तक की रिमांड अवधि में SOG राजमोहन मीणा से पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश करेगी। अगर जांच में और नाम सामने आते हैं, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि डमी अभ्यर्थी या पेपर लीक जैसे शॉर्टकट न सिर्फ करियर खत्म करते हैं, बल्कि आपराधिक मुकदमे में भी फंसा देते हैं — जैसा कि अरुण कुमार मीणा के मामले में हुआ, जिसका चयन होने के बावजूद अब वह सलाखों के पीछे है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: राजमोहन मीणा कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
उत्तर: राजमोहन मीणा सवाई माधोपुर जिले के कुंडेरा थाना क्षेत्र के हिंगोनी गांव का निवासी है। SOG के अनुसार, उसने RPSC वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 में मूल अभ्यर्थी अरुण कुमार मीणा की जगह दो अलग-अलग विषयों की परीक्षा में डमी अभ्यर्थी बैठाने की व्यवस्था की थी। इसके लिए 8 लाख रुपये का सौदा तय हुआ था।
प्रश्न 2: डमी अभ्यर्थी किस तरह परीक्षा में बैठे?
उत्तर: जांच के मुताबिक, टोंक के परीक्षा केंद्रों पर सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान और विज्ञान — दोनों विषयों की परीक्षा में अलग-अलग डमी अभ्यर्थी बैठाए गए। डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा पास करने के बाद अरुण कुमार मीणा का वरिष्ठ अध्यापक (विज्ञान) पद पर चयन हो गया था।
प्रश्न 3: इस मामले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई है?
उत्तर: SOG थाने में 27 दिसंबर 2023 को राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2022 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। मूल अभ्यर्थी अरुण कुमार मीणा को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। अब मध्यस्थ राजमोहन मीणा की गिरफ्तारी हुई है और अदालत ने उसे 21 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा है।
प्रश्न 4: क्या इस मामले का SI भर्ती-2021 से भी संबंध है?
उत्तर: हां। जांच में सामने आया है कि राजमोहन मीणा और अरुण कुमार मीणा का नाम SI भर्ती-2021 के डमी अभ्यर्थी मामले में भी आया था। आरोप है कि उस भर्ती में भी अरुण कुमार मीणा ने डमी अभ्यर्थी के जरिए परीक्षा पास की और SI पद पर चयनित हुआ। उस मामले में भी आरोपी पहले गिरफ्तार हो चुका है।
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स्रोत: SOG जांच विवरण, RPSC परीक्षा रिकॉर्ड।