RGHS संकट गहराया: 52 लाख लाभार्थियों के कैशलेस इलाज पर ग्रहण, निजी अस्पतालों ने बनाई दूरी — जानें पूरी सच्चाई

राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवारों के लिए चल रही सबसे बड़ी कैशलेस स्वास्थ्य योजना — आरजीएचएस — इस वक्त गंभीर संकट से गुजर रही है। कई निजी अस्पतालों में योजना के मरीजों को या तो इलाज से मना किया जा रहा है या कैशलेस की जगह नकद भुगतान मांगा जा रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक, जयपुर के एक बड़े निजी अस्पताल ने आने वाले दिनों में आरजीएचएस मरीजों का इलाज बंद करने का फैसला लिया है, जबकि नकद भुगतान करने वाले मरीजों का इलाज वहां जारी रहेगा।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह फैसला चुपचाप लिया जा रहा है — कोई आधिकारिक घोषणा नहीं, लेकिन मरीजों को इसकी जानकारी देना शुरू कर दिया गया है। यानी इलाज के लिए जाने वाला मरीज अचानक सुन रहा है कि अब यहां आरजीएचएस पर इलाज नहीं मिलेगा।

52 लाख लोगों की सेहत दांव पर: आंकड़े क्या कहते हैं

आरजीएचएस यानी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम — राज्य सरकार के कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवार के सदस्यों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित पैकेज के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा।

आरजीएचएस पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, योजना में 13.61 लाख पंजीकृत लाभार्थी दर्ज हैं और उनके परिवार के सदस्यों की संख्या 38.53 लाख है। यानी कुल मिलाकर करीब 52.14 लाख लोग इस योजना के दायरे में आते हैं। प्रदेश में इस योजना से 2,663 अस्पताल जुड़े हुए हैं।

अब जरा सोचिए — 52 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा जिस योजना पर टिकी है, अगर उससे निजी अस्पताल ही दूरी बनाने लगें तो आम कर्मचारी और पेंशनर कहां जाएगा?

एक लाख रुपये लेकर इलाज: वो मामला जो दब गया

एक अन्य निजी अस्पताल का मामला और भी गंभीर है। जानकारी के मुताबिक, वहां आरजीएचएस के तहत सूचीबद्ध एक मरीज से एक लाख रुपये से अधिक की नकद राशि लेकर इलाज किया गया। बताया गया कि पहले भी इसी तरह योजना के मरीज से इतनी ही राशि लेकर इलाज किया जा चुका था।

लेकिन इस मरीज ने कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई, क्योंकि उनके परिवार के सदस्य राज्य सरकार में ही पदस्थ हैं। यही डर इस योजना के ज्यादातर लाभार्थियों को शिकायत करने से रोक रहा है — कि कहीं नौकरी में परेशानी खड़ी न हो जाए। और यही चुप्पी नियम तोड़ने वाले अस्पतालों का हौसला बढ़ा रही है।

अस्पताल क्यों बना रहे हैं दूरी? दो बड़े कारण

पहला कारण है — भुगतान में देरी। निजी अस्पतालों का तर्क है कि उनका भुगतान लंबे समय तक अटका रहता है। दवाओं, इम्प्लांट, जांच और डॉक्टरों की फीस का खर्च अस्पताल को तुरंत वहन करना पड़ता है। जब सरकार से पैसा महीनों तक न आए, तो अस्पताल की कार्यशील पूंजी फंसती चली जाती है।

दूसरा कारण है — नियमों की बढ़ती सख्ती। अस्पतालों का कहना है कि गड़बड़ी करने वाले कुछ संस्थानों पर ठोस कार्रवाई के बजाय लगातार नए नियम लागू किए जा रहे हैं। इनमें मुख्य प्रवेश द्वार, ओपीडी और दवा वितरण केंद्र के पास हेल्प डेस्क बनाना, गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को प्राथमिकता देना, और सूचीबद्ध डॉक्टर की ओर से प्रिस्क्रिप्शन का व्यक्तिगत सत्यापन शामिल है। अस्पतालों का कहना है कि इनके पालन के लिए अतिरिक्त मैनपावर और संसाधन चाहिए।

यह संकट आज का नहीं: मार्च 2026 से चला आ रहा टकराव

आरजीएचएस को लेकर अस्पतालों और सरकार के बीच यह टकराव नई बात नहीं है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस साल मार्च में ही निजी अस्पतालों के संगठन ने 25 मार्च से ओपीडी में कैशलेस दवा वितरण अस्थायी रूप से बंद करने का ऐलान किया था। संगठन का दावा था कि आठ से नौ महीनों से अस्पतालों और फार्मेसी इकाइयों के करोड़ों रुपये के भुगतान लंबित हैं।

राजस्थान अलायंस ऑफ हॉस्पिटल एसोसिएशंस (राहा) का दावा है कि प्रदेश के करीब 700 निजी अस्पतालों ने कैशलेस इलाज पर रोक लगा दी है। संगठन के मुताबिक, नौ महीने से रुका भुगतान पहले 50 प्रतिशत जारी किया जाए, तभी मुफ्त इलाज दोबारा शुरू होगा।

तारीख घटनाक्रम
जुलाई 2025 चिकित्सा विभाग और अस्पताल एसोसिएशन की बैठक में सहमति — बकाया भुगतान जारी करने और 60 दिन में भुगतान का आश्वासन
मार्च 2026 अस्पताल संगठनों ने 25 मार्च से ओपीडी में कैशलेस दवा वितरण बंद करने का ऐलान किया
अक्टूबर 2026 8-9 महीने के बकाए का दावा; जयपुर के बड़े अस्पताल ने आरजीएचएस मरीजों का इलाज बंद करने का फैसला लिया

अगर अस्पताल इलाज से मना करे या पैसे मांगे तो क्या करें

आरजीएचएस की परियोजना निदेशक निधि पटेल का कहना है कि सूचीबद्ध अस्पताल का कैशलेस की जगह नकद राशि लेकर इलाज करना गंभीर मामला है। मरीज और परिजन राजस्थान सरकार के संपर्क पोर्टल पर शिकायत कर सकते हैं — शिकायत पर अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाती है।

आपके काम के कदम:

  1. संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें — अस्पताल का नाम, तारीख और मांगी गई राशि का ब्योरा जरूर लिखें।
  2. हेल्पलाइन पर कॉल करें — आरजीएचएस हेल्पलाइन नंबर 0141-7156666 पर संपर्क किया जा सकता है।
  3. बिल और रसीद संभालकर रखें — नकद राशि की रसीद जरूर लें। बिना रसीद के शिकायत कमजोर पड़ जाती है।
  4. डरें नहीं — बिना शिकायत के व्यवस्था नहीं सुधरेगी।

सरकार के लिए भी सबक

यह पूरा मामला सिर्फ अस्पतालों और मरीजों का नहीं है। एक तरफ योजना की सफलता के दावे किए जाते हैं, दूसरी तरफ लाभार्थी इलाज के लिए भटक रहे हैं। भुगतान समय पर न होना और नियमों का एकतरफा सख्त होना — दोनों ही इस संकट की जड़ में हैं। 52 लाख लोगों की सेहत का सवाल है, इसलिए समय रहते भुगतान व्यवस्था सुधारना और अस्पतालों का भरोसा लौटाना जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: RGHS क्या है और इसका लाभ किसे मिलता है?

उत्तर: RGHS यानी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम। यह राज्य सरकार के कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवार के सदस्यों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा देती है। योजना में करीब 52.14 लाख लोग पंजीकृत हैं।

प्रश्न 2: अगर निजी अस्पताल RGHS पर इलाज से मना करे तो शिकायत कहां करें?

उत्तर: राजस्थान सरकार के संपर्क पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा आरजीएचएस हेल्पलाइन 0141-7156666 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

प्रश्न 3: क्या अस्पताल RGHS मरीज से नकद पैसे ले सकता है?

उत्तर: नहीं। योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल में निर्धारित पैकेज का इलाज कैशलेस होना चाहिए। नकद राशि लेना नियमों का उल्लंघन है और इस पर कार्रवाई का प्रावधान है।

प्रश्न 4: इस संकट की सबसे बड़ी वजह क्या बताई जा रही है?

उत्तर: अस्पतालों के मुताबिक, सरकार की ओर से महीनों से भुगतान अटका है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी फंस रही है। साथ ही लगातार सख्त होते नियमों के पालन में अतिरिक्त संसाधन लग रहे हैं।

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